अंतरिम सरकार में फौज ने 400 बिहारी किसान मारे तो चैन की नींद आई थी नेहरु को
देश के प्रति नेहरू के अपराध-1
हिन्दू नरसंहार पर नेहरू की प्रसन्नता
तारीख़ 5 नवंबर, 1946 को बंगाल के नोआखली में अल्पसंख्यक हिन्दुओं का ऐसा नरसंहार हुआ था कि बिहार में भी दंगे भड़क गए। नेहरू ने जब सुना कि वहाँ मुसलमान मरे हैं, तो वे बिहार पहुँच गये। उन्होंने बिहार के किसानों को ‘पागल’ और ‘जानवर’ तक कह दिया। उन्हें पागलखाने भेजने की बातें कीं। आम जनता पर मशीनगन, बंदूकों और हवाई बमबारी की धमकी दी। ये अलग बात है कि हिन्दुओं के सामने अपनी मर्दानगी का प्रदर्शन करने वाले नेहरू की सारी ताकत कश्मीर के समय तेल लेने चली गई थी।
इसी बीच एक घटना होती है नगरनौसा गाँव में। उस समय देश में अंतरिम सरकार थी जिसके मुखिया जवाहरलाल नेहरू ही थे। उनके आदेश पर फौज ने 400 हिन्दू किसानों को गोलीबारी करके मार डाला। रात को नेहरू ने अपनी अंतरंग महिला मित्र पद्मजा नायडू (सरोजिनी नायडू की बेटी) को पत्र लिखकर कहा कि वे इससे खुश हैं। इसमें उन्होंने लिखा, “आधी रात के आसपास मैं थका-हारा होने के बावजूद तुम्हें क्यों लिख रहा हूँ, मैं खुद नहीं जानता। इस शाम मैं भागलपुर से हवाई मार्ग से लौटा। पहुँचने पर मुझे पता चला कि फ़ौज ने ग्रामीण इलाके में किसानों की एक भीड़ पर गोलीबारी की है, जिसमें 400 मारे गए हैं। सामान्यतः इस तरह का कुछ मुझे डरा देता, लेकिन क्या तुम यकीन करोगी? मैं ये जानकर अत्यंत चिंतामुक्त हो गया।“
नेहरू ने इस चिट्ठी में पद्मजा नायडू को ‘Love’ के साथ लिखा है, “बात ये है कि हम बदलती परिस्थितियों के साथ खुद भी बदलते हैं क्योंकि ताज़ा अनुभवों एवं एहसासों की परतें हमारे पुराने विचारों को ढँक लेती हैं। हिन्दू किसानों की भीड़ ने कुछ ऐसा व्यवहार किया है, जो क्रूरता और अमानवीयता की चरम सीमा है। मैं नहीं जानता इन्होंने कितनों को मारा होगा, लेकिन ये संख्या बहुत ज्यादा होगी। पिछले कुछ दिनों से इन्होंने बिना रोकटोक ये सब किया। इसीलिए, जब मुझ तक खबर पहुँची कि इनमें से 400 को मार डाला गया है, मुझे लगता है संतुलन थोड़ा ठीक किया गया है।”
क्या 400 हिन्दुओं को मरवाकर उनकी हत्या पर खुश होने वाला यह व्यक्ति भारत का नेतृत्व करने लायक था? बाद में डैमेज कंट्रोल के लिए उन्होंने बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह को पत्र लिखकर सारी जिम्मेदारी बिहार सरकार पर डालने के लिए बयान देने को कहा, ताकि उसका पल्ला इस घटना से झड़ जाए। रामधारी सिंह दिनकर ने भी इस घटना का जिक्र अपनी पुस्तक ‘लोकदेव नेहरू’ में किया है। राष्ट्रकवि ने लिखा है कि ”इस नरसंहार के कारण लोगों में इतना आक्रोश था कि नेहरू जब पटना के सीनेट हॉल में भाषण देने पहुँचे, तो नौजवानों ने उनका कुर्ता फाड़ डाला और उनकी टोपी उछाल डाली। जयप्रकाश नारायण ने किसी तरह उनको बचाया। क्या जवाहरलाल नेहरू ने नोआखली में कदम भी रखा, मुसलमानों के लिए ऐसे कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया?“
5 नवंबर, 1946 को जवाहरलाल नेहरू द्वारा पद्मजा नायडू को लिखा गया पत्र साथ में दिया गया है। जिनको कोई शका हो उसे पढ़ लें। यह पत्र ‘सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ जवाहरलाल नेहरू’ (सीरीज 2, वॉल्यूम 1) से लिया गया है। वहाँ इस बारे में सारी जानकारियाँ मिल जाएँगी। पागल नेहरू के बिहारियों को धमकी वाले भाषण भी इसी में मिल जाएँगे। ठरकी नेहरू का पद्मजा नायडू से क्या संबंध था, इस पर आप खटमल परिवार में विस्तार से पढ़ चुके हैं। बालशास्त्री हरदास ने भी अपनी किताब में लिखा है कि जवाहरलाल नेहरू शादी करना चाहते थे पद्मजा नायडू से।
आज हमें सोचने की आवश्यकता है कि 400 हिन्दुओं की सामूहिक हत्या पर प्रसन्न होने वाला यह व्यक्ति क्या हिन्दुओं की धरती का नेतृत्व करने के लायक था? ऐसे मानसिक पागल व्यक्ति को इस देश का प्रधानमंत्री क्यों बनाया गया, वह भी अनेक योग्य नेताओं के रहते हुए? वामपंथी इतिहासकारों ने केवल नेहरू के गुण गाए हैं। अब जैसे-जैसे इतिहास की परतें खुल रही हैं, उनके कुकर्म भी सामने आते जा रहे हैं। नेहरू तब कहाँ थे जब नोआखली में हिन्दुओं के घरों में घुस-घुसकर उन्हें मारा जा रहा था? आज यह जगह बांग्लादेश में है, इसी से समझ जाइए कि गाँधी के यहाँ डेरा डालने का क्या फायदा हुआ। नोआखली के समृद्ध हिन्दुओं को वहाँ से मिटा ही दिया गया। जिन गरीब मुसलमानों का वे घर चलाते थे, उन्हें काम देते थे, उन्हीं मुसलमानों ने उनकी बहन-बेटियों की इज्जत लूटी, उनकी संपत्ति पर कब्ज़ा किया और उनके देवी-देवताओं पर टिप्पणियाँ की। हिन्दुओं के नियंत्रण वाले बाजारों में गोमाँस बेचा जाने लगा था, हिन्दू देवियों को ‘वेश्या’ बताया गया था। बिहार के हिन्दुओं पर रौब झाड़नेवाले नेहरू तब कहाँ थे जब मौलाना सैयद गुलाम सरवर हुसैनी और उसकी ‘मियार फ़ौज’ यह सब करने में लगी थी?
— डॉ. विजय कुमार सिंघल
फाल्गुन कृ. 2, सं. 2082 वि. (3 फरवरी, 2026)
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