निकली तोंद खाते-पीते घर की निशानी या बीमारियों का बोर्ड? जानिए ये कब बनती है संकट,समाधान भी

भारतीयों की निकली तोंद खाते-पीते घर की निशानी या बीमारियों का बोर्ड? जान लीजिए ये कब बन जाती है प्राणघातक?
क्या आप भी निकली हुई तोंद को खाते-पीते घर की निशानी समझते हैं तो आप बहुत बड़ी गलती करते हैं. बढ़ा पेट आपके महत्वपूर्ण अंगों पर दबाव डालकर मधुमेह और हृदयाघात जैसे प्राणघातक रोगों को आमंत्रित करता है.

पेट की चर्बी रोगों की निशानी

नई दिल्ली,08 फरवरी 2026,भारत में पुराने समय से लेकर आज तक निकले पेट (तोंद ) को समृद्धि और संपन्नता का प्रमाण माना जाता है. वयोवृद्ध इसे खाते पीते घर की निशानी कहकर गर्वोक्ति करते रहे हैं. लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण  में निकला हुआ पेट कोई स्टेटस सिंबल नहीं बल्कि शरीर में पनपती बीमारियों की पोटली है.

स्टेटस सिंबल या साइलेंट किलर ?

लगातार बाहर निकलता पेट विसरल फैट (आंतरिक अंगों के आसपास चर्बी) कंडीशन है जो मधुमेह,हृदय रोग और उच्च रक्तचाप का कारण बन सकती है. शोध बताते हैं कि भारतीयों में विसरल फैट (अंगों के आसपास जमा चर्बी) जेनेटिक और खान-पान संबंधी कारणों से ज्यादा होती है.

भारतीय फिल्मों में भी तोंद आलसी या भ्रष्ट पुलिसजन चित्रित करती है जबकि कार्टूनों में नेताओं का मजाक उड़ाने को मोटे पेट का खूब इस्तेमाल होता है. लेकिन जिसे कभी दृष्टिविगत किया जाता था, या ज्यादातर सेलिब्रेट किया जाता था, वही मोटी तोंद अब खतरे की घंटी बजा रही है. वास्तव में स्टेटस सिंबल मानी वाली मोटा पेट हमारी सोच से कहीं ज्यादा बड़ा खलनायक होता है.

मोटापे में शीर्ष देशों में शामिल है भारत

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में साल 2021 में अधिक वजन वाले या मोटापे से ग्रस्त वयस्कों की संख्या दुनिया में दूसरी सबसे ज्यादा थी, जहां 18 करोड़ लोग इससे प्रभावित थे. लैंसेट की एक नई रिपोर्ट चेतावनी देती है कि साल 2050 तक यह संख्या बढ़कर 45 करोड़ तक पहुंच सकती है जो कि देश की अनुमानित आबादी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा होगा.

वैश्विक स्तर पर भी हालात चिंताजनक हैं. मान्यता है कि तब तक दुनिया के आधे से अधिक वयस्क और एक-तिहाई बच्चे और किशोर भी मोटापे की इसी समस्या का सामना कर रहे होंगे.

इसे कम करने को जंक फूड छोड़ें, फाइबरयुक्त आहार लें, सुबह गुनगुना नींबू पानी पिएं और रोजाना तेज चलने या कार्डियो जैसे व्यायाम करें.

भारत में मोटापे की समस्या की मुख्य जड़ तोंद है जिसे डॉक्टरी भाषा में ‘एब्डोमिनल ओबेसिटी’ (Abdominal Obesity) यानी पेट का मोटापा कहते हैं.

मोटापे का यह रूप मुख्यत: पेट के चारों ओर जमा हुई अतिरिक्त चर्बी दर्शाता है. डॉक्टरों के अनुसार यह केवल दिखने में खराब नहीं लगता, बल्कि यह सुंदरता से कहीं बड़ी चिंता का विषय है. 1990 के दशक से ही कई शोध साफ कर चुके कि पेट की चर्बी और टाइप 2 डायबिटीज व दिल की बीमारियों जैसी गंभीर समस्याओं में सीधा और गहरा संबंध है.

आखिर पेट की चर्बी इतनी बड़ी समस्या क्यों है?

इसका एक प्रमुख कारण है ‘इंसुलिन रेजिस्टेंस’. यह ऐसी स्थिति है जिसमें हमारा शरीर इंसुलिन हार्मोन के प्रति सही प्रतिक्रिया बंद कर देता है. इंसुलिन ब्लड शुगर नियंत्रित करने में सहायक हार्मोन है. पेट की चर्बी इंसुलिन के काम में बाधक है जिससे ब्लड शुगर नियंत्रण कठिन हो जाता है.

शोधों के अनुसार भारतीयों सहित दक्षिण एशियाईयों और पश्चिमी लोगों में एक समान BMI (Body Mass Index) होने के बावजूद भारतीयों के शरीर में श्वेत लोगों की तुलना में फैट अधिक है.

यहां  सिर्फ आपके शरीर में कितना फैट है, विषय नही है बल्कि यह है कि फैट कहां जमा हो रहा है. दक्षिण एशियाई लोगों में फैट धड़ के आसपास और त्वचा के ठीक नीचे जमा होता है. हालांकि, कुछ मामलों में दक्षिण एशियाई लोगों में अंगों (जैसे लिवर और पैन्क्रियाज) के आसपास जमा होने वाला जिद्दी विसरल फैट कम हो सकता है लेकिन अध्ययन बताते हैं कि उनकी फैट कोशिकाएं आकार में बड़ी और कम कुशल होती हैं. इस कारण वो त्वचा के नीचे फैट सही ढंग से स्टोर नहीं कर पातीं. परिणाम यह है कि एक्स्ट्रा फैट रिसकर उन महत्वपूर्ण अंगों में चला जाता है जो मेटाबॉलिज्म नियंत्रित करते हैं. जैसे लिवर और पैन्क्रियाज. यही प्रक्रिया डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा देती है.

आखिर क्या करें?

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीयों को पश्चिमी देशों के मानकों के मुकाबले अपनी जीवनशैली में कहीं अधिक कड़े बदलाव करने की जरूरत है. शोध बताते हैं कि जहां यूरोपीय पुरुषों के लिए सप्ताह में 150 मिनट की कसरत पर्याप्त है, वहीं दक्षिण एशियाई लोगों (जैसे भारतीयों) को 250 से 300 मिनट साप्ताहिक व्यायाम की जरूरत होती है. ऐसा इसलिए है क्योंकि भारतीयों का मेटाबॉलिज्म धीमा होता है और हमारा शरीर चर्बी उतनी कुशलता से स्टोर नहीं कर पाता जिससे बीमारियां जल्दी घेर लेती हैं.

अपने वजन को नियंत्रित करना

वजन घटाने में आपकी मदद करने के लिए कुछ सुझाव
वजन कम करने के कई तरीके हैं, जिनमें अपने खान-पान में छोटे-मोटे बदलाव करना और अधिक सहायता प्राप्त करना शामिल है।

यदि आपका वजन अधिक है, तो वजन कम करने से आपको अधिक ऊर्जा मिलेगी और मोटापे, हृदय रोग और टाइप 2 मधुमेह के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।

जानकारी:
पता करें कि आपका वजन स्वस्थ वजन के अनुरूप है या नहीं।
बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) एक ऐसा माप है जिससे यह पता चलता है कि आपकी लंबाई के हिसाब से आपका वजन स्वस्थ है या नहीं।

अपना बीएमआई निकालने के लिए आपको अपनी लंबाई और वजन की आवश्यकता होगी।

स्वस्थ वजन कैलकुलेटर (बीएमआई) का उपयोग करें

वजन कम करने के लिए आप ये चीजें कर सकते हैं
आपको एक साथ सब कुछ करने की जरूरत नहीं है, एक समय में एक ही चीज आजमाएं और पता लगाएं कि आपके लिए क्या काम करता है।

करना
सप्ताह में 150 मिनट तक सक्रिय रहें – आप इसे छोटे-छोटे सत्रों में बाँट सकते हैं।

प्रतिदिन 5 फल और सब्जियां खाने का लक्ष्य रखें – 80 ग्राम ताजे, डिब्बाबंद या जमे हुए फल या सब्जियां 1 भाग के बराबर होती हैं।

प्रति सप्ताह 1 से 2 पाउंड, या 0.5 से 1 किलोग्राम वजन कम करने का लक्ष्य रखें।

खाद्य पदार्थों के लेबल पढ़ें – जिन उत्पादों पर एम्बर और लाल रंग की तुलना में हरे रंग की अधिक कोडिंग होती है, वे अक्सर अधिक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प होते हैं।

मीठे पेय पदार्थों की जगह पानी पिएं – अगर आपको इसका स्वाद पसंद नहीं है, तो स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें नींबू या लाइम के टुकड़े मिला लें।

चीनी और वसा से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें – शुरुआत में मीठे अनाज की जगह साबुत अनाज वाले विकल्प चुनें।

अपने वजन घटाने की योजना किसी भरोसेमंद व्यक्ति के साथ साझा करें – वे बुरे दिन में आपको प्रेरित करने में मदद कर सकते हैं।

नहीं
डाइटिंग के जरिए अचानक वजन कम न करें।

अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों का भंडार न करें – पॉपकॉर्न, फल ​​और चावल के केक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प हो सकते हैं।

खाना न छोड़ें – इससे भूख के मारे आप ज़्यादा स्नैक्स खाने लगेंगे।

अगर आपका पेट भर गया है तो अपनी प्लेट पूरी तरह से खाली न करें – बचा हुआ खाना आप अगले दिन के लिए बचा सकते हैं।

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