पैक्स सिलिका

भारत का बड़ा कदम… Pax Silica के साथ साझेदारी, चीन को लगेगी मिर्ची
भारत अब अमेरिकी पैक्स सिलिका के साथ जुड़ गया है और इससे देश को कई बड़े फायदे होने वाले हैं. इसके जरिए इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर सेमीकंडक्टर तक और AI से लेकर रेयर अर्थ मेटल्स सेक्टर में बूम आएगा और चीन पर निर्भरता में कमी आएगी.
पैक्स सिलिका के साथ जुड़ा भारत. (Photo: ITG)

नई दिल्ली,20 फरवरी 2026,भारत ने शुक्रवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिकी नेतृत्व वाले रणनीतिक गठबंधन पैक्स सिलिका (Pax Silica) में शामिल होने का ऐलान कर दिया. इसके घोषणा पर साइन हो चुके हैं और अब महत्वपूर्ण खनिजों से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए सप्लाई चेन मजबूत करने में मदद मिलेगी. जबकि, तमाम तरह के दुर्लभ खनिजों (Rare Earths Metals) में चीन के प्रभुत्व का मुकाबला करने में भी ये साझेदारी मददगार होगी.

चीन पर निर्भरता कम होगी
पैक्स सिलिका से साझेदारी के बाद भारत को दुर्लभ पृथ्वी खनिजों के आयात के लिए चीन पर अपनी भारी निर्भरता को कम करने में मदद मिल सकती है. इसके साथ ही महत्वपूर्ण खनिजों और एआई के लिए लचीली सप्लाई चेन को भी मजबूती मिल सकती है.

AI Summit में हुए साइन
नई दिल्ली में चल रहे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट (India AI Impact Summit 2026) में इस घोषणापत्र पर साइन किए गए हैं. इस पहल का लक्ष्य तकनीकी सहयोग को बढ़ाना और नेक्स्ट जेनेरेशन बिजनेस के लिए जरूरी प्रमुख संसाधनों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करना है. इसके अलावा यह कदम प्रस्तावित India-US Trade Deal को अंतिम रूप देने और द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने के बीच बड़ा प्रयास है.

भारत-अमेरिका ने मिलाया हाथ, क्या है PAX Silica? रेयर अर्थ पर चीन को बड़ा मैसेज! भारत-अमेरिका समेत 11 देशों का गठजोड़ खत्म करेगा ‘दादागीरी’

क्या है PAX Silica? रेयर अर्थ पर चीन को बड़ा मैसेज! भारत-अमेरिका समेत 11 देशों का गठजोड़ खत्म करेगा ‘दादागीरी’What is Pax Silica Alliance: अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका गठजोड़ में शामिल होने के लिये भारत ने समझौते पर हस्ताक्षर किए. समझिए यह गठजोड़ क्या है.

क्या है PAX Silica? रेयर अर्थ पर चीन को बड़ा मैसेज! भारत-अमेरिका समेत 11 देशों का गठजोड़ खत्म करेगा ‘दादागीरी’
अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका गठजोड़ में शामिल हुआ भारत

भारत भी अब अमेरिका के पैक्स सिलिका गठबंधन में शामिल हो चुका है. भारत ने यहां AI इम्पैक्ट समिट में एक समारोह में गठबंधन में शामिल होने के समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस मौके पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और भारत में अमेरिकी दूत सर्जियो गोर सहित अन्य लोग उपस्थित थे. अमेरिका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और वैश्विक खनिज सप्लाई चेन को सुरक्षित और डायवर्सिफाई करने के लिए इंडो-पैसिफिक साझेदारों के साथ गहरा सहयोग चाहता है और इसमें भारत अहम भूमिका निभा सकता है. भारत के शामिल होते ही अमेरिका के साथ इस रणनीतिक गठबंधन में कुल 10 हस्ताक्षरकर्ता देश हो गए हैं. चलिए समझते हैं कि आखिर पैक्स सिलिका गठबंधन है क्या, इसका मकसद क्या है और इसमें कौन-कौन से देश शामिल हैं.

पैक्स सिलिका गठबंधन क्या है?
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार पैक्स सिलिका AI और सप्लाई चेन सुरक्षित करने के लिए उसका एक प्रमुख प्रयास है, जो सहयोगी देशों के बीच नई आर्थिक सुरक्षा सहमति को आगे बढ़ाता है. पैक्स सिलिका शिखर सम्मेलन पिछले साल 12 दिसंबर को वाशिंगटन में आयोजित किया गया था जहां भागीदार देशों ने पैक्स सिलिका घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे. “पैक्स” एक ऐतिहासिक शब्द है जो शांति, स्थिरता और समृद्धि को दर्शाता है.

अमेरिका में आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेल्बर्ग ने कहा कि 20वीं सदी में दुनिया तेल और स्टील से चलती थी. लेकिन 21वीं सदी में दुनिया कंप्यूटर से चलती है. और उस कंप्यूटर बनाने के लिए लिथियम और कोबाल्ट जैसे खनिज जरूरी हैं. Pax Silica का मकसद भरोसेमंद देशों के साथ एक साझा योजना बनाना है. ताकि वे भविष्य की AI और तकनीक तैयार कर सकें. इसमें ऊर्जा, जरूरी खनिज, हाईटेक फैक्ट्री और एआई मॉडल, सब शामिल हैं. पैक्स सिलिका से जुड़े देश मिलकर काम करने पर सहमत हैं. उनका लक्ष्य समृद्धि, तकनीकी विकास और आर्थिक सुरक्षा है.

पैक्स सिलिका की घोषणा में कहा गया है कि “हम साझा समृद्धि, तकनीकी प्रगति और आर्थिक सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हैं. हम मानते हैं कि भरोसेमंद सप्लाई चेन और सुरक्षित एआई सिस्टम भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी हैं. एआई की तेज प्रगति वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन को बदल रही है और इससे ऊर्जा, जरूरी खनिज, मैन्युफैक्चरिंग, हार्डवेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर और नए बाजारों में बड़े अवसर बनेंगे. इसलिए हम निवेश सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोत्साहन के जरिए आर्थिक साझेदारी मजबूत करेंगे और सॉफ्टवेयर, एआई मॉडल, सेमीकंडक्टर, नेटवर्क, उन्नत निर्माण, लॉजिस्टिक्स, खनिज प्रोसेसिंग और ऊर्जा समेत पूरी टेक सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाएंगे. हम निजी उद्योग की भागीदारी, गलत बाजार प्रथाओं से निपटने, अत्यधिक निर्भरता कम करने, संवेदनशील तकनीक की सुरक्षा और भरोसेमंद आईसीटी नेटवर्क, फाइबर ऑप्टिक केबल व डेटा सेंटर बनाने के जरिए एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का लक्ष्य रखते हैं.”

पैक्स सिलिका का मुख्य उद्देश्य क्या है?
सबसे अहम उद्देश्यों में से एक है किसी एक देश पर पूरी तरह से निर्भरता को कम करना. इसका मतलब है कि देश किसी एक देश पर सामग्री, तकनीक या उत्पादों के लिए जरूरत से ज्यादा निर्भर न रहें, ताकि वैश्विक व्यापार में उन पर दबाव या उनका शोषण न किया जा सके. बिना नाम लिया चीन की चुनौती को ही पार करने की कोशिश है और खास तौर से रेयर अर्थ मेटल्स के सप्लाई चेन को सुरक्षित करने की प्लानिंग है.

नोट– रेयर अर्थ मेटल्स धरती के अंदर पाए जाने वाले 17 दुर्लभ धातु हैं. आज के टेक्नोलॉजी के जमाने में रेयर अर्थ मेटल्स ऐसा फैक्टर है जिससे कंट्रोल अपने हाथ में बनाया रखा जा सकता है. दरअसल हथियारों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, गाड़ी बनाने से लेकर एयरोस्पेस बनाने तक, सेमीकंडक्टर बनाने से और उपभोक्ता वस्तुओं बनाने तक, हर जगह रेयर अर्थ के कंपोनेंट अहम हैं. अभी चीन रेयर अर्थ मिनरल्स की वैश्विक आपूर्ति पर हावी है. दुनिया में रेयर अर्थ मिनरल्स के खनन का 60-70 प्रतिशत हिस्सा चीन का है.

एक और उद्देश्य भरोसेमंद डिजिटल ढांचा तैयार करना है और यह सुनिश्चित करना है कि उन्नत तकनीकों (एडवांस टेक्नोलॉजी) की चोरी या गलत इस्तेमाल न हो.
पैक्स सिलिका में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
हस्ताक्षर करने वाले देश

  • भारत
    ऑस्ट्रेलिया
    ग्रीस
    इजरायल
    जापान
    कतर
    साउथ कोरिया
    सिंगापुर
    संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
    यूनाइटेड किंगडम
    हस्ताक्षर किए बना जुड़े देश

कनाडा
यूरोपीयन यूनियन
नीदरलैंड
आर्थिक सहयोगिता और विकास के लिए संगठन (OECD)
ताइवान

पहल की शुरुआत बीते साल दिसंबर में वाशिंगटन में आयोजित Pax Silica Summit में हुई थी, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इज़राइल, जापान, कतर, साउथ कोरिया, सिंगापुर, यूएई और यूके जैसे देश शामिल रहे थे.

पैक्स सिलिका के साथ से ये फायदे भी
भारत, पैक्स सिलिका का हिस्सा बन गया है और इससे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर उद्योग को भी तगड़ा बेनेफिट होगा. बता दें कि देश में 10 संयंत्र पहले से ही स्थापित हैं और कई स्थापित किए जा रहे हैं. उम्मीद है कि जल्द पहला सेमीकंडक्टर संयंत्र कॉमर्शियल प्रोडक्शन भी शुरू कर देगा.

US राजदूत ने क्या कहा?
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने India-Pax Silica के बीच पहल को 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था आकार देने को India-US के बीच एक रणनीतिक गठबंधन जरूरी बताया. उन्होंने भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा और अमेरिका-भारत टेक पार्टनरशिप मजबूत करने में उसकी भूमिका का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि इस साझेदारी का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय AI को बढ़ावा देना है.

क्या है ये Pax Silica?
पैक्स सिलिका का साझेदार देशों में एआई संचालित विकास को गति देने को एक टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना लक्ष्य है. Pax Silica एक गठबंधन है, जिसे AI और Semiconductors की ग्लोबल सप्लाई चेन सुरक्षित करने को शुरू किया गया है.ये 20वीं सदी की तेल और इस्पात पर निर्भरता से सिलिकॉन और महत्वपूर्ण खनिज संचालित अर्थव्यवस्था की ओर एक बदलाव का प्रतीक है. गठबंधन अमेरिकी आर्थिक मामलों के उप सचिव जैकब हेलबर्ग के नेतृत्व में काम कर रहा है.

 

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