मुस्लिम यूनि./डैमोग्राफिक जिहाद? शेखुल हिंद एजुकेशन ट्रस्ट की जमीनों की प्लाटिंग कर रहा रईस

देहरादून जमीन विवाद: 20 एकड़ जमीन पर शेखुल हिंद ट्रस्ट ने झाड़ा पल्ला, जांच जारी शेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट ने हरियावाला धौलास में 20 एकड़ जमीन शैक्षणिक अकादमी के लिए खरीदी थी। निर्माण न होने पर ट्रस्ट ने हाईकोर्ट से जमीन बेचने की अनुमति ली और उसे बेच दिया। अब ट्रस्ट का कहना है कि उन्हें नहीं पता कौन किसे जमीन बेच रहा है। प्रशासन मामले की जांच कर रहा है कि कहीं सरकारी या वन भूमि तो शामिल नहीं है। रईस पर अवैध प्लाटिंग का आरोप है। ट्रस्ट बोला, अपनी जमीन काफी पहले बेच चुके, अब नहीं कोई सरोकार. ट्रस्ट ने अपनी 20 एकड़ जमीन पहले ही बेच दी प्रशासन सरकारी और वन भूमि की संलिप्तता की जांच कर रहा रईस पर अवैध प्लाटिंग और बिक्री का आरोप देहरादून 08 फरवरी 2026 । हरियावाला धौलास में शेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट ने शैक्षणिक अकादमी बनाने के लिए 20 एकड़ भूमि खरीदी थी। निर्माण नहीं हो पाने पर ट्रस्ट ने जमीन को बेचने की अनुमति हाईकोर्ट से मांगी। हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए थे कि भूमि का लैंडयूज बदला नहीं जाएगा। परगनाधिकारी विनोद कुमार के अनुसार, मामले की जांच चल रही है, लेकिन जमीन का लैंडयूज बदला नहीं गया है, यह स्पष्ट है। उधर, शेखुल हिंद ट्रस्ट  के अनुसार ट्रस्ट को जमीन बेचने की अनुमति उच्च न्यायालय से मिली थी। ट्रस्ट अपनी जमीन काफी पहले बेच चुका। अब कौन किसको जमीन बेच रहा है, इससे ट्रस्ट का कोई संबंध नहीं है। ग्राम समाज और वन विभाग की सरकारी भूमि तो नहीं शामिल यह मामला शेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ा होने से सरकार जांच बेहद गंभीरता से करा रही है। पता किया जा रहा है कि हरियावाला में शैक्षणिक अकादमी बनाने को खरीदी गई 20 एकड़ भूमि में सिर्फ किसानों से ली गई जमीन शामिल है या अन्य कोई भूमि भी है। प्रशासनिक जांच में यह भी पता किया जा रहा है कि ग्राम समाज और वन विभाग की सरकारी भूमि पर तो किसी प्रकार का कोई कब्जा नहीं है। रईस ही करा रहा जमीन की बिक्री हरियावाला की प्रधान रही रजनी देवी मामला जिला प्रशासन के समक्ष कई बार लिखित में उठा चुकी हैं। वह हरियावाला में जमीन की बिक्री,बसावट व अवैध प्लाटिंग का लगातार विरोध कर रही हैं। सरकारी प्रपत्रों में रईस ट्रस्ट का पावर आफ अटार्नी  है और वही जमीन की बिक्री और अवैध प्लाटिंग कर रहा हैं। उत्तराखंड में जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफी) बदलाव को लेकर सख्त धामी सरकार ने अब देहरादून के बेहद संवेदनशील सैन्य क्षेत्र (आईएमए) के पास ‘लैंड जिहाद’ की आशंका पर बड़ी कार्रवाई शुरू की है। मामला पछवादून के धौलास-हरियावाला क्षेत्र का है, जहां एक चैरिटेबल ट्रस्ट की 20 एकड़ कृषि भूमि को अवैध रूप से समुदाय विशेष के लोगों को बेचने की शिकायतें मिली हैं। प्रारंभिक जांच में आया है कि जिस जमीन पर कभी शिक्षण संस्थान बनना था, वहां अब अवैध प्लॉटिंग कर कॉलोनी बसाई जा रही है। एमडीडीए ने हाल ही में यहां ध्वस्तीकरण भी किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामला गंभीरता से लेते हुए डीएम को विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। सरकार यह पता लगा रही है कि क्या यह सोची-समझी साजिश के तहत डेमोग्राफी बदलने का प्रयास है।

खेती की जमीन पर रातों-रात कैसे बदल गए मालिक

शासन को जानकारी मिली है कि शेखुल हिंद एजुकेशन चैरिटेबल ट्रस्ट की जिस जमीन पर स्कूल बनना था, उसे अब छोटे-छोटे आवासीय प्लॉट्स में बेचा जा रहा है। चौंका यह रहा है कि रजिस्ट्री में खरीदारों के नाम तारिक, शोएब, आसिफ, अमजद, साहिल, शहजाद, इरशाद और वसीम जैसे एक ही समुदाय के हैं। जमीन भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के बिल्कुल नजदीक है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अति-संवेदनशील क्षेत्र है।

कांग्रेस राज से जुड़े हैं तार

इस मामले की जड़ें एनडी तिवारी सरकार (कांग्रेस शासनकाल) से जुड़ी हैं।

मंजूरी: तब शेखुल हिंद एजुकेशन

चैरिटेबल ट्रस्ट (अध्यक्षः महमूद मदनी) को यहां शिक्षण संस्थान के लिए 20 एकड़ जमीन खरीदने की अनुमति मिली थी। चर्चा थी कि यहां मुस्लिम यूनिवर्सिटी या बड़ा मदरसा बनेगा।

विरोधः आईएमए ने सुरक्षा कारणों से इस प्रोजेक्ट पर कड़ी आपत्ति जताई ।

हाईकोर्ट का आदेश: मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमीन का ‘लैंड यूज’ (भू-उपयोग) नहीं बदला जायेगा । यह कृषि भूमि ही रहेगी।

बदला जाएगा। यह कृषि भूमि ही रहेगी और इसे बेचने पर भी इसका स्वरूप नहीं बदलेगा।

ट्रस्ट ने झाड़ा पल्ला

ट्रस्ट ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए रईस अहमद नामक व्यक्ति को ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ दे दी है। सरकारी दस्तावेजों में रईस ही जमीन की बिक्री और प्लॉटिंग का काम देख रहे हैं। ट्रस्ट का कहना है कि उन्हें नहीं पता अब जमीन किसे बेची जा रही है। वहीं, स्थानीय पूर्व प्रधान रजनी देवी लगातार इस अवैध बसावट के खिलाफ आवाज उठा रही हैं।

जिम्मेदारों बोले- साजिश कामयाब नहीं होगी

“यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। यह संवेदनशील विषय है। हमने जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। उत्तराखंड की डेमोग्राफी चेंज करने की कोई भी साजिश कामयाब नहीं होने दी जाएगी।” – पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

दस्तावेज खंगाल रहे हैं

विकासनगर एसडीएम विनोद कुमार ने बताया कि, ट्रस्ट की जमीन बिक्री के सभी दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं। टीम मौके पर भेजी गई थी। यह देखा जा रहा है कि नियमों का पालन हुआ है या नहीं। डीएम को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।

अवैध प्लॉटिंग नहीं चलेगी

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि, यह क्षेत्र एमडीडीए के अंतर्गत आता है। पूर्व में हमने यहां अवैध कॉलोनी ध्वस्त की थी। यहां किसी भी प्रकार की प्लॉटिंग नहीं होने दी जाएगी।

राजनीतिक वार-पलटवार

विहिप का आरोप: विश्व हिंदू परिषद प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने आईएमए के पास मुस्लिम यूनिवर्सिटी को जमीन दी थी। अब वहां ‘लैंड जिहाद’ में समुदाय विशेष बसाया जा रहा है।

हैदराबाद तक गूंज: हैदराबाद के विधायक

टी. राजा सिंह ने भी वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि कांग्रेस काल में ली गई जमीन को अब गलत मंशा से बेचा जा रहा है।

आगे क्या

प्रशासन अब यह जांच कर रहा है कि ट्रस्ट की 20 एकड़ जमीन में कहीं ग्राम समाज और वन विभाग की सरकारी जमीन तो शामिल नहीं कर ली गई। साथ ही, खरीदारों का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन भी किया जा सकता है।

भारतीय सैन्य अकादमी यानि आईएमए की सुरक्षा ताक में रख  इस्लामिक संस्था के कृषि भूमि बिना लैंड यूज़ कराए बेचने का मामला देहरादून में सामने आने से चर्चा में है। ये प्रकरण शेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ा है। इस ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉक्टर महमूद असद मदनी है जो दारुल उलूम देवबंद और जमीयत उलेमा ए हिंद के नेता हैं और राज्यसभा के पूर्व सदस्य भी रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, नारायण दत्त तिवारी की कांग्रेस सरकार ने इस ट्रस्ट जिसका पता 1 बहादुर शाह जफर मार्ग दिल्ली बताया गया है, को भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून के पास इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोले जाने की प्रारंभिक अनुमति दी थी। कहा जाता है कि ट्रस्ट यहां देवबंद दारुल उलूम की तरह विशाल मदरसा अथवा मुस्लिम यूनिवर्सिटी बना रहा था, जिसके लिए ट्रस्ट ने 20 एकड़ भूमि ग्राम हरियावाला धौलास पछुवा दून परगना विकासनगर देहरादून में धारित भूमि किसानों से ली थी और साथ ही कुछ और ग्राम समाज और वन विभाग की सरकारी विभागों की भूमि पर भी कथित रूप से कब्जा हुआ था।

इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) को यहां इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोले जाने के प्रयासों की जानकारी मिली तो उसने उत्तराखंड की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समक्ष आपत्ति  की। तब इस योजना पर कई माह रोक लगी रही। कांग्रेस सरकार के बाद आई भाजपा सरकार में ये मामला ठंडे बस्ते में रहा। उसके बाद जब पुनः कांग्रेस सरकार आई तो एक बार फिर यहां इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोले जाने को हलचल तेज हुई। उल्लेखनीय है कि ट्रस्ट के अध्यक्ष महमूद हसन मदनी  मामला उत्तराखंड उच्च न्यायालय में ले गये जो कि कई माहों तक चला लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली । इसके पीछे सबसे बड़ा कारण आईएमए की आपत्ति रही थी।

हाई कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता देख राज्य सरकार को और ट्रस्ट को निर्देश दिए कि भूमि का लैंड यूज़ चेंज नहीं होगा और ये कृषि भूमि ही रहेगी । यदि बेची जाएगी तो भी कृषि भूमि ही रहेगी और इससे जो पैसा आयेगा वो भी ट्रस्ट में सामाजिक कार्यों में लगाया जाएगा। इस निर्देश के पीछे तर्क ये दिया गया था कि आईएमए एक संवेदनशील स्थान है ।णआंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से इसके कैंपस के आसपास न तो आबादी की बसावट होनी चाहिए और न ही यहां से व्यापारिक गतिविधियां यहां से संचालित होनी चाहिए।

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