विदेशी मीडिया में एआई इम्पैक्ट समिट : भारत कर क्या प्राप्त कर पाएगा?

एआई समिट से भारत कर क्या प्राप्त कर पाएगा?

ब्रिटिश अख़बार फ़ाइनैंशियल टाइम्स ने भारत की एआई महत्वाकांक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं.

दिल्ली एआई इम्पैक्ट समिट

16 फ़रवरी को समिट उद्घाटन दिवस अफ़रातफ़री के अतिरिक्त भी विदेशी मीडिया ने भारत की क्षमताओं पर सवाल उठाए हैं.

फ़ाइनैंशियल टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है, ”भारत का रिसर्च और विकास पर ख़र्च पिछले दशक में घटकर जीडीपी के 0.7 प्रतिशत से भी नीचे आ गया है, जो चीन के 2.5 प्रतिशत और अमेरिका के 3.5 प्रतिशत की तुलना में नगण्य है.”

”भारत के तकनीकी बजट का बड़ा भाग डिफ़ेंस रिसर्च पर ख़र्च होता है, जिससे सिविलियन टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन को सीमित संसाधन बचते हैं. 2022 में इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय सरकार को कुल आरएंडडी ख़र्च का केवल दो प्रतिशत ही मिला था.”

एफ़टी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ”भारत का प्राइवेट सेक्टर भी एआई के मामले में धीमा रहा है. हाल ही में गत वर्ष तक इंडस्ट्री के कुछ सीनियर लीडर्स ने यह सवाल उठाया कि क्या भारत को अपने बड़े लैंग्वेज मॉडल विकसित करने की ज़रूरत है और एआई उछाल को चिप-चालित प्रचार बता दिया. क्षेत्रीय भाषाओं के एआई सिस्टम में उत्साहजनक प्रयासों के बावजूद, अग्रणी मॉडल विकास, सेमीकंडक्टर क्षमता और मौलिक रिसर्च इकोसिस्टम में भारत अब भी अमेरिका और चीन से पीछे है.”

एफ़टी ने लिखा है, ”यही इस समिट का विरोधाभास है. भारत वैश्विक नेताओं को एक मंच पर ला सकता है और विकास को एआई का समर्थन कर सकता है. लेकिन केवल आयोजन करने से एआई की रेस में बराबरी नहीं मिलेगी.”

”एआई इम्पैक्ट समिट को कूटनीतिक प्रदर्शन से आगे ले जाना है, तो भारत को ठोस घरेलू क़दम उठाने होंगे. स्पष्ट अधिकारों वाली कोऑर्डिनेशन बॉडी, विश्वसनीय रणनीति, ज़्यादा निवेश और देशव्यापी स्किल अभियान शुरू करने होंगें. विदेशी टेक्नोलॉजिकल इकोसिस्टम पर निर्भर रहते हुए भारत ग्लोबल साउथ में एआई  लीडरशिप का दावा नहीं कर सकता.”

दिल्ली एआई समिट

20 देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति दिल्ली एआई इम्पैक्ट समिट में आए हैं
भारत का सपना
अमेरिकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है, ”कई देशों को चिंता है कि एआई मौजूदा तकनीकी खाइयां और गहरा कर सकता है. वे इस बात को लेकर सतर्क हैं कि ऐसी तकनीक को अमेरिका या चीन पर निर्भर रहने से उनकी अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गहरे प्रभाव हो सकते हैं. इसी कारण कुछ देश स्थानीय कंप्यूटिंग स्ट्रक्चर विकसित करने, अपने मॉडल बनाने और घरेलू एआई प्रतिभा प्रोत्साहन की दिशा में प्रयास कर रहे हैं. हालाँकि, यह आसान नहीं होगा.”

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने लिखा है, ”इपोच एआई नामक रिसर्च ग्रुप के अनुसार, एआई के अग्रिम मोर्चे पर मॉडल विकसित करने को अमेरिका और चीन जैसे देश ही दसियों अरब डॉलर निवेश कर सकते हैं. वैश्विक एआई सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टरों में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 75 प्रतिशत और चीन की लगभग 15 प्रतिशत है.”

”मार्च 2024 में भारत ने एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर पाँच साल में ख़र्च को 1.1 अरब डॉलर का निवेश शुरू किया. सीबी इंसाइट्स के अनुमान के अनुसार, 2025 में एआई कंपनियों को मिले 226 अरब डॉलर के वेंचर कैपिटल निवेश में भारत की हिस्सेदारी बहुत छोटी रही. भारतीय एआई पॉलिसी रिसर्चर अमलान मोहंती ने कहा कि अमेरिका ने यह संकेत भी दिया है कि वह चीन के साथ प्रतिस्पर्धा में उच्च-स्तरीय एआई चिप्स तक पहुँच को व्यापार और जियोपॉलिटिक्स के साधन के रूप में उपयोग करने को तैयार है.”

चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र माने जाने वाले अंग्रेज़ी दैनिक ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ”अमेरिका और चीन के साथ एआई की खाई  पाटने की दौड़ में, भारत बड़े पैमाने पर डिजिटल विकास को गति देने को एक विशाल नए “डेटा सिटी” की योजना बना रहा है.”

बीजिंग यूनिवर्सिटी ऑफ़ पोस्ट्स एंड टेलीकम्युनिकेशंस की ह्यूमन–मशीन इंटरैक्शन और कॉग्निटिव इंजीनियरिंग लैब के निदेशक लियू वेई ने मंगलवार को ग्लोबल टाइम्स से कहा कि यह समिट वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में सक्रिय भागीदारी के भारत के प्रयासों और गति को दर्शाता है और विकसित देशों के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को चुनौती देने की दिशा में एक क़दम है.

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ”एआई के क्षेत्र में भारत के सामने अभी लंबा रास्ता है.

लियू ने कहा, “भारत प्रभावशाली प्रारुप लाया है लेकिन मौलिक रिसर्च, कंप्यूटिंग संसाधनों, प्रतिभा की गहराई और इकोसिस्टम की परिपक्वता से जुड़ी चुनौतियों के कारण अपनी पूर्ण एआई क्षमता हासिल करने को निरंतर प्रयास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की ज़रूरत होगी.”

दिल्ली एआई समिट के उद्घाटन के दिन ‘अव्यवस्था’ को लेकर विदेशी मीडिया में चर्चा
एआई समिट

दिल्ली के भारत मंडपम में 16 फ़रवरी से शुरू एआई इम्पैक्ट समिट 20 फ़रवरी तक चलेगा
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के उद्घाटन के दिन इसमें शामिल लोगों को हुई असुविधा को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खेद जताया था.

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी सरकार की “पूर्ण अव्यवस्था और गंभीर कुप्रबंधन” को लेकर आलोचना की.

समिट के उद्घाटन पर भरे हुए हॉल, लंबी क़तारें, कमज़ोर कनेक्टिविटी और एंट्री के निर्देशों को लेकर भ्रम की स्थिति रही.

भारी भीड़ से सुरक्षा जाँच प्रक्रिया से भी लोगों को कठिनाई हुईं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक्सपो आने से पहले कुछ स्टॉल अस्थायी रूप से ख़ाली कराए गए. अव्यवस्था के बीच कुछ प्रतिभागियों ने सामान ग़ुम होने या चोरी की शिकायत भी की.

इसके अलावा भारत की एक यूनिवर्सिटी ने एआई इम्पैक्ट समिट दौरान एक रोबोट डॉग को अपना बता दिया, जबकि वह चीन का था. इसे लेकर भी सोशल मीडिया पर काफ़ी आलोचना हुई. आलोचना के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया कि उसने वह रोबोडॉग नहीं बनाया था.

नियोसैपियन के सीईओ धनंजय यादव ने एक्स पर लिखा कि सुरक्षाकर्मियों ने प्रधानमंत्री के दौरे से पहले स्टॉल ख़ाली करने को कहा और भरोसा दिलाया कि सामान सुरक्षित रहेगा। उन्होंने दावा किया कि बाद में कंपनी के कुछ एआई वेयरेबल्स चोरी हो गए.

धनंजय यादव ने एक्स पर लिखा, “सोचिए, हमने फ़्लाइट, रहने, लॉजिस्टिक्स और बूथ तक को भुगतान किया. फिर जहाँ कड़ा पहरा था, वहाँ से हमारे वेयरेबल्स ग़ायब हो गए. अगर केवल सुरक्षा कर्मियों और आधिकारिक दल की ही एंट्री थी, तो यह कैसे हुआ? यह बहुत ही निराशाजनक है.”

रेस्किल के संस्थापक पुनीत जैन ने शुरुआती अव्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि कई प्रतिनिधि बिना पानी और स्पष्ट निर्देशों के बाहर खड़े रहे. हालाँकि, उन्होंने मंगलवार को सुधार की बात मानी.

उद्यमी प्रियांशु रत्नाकर ने भी लंबी क़तारों, स्टॉल तक पहुँच में मुश्किलों, कमज़ोर कनेक्टिविटी और रजिस्ट्रेशन संबंधी कठिनाईयों का ज़िक्र करते हुए इसे दिखावा ज़्यादा कहा.

एआई इम्पैक्ट समिट

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने असुविधा के लिए खेद जताया है

यह एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन है और इसमें 20 देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति आए हैं. ऐसे में इस समिट पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नज़र है. विदेशी मीडिया में इस समिट की चर्चा कई कारणों से हो रही है.

अमेरिकी मीडिया आउटलेट ब्लूमबर्ग ने लिखा है, ”हाल के वर्षों में भारत का सबसे बड़ा कारोबारी शिखर सम्मेलन इस हफ़्ते अव्यवस्था में घिर गया. अचानक सुरक्षा चौकसी से सैकड़ों प्रतिनिधि बिना भोजन और पानी फँसे रह गए. यह उस प्रतिष्ठित आयोजन के लिए झटका था, जिसका उद्देश्य देश की एआई में प्रगति का प्रदर्शन करना था.”

ब्लूमबर्ग ने लिखा है, ”इंडिया एआई समिट के पहले दिन छाई अफ़रा-तफ़री के अगले दिन स्थिति ज़्यादा संतुलित दिखी. प्रतिभागी नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम के विशाल प्रदर्शनी परिसर के हॉलों के बीच सहजता से आते-जाते दिखे.”

ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ”कीनिया से आए मोसेस थिगा के लिए इस समिट का पैमाना हैरान कर देने वाला है. मल्टीनेशनल कंपनियों की मौजूदगी ने उन्हें ख़ास तौर पर प्रभावित किया. उद्घाटन के दिन अफ़रा-तफ़री को लेकर उन्हें कोई शिकायत नहीं थी, जब सैकड़ों प्रतिभागी घंटों तक या तो परिसर के भीतर बंद रहे या बाहर ही रोक दिए गए.”

”थिगा ने कहा कि सब कुछ सुचारु रूप से चल रहा था, जब तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहाँ नहीं पहुँचे. उनके साथ आए सुरक्षा दल ने पूरा परिसर सील कर दिया, जिससे आने-जाने पर पाबंदियाँ लग गईं. कई प्रतिभागियों ने बताया कि मोदी के जाने तक वे घंटों बिना भोजन और पानी के अंदर ही रहे.”

एआई समिट

प्रधानमंत्री के जाने पर सुरक्षाकर्मियों ने स्टॉल ख़ाली करवा दिए थे
क्षमता पर संदेह
ब्रिटिश न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स ने लिखा है कि भारत ने जिस उद्देश्य से एआई इम्पैक्ट समिट आयोजित किया था, इसके उलट उसे पहले दिन आलोचना का सामना करना पड़ा. प्रतिभागियों ने लंबी क़तारों, भीड़-भाड़ और आयोजन संबंधी कमियों की काफ़ी शिकायतें कीं. बातचीत में कई लोगों ने कहा कि अस्पष्ट निर्देशों से अचानक सुरक्षा जाँच को प्रदर्शनी भवन ख़ाली कराए जाने के बाद लोगों को अपने सामान वापस लेने में अफ़रा-तफ़री का सामना करना पड़ा.

रॉयटर्स ने लिखा है, ”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन में अव्यवस्था केवल छवि का सवाल नहीं है बल्कि आयोजन संबंधी कमियों ने भारत की तकनीकी क्षमता के संदेश को भी प्रभावित किया.”

एआई वॉइस स्टार्टअप बोलना के सह-संस्थापक मैत्रेय वाघ ने एक्स पर लिखा. “गेट बंद हैं, इसलिए एआई समिट में अपने ही बूथ तक नहीं पहुँच सका. अगर आप भी बाहर फँसे हैं और बोलना टीम से मिलना चाहते थे, तो मुझे डीएम करें.”

उन्होंने व्यंग्य किया कि, “शायद हम कनॉट प्लेस के किसी कैफ़े में एक छोटा सा मिनी-बूथ लगा लें.”

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