ट्रंप टैरिफ झेल गया भारत,पचासों चीजें बची,आगे क्या?

Share Market: सोना, चांदी, इंसुलिन, विटामिन… इन 50 चीजों पर नहीं लगेगा ट्रंप का टैरिफ, शेयर बने रॉकेट!
जिन प्रोडक्‍ट्स पर डोनाल्‍ड ट्रंप का टैरिफ नहीं लगाया गया है, उसमें सोना-चांद और इंसुलिन जैसे प्रोडक्‍ट्स हैं. आइए जानते हैं उन टॉप 50 प्रोडक्‍ट्स के बारे में, जिनपर Trump Tariff लागू नहीं होगा.

US President Donald Trump (Image: AFP)

नई दिल्‍ली ,03 अप्रैल 2025,अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald Trum) ने भारत पर 27% टैरिफ का ऐलान किया है. ऑटो सेक्‍टर से लेकर टेक्‍स्‍टाइल सेक्‍टस और अन्‍य सेक्‍टर पर टैरिफ का ऐलान किया गया है. डोनाल्‍ड ट्रंप के इस टैरिफ से भारत समेत दुनिया के तमाम शेयर बाजार में भारी गिरावट आई है. सबसे ज्‍यादा जापान का मार्केट प्रभावित हुआ है, जो 3 फीसदी की गिरावट दिखा रहा है.

जिन प्रोडक्‍ट्स पर डोनाल्‍ड ट्रंप का टैरिफ नहीं लगाया गया है, उसमें सोना-चांद और इंसुलिन जैसे प्रोडक्‍ट्स हैं. आइए जानते हैं उन टॉप 50 प्रोडक्‍ट्स के बारे में, जिन पर Trump Tariff लागू नहीं होगा.

1-सोना, गैर-मौद्रिक, बुलियन और डोर
2-चांदी बुलियन और डोर
3-इंसुलिन और उसके साल्‍ट
4-विटामिन A और उससे बने प्रोडक्‍ट्स
5-विटामिन बी1 (थायमिन) और इसके डेरिवेटिव
6-विटामिन बी2 (राइबोफ्लेविन) और इसके डेरिवेटिव
7-विटामिन बी5 (डी- या डीएल-पैंटोथेनिक एसिड) और इसके डेरिवेटिव
8-विटामिन बी6 (पाइरिडोक्सिन और विटामिन बी6 एक्टिव कंपाउंड के साथ) और इसके डेरिवेटिव
9-विटामिन बी12 (सायनोकोबालामिन और विटामिन बी12 एक्टिव कंपाउंड के साथ) और इसके डेरिवेटिव
10-विटामिन सी (एस्कॉर्बिक एसिड) और इसके डेरिवेटिव
11-विटामिन ई (टोकोफेरोल और विटामिन ई एक्टिव कंपाउंड के साथ) और इसके डेरिवेटिव
12-फोलिक एसिड और इसके डेरिवेटिव
13-नियासिन और नियासिनमाइड
14-प्रकाश-संवेदनशील ट्रांजिस्टरों के अलावा अन्य ट्रांजिस्टर, जिनकी अपव्यय रेटिंग 1 W से कम है
15-प्रकाश-संवेदनशील ट्रांजिस्टर के अलावा अन्य ट्रांजिस्टर, जिनकी अपव्यय रेटिंग 1 W या उससे अधिक है
16-कागज या पेपरबोर्ड
17-सिंगल शीट में वाली किताबें, ब्रोशर, लेटर और इसी तरह की अन्‍य किताबें
18-मुद्रित शब्दकोश और विश्वकोश तथा उनकी धारावाहिक किश्तें
मुद्रित पुस्तकें, ब्रोशर, पत्रक और इसी प्रकार की मुद्रित सामग्री, एकल शीट के अलावा
19-समाचार पत्र, पत्रिकाएं और पत्रिकाएं, जो सप्ताह में कम से कम चार बार प्रकाशित हों
20-समाचार पत्र के पूरक
21-समाचार पत्र, पत्रिकाएं और पत्रिकाएं, उनको छोड़कर जो सप्ताह में कम से कम चार बार प्रकाशित होती हैं
22-बच्चों की चित्र, ड्राइंग या रंग भरने वाली पुस्तकें
23-संगीत, मुद्रित या पांडुलिपि में, चाहे फोटो के साथ हो या नहीं
24-सभी प्रकार के मानचित्र और जलविज्ञान या इसी प्रकार के चार्ट, जिनमें एटलस और स्थलाकृतिक योजनाएं शामिल हैं, पुस्तक रूप में मुद्रित
25-ग्लोब, मुद्रित
26-अन्य मुद्रित मानचित्र और जल सर्वेक्षण या इसी तरह के चार्ट, ग्लोब नहीं और पुस्तक के रूप में नहीं, नेसोई
27-हाथ से तैयार चीजें और चित्र, हस्तलिखित पाठ, संवेदनशील 28-कागज पर फोटो प्रतिकृतियां और कार्बन प्रतियां
29-मुद्रित व्यापार विज्ञापन सामग्री, वाणिज्यिक कैटलॉग और इसी तरह की अन्य सामग्री
30-मुद्रित सामग्री, नेसोई, लिथोग्राफिक प्रक्रिया द्वारा कागज पर पूरी तरह या आंशिक रूप से मुद्रित
31-मुद्रित सामग्री, नेसोई
32-जिंक (o/than मिश्र धातु), कच्चा, जिंक का भार o/99.99% युक्त
33-जिंक (मिश्र धातु से अधिक), कच्चा, ढलाई-ग्रेड जिंक, जिसमें भार के हिसाब से कम से कम 97.5% लेकिन 99.99% से कम जिंक हो
34-जिंक (मिश्र धातु से अधिक), कच्चा, कास्टिंग ग्रेड जिंक से अधिक, जिंक के वजन के हिसाब से कम से कम 97.5% लेकिन 99.99% से कम
35-जिंक मिश्र धातु, कच्चा
36-जस्ता, अपशिष्ट और स्क्रैप
37-जस्ता, वस्तुएं (घरेलू, मेज या रसोई के उपयोग के लिए), नेसोई
38-डायोड या ट्रांजिस्टर के अलावा अन्य प्रकाश संवेदनशील अर्धचालक उपकरण, नेसोई
39-प्रकाश-संवेदनशील ट्रांसड्यूसर के अलावा अन्य अर्धचालक-आधारित ट्रांसड्यूसर
40-अन्य अर्धचालक उपकरण, अर्धचालक-आधारित ट्रांसड्यूसर के अलावा, प्रकाश संवेदनशील उपकरणों के अलावा, नेसोई
41-डायोड, ट्रांजिस्टर, समान अर्धचालक उपकरण, प्रकाश-संवेदनशील अर्धचालक उपकरण, एलईडी और माउंटेड

42-पीजोइलेक्ट्रिक क्रिस्टल के भाग
43-सिक्के, नेसोई
44-स्टेनलेस स्टील अपशिष्ट और स्क्रैप
प्लैटिनम, कच्चा, या पाउडर के रूप में
45-प्लैटिनम, बिना गढ़े या अर्द्धनिर्मित रूप में
46-पैलेडियम, कच्चा या पाउडर के रूप में
47-पैलेडियम, अर्द्धनिर्मित रूपों में
48-रोडियाम, पाउडर के रूप में कच्चा
49-रोडियाम, अर्द्धनिर्मित रूपों में
50-मूल रंग और उन पर आधारित तैयारियां,

भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए राहत की बात यह है कि फिलहाल इस सेक्टर को टैरिफ से दूर रखा गया है. भारत के कुल अमेरिकी निर्यात में फार्मा का 11% हिस्सा है और सालाना करीब 76,000 करोड़ रुपये के फार्मा उत्पाद अमेरिका को निर्यात किए जाते हैं. भारत खुद अमेरिका से आयात किए जाने वाले फार्मा प्रोडक्ट्स पर 10% टैरिफ लगाता है, लेकिन अब तक अमेरिकी सरकार ने भारतीय फार्मा उत्पादों पर कोई नया शुल्क नहीं लगाया है. इससे उन कंपनियों को फायदा होगा जो अमेरिकी बाजार से अपना बड़ा हिस्सा कमाती हैं.

फार्मा सेक्टर: सबसे ज्यादा अमेरिका पर निर्भर
भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए राहत की बात यह है कि फिलहाल इस सेक्टर को टैरिफ से दूर रखा गया है. भारत के कुल अमेरिकी निर्यात में फार्मा का 11% हिस्सा है और सालाना करीब 76,000 करोड़ रुपये के फार्मा उत्पाद अमेरिका को निर्यात किए जाते हैं. भारत खुद अमेरिका से आयात किए जाने वाले फार्मा प्रोडक्ट्स पर 10% टैरिफ लगाता है, लेकिन अब तक अमेरिकी सरकार ने भारतीय फार्मा उत्पादों पर कोई नया शुल्क नहीं लगाया है. इससे उन कंपनियों को फायदा होगा जो अमेरिकी बाजार से अपना बड़ा हिस्सा कमाती है।
अमेरिका से सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फार्मा कंपनियां
Gland Pharma – कुल आय का 50% अमेरिका से, Aurobindo Pharma – 48%,Dr Reddy’s Lab – 47%, Zydus Life– 46%,Lupin–37%,Sun Pharma–32%,Cipla–29%,Torrent Pharma – 9%

अमेरिका से सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फार्मा कंपनियां
इन आंकड़ों से साफ है कि भारतीय फार्मा कंपनियों का अमेरिका पर बहुत ज्यादा निर्भर रहना उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती देता है, और अगर भविष्य में इस सेक्टर पर टैरिफ लगाया गया तो इन कंपनियों को तगड़ा झटका लग सकता है.
मेटल सेक्टर पर असर: स्टील और एल्युमीनियम
अमेरिकी सरकार ने स्टील और एल्युमीनियम उत्पादों पर टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 25% कर दिया है. हालांकि, यह फैसला भारतीय कंपनियों के लिए तटस्थ (Neutral) माना जा रहा है. खासकर Hindalco जैसी कंपनियों के लिए यह सकारात्मक हो सकता है, क्योंकि उसकी अमेरिकी सहायक कंपनी Novelis को वैश्विक बाजार में कॉम्पटिशन का फायदा मिल सकता है।
टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर
अमेरिका, भारतीय टेक्सटाइल निर्यात का लगभग 28% हिस्सा खरीदता है. नए टैरिफ के तहत इस सेक्टर पर 10% से 15% तक का शुल्क लगाया गया है, जो कि Welspun Living, Arvind, Raymond और Bombay Dyeing जैसी कंपनियों के लिए झटका साबित हो सकता है. हालांकि, यह कंपनियां अमेरिकी बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने की कोशिश करेंगी, लेकिन बढ़े हुए टैरिफ से उनकी लागत में बढ़ोतरी हो सकती है.

सीफूड सेक्टर: Avanti Feeds पर असर
सीफूड उत्पादों पर 5% तक का टैरिफ लगाया गया है, जो कि Avanti Feeds के लिए नकारात्मक हो सकता है. यह कंपनी अमेरिकी बाजार में अच्छा प्रदर्शन कर रही थी, लेकिन अब उसे लागत बढ़ने का सामना करना पड़ेगा, जिससे उसकी निर्यात आय पर असर पड़ सकता है.

सोलर और एनर्जी कंपनियों पर असर
Solar Cells और Modules पर बढ़े हुए टैरिफ का असर उन कंपनियों पर पड़ेगा जिनकी अमेरिकी बाजार में अच्छी हिस्सेदारी है. Apar Industries की कुल आय में अमेरिका का योगदान 50% है, जबकि Waaree Energy की आय में यह हिस्सा 60-70% तक पहुंचता है. बढ़े हुए टैरिफ से इन कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और उनके अमेरिकी व्यापार पर दबाव आ सकता है.
जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर पर दबाव
भारत अमेरिका को बड़ी मात्रा में ज्वेलरी निर्यात करता है. खासतौर पर Finished Jewellery पर 5.5% का नया टैरिफ लगाया गया है, जिससे Titan और Kalyan Jewellers जैसी कंपनियों पर निगेटिव असर पड़ सकता है. यह कंपनियां पहले से ही अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही थीं, और अब बढ़ी हुई लागत से उनकी मार्जिन पर असर पड़ सकता है.
ऑटो और ऑटो एंसिलरी कंपनियां प्रभावित
अमेरिकी सरकार ने ऑटो और ऑटो पार्ट्स पर 25% टैरिफ लागू कर दिया है, जो कि Tata Motors, Sona BLW, Bharat Forge और Balkrishna Industries जैसी कंपनियों के लिए निगेटिव साबित हो सकता है. हालांकि, कुछ चुनिंदा ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ 3 मई से लागू होंगे, लेकिन इससे ऑटो सेक्टर की लागत और मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है.
कॉपर सेक्टर को मिली राहत
फिलहाल, अमेरिका ने कॉपर उत्पादों पर किसी भी तरह का टैरिफ नहीं लगाया है, जिससे Hindustan Copper जैसी कंपनियों को राहत मिली है. यह कंपनी अमेरिकी बाजार से अच्छी खासी कमाई करती है,।
टैरिफ का भारत पर असर
अमेरिका के नए टैरिफ से भारतीय कंपनियों को मिक्स्ड इंपैक्ट देखने को मिलेगा. जहां फार्मा सेक्टर को राहत मिली है, वहीं टेक्सटाइल, ज्वेलरी और ऑटो सेक्टर पर दबाव बना रहेगा. अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में अमेरिकी और भारतीय सरकार के बीच बातचीत से ,क्या कुछ सकारात्मक निकलता है.

फार्मा शेयरों में शानदार तेजी
सनफार्मा शेयर (Sunpharma Share) सबसे ज्यादा चढ़ा और खबर लिखे जाने तक 4.72% की उछाल के साथ 1795.20 रुपये पर पहुंचकर कारोबार करता दिखा. इसके अलावा GlandPharma Share (7.15%), Aurobindo Pharma Share (6.55%). Lupin (6.35%), Emcure Pharma (5%), Biocon Share (3.90%), Ajanta Pharma Share (3.07%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे.

India’s Dodge The Shrapnel Of Trump’s Tariff Bombshell How Some Desi Sectors Did It
फुस्सी निकला ट्रंप का टैरिफ बम! चुपचाप झेल गया भारत, अब खोज रहा आपदा में अवसर
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 60 से अधिक देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी। पिछले कई दिनों से इसे लेकर कई तरह की आशंकाएं थी। दो दिन में विदेशी निवेशक 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेच चुके थे। लेकिन आज बाजार में ज्यादा हलचल देखने को नहीं मिली।
डोनाल्ड ट्रंप ने 60 से अधिक देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा के
शुरुआती झटकों के बाद घरेलू शेयर बाजार में गिरावट कम हो गई
ट्रंप के टैरिफ से भारत में कई सेक्टर्स को फायदा मिलने की उम्मीद

ट्रंप के टैरिफ को लेकर पिछले कई दिनों से शेयर बाजार में भय था। दो दिन में विदेशी निवेशक 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेच चुके थे। आखिरकार बुधवार को ट्रंप ने टैरिफ की घोषणा कर दी। उन्होंने पिछले 100 साल में सबसे ज़्यादा टैरिफ लगाए हैं जिससे 60 से अधिक देश प्रभावित हुए हैं। इससे ट्रेड वॉर बढ़ने और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के प्रभावित होने की आशंका है। भारत से अमेरिका को होने वाले एक्सपोर्ट पर 26% का टैरिफ लगाया गया है। लेकिन घरेलू शेयर बाजार में आज उस तरह की उथलपुथल नहीं दिखी जैसी आशंका जताई जा रही थी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में 500 अंक की गिरावट आई लेकिन दिन चढ़ने के साथ यह सुधर गया और गिरावट 250-300 अंक के आसपास रह गई। आखिर कैसे हुआ यह चमत्कार…

बर्नस्टीन की एक रिपोर्ट में है कि भारत इस टैरिफ की मुश्किलों से आसानी से निपट सकता है। रिपोर्ट में यह भी है कि भारत ट्रेड को लेकर झगड़ा बढ़ाने के बजाय अमेरिका से बातचीत करेगा। शुरुआत में मार्केट पर इसका बुरा असर पड़ेगा लेकिन साल के दूसरे हिस्से में अर्थव्यवस्था फिर से ठीक हो जाएगी। जीटीआरआई के फाउंडर अजय श्रीवास्तव का कहना है कि ट्रंप ने चीन, वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड और बांग्लादेश जैसे कई एशियाई और यूरोपीय देशों पर ज्यादा टैरिफ लगाए हैं। इससे भारत को ग्लोबल ट्रेड और मैन्युफैक्चरिंग में अपनी जगह मजबूत करने का मौका मिल सकता है।

किस सेक्टर को होगा फायदा
श्रीवास्तव ने बताया कि भारत से स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो से जुड़े सामान के एक्सपोर्ट पर 25% का टैरिफ लगेगा। लेकिन दवाइयों, सेमीकंडक्टर, कॉपर और एनर्जी प्रोडक्ट्स पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। भारत पर 26% का टैरिफ लगा है, जो यूरोपियन यूनियन (20%), जापान (24%) और साउथ कोरिया (25%) से थोड़ा ज़्यादा है। लेकिन ये चीन (54%) से काफी कम है। वियतनाम पर 46% का टैरिफ लगा है, जबकि थाईलैंड और इंडोनेशिया पर क्रमशः 36% और 32% का टैरिफ लगा है। कुछ विकसित देशों जैसे यूके (10%) और स्विट्जरलैंड (34%) पर कम टैरिफ है लेकिन वे भारत के साथ एक्सपोर्ट के मामले में सीधे मुकाबला नहीं करते हैं। एशियाई देशों में सिर्फ मलेशिया (24%) ही कुछ सेक्टरों में भारत के साथ मुकाबला करता है।

अमेरिका में टैरिफ लगने से टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और जेम्स एंड ज्वैलरी जैसे एक्सपोर्ट सेक्टर पर सबसे ज़्यादा असर पड़ने की उम्मीद है। हालांकि सरकारी अधिकारियों और इंडस्ट्री के लीडर्स ने चिंताओं को कम करने की कोशिश की है। उनका कहना है कि भारत अभी भी अपने कुछ कंपटीटर्स से बेहतर स्थिति में है। एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि ये एक मिला-जुला असर है और भारत के लिए कोई झटका नहीं है।

फार्मा कंपनियों की चांदी
भारत की फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री के लिए बड़ी राहत की खबर है। ट्रंप ने दवाइयों को नए टैरिफ से छूट दी है। इससे भारत की दवा कंपनियों को राहत मिलेगी। दवा कंपनियों के शेयरों में आज 15% तक उछाल देखी गई। अमेरिकी मार्केट भारत की फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इंडस्ट्री के लीडर्स ने इस छूट का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सस्ती जेनेरिक दवाएं पब्लिक हेल्थ, इकॉनमी और नेशनल सिक्योरिटी के लिए कितनी जरूरी हैं। नए टैरिफ के बावजूद अमेरिका को होने वाले भारत के एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट स्थिर रहने या बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि दूसरे देशों पर ज्यादा टैरिफ लगाया गया है।

एग्री एक्सपोर्ट पर कम असर

एग्रीकल्चर इकनॉमिस्ट अशोक गुलाटी ने बताया कि भारत के एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट पर इसके क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में कम असर पड़ेगा।सीफूड और चावल जैसे एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट पर ट्रंप 26% टैरिफ का कम असर हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस क्षेत्र के दूसरे देशों पर ज्यादा टैक्स लगाया गया है। गुलाटी ने कहा कि सीफूड एक्सपोर्ट खासकर झींगा के मामले में भारत को टैरिफ का फायदा मिलेगा। इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट सेक्टर में भी भारत पड़ोसी देशों चीन और वियतनाम से बेहतर स्थिति में है। भारत पर जो नया टैरिफ लगाया गया है, वो उसके कंपटीटर्स की तुलना में काफी कम है।

इलेक्टइंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) ने कहा कि टैरिफ के पहले राउंड में भारत फायदे में रहा है। चीन, वियतनाम, थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में भारत के कंपटीटर्स की तुलना में भारत को बेहतर टैरिफ ट्रीटमेंट मिला है। ब्राजील और मिस्र जैसे कुछ देशों को थोड़ा बेहतर टैरिफ ट्रीटमेंट मिला है, लेकिन चीन और वियतनाम की तुलना में भारत की स्थिति काफी मजबूत है। चीन पर अब 54%-79% तक का टैरिफ लग सकता है जबकि वियतनाम पर 46% का टैरिफ लगा है। ICEA ने कहा कि इससे भारत को एक्सपोर्ट में कॉम्पिटिटिव होने का मौका मिलेगा।

टेक्सटाइल सेक्टर क्योंं है खुश
अपेरल एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल के महासचिव मिथिलेश ठाकुर बताते हैं कि टेक्सटाइल सेक्टर को भी ट्रंप के टैरिफ से फायदा हो सकता है। वियतनाम, बांग्लादेश, कंबोडिया, पाकिस्तान और चीन जैसे टेक्सटाइल एक्सपोर्ट करने वाले देशों पर ज्यादा टैरिफ लगाया गया है जिससे भारत को फायदा हो सकता है। अमेरिका इंडियन टेक्सटाइल का सबसे बड़ा खरीदार है। 2023-24 में, भारत का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट लगभग 36 बिलियन डॉलर था जिसमें अमेरिका का हिस्सा लगभग 28% यानी 10 बिलियन डॉलर था। भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में अमेरिका का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। 2016-17 और 2017-18 में ये 21% था, 2019-20 में 25% और 2022-23 में 29% तक पहुंच गया।

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