उत्तम आर्जव धर्म नाटिका “सर्वज्ञ के वचन सदा जयवंत रहेंगें” मंचन, उत्तम शौच धर्म एव भगवान पुष्पदंत स्वामी निर्वांण कल्याणक
उत्तम आर्जव धर्म आधारित नाटिका “सर्वज्ञ के वचन सदा जयवंत रहेंगे” का प्रभावशाली मंचन
आयोजक: महिला जैन मिलन एकता एवं वीतराग विज्ञान पाठशाला
स्थान: श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर एवं जैन भवन, गांधी रोड, देहरादून
दसलक्षण पर्व के चौथ दिन उत्तम शौच धर्म एव भगवान पुष्पदंत स्वामी का निर्वांण कल्याणक
देहरादून 31-30 अगस्त 2025। परम पूज्य संस्कार प्रणेता, ज्ञानयोगी, आचार्य श्री 108 सौरभ सागर महाराज — जो वर्तमान में उत्तराखंड के राजकीय अतिथि हैं — के मंगल सान्निध्य में श्री स्वयंभू चौबीसी महामंडल विधान का शुभारंभ श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर एवं जैन भवन, गांधी रोड में किया गया।
दशलक्षण धर्म पर्व के तीसरे दिन, जिसे उत्तम आर्जव धर्म दिवस के रूप में मनाया जाता है, पूज्य आचार्य श्री ने अपने दिव्य प्रवचनों में कहा कि “गुमराह करना, भ्रमित करना और धोखा देना तब होता है जब हमारे विचार, वाणी और कर्म में सामंजस्य नहीं होता। आर्जव धर्म हमें सिखाता है कि जो हमारे मन में है, वही वाणी में होना चाहिए और वही कर्म में उतरना चाहिए — परन्तु यह भी आवश्यक है कि हमारे विचार सन्मार्ग पर हों।”
सांध्यकालीन कार्यक्रम में महिला जैन मिलन एकता एवं वीतराग विज्ञान पाठशाला ने भव्य नाटिका “सर्वज्ञ के वचन सदा जयवंत रहेंगे, इस काल में सदा ही जैन संत रहेंगे” का मंचन किया गया।
इस सांस्कृतिक प्रस्तुति का उद्देश्य तीर्थंकरों के केवलज्ञान से प्राप्त जिन धर्म के मूल सिद्धांतों को जन-जन तक पहुँचाना रहा। वीतराग विज्ञान पाठशाला से निरंतर तत्वज्ञान व आध्यात्मिक शिक्षा की प्रेरणा दी जाती रही है, और इसी कड़ी में यह आयोजन उल्लेखनीय रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ वीतराग विज्ञान पाठशाला की अध्यक्षा वीरांगना वीणा जैन के नेतृत्व में महावीर प्रार्थना एवं पंच परमेष्ठी वंदना से हुआ। इसके पश्चात महिला जैन मिलन की वीरांगनाओं ने नाट्य प्रस्तुति दी, जिसमें नन्हें-मुन्ने बच्चों ने कविताओं एवं प्रश्नोत्तर शैली से जैन धर्म के आदर्शों को सहजता से प्रस्तुत किया ।
“अपनापन” नाटक से दिखाया गया कि जहाँ आत्मिक संबंध होते हैं, वहाँ मनुष्य अपना सर्वस्व अर्पित करने को तत्पर रहता है।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में आत्मज्ञान की महत्ता रेखांकित करती हुई “भव्यजन कव्वाली” एवं “जिया कब तक उलझेगा” तथा “देह जाए तो भले, जिन धर्म रहना चाहिए” जैसे भक्ति गीतों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम का संचालन एकता के अध्यक्षता वंदना जैन ने सफलतापूर्वक किया
इस कार्यक्रम में वीरांगना प्रीति जैन अनुभा बबीता संध्या संगीता दीपशिखा हर्षिता मीनू सारिका शिखा का विशेष सहयोग रहा पाठशाला के बच्चों में कुमारी दृषि जैन रोनित रिमिषा आगम अरिहंत अरनव अनन्या श्रेया आदि बच्चों ने पार्टिसिपेट किया।
दसलक्षण पर्व के चौथ दिन उत्तम शौच धर्म एव भगवान पुष्पदंत स्वामी का निर्वांण कल्याणक
परम पूज्य संस्कार प्रणेता ज्ञानयोगी जीवन आशा हॉस्पिटल प्रेरणा स्रोत उत्तराखंड के राजकीय अतिथि आचार्य श्री 108 सौरभ सागर महामुनिराज के मंगल सानिध्य में आज दसलक्षण पर्व का चौथा दिन उत्तम शौच धर्म एव भगवान पुष्पदंत स्वामी का निर्वांण कल्याणक मनाया गया जिसमे प्रातः जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक कर शांतिधारा की गयी।
शांतिधारा करने का सौभाग्य श्री अभिषेक जैन मनन जैन को प्राप्त हुआ। भगवान् को 9 किलो का निर्वांण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य श्री राजीव जैन सात्विक जैन को प्राप्त हुआ।
पूज्य आचार्य श्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि
“बाहा शुद्धता शौच धर्म नहीं बल्कि मन की पवित्रता ही शौच धर्म है।” जब मन की पवित्रता होगी तो ही संसार, देह और भोगों से विरहिक होगी। शौच धर्म का दूसरा नाम संवेग धर्म है।
जब इंसान के अंदर लालच जन्म लेता है तभी उसके सुख और संतुष्टि को खत्म कर देता है।
शौच धर्म कहता है कि वस्तु को जानो देखो पर ग्रहण करने का भाव मत करो।
यही लोभ का त्याग हममें शौच धर्म को प्रकट कर देगा।
जो वस्तु तुम्हारी नहीं थी, है नहीं, और कभी होगी नहीं उसका त्याग करो, शौच धर्म प्रकट हो जाएगा।
अपना-अपने काम आ जाए, वहीं शौच धर्म है। तुम किसी के दास (आधीन) नहीं रहना चाहते तो किसी के दास (आधीन) नहीं बनाऊंगा-तो शौच धर्म जीवन में आ जाएगा।
आज दोपहर श्री वर्णी जैन विद्यालय में श्री मिट्ठन लाल सुरेश चंद वाद विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसका विषय:- “प्रसारण मीडिया अपनी विश्वनियता खो रहा है” था।
संध्याकालीन बेला में महिला जैन मिलन ने ‘भरत बाहुबली’ नाटिका का सुंदर मंचन किया गया।
