5% घूस को गंवाया IAS कैरियर,टॉपर से रसातल तक अभिषेक की यात्रा

आईएएस साहब ने 5% कमीशन के चक्कर में दांव पर लगाया करियर, अफसर पत्नी ने कहा था- यूपी से भेज दो वापस
IAS Abhishek Prakash Story: उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित प्रशासनिक मामलों में से शामिल आईएएस अभिषेक प्रकाश की कहानी किसी उतार-चढ़ाव भरी फिल्म से कम नहीं है. आईआईटी से पासआउट, यूपीएससी टॉपर लिस्ट में नाम और फिर भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच ‘आरोपित बनने तक उनकी यात्रा.

नई दिल्ली (IAS Abhishek Prakash Story) उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में कुछ ऐसे अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने कम समय में जितनी ऊंचाइयां छुईं, उतनी ही तेजी से वे विवादों के भंवर में भी फंस गए. 2006 बैच के आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश इस फेहरिस्त में सबसे ऊपर नजर आते हैं. बिहार के साधारण परिवार में जन्म, IIT रुड़की से बीटेक और यूपीएससी में 8वीं रैंक.. आरोपों में घिरने से पहले आईएएस अभिषेक प्रकाश का प्रोफाइल यही था. वे यूपी सीएम ऑफिस के भरोसेमंद अफसर थे. लखनऊ के जिलाधिकारी (DM) जैसे रसूखदार पद पर भी लंबे समय तक तैनात रहे.

IAS Story आईएएस अभिषेक प्रकाश रिश्वत के मामले में फंसे हैं

आईएएस अभिषेक प्रकाश की कहानी केवल फाइलों और दफ्तरों तक सीमित नहीं है. इसमें हाई-प्रोफाइल मैरिज, गहराता व्यक्तिगत विवाद और करियर नष्ट करने वाला ‘कमीशन कांड’ भी शामिल है. मार्च 2025 में हुए उनके निलंबन के बाद से ही अनुमान थे कि उन पर  जकड़ और कसेगी. जनवरी 2026 में विशेष जांच दल (SIT) ने उन्हें आधिकारिक ‘आरोपित ’ बनाया है. इससे साफ है कि उनकी कठिनाई शीघ्र समाप्त नही होगी. जानें मेधावी छात्र से उत्तर प्रदेश के दागी अधिकारी बनने तक आईएएस अभिषेक प्रकाश की पूर्ण कथा.

बिहार से आईआईटी रुडकी और फिर यूपीएससी का शिखर
अभिषेक प्रकाश का जन्म बिहार के सिवान जिले में 21 दिसंबर 1982 को हुआ था. वे बचपन से ही पढ़ाई में बहुत होशियार थे. शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा पास की और IIT रुड़की से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीटेक की डिग्री ली. इंजीनियरिंग के तुरंत बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की । 2005 में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा पूरे भारत में 8वीं रैंक पाई . 2006 में उन्होंने प्रशासनिक सेवा जॉइन की तो नागालैंड कैडर मिला. उनकी छवि ईमानदार और मेहनती अफसर की बनी।

प्यार और हाई-प्रोफाइल शादी
अभिषेक प्रकाश आईएएस का निजी जीवन फिल्म जैसा रहा. उनकी जान-पहचान अदिति सिंह (2009 बैच आईएएस) से हुई. उनकी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई. जल्द ही उन्होंने शादी करने का फैसला किया. उस समय IAS अभिषेक नागालैंड कैडर में तैनात थे, जबकि आईएएस अदिति सिंह को यूपी कैडर अलॉट हुआ था. शादी के आधार पर (Spouse Ground) अभिषेक ने नागालैंड छोड़कर उत्तर प्रदेश में अपनी प्रतिनियुक्ति (Deputation) कराई. कभी इस जोड़े को यूपी ब्यूरोक्रेसी का ‘पावर कपल’ माना जाता था, लेकिन यह सुखद समय ज्यादा दिन नहीं चल सका.

पत्नी से विवाद और कैडर स्थानांतरण युद्ध
शादी के कुछ सालों बाद ही दोनों के संबंधों में कड़वाहट आ गई. विवाद इतना सार्वजनिक हुआ कि अदिति सिंह ने शासन से अभिषेक की शिकायत कर उन्हें उनके मूल कैडर (नागालैंड) वापस भेजने की मांग तक कर डाली. अभिषेक प्रकाश के उत्तर प्रदेश कैडर में स्थायी विलय (Permanent Absorption) को लेकर सालों तक कानूनी लड़ाई चली. इस बीच उनके व्यक्तिगत विवादों की खबरें अखबारों की सुर्खियां बनती रहीं. अंतत: दोनों में अलग होने के निर्णय के साथ संबंध विच्छेद हो गया. लेकिन इस विवाद ने प्रशासनिक क्षेत्र में उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हुई.

उत्कोच जाल में कैसे फंसे ?
आईएएस अभिषेक प्रकाश के पतन का सबसे बड़ा कारण बना ‘इन्वेस्ट यूपी’ (Invest UP) में उनका कार्यकाल. आरोप है कि उन्होंने एक बड़ी सोलर कंपनी SAEL Solar के प्रकल्प की स्वीकृति और अनुदान दिलवाने के बदले अपने मध्यस्थ निकांत जैन द्वारा 5% उत्कोच मांगा. शिकायतकर्ता ने ऑडियो और पुष्ट प्रमाणों के साथ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायत की. जांच में आया कि मध्यस्थ ने साहब के नाम पर करोड़ों का लेन-देन किया था. इसी भ्रष्टाचार के आरोप में योगी सरकार ने मार्च 2025 में उन्हें निलंबित कर प्रतीक्षा सूची में डाल दिया था.

अब बने सरकारी आरोपित और ED का प्रवेश
जनवरी 2026 में मामले ने नया मोड़ ले लिया है. SIT ने अपनी 1600 पन्नों का आरोप पत्र न्यायालय में जमाकर आईएएस अभिषेक प्रकाश को आरोपित नामांकित किया है. अब वे केवल निलंबित आईएएस अधिकारी नहीं, बल्कि उत्कोच  आरोपित ’ हैं. साथ ही, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मामले में सक्रिय है. जांच में उनकी करोड़ों की बेनामी संपत्तियों, लखनऊ से लेकर बरेली तक फैली जमीनों और अवैध निवेशों का पता चला है. कभी आईएएस टॉपर्स को व्याख्यान देने वाले साहब अब खुद अधिवक्ताओं और न्यायालयों के चक्कर लगा रहे हैं.

 

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