नाच ना जाने आंगन टेढ़ा,फ्लॉप और कूड़ा संगीत ने किया ए आर रहमान को किनारे

बॉलीवुड में कम्युनल एंगल पर एआर रहमान बता रहे आधी सच्चाई… 2015 के बाद वाकई खो गया उनका जादुई संगीत!
हाल ही में एक इंटरव्यू में एआर रहमान ने बॉलीवुड में अपने हालिया काम के लिए नॉन-क्रिएटिव पावर शिफ्ट और सांप्रदायिक कानाफूसी को जिम्मेदार ठहराया. सच तो यह है कि 2015 के बाद की उनकी फ्लॉप फिल्मों ने उनके पतन में योगदान दिया.

संगीतकार एआर रहमान (Photo: Instagram/@arrahman)
संगीतकार एआर रहमान (Photo: Instagram/@arrahman)

संदीपन शर्मा
नई दिल्ली,18 जनवरी 2026, एआर रहमान, अमिताभ बच्चन के बाद हिंदी सिनेमा के लिए सबसे अच्छी चीज हैं. एक एक्टर के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे म्यूजिक डायरेक्टर के तौर पर जिन्होंने भारतीय फिल्म संगीत के DNA को ही बदल दिया.

1970 के दशक में बच्चन की तरह, 1992 से 2015 तक, किसी एल्बम पर रहमान का नाम सफलता की गारंटी था. उनका म्यूजिक एक पीढ़ी को परिभाषित करता था, गाने कल्चरल एंथम बन जाते थे और फिल्म को सिर्फ उनकी वजह से सफल होने का मौका मिलता था.

जब रहमान ने हाल ही में खुलासा किया कि पिछले आठ सालों में बॉलीवुड में उनके काम में काफी गिरावट आई है, क्योंकि अब नॉन-क्रिएटिव लोग फैसले कंट्रोल करते हैं, तो यह सिर्फ एक पर्सनल दुख नहीं था, बल्कि यह इंडस्ट्री पर एक आरोप था.

लेकिन यहां एक कड़वी सच्चाई है जिसे कहने की जरूरत है- रहमान भी अपने बॉलीवुड करियर में गिरावट के लिए जिम्मेदार हैं. तमाशा (2015) के बाद बॉलीवुड में उनका काम चौंकाने वाले रूप से अस्थिर, इनकंसिस्टेंट रहा है, और इसमें से ज्यादातर तो बस भुला देने लायक है.

एक स्टार का जन्म

रहमान से पहले, हिंदी फिल्म संगीत अनुमानित और कॉपी किया हुआ होता था. अनु मलिक, आनंद मिलिंद, विजू शाह जैसे संगीतकार न सिर्फ दुनिया भर से, बल्कि इलाया राजा जैसे दिग्गजों से भी बेशर्मी से म्यूजिक कॉपी करते थे. बॉलीवुड में विडंबना यह है कि रहमान की कंपोजिशन चुराकर सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. ‘द जेंटलमैन’ के लिए, मलिक ने रहमान के ओरिजिनल तमिल साउंडट्रैक को कॉपी किया और चोरी के आरोपों को यह कहकर खारिज कर दिया- ‘क्या दो महान लोग एक जैसा नहीं सोच सकते?’

Photo: Instagram/@arrahman
फिल्म ‘रोजा’ के साथ भारत का पूरा म्यूजिक लैंडस्केप अचानक बदल गया. अगले दो दशकों तक किसी एल्बम पर रहमान का नाम एक कल्चरल गारंटी था. संगीत हवा में छा जाता था, गाने हर घर, टैक्सी और शादी में लूप पर बजते थे, और फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर अपने आप फायदा मिलता था.

उनकी कंपोजिशन लोगों की जिंदगी का साउंडट्रैक बन गई. पहली डेट, रोड ट्रिप, दिल टूटना, देशभक्ति के पल. बॉम्बे से दिल से तक, लगान से रॉकस्टार तक, रहमान ने सिर्फ हिट नहीं बनाए, उन्होंने यादें बनाईं. हर एल्बम एक इवेंट था, हर रिलीज एक राष्ट्रीय त्योहार. और फिर उन्होंने असल में बॉलीवुड छोड़े बिना ही उससे दूरी बना ली.

ढलता हुआ करियर
आइए 2015 के बाद से उनके हिंदी काम का ईमानदारी से ऑडिट करें. फिल्म ‘रांझणा’ की सफलता के बाद, रहमान ने ‘मोहनजोदारो’ नाम की एक फ्लॉप फिल्म दी. यह सचमुच मरे हुए गानों का ढेर था: जिसकी बहुत आलोचना हुई, आम, पुराने जमाने के बिना प्रेरणा वाला गड़बड़झाला. लगभग उसी समय, उन्होंने ओके कानमणि के रीमेक ‘ओके जानू’ के लिए अपने ही काम को रीसायकल किया. म्यूजिक अच्छा था लेकिन भुलाने लायक था.

बच्चन के करियर में एक ऐसा समय आया जब उनके कट्टर फर्स्ट-डे-फर्स्ट-शो वाले फैन्स ने (इस लेखक की तरह) भी उनकी फिल्मों को फॉलो करना बंद कर दिया, और फिर उन्हें ‘लाल बादशाह’ जैसी फिल्में शर्मनाक लगने लगीं. रहमान के वफादारों के लिए, वह दौर फिल्म तमाशा के बाद उनकी औसत दर्जे की गिरावट के बाद शुरू हुआ.

‘हीरोपंती 2’, एक पूरी तरह से डिजास्टर थी, उनका ‘लाल बादशाह’ वाला पल. यहां तक ​​कि रहमान के कट्टर फैन्स भी मेसी दफा कर, जलवनुमा और जो कुछ भी उन्होंने एल्बम में जोड़ा था, उसका बचाव नहीं कर सके. ‘अमर सिंह चमकीला’ एक तरह से वापसी थी. बाकी? भुलाने लायक.

चलो बिल्कुल ईमानदार रहें: 2015 के बाद से रहमान का कौन सा बॉलीवुड एल्बम आपको सच में याद है? नहीं कर सकते? ज्यादातर लोग भी नहीं कर सकते.

Photo: Instagram/@arrahman
दोहरी गिरावट
अपने हालिया इंटरव्यू में रहमान ने मौकों की कमी के लिए कॉर्पोरेट टेकओवर और मल्टी-कंपोजर एल्बम को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने बाहरी होने और सांप्रदायिक कानाफूसी का भी इशारा किया. ये सभी सिस्टम की सही समस्याएं हैं जिन्होंने हिंदी फिल्म म्यूजिक को खराब कर दिया है. लेकिन वे उनकी गिरावट, लगातार जादू दिखाने में उनकी असमर्थता को नहीं समझाते हैं. यह नहीं समझाता कि उन्होंने ‘हीरोपंती 2’ जैसे फ्लॉप गाने क्यों कंपोज किए, और क्यों 99 सॉन्ग्स, उनका पैशन प्रोजेक्ट, पूरी तरह से फेल हो गया. शायद समस्या सिर्फ बॉलीवुड में नहीं है.

साउथ फिल्मों में चला जादू
हिंदी सिनेमा में अपनी साफ गिरावट के बावजूद, रहमान का दक्षिण भारतीय काम लगातार शानदार रहा है. उदाहरण के लिए ‘पोन्नियिन सेल्वन I’ और ‘II’ (2022-2023) एक मास्टरक्लास थी. एपिक, लेयर्ड, तुरंत आइकॉनिक. असली अंतर? दक्षिण में रहमान अभी भी ऐसे डायरेक्टर्स के साथ काम करते हैं जो उन्हें चुनौती देते हैं, और ऐसे प्रोजेक्ट्स पर जो प्रतिष्ठित हैं. बॉलीवुड में वह आलसी सैलरी वाली नौकरियां (हीरोपंती 2) और दिखावटी प्रोजेक्ट्स (99 सॉन्ग्स) ले रहे हैं.

1990 और 2000 के दशक के रहमान अथक थे. उन्होंने एक साल में पांच से छह फिल्मों पर काम किया, लगातार एक्सपेरिमेंट किया, गीतकारों और गायकों के साथ जुनून से सहयोग किया, और हर प्रोजेक्ट को कुछ नया करने के मौके के तौर पर लिया. 2016-2024 के रहमान? वह बॉलीवुड में इतने सिलेक्टिव हो गए हैं कि लगभग गायब ही हो गए हैं, और जब वह दिखते भी हैं, तो अक्सर आधे-अधूरे मन से.

रहमान का पतन बॉलीवुड की क्रिएटिव गिरावट को दिखाता है. कभी सदाबहार हिट्स की फैक्ट्री रही यह इंडस्ट्री अब फॉर्मूला वाला शोर मचा रही है. कई कंपोजर्स के मिले-जुले गाने, पूरे गानों के बजाय प्लेलिस्ट-फ्रेंडली छोटे-छोटे टुकड़े, और वायरल होने के चक्कर में बिना सोल वाले रीमेक. कॉर्पोरेट सूट वाले लोग कला से ज्यादा एल्गोरिदम और स्ट्रीमिंग मेट्रिक्स को प्राथमिकता देते हैं.

Photo: Instagram/@arrahman
दुख की बात यह नहीं है कि बॉलीवुड ने रहमान को रिजेक्ट किया. दुख की बात यह है कि रहमान ने पहले खुद बॉलीवुड को आधा रिजेक्ट किया, और फिर जब इंडस्ट्री आगे बढ़ गई तो उसे ही दोष दिया.

जिस वापसी का हमें इंतजार है
बच्चन गुमनामी में नहीं खोए; उन्होंने खुद को फिर से बनाया, उदास एंटी-हीरो से लेकर बड़े राजनेता तक, यह साबित करते हुए कि लेजेंड्स या तो बदलते हैं या खत्म हो जाते हैं. रहमान में भी ऐसा करने का टैलेंट है. लेकिन तभी जब वह आधी-अधूरी कोशिशें छोड़ दें और अपने पुराने जोश को वापस पाएं, और वैसे ही कंपोज करना शुरू करें जैसे वह पहले करते थे दिल से.

बॉलीवुड का नुकसान खुद का किया हुआ है, लेकिन रहमान का उद्धार उनके अपने हाथों में है. क्या वह मद्रास के मोजार्ट की तरह फिर से उठेंगे, या जो हो सकता था उसकी एक छोटी सी कहानी बनकर रह जाएंगे? ओ नादान परिंदे, घर आजा…जैसे गाने तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं.

Ar Rahman Divorce Reason Wife Saira Banu Lawyer Reveals Separation Happen In Film Industry Due To Boredom
एआर रहमान का 29 वर्ष तलाक क्यों हुआ? सायरा बानो की वकील ने बताया फिल्म इंडस्ट्री में क्यों नहीं टिकती शादियां
एआर रहमान और उनकी पत्नी सायरा बानो शादी के 29 साल पूरे करने के बाद अलग हो रहे हैं। सेलिब्रिटी वकील वंदना शाह ने सायरा की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया और शोबिज में शादियों और असफलताओं के बारे में खुलासे किए। उन्होंने बताया कि ऐसी शादियों में, खासकर बॉलीवुड में, बेवफाई नहीं बल्कि बोरियत अक्सर अलगाव की ओर ले जाती है।

एआर रहमान और उनकी वाइफ शादी के 29 साल बाद हुए अलग
सायरा बानो की वकील ने बताया क्यों हुआ दोनों का तलाक
उन्होंने ये भी बताया कि बॉलीवुड में तलाक की वजह क्या है
ar rahman divorce reason
एआर रहमान का क्यों हुआ तलाक?
बॉलीवुड के फेमस सिंगर एआर रहमान और उनकी वाइफ सायरा बानो शादी के 29 साल बाद अलग हो गए हैं। सायरा ने तलाक का ऐलान किया और उनके बयान के बाद एआर रहमान ने सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि करते हुए एक पोस्ट शेयर किया। अब सेलिब्रिटी वकील वंदना शाह ने सायरा की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया और शोबिज में शादियों और असफलताओं के बारे में चौंकाने वाले खुलासे किए।

हाल ही में एक पॉडकास्ट में वंदना शाह ने सेलिब्रिटी मैरिज में टूटने के कारणों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि ऐसी शादियों में, खासकर बॉलीवुड में, बेवफाई नहीं बल्कि बोरियत अक्सर अलगाव की ओर ले जाती है।

शादी में नीरसता है अलगाव की वजह!

वकील ने कहा कि मशहूर हस्तियां अक्सर एक रिश्ते से दूसरे रिश्ते में बदलाव करते हुए कई शादियां करती हैं। हालांकि वन-नाइट स्टैंड काफी आम है, लेकिन असली मुद्दा नीरसता (Monotony) है, जो रिश्तों के टूटने का कारण बनती है।

बेवफाई नहीं है असली कारण

वंदना ने कहा, ‘उनकी जिंदगियां बहुत अलग हैं। मुझे नहीं लगता कि बॉलीवुड में उनकी शादियों की असफलता का कारण बेवफाई है। इसका कारण बोरियत है। वे बोरियत के कारण एक शादी से दूसरी शादी में चले जाते हैं, जो बॉलीवुड और अमीर परिवार के लिए निराली बात है। वंदना ने इस बात पर जोर दिया कि ये कुछ ऐसा है, जैसा उन्होंने दूसरी शादियों में नहीं देखा है।

सबकी दखलअंदाजी से बढ़ जाती हैं चुनौतियां
वंदना ने यह भी खुलासा किया कि जीवनसाथी की मां, भाई और यहां तक कि ससुर सहित बाहरी लोगों का हस्तक्षेप अक्सर सेलिब्रिटी मैरिज में चुनौतियों को बढ़ा देता है।

ससुर के कंट्रोल के कारण बहू है नाखुश
वंदना ने आगे साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में एक हाई-प्रोफाइल तलाक के बारे में बताया, जहां ससुर के कंट्रोल करने के कारण बहू नाखुश थी। उन्होंने कहा, ‘एक साउथ इंडियन कपल है, जहां ससुर सब कुछ कंट्रोल कर रहा है और उसकी बहू दुखी है। उसका पति बेड पर तो शेर है, लेकिन अपने पिता के सामने वो बिल्ली की तरह हो जाता है। ससुर की नेटवर्थ लगभग 10,000 करोड़ रुपये है।’

क्या ऐश्वर्या और अभिषेक के बारे में की बात?
वकील के इस बयान ने सभी का ध्यान खींचा है। कई लोगों ने इसे अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन के तलाक की अफवाहों से भी जोड़ा है। वहीं कुछ लोगों को लग रहा है कि ये सामंथा रुथ प्रभु और नागा चैतन्य के बारे में है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *