लोकसभाध्यक्ष बिड़ला के विरुद्ध कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव,तृणमूल कांग्रेस साथ नहीं

No Confidence Motion Against Speaker Om Birla Why Tmc Stay Out Blow To Opposition Unity
स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव से टीएमसी क्यों रही बाहर, विपक्षी एकता को बड़ा झटका?
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। लेकिन, जानकारी है कि विपक्ष के सभी दलों में इसको लेकर एक राय नहीं बन पाई है।

नई दिल्ली 10 फरवरी 2026 : कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने आज लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को उनके पद से हटाने का अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। बजट सत्र के दूसरे हफ्ते में भी निचले सदन की कार्यवाही नहीं चल पा रही थी और सत्ता पक्ष और विपक्ष में जबरदस्त मतभेद से बीच का रास्ता नहीं निकल पा रहा था। स्पीकर को लेकर विपक्ष की कई शिकायतें हैं, जिसके चलते उनकी ओर से स्पीकर के ऑफिस को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया है। लेकिन विपक्ष के भीतर भी इस पर एक राय नहीं है और टीएमसी ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किया है।

प्रस्ताव पर टीएमसी एमपी’ज के हस्ताक्षर नहीं!
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने वाले अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस के बारे में कहा कि यह लोकसभा महासचिव को संविधान के आर्टिकल 94-सी में दिया गया है। नोटिस पर कांग्रेस,डीएमके,आरजेडी, समाजवादी पार्टी जैसे दलों के 120 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर  हैं। लेकिन,सूत्रों के अनुसार टीएमसी सांसदों ने अभी इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं।

स्पीकर बिरला को समय देना चाहती थी टीएमसी
वैसे टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने इस मामले पर कहा कि उनकी पार्टी ने अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया से पहले कांग्रेस से कहा था कि पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के सामने एक अपील हो। उनके अनुसार, ‘कल भी हमने स्पष्ट किया था कि टीएमसी के सभी एमपी अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करेंगें, लेकिन हमारा सुझाव है कि जितने भी विषय हैं…हमने कहा कि पहले हमें स्पीकर को विरोध पत्र देना चाहिए जिस पर सभी विपक्षी सांसद हस्ताक्षर करें । हमें स्पीकर को 2 से 3 दिन देने चाहिए।’

स्पीकर के मुद्दे पर विपक्ष में गहरे मतभेद?
उन्होंने आगे कहा कि ‘स्पीकर इस पर कोई कार्रवाई नहीं करते है, तब हमारे पास अविश्वास प्रस्ताव का रास्ता तो है ही, हमें कोई समस्या नहीं है।’ टीएमसी के स्टैंड से साफ है कि संसद में विपक्ष में भी गहरे मतभेद हैं।

स्पीकर क्यों हटाना चाहता है विपक्ष
विपक्षी दलों में विशेषकर कांग्रेस का आरोप है कि स्पीकर ओम बिरला सरकार के निर्देशों पर काम कर रहे हैं और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी को अपने विचार रखने का मौका नहीं दिया,जबकि सत्ता पक्ष को कुछ भी कहने की अनुमति मिल जाती है। विवाद की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण पर परंपरागत धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस से शुरू हुई।

राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित विवरण उद्धृत करने पर अड़े रहे, जिसकी स्पीकर ने अनुमति नहीं दी। बाद में कांग्रेस सांसदों ने आसन की ओर कागज उछाले, टेबल पर भी चढ़ गए। तो 8 कांग्रेसी सांसदों को निलंबित भी किया गया। समय ऐसा भी आया कि कांग्रेस की 6 महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री का आसन ही घेर लिया। जब स्पीकर ने यह कहा कि उन्हें पता चला है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले का षड्यंत्र रचा गया था तो विवाद और बढ़ गया।

स्पीकर ओम बिरला का बड़ा फैसला, अविश्वास प्रस्ताव पर फैसले तक लोकसभा नहीं जाएंगे

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपने खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय होने तक सदन में नहीं आने का निर्णय किया है.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला. (File Photo: X/@SansadTV)लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला. File Photo:

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय होने तक सदन की कार्यवाही से असंबद्ध रहने का निर्णय किया है. सूत्रों के अनुसार, वह बजट सत्र के दूसरे चरण में तब तक लोकसभा नहीं आएंगे, जब तक प्रस्ताव पर चर्चा और फैसला नहीं हो जाता.

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय होने तक सदन में नहीं आने का निर्णय किया है. सूत्रों के अनुसार, जब तक उन्हें हटाने के प्रस्ताव पर सदन में चर्चा और निर्णय नहीं हो जाता, तब तक वह लोकसभा की कार्यवाही में नहीं जायेंगें. हालांकि, संसदीय नियमों में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है, फिर भी ओम बिरला ने स्वयं सदन में न जाने का निर्णय किया है. सूत्रों का कहना है कि सरकार या विपक्ष से उन्हें मनाने की कोशिश हो सकती है,लेकिन उन्होंने अपना निर्णय स्पष्ट कर दिया है कि वह सदन में नहीं रहेंगें.

जानकारी के अनुसार, बजट सत्र के दूसरे हिस्से के पहले ही दिन  9 मार्च को लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने को लाए गए विपक्ष के प्रस्ताव पर चर्चा की संभावना है. प्रक्रिया में सदन में कम से कम 50 सांसदों को खड़े होकर प्रस्ताव को समर्थन दिखाना होगा. तभी पीठासीन अधिकारी इस प्रस्ताव पर औपचारिक चर्चा की अनुमति दे सकते ह्. उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, यदि आवश्यक समर्थन मिलता है तो उसी दिन लोकसभा में ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है.

कांग्रेस का ओम बिरला पर पक्षपात का आरोप

कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंप दिया है. नोटिस उच्च सदन के महा सचिव को दिया गया है. नोटिस में आरोप है कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला सदन कार्यवाही का संचालन पक्षपातपूर्ण तरीके से कर रहे हैं । कई मौकों पर विपक्षी दलों के नेताओं को बोलने का अवसर नहीं दिया गया, जो संसद में उनका मूल लोकतांत्रिक अधिकार है. कांग्रेस ने कहा ​है कि स्पीकर ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने की अनुमति नहीं दी. साथ ही आठ सांसदों के निलंबन भी नोटिस में उठाया गया है.

राहुल गांधी ने प्रस्ताव पर नहीं किया हस्ताक्षर

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि मंगलवार दोपहर 1 बजकर 14 मिनट पर नियम 94C में लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा गया. इस बीच, एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अविश्वास प्रस्ताव नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किया है. पार्टी के अनुसार संसदीय लोकतंत्र में नेता प्रतिपक्ष का स्पीकर हटाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर उचित नहीं माना जाता.

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), समाजवादी पार्टी (सपा) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सहित विभिन्न दलों के 118 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के प्रस्ताव के समर्थन में हस्ताक्षर किए हैं. कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव नोटिस में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के प्रावधानों में यह प्रस्ताव लाया गया है. सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष के सौंपे गए इस नोटिस की जांच के निर्देश लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को दे दिए हैं.

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