‘कांग्रेस का अंतिम हिंदू नेता’ भूपेन बोरा भाजपा में ,बदल जाएगी असम की राजनीति
Congress’s Last Hindu Leader’ Switches to BJP, Signals Major Assam Political Shake-Up
गुवाहाटी 22 फरवरी। असम विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस की राज्य इकाई के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा रविवार को औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। राज्य में महत्वपूर्ण चुनावी सत्र से पहले इसे एक बड़ा राजनीतिक बदलाव माना जा रहा है।
तीन दशक तक असम में कांग्रेस की राजनीति करने वाले भूपेन बोरा ने आज रविवार को भाजपा का दामन थाम लिया। 16 फरवरी को उन्होंने कांग्रेस पार्टी से त्यागपत्र दे दिया था। इसके बाद कांग्रेस के उच्च नेताओं ने उनसे अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने को कहा था, लेकिन सभी अटकलों को विराम देते हुए बोरा ने रविवार को अपने समर्थकों के साथ भाजपा का दामन थाम लिया। उनके भाजपा में शामिल होने से जहां सत्तारूढ़ भाजपा को बड़ी मनोवैज्ञानिक बढ़त मिली है, वहीं राज्य में सत्ता में वापसी के लिए संघर्ष कर रही कांग्रेस के लिए इसे बड़ा झटका माना जा है।
भूपेन बोरा को भाजपा में लाने का श्रेय पूरी तरह मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा को दिया जा रहा है। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई से कथित मतभेदों के कारण बोरा पार्टी में उपेक्षित महसूस कर रहे थे। वे कथित तौर पर कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण राजनीति से भी सहमत नहीं थे और समय-समय पर पार्टी के अंदर और बाहर हिंदू हितों की आवाज उठाते रहते थे। वे बांग्लादेशी घुसपैठियों के विषयों पर भी लगातार आक्रामक थे। संभवतः यही कारण था कि मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा उन्हें ‘असम कांग्रेस में आखिरी प्रमुख हिंदू नेता’ करार देते थे। आज उस नेता ने भी भाजपा का दामन थाम लिया।
घुसपैठ और विकास पर केंद्रित भाजपा का चुनावी अभियान
भाजपा असम में अपनी जीत की हैट्रिक लगाने को घुसपैठ का विषय जमकर उछाल रही है। शनिवार को असम दौरे पर पहुंचे गृह मंत्री अमित शाह ने भी घुसपैठ का विषय पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि असम की भाजपा सरकार पहली बार घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश में भेज रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार बनने पर यह अभियान और तेज किया जाएगा और असम केवल यहां के मूल लोगों के लिए रहेगा। घुसपैठिये असम के लोगों के रोजी-रोटी का अधिकार नहीं छीन पाएंगे। भाजपा जिस विषय पर खेल रही है, भूपेन बोरा के पार्टी में शामिल होने से उसे चुनावी बढ़त मिलने की संभावना है।
घुसपैठ असम की अस्मिता से जुड़ा सवाल- प्रमोद गोस्वामी
असम भाजपा के प्रवक्ता प्रमोद स्वामी ने कहा कि उनके लिए बांग्लादेश से होने वाला घुसपैठ बड़ा विषय है। यह असम की सांस्कृतिक अस्मिता और पहचान से जुड़ा मुद्दा है जो आम असमिया लोगों के दिलों के बेहद करीब है। उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश युद्ध (1970-71) के दौरान से लेकर कांग्रेस नेता और असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के कार्यकाल (2001-2016) तक में एक षड्यंत्र में पड़ोसी देश से बड़ी संख्या में घुसपैठियों को लाकर असम में बसाया गया। परिणाम यह हुआ कि असम के कई जिलों में यहां के मूल निवासी ही अल्पसंख्यक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि असम के लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने को लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू हितों की आवाज उठाने के कारण भूपेन बोरा के आने से असम की आवाज को एक मजबूती मिलेगी।
‘आज तक नहीं हुआ था ऐसा विकास’
प्रमोद स्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में पहली बार असम सहित पूर्वोत्तर के सभी राज्य देश की राजनीति के केंद्र के प्रमुख हिस्से के रूप में दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक पूर्वोत्तर के राज्यों को छोटा समझकर इनकी उपेक्षा की जाती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की सरकारों के समय पूर्वोत्तर के मुख्यमंत्रियों को प्रधानमंत्री से मिलने तक नहीं दिया जाता था, उन्हें प्रधानमंत्री से मिलने के लिए तीन-चार दिन तक प्रतीक्षा करायी जाती थी। लेकिन अब भाजपा की सरकार में पूर्वोत्तर की आवाज पूरी प्रमुखता के साथ न केवल सुनी जा रही है, बल्कि उस पर कार्रवाई भी हो रही है।
असम नेता के अनुसार, हेमंत सरकार में असम के चारों ओर विकास हुआ है। वे घुसपैठ के साथ-साथ विकास के विषय पर जनता से वोट मांग रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि हेमंत बिस्वा सरमा सरकार हैट्रिक लगाने में सफल रहेगी।

