मत: सोना आसमान में,अमेरिकी चाल?RBI ने दो माह पूर्व बंद की शापिंग
China’s Central Bank Expanding Its Gold Reserves What About Rbi
India vs China: बोरे भर-भरकर सोना खरीद रहा चीन, लेकिन भारत ने लगा दिया ‘ब्रेक’, क्या है चक्कर?
सोने की कीमत में तेजी का दौर जारी है। सोमवार को पहली बार इसकी कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस पार पहुंची। इसके बावजूद कई देशों के केंद्रीय बैंक सोना खरीद रहे है। इनमें चीन के केंद्रीय बैंक ने लगातार 11वें महीने सोना खरीदा है।
नई दिल्ली 12 अक्टूबर2025 : सोने की कीमत पहली बार 4,000 डॉलर प्रति औंस पार पहुंची है। इस साल सोने की कीमत 40 बार से ज्यादा बार ऑल टाइम हाई पर पहुंची। गोल्डमैन सैश के अनुसार अगले साल दिसंबर तक सोने की कीमत 4,900 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। दुनिया के कई देशों के बैंक जमकर सोना खरीद रहे हैं। अगस्त में उन्होंने 15 टन सोना खरीदा। चीन ने लगातार 11वें महीने सोने की खरीद की है जबकि आरबीआई ने लगातार दूसरे महीने सोना नहीं खरीदा।
India vs China gold reserves
चीन का बैंक लगातार अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहा है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के अनुसार अगस्त में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने कुल मिलाकर 15 टन सोना खरीदा। यूक्रेन युद्ध के बाद से ही कई देशों के केंद्रीय बैंक अपने पोर्टफोलियो में सोना बढ़ा रहे हैं। अगस्त में उन्होंने फिर सोना खरीदना शुरू किया है। अगस्त में कजाकिस्तान नेशनल बैंक ने सबसे ज्यादा 8 टन सोना खरीदा। लेकिन भारत के रिजर्व बैंक (RBI) ने लगातार दूसरे महीने सोना नहीं खरीदा।
आरबीआई के पास कितना सोना?
आरबीआई ने 2025 के पहले आठ महीनों में से केवल तीन बार ही सोना खरीदा जबकि 2024 में उसने लगभग हर महीने सोना खरीदा था। WGC ने बताया कि आरबीआई ने जनवरी से अगस्त 2025 के बीच केवल 3.8 टन सोना खरीदा जबकि पिछले साल इसी अवधि में 45.4 टन सोना खरीदा था। 29 अगस्त तक, RBI के पास कुल 879.98 टन सोना था। नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक 26 सितंबर तक आरबीआई के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी 13.6% थी। एक साल पहले यह आंकड़ा 9.3% था जब देश का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था।
भारत के घरों में रखा है जितना सोना, दुनिया के 10 बड़े बैंकों और बड़े-बड़े देशों के पास मिलाकर भी उतना नहीं
HSBC रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय घरों में 25,000 टन सोना है, जो टॉप 10 केंद्रीय बैंकों के कुल भंडार से अधिक है. भारत में सोना आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है. यह वित्तीय सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है.
भारत सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है.
भारत में सोने का क्रेज किसी से छुपा नहीं है. लेकिन अब एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारतीय घरों में रखा गया सोना दुनिया के टॉप 10 केंद्रीय बैंकों के कुल भंडार से भी ज्यादा हो गया है. HSBC की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में घरेलू सोने की होल्डिंग 25,000 टन तक पहुंच चुकी है. यह दिखाता है कि भारतीय समाज में सोने का कितना गहरा आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व है.
भारत में सोना सिर्फ एक कीमती धातु नहीं, बल्कि परंपरा और सुरक्षा का प्रतीक है. शादी-ब्याह, त्योहार और धार्मिक अनुष्ठानों में सोने की मांग हमेशा बनी रहती है. खासकर ग्रामीण इलाकों में इसे बैंकिंग संपत्तियों के विकल्प के रूप में देखा जाता है. सोने को महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता से बचने का मजबूत साधन माना जाता है.
दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता
चीन के बाद भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है. हालांकि, सोने के बढ़ते आयात से भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) भी बढ़ता है, लेकिन फिर भी भारतीय परिवारों के लिए सोना धन संचय (Wealth Preservation) का सबसे लोकप्रिय तरीका बना हुआ है.
दुनिया के केंद्रीय बैंकों का रुझान
HSBC की रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के अलावा दुनिया के कई केंद्रीय बैंक भी हाल के वर्षों में अपना स्वर्ण भंडार बढ़ा रहे हैं. वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंक सोने को आर्थिक अस्थिरता से बचाव का एक अहम साधन मान रहे हैं.
क्यों बढ़ रही है कीमत?
WGC ने संभावना जताई है कि सोने की कीमत में हाल की तेजी केंद्रीय बैंकों की खरीद सीमित कर रही है। कुछ देश सोने में आई तेजी का फायदा उठाने को इसकी बिक्री भी की है। WGC ने कहा कि खरीद में हालिया कमी का मतलब यह नहीं है कि केंद्रीय बैंक सोने में रुचि खो रहे हैं। जानकारों के अनुसार फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें हैं। ऐसे में सोने की मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ेगी।
दुनिया भर में अनिश्चितता घटी नहीं है,जो सोने की कीमत सपोर्ट करती है। साथ ही यह भी याद रखें कि सोने का खनन सीमित है जबकि मांग स्थिर बनी हुई है। इसलिए,सोने की कीमत में और बढ़ोतरी से केंद्रीय बैंकों को फायदा होगा। अगस्त में चीन के सेंट्रल बैंक ने दो टन सोना खरीदा जिससे उसकी गोल्ड होल्डिंग पहली बार 2,300 टन पार पहुंची है।
चीन वर्सेज भारत
गोल्ड रिजर्व में अमेरिका के आसपास कोई नहीं है। उसके पास 8,133 टन सोना है। जर्मनी के पास 3,350 टन, इटली (2452 टन), फ्रांस (2437 टन) और रूस (2330 टन) का नंबर है। चीन 2,301 टन गोल्ड के साथ छठे नंबर पर है। उसके बाद स्विट्जरलैंड (1040 टन) और फिर भारत का नंबर है। जापान के पास 846 टन और तुर्की के पास 837 टन सोना है। तुर्की के सेंट्रल बैंक ने अगस्त में 2 टन सोना खरीदा।
India Halts Gold Purchase Is The Us Planning A Bullion Reset
आरबीआई ने दो महीने से नहीं खरीदा कोई सोना, क्या अमेरिका की चाल समझ चुका है भारत?
सोने की कीमत में हाल की तेजी के अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक अलग ही थ्योरी चल रही है कि अमेरिका एक बड़ी चाल चल रहा है। अमेरिका ने 1970 के दशक से अपने गोल्ड रिजर्व की कीमत नहीं बदली है।
इस साल सोना 40 से अधिक बार ऑल-टाइम हाई पर पहुंच चुका है। भारत में सोना ₹1,20,000 प्रति 10 ग्राम के पार जा चुका है। इस रिकॉर्ड बढ़ोतरी के कारण के बारे में तरह-तरह की अटकलें लग रही हैं। कोई कह रहा है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी के कारण सोना चढ़ रहा है। किसी का तर्क है कि दुनिया के कई देशों में अशांति से सोना चमक रहा है। एक थ्योरी यह भी है कि अमेरिका अपने भारी कर्ज को चुकाने के लिए कोई बड़ी चाल चल रहा है?
भारतीय के फाइनेंस सेक्टर में भी इस पर खूब चर्चा है। एक लिंक्डइन पोस्ट में बताया गया कि 1970 से अब तक सोने ने 649 गुना रिटर्न दिया। इसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर सोने के दाम इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं। सोशल मीडिया पर चलती थ्योरी यह भी है कि अमेरिका शायद अपने सोने के भंडार का फिर से मूल्यांकन करने की सोच रहा है। ऐसा करके वह अपना बढ़ता कर्ज कम करने की कोशिश में है। दिलचस्प बात है कि अमेरिका के गोल्ड रिजर्व में पिछले 25 साल में कोई खास बदलाव नहीं आया है।
अमेरिका का सोना
सीनियर वेल्थ एडवाइजर आशीष सेनगुप्ता ने कहा,कि ‘आपको सोने की इस रैली के पीछे का असली कारण नहीं पता।’ अमेरिका अब भी अपना सोना फेडरल रिजर्व के रिकॉर्ड में सिर्फ $42.22 प्रति औंस दिखा रहा है। यह कीमत 1970 के दशक की शुरुआत में तय हुई थी। अमेरिका के पास दुनिया में सबसे ज्यादा 8,133 टन सोना है जिसकी आधिकारिक कीमत करीब 11 अरब डॉलर है। आज सोने की कीमत $4,000 प्रति औंस पार चली गई। आज के बाजार भाव से इसका मूल्यांकन करें, तो अमेरिका के सोने के भंडार का मूल्य 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो जाएगा।
अमेरिका अपने गोल्ड रिजर्व की वैल्यू रिसेट करता है तो उसे तुरंत मुनाफा होगा। सोने-चांदी बाज़ार विशेषज्ञ आशीष यू. के अनुसार यह कीमत 10 गुना भी बढ़ी,तो अमेरिका का एक ट्रिलियन डॉलर का कर्ज खत्म होगा। लेकिन इससे डॉलर गिर सकता है और महंगाई आसमान छू सकती है। सेनगुप्ता का मत भिन्न है। उनके अनुसार, ‘यह 10 गुना नहीं है… यह 100 गुना है। सोने का दाम बढ़ने से जरूरी नहीं कि डॉलर कमजोर हो। डॉलर की चाल अलग होती है। अगर सोना मजबूत होता है,तो डॉलर भी मजबूत होगा।’लगता है कि अमेरिका की इस चाल को भारत समझ गया है। भारत के केंद्रीय बैंक ने दो महीने से अपना गोल्ड रिजर्व नहीं बढाया है।

