वित्त संकट:सोती पकड़ी गई हिप्र सरकार,RGD बंद होना पूर्वनिर्धारित:प्रो. धूमल
Shimla: धूमल बोले- आरडीजी बंद होना नई बात नहीं, वर्षों पहले से तय था, आर्थिक संकट का समाधान भाषण नहीं
pk dhumal said said: The closure of RDG is nothing new; it was decided years ago.
शिमला 10 फरवरी 2026 । प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल ने प्रदेश की वर्तमान आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हिमाचल में जो वित्तीय संकट की चर्चा हो रही है,वह अचानक उत्पन्न हुई स्थिति नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल –
पूर्व मुख्यमंत्री प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल ने प्रदेश की वर्तमान आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हिमाचल में वित्तीय संकट की चर्चा हो रही है, वह अचानक उत्पन्न हुई स्थिति नहीं है। बल्कि सरकार सोती पकड़ी गई है क्योंकि इसके संकेत वर्षों पहले ही स्पष्ट हो चुके थे। उन्होंने कहा कि आरडीजी के चरणबद्ध समाप्त होने की जानकारी पहले से थी। इसके बावजूद सरकार ने समय रहते वैकल्पिक संसाधन जुटाने और वित्तीय प्रबंधन की ठोस योजना नहीं बनाई। धूमल ने कहा कि वित्त आयोग की रिपोर्ट में पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि 31 मार्च 2026 के बाद आरडीजी समाप्त हो जाएगी। यह कोई नई घोषणा नहीं है। जब यह बात वर्षों पहले से ज्ञात थी, तो सरकार को उसी अनुसार अपनी नीतियां, खर्च और आय के स्रोत तय करने चाहिए थे।
वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करना केंद्र सरकार का दायित्व होता है। इसलिए इस विषय पर भ्रम फैलाने के बजाय राज्य सरकार को अपनी तैयारी पर जवाब देना चाहिए। आर्थिक संकट हर संसाधन सीमित राज्य में आता है, लेकिन समझदारी यह है कि उससे निपटने के लिए समय पर कठोर निर्णय लिए जाएं। अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी कठिन आर्थिक परिस्थितियां आईं, तब सरकार ने बचत और वित्तीय अनुशासन का रास्ता अपनाया। मुख्यमंत्री और मंत्रियों के खर्चों पर नियंत्रण लगाया गया, अनावश्यक यात्रा और सुविधाओं में कटौती की गई। सब्ज़ी उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देकर जहां पहले लगभग 250 करोड़ का कारोबार होता था, उसे बढ़ाकर लगभग 2250 करोड़ तक पहुंचाया गया। सेब उत्पादन में आई गिरावट की भरपाई वैकल्पिक कृषि से की गई, जिससे राजस्व में उल्लेखनीय सुधार हुआ और बजट संतुलन में मदद मिली।
उन्होंने कहा कि एक ओर आर्थिक संकट की बात की जा रही है, दूसरी ओर बड़ी संख्या में चेयरमैन, सलाहकार और पदाधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं, जिन पर भारी खर्च हो रहा है। नई गाड़ियों की खरीद, अतिरिक्त स्टाफ और सुविधाओं पर व्यय यह सब वित्तीय अनुशासन के विपरीत है। यदि सचमुच स्थिति कठिन है तो सबसे पहले गैर जरूरी खर्चों पर रोक लगनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ही खजाना खाली की बात करें तो जन विश्वास होता कमजोर
धूमल ने कहा कि प्रदेश का मुख्यमंत्री ही यदि बार-बार यह कहे कि खजाना खाली है, तो इससे जनविश्वास कमजोर होता है। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार ठोस कदम उठाए, खर्चों की समीक्षा करे, प्राथमिकताएं तय करे और वित्तीय प्रबंधन मजबूत बनाए। आर्थिक चुनौतियों का समाधान जिम्मेदार निर्णयों और अनुशासित शासन से ही संभव है।
हिमाचल में गहराते वित्तीय संकट में सुक्खू सरकार के पास सिर्फ 3 विकल्प
केंद्र से राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से हिमाचल प्रदेश गंभीर वित्तीय संकट में है, जिससे प्रति वर्ष ₹10,000 करोड़ का नुकसान होगा। सरकार आय के नए स्रोत तलाशने, खर्च में कटौती करने, शराब पर सेस व पेट्रोल-डीजल पर वैट बढ़ाने या सब्सिडी घटाने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है।
केंद्रपिछले तीन दिनों से राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के बाद वित्त विभाग ने आय के अन्य स्रोत तलाशने व खर्च में कटौती के विकल्प पर विचार शुरू कर दिया है। केंद्र सरकार से मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से प्रदेश को हर वर्ष लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। इसकी भरपाई के लिए सरकार को कड़े निर्णय लेने पड़ सकते हैं।
हिमाचल सरकार के पास तीन विकल्प
फिलहाल, सरकार के पास तीन विकल्प हैं। पहला, शराब पर सेस और पेट्रोल-डीजल पर वैट बढ़ाकर आय बढ़ाए। दूसरा, बजट में सरकार नए कर लगाये। तीसरा, अनुदानित योजनाओं पर दी जा रही धनराशि में कटौती हो। प्रदेश में कई योजनाएं चल रही हैं, जिन पर सरकार बड़ी राशि अनुदान पर खर्च करती है।
प्रदेश सरकार की संसाधन सृजन समिति की रिपोर्ट पर कठोर कदम उठाए जा सकते हैं। इसमें राज्य के विभिन्न विभागों के किराए के भवनों में चल रहे कार्यालयों को तुरंत खाली पड़े सरकारी भवनों में लाने का निर्णय आ सकता है। समिति ने ये भी सुझाया था कि आय जुटाने के विकल्पों पर प्रभावी कदम उठाये जायें।
प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष कुल राकेश पंत बताते हैं कि हिमालयी राज्य होने से यह एक उत्पादक राज्य है,उपभोक्ता राज्य नही। इसलिए उसे जी एस टी में हानि हुई।
मौजूदा वित्त वर्ष के आंकड़ों में जीएसटी से 6,824 करोड़ की राशि दर्शाई गई है। वहीं, वर्ष 2023-24 में जीएसटी से 9,956 करोड़ और 2024-25 में 10,824 करोड़ की राशि मिली थी।
ओपीएस बंद नही करेगी सरकार: आर्थिक संकट पर बोले सुक्खू
पार्टी मीटिंग में शामिल होने आज मुख्यमंत्री सुक्खू दिल्ली गये. इससे पहले मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत की.
मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू
दिल्ली में पार्टी मीटिंग में रवाना होने से पहले शिमला में पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री सुक्खू ने आरडीजी ग्रांट बंद होने से प्रदेश को होने वाले आर्थिक नुकसान के बारे में बात की. RDG के विषय पर मुख्यमन्त्री सुक्खू ने आंकड़ों से केंद्र सरकार पर हिमाचल की अनदेखी और कांग्रेस सरकार से भेदभाव का आरोप लगाया. बीते दिनों वित्त सचिव ने आर्थिक संकट के बीच दी प्रजेंटेशन ओल्ड पेंशन स्कीम छोड़ यूपीएस की तरफ जाने की बात कही थी.
वित्त सचिव ने कहा था कि आरडीजी खत्म होने पर धन की कमी से डीए फ्रीज करना होगा. ये पहले ही कह दिया है कि हम (वित्त विभाग) एरियर नहीं दे पाएंगे, लेकिन मुख्यमंत्री सुक्खू ने साफ कहा कि वो ओपीएस बंद नहीं करेंगे. उन्होने कहा कि ‘मैंने 11 दिसंबर 2022 को मुख्यमंत्री की शपथ ली थी. तब तक जयराम ठाकुर नीत सरकार को 54,256 करोड़ आरडीजी आया था. इसके साथ ही 16 हजार करोड़ जीएसटी क्षतिपूर्ति मिली, लेकिन हमें इस साल वित्तीय वर्ष खत्म होने तक तीन सालों में सिर्फ 17 हजार करोड़ रुपये मिले. हमने इसके बाद भी सामान्य जनता को दुखी नहीं किया।अपने सरकारी कर्मचारियों अधिकारियों को ओपीएस दी. वित्त सचिव के बयान के बाद भी ओपीएस बंद नहीं करेंगें और अपने संसाधन मजबूत करेंगे. वित्तीय प्रबंधन सुधारेंगें. आरडीजी से हमें 3 साल में 17 हजार करोड़ मिला है, फिर भी हम आगे बढ़ रहे हैं. हम अपने संसाधनों से गरीबों की कोई भी योजना बंद नहीं करेंगें. गरीबों को उनका अधिकार मिलेगा. हमने तीन सालों में अच्छे फैसलों से 3 हजार करोड़ से अधिक का राजस्व कमाया है.’
हिमाचल का हक छीनने की कोशिश
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि 1 फरवरी को वित्त मंत्री ने 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट टेबल की थी. ये हिमाचल के इतिहास का काला दिन है. हिमाचल की आरडीजी रोकी गई. आरडीजी संविधान की धारा 275 में राजस्व घाटे और खर्च की खाई भरने का एक तरीका है. सुक्खू ने कहा कि जयराम ठाकुर समेत अन्य भाजपा विधायकों को प्लानिंग कमेटी की बैठक में बुलाया गया था. उन्हें इस बैठक का निमंत्रण दिया गया था, लेकिन कोई नहीं आया. ये राजनीतिक विषय नहीं हिमाचल हित का सवाल है. मुख्यमंत्री सुक्खू ने प्रदेश भाजपा नेताओं पर सवाल उठाया कि हिमाचल का हक छीना जा रहा है. ये अधिकार की लड़ाई है ना कि सरकार की, ये हिमाचल के किसान, गरीब समेत तमाम वर्गों के अधिकार की लड़ाई है.
‘जयराम ठाकुर लड़ रहे कुर्सी की लड़ाई’
मुख्यमंत्री सुक्खू ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर निशाना साधते हुए कहा कि आरडीजी ग्रांट और जीएसटी क्षतिपूर्ति मिलने पर भी जयराम ठाकुर ने छठे पे कमीशन का सरकारी कर्मचारियों को 10 हजार करोड़ के अवशेष भुगतान भी नहीं किया और ऋण भी नहीं घटाया, लेकिन उन्होंने 1 हजार करोड़ के भवन बना दिये. जयराम ठाकुर को समझना चाहिए कि ये प्रदेश हित और अधिकार की बात है. आप दिल्ली हमारे साथ नहीं जाना चाहते हैं तो अपने सांसदों और विधायकों को लेकर दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर बताएं कि हिमाचल पहाड़ी राज्य है और कभी रेवन्यू सरप्लस नहीं हो सकता। आरडीजी रोकना हमारे साथ सौतेला व्यवहार है, लेकिन जयराम ठाकुर अपना कुर्सी हित नहीं छोड़ पा रहे। वो सरकार बनाने की तैयारी कर रहे हैं.
‘प्रधानमंत्री से करूंगा मुलाकात’
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री से मिलूंगा, हमने उनसे भेंट का समय मांगा है. फिलहाल संसद सत्र चल रहा है. मैं हिमाचल के हित को प्रधानमंत्री मोदी से कहीं भी मिल सकता हूं. इसके अलावा पार्टी मीटिंग से समय मिलने के बाद जेपी नड्डा से भी मिलूंगा.
Jairam Thakur says Sukhu government has pushed the state towards economic ruin in name of Vyavastha parivartan
जयराम ठाकुर बोले- सुक्खू सरकार ने ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नाम पर प्रदेश धकेला आर्थिक बदहाली की ओर
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश की बिगड़ती राजनीतिक और वित्तीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नाम पर हिमाचल को दयनीय मोड़ पर खड़ा कर दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर
उन्होंने प्रदेश की बिगड़ती राजनीतिक और वित्तीय स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सीधे तौर पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नारे को एक खोखला मॉडल करार दिया और आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की केवल ‘सब कुछ बंद करने और बदलने’ की जिद ने आज हिमाचल को इस दयनीय मोड़ पर खड़ा कर दिया है।
जयराम ठाकुर ने व्यंग्य कसा कि मुख्यमंत्री अपनी प्रशासनिक विफलताओं और गलत निर्णयों का ठीकरा अब केंद्र सरकार के बजट पर फोड़ने की कोशिश में हैं, जबकि उन्हें अपनी ऊर्जा प्रदेश के निर्माणाधीन बजट पर केंद्रित करनी चाहिए। उन्होंने जनता को सावधान किया कि सरकार अपनी विफलताओं का बोझ जनता पर डालने को है, क्योंकि एक तरफ चहेते मित्रों को कैबिनेट रैंक बांटकर सरकारी खजाना खाली किया और अब घाटे की भरपाई को जनता पर भारी भरकम टैक्स थोपने की जुगत भिड़ा रहे हैं।
बजट से पहले ही ‘बजट का रोना’ रोना मुख्यमंत्री की भविष्य की विफलताओं की पूर्व-तैयारी है, जो दर्शाता है कि सरकार के पास विकास का कोई रोडमैप नहीं है।
‘झूठी गारंटी या देते समय क्या मुख्यमंत्री को नहीं थी प्रदेश की आर्थिक हालत की जानकारी ?’
जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार प्रदेश के वित्तीय स्थिति का रोना रो रही है लेकिन प्रदेश की संपदा अपने मित्रों पर लगातार लुटाए जा रही है। क्या मुख्यमंत्री को प्रदेश की वित्तीय हालत की जानकारी नहीं थी। झूठी गारंटियां देते समय कांग्रेस पार्टी के सारे बड़े नेताओं ने खूब सीना ठोक-ठोक कर कहा था कि हमारे पास प्लान है। हमने पूरी रिसर्च कर ली है। हम कहां से करेंगे हमें सब कुछ पता है। एक हफ्ते पहले तक मुख्यमंत्री व्यवस्था परिवर्तन से प्रदेश को सबसे समृद्ध राज्य बनाने का दावा कर रहे थे तो उसे समय क्या उन्हें प्रदेश की वित्तीय स्थिति का पता नहीं था? तीन साल से ज्यादा समय तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए अगर उन्हें प्रदेश की वित्तीय स्थिति की जानकारी नहीं थी और वह अपनी गारंटीयों को पूरा करने का आश्वासन दे रहे थे तो यह स्थिति बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।

