गुरुमंत्र:कार्यस्थल की राजनीति से कैसे बचें?
Education Career Expert Advice – How To Deal With Office Politics And Grow Professionally Tech Employee Share Tips
ऑफिस पॉलिटिक्स से कैसे बचें? एक टेक वर्कर ने बताया अपना तरीका, कहा- 5 चीजें अपनाकर देखो
Politics at Workplace Tips in Hindi: ऑफिस की राजनीति से बचना है और नौकरी में तरक्की भी करना है, तो क्या करें? भारत के एक टेक एम्प्लॉई ने कुछ ऐसी स्ट्रैटजीज शेयर की हैं। कहा कि इसे वो खुद भी फॉलो करता है।
शायद ही ऐसी कोई जगह हो जहां पॉलिटिक्स नहीं है। ये तो हर जगह है। कहीं कम, कहीं ज्यादा। खासकर जब बात वर्कप्लेस की हो, तो नौकरी करने वाले हर शख्स की अपनी दुख दर्द पीड़ा की कहानी होती है। लेकिन ये कोई हल्की बात नहीं। इसे पूरी तरह से नजरअंदाज करना, सही रणनीति न अपनाना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। तो फिर ऐसा क्या करें कि ऑफिस की पॉलिटिक्स का हिस्सा भी न बनना पड़े और अपने काम के दम पर आगे भी बढ़ सकें? एक इंडियन कॉर्पोरेट वर्कर ने इसके कुछ जवाब सुझाए हैं।
कौन है ये टेक वर्कर?
ऑफिस पॉलिटिक्स पर टिप्स देने वाले इस शख्स का नाम रोहित यादव है। रोहित ने बताया है कि वो एक टेक कंपनी में प्रॉडक्ट मैनेजर के पद पर काम करते हैं। रोहत अक्सर वर्कप्लेस और कॉर्पोरेट जॉब से जुड़े टिप्स शेयर करते रहते हैं। उसी कड़ी में करीब एक हफ्ते पहले उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर की। इस पोस्ट में उन्होंने बताया है कि वो कैसे ऑफिस पॉलिटिक्स में शामिल हुए बिना इससे बचते रहे हैं।
ऑफिस पॉलिटिक्स से बचने को क्या करें ?
अपने पोस्ट में रोहित ने लिखा, ‘मैं किसी की साइड नहीं लेता हूं, न ही गॉसिप करता हूं। लेकिन मैं सबकुछ देखकर आंखों पर पट्टी भी नहीं बांधता हूं। तो फिर मैं करता क्या हूं…?’ उन्होंने 5 खास बातें बताई हैं, जो शायद सुनने में आपको आम सी लगे, लेकिन हैं बड़े काम की।
1. पहली बात-
रोहित ने लिखा, ‘मीटिंग्स में मैं सुनता ज्यादा हूं और बोलता कम हूं। जब भी कभी कोई ड्रामा होता है, मैं खुद को शांत और फोकस्ड रखता हूं।’
2. दूसरी बात-
मैं इस बात पर गौर करता हूं कि जो फैसले हो रहे हैं वो किस तरह लिए जा रहे हैं। ये समझने की कोशिश करता हूं कि असल में उन फैसलों के पीछे कौन है। कौन उन्हें प्रभावित करता है।
3. तीसरी बात-
मेरी कोशिश होती है कि मैं सबके सामने लोगों के बारे में डंके की चोट पर कोई भी राय न रखूं। अगर मुझे कोई चीज पसंद नहीं है, तो मैं उस शख्स से सीधे बात करता हूं या फिर चुप रहता हूं।
4. चौथी बात-
किसी भी महत्वपूर्ण बातचीत के बाद मैं हमेशा एक फॉलो-अप ईमेल भेजता हूं। इससे बाद में न तो किसी तरह की कोई कन्फ्यूजन होती है, न ही एक-दूसरे पर दोष मढ़ने की स्थिति बनती है।
5. पांचवीं बात-
मैं कभी भी छोटी-छोटी बातों पर रिएक्ट नहीं करता। हर चीज के लिए लड़ने की जरूरत नहीं है।
अंत में रोहित लिखते हैं ‘ऑफिस में होने वाली राजनीति से खुद को बचाने के लिए आपको उसका हिस्सा बनने की जरूरत नहीं है। बस स्मार्ट बनिए, शांत रहिए और अपने काम पर फोकस रखिए।’


