“कैसा हराया?”, शाबास हिजाबी सहर शेख,तुष्टिकरण मॉडल जीतेंद्र आव्हाड को जो सबक सिखाया,आभारी हैं
आजकल इस चित्र में दिखते लोग सोशल मीडिया पर वायरल हैं। यह बड़ी रोचक और शिक्षाप्रद कहानी है।
हाथों में लाल किताब लिए ये व्यक्ति मुंब्रा कलवा विधानसभा थाणे से 4 बार का विधायक जितेंद्र आव्हाड हैं।
और दूसरे चित्र में दाढ़ी वाला इसका दोस्त था “युनुस शेख” …
जीतेंद्र आव्हाड मुंब्रा-कलवा विधानसभा क्षेत्र से 2009 से लगातार विधायक है, 2009, 2014, 2019 और 2024। इसके पहले सन 2002 से 2009 तक वह महाराष्ट्र विधान परिषद सदस्य (MLC) था …
मुंब्रा – कलवा विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता लगभग 43.7% हैं । केवल मुंब्रा इलाके में मुस्लिम जनसंख्या 80+% है। 25 सालों से मुंब्रा में मुसलमानों की आवाज़ जीतेंद्र अह्वाड बनें हैं।
महाराष्ट्र में मुसलमान जिस पर भी आक्रमण करते, पुलिस थाना कोर्ट कचहरी में वह मुसलमानों की ढाल बन के खड़ा रहा। इसकी तुष्टिकरण की हद इससे समझें हैं कि धर्म विरुद्ध जाकर इसके मुसलमानों के पक्ष में दिये बयानों पर इस पर 15 से अधिक F.I.R. हुई।
जिहादी सांप्रदायिकता की लड़ाई लड़ते, फिलिस्तीन के समर्थन में सभाएं करने वाले जीतेंद्र आह्वाड महाराष्ट्र में मुसलमान तुष्टिकरण का सबसे बड़ा चेहरा हैं।
इसने महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रहते मुंबई और महाराष्ट्र में CAA विरोधी आंदोलन का नेतृत्व किया..
जीतेंद्र आह्वाड ने CAA-NRC विरोधी आंदोलन में मंत्री रहते विरोध प्रदर्शनों में सीधे भाग ले विषैले भाषण दिए।
ठाणे , कल्याण , भिवंडी ,आजाद मैदान, अगस्त क्रांति मैदान और YMCA ग्राउंड आदि तमाम जगहों पर प्रदर्शनकारी संबोधित किये और शाहीन बाग जैसे अराजक आंदोलन का समर्थन किया।
ठाणे रैली में इसने कहा “मुसलमान तो अपने पूर्वजों की कब्र दिखा देंगे, लेकिन हिंदू क्या सबूत दिखाएंगे कि उसके परदादा का अंतिम संस्कार कहां हुआ था?”
तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार ने CAA-NRC पर एक कैबिनेट सब-कमिटी बनाई थी, जिसके NCP सदस्य जितेंद्र आह्वाड विरोध की आवाज बने। इसी से पूरे महाराष्ट्र में प्रायोजित CAA-NRC विरोधी आंदोलन हुआ, वहां के शरजिल इमाम और खालिद उमर जैसों को इसने बचाये रखा।
इसकी शह पर मुंबई में CAA-NRC विरोधी आंदोलन में आपत्तिजनक नारे लगते रहे,लाखों लोग जुटते, लेकिन पुलिस ने कोई गिरफ्तारी नहीं कीं।
पिछले कई सालों से जीतेंद्र आह्वाड का पुराना सहयोगी और करीबी युनुस शेख माना जाता था। आज वही युनुस शेख जीतेंद्र आह्वाड को गालियां दे रहा हैं क्योंकि उसकी बेटी सहर शेख मुंब्रा में छोटा सा कारपोरेटर चुनाव जीत गयी।
सहर शेख जीतेंद्र आह्वाड को अपना गुरु और “दूसरा बाप” जैसा बताती थी, गोदी में बेटी बन कर खेलीं आज वही जीतेंद्र आह्वाड को चिढ़ा रहीं हैं “कैसा हराया ?”
उसके पिता युनुस शेख जीतेंद्र आह्वाड को कह रहे हैं कि “दिमाग सटका ना, मुंब्रा में एंट्री बंद करवा दूंगा”, “मुंब्रा में मत आना”।
बेटी की जीत बाद युनुस शेख ने जीतेंद्र आह्वाड को “Fake Jitendra” या “JJ” कहा। जीतेंद्र आह्वाड का पिछले 23 साल से पिछलग्गू युनुस शेख आज गाली-गलौच कर रहा है कि जीतेंद्र आह्वाड को कुत्ते की मार मारूंगा, एक बाप की औलाद हो तो मुंब्रा आकर दिखा।
महाराष्ट्र और मुंबई में सोशल मीडिया जितेंद्र आह्वाड को चिढ़ा रहा है। लोग जीतेंद्र आह्वाड को ट्रोल कर मज़े ले रहे हैं कि…
“इसने हमेशा मुसलमानों का पक्ष लिया और आज वही लतिया रहे हैं।
सेक्युलर हिन्दुओं देख लो यह केवल उम्मत के सगे हैं”…
12.5 हज़ार मतदाताओं के वार्ड में चुनाव जीतने पर इतना नशा कि सब कुछ भूल गए ? जिसकी गोद में पल बढ़ कर बड़ी हुई उस दूसरे बाप को चिढ़ा बेइज़्ज़त किया?
दिन रात मुस्लिम तुष्टिकरण में लगे हिन्दू नेताओं के लिये सबक।
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कौन हैं सहर शेख? मुंब्रा को हरा रंगने के बयान पर चौतरफा घिरीं, जानें कितनी अमीर और जितेंद्र आव्हाड से क्या कनेक्शन
महाराष्ट्र में मुंबई समेत 29 महानगरपालिका के चुनावों में 2600 से ज्यादा पार्षद चुने गए हैं, लेकिन सिर्फ और सिर्फ सहर शेख की चर्चा है। हिजाब पहने AIMIM की युवा पार्षद का छोटा वीडियो वायरल है। उनके बयान को विभाजनकारी बताया जा रहा है। जानें कौन हैं सहर शेख?
मुंबई मेट्रोपॉलिटिन रीजन (MMR) की ठाणे महानगरपालिका के मुंब्रा से जीती सहर शेख के बयान पर विवाद थम नहीं रहा। जीत बाद सहर शेख ने कहा कि पांच साल में मुंब्रा को हरे रंग में रंगना चाहती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हम किसी के बाप के माेहताज नहीं हैं। वें अल्लाह की ताकत से जीती हैं। मुंब्रा के वार्ड 30 से सहर शेख ने सिर्फ शरद पवार की एनसीपी नहीं हरायी , सामने भाजपा-कांग्रेस और शिवसेना प्रत्याशी भी थे।
एनसीसी से शुरुआत फिर MIM में आईं
सहर शेख जीती तो अपने इलाके में पहुंचकर गरजी। स्पीच में शरद पवार की पार्टी के बड़े नेता मुंब्रा कलवा से चौथी बार विधायक जितेंद्र आव्हाड को निशाने पर लिया। सहर शेख ने स्पीच में चिढाया” कैसा हराया.”.। सहर शेख ने कहा, “उन लोगों के घमंड की आपने धज्जियां उड़ा दी, जिनको लगता है कि हम ताल्लुक(पहचान) के मोहताज हैं. वो भूल गए कि हम सिर्फ अल्लाह के मोहताज हैं, किसी के बाप के नहीं. 30 नंबर पैनल ने ये साबित किया. मैं शुक्रगुजार हूं आपकी, जैसे बढ़-चढ़कर आप सब ने AIMIM पार्टी के उम्मीदवार जिताये.”
इसके बाद हिजाब पहने कम उम्र की पार्षद सहर शेख सुर्खियों में आ गई। पिता युनूस शेख ने बेटी की जीत के बाद लोगों का आभार व्यक्त किया कि चुनावी जंग में उनकी शहजादी अकेली थी। शेख परिवार पॉलिटिक्स से जुड़ा है। उनके पिता यूनुस शेख एनसीपी पार्टी की स्थापना के समय से ही मुंब्रा इलाके में एक्टिव थे। वह मुंब्रा ब्लॉक प्रेसिडेंट भी रहे । उम्मीद थी कि इस बार उनके परिवार को एनसीपी से टिकट मिलेगा।
जितेंद्र आव्हाड से कनेक्शन
युनुस जितेंद्र आव्हाड के काफी अच्छे दोस्त भी हैं। सहर आव्हाड को अंकल कहती आई हैं लेकिन जब 2026 के चुनावों में टिकट नहीं मिला तो युनुस शेख ने बेटी को एआईएमआईएम से लड़ाया। सहर शेख को एनसीपी से उम्मीद थी।विधायक जितेंद्र आव्हाड ने वादा किया था, लेकिन पूरा नहीं किया। तब दूसरी पार्टी से चुनाव लड़ा और 400 वोटों से जीता । ठाणे के मुंब्रा इलाके से कुछ और AIMIM कैंडिडेट जीते हैं।
किरीट सोमैया ने खोला मोर्चा
मुंब्रा को हरा रंगने के बयान बाद सहर भाजपा-शिवसेना और हिंदू संगठनों के निशाने पर हैं। भाजपा नेता किरीट सोमैया ने शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया। लोग सहर के बयान को विभाजनकारी कह रहे हैं। सहर की सफाई भी आई कि हरा रंगने से मतलब कि हर जगह एआईएमआईएम की जीत। (इस्लामी हरा नहीं) पार्टी का रंग हरा है। भगवा हाेता तो भगवा कहतीं। हरे का मतलब पार्टी के हरे झंडे से है। यूनुस शेख की बगावत और सहर शेख की जीत के साथ AIMIM के उभार ने NCP के लिए राजनीतिक चुनौती पेश कर दी है।
सहर शेख की कितनी संपत्ति?
मुंब्रा के वार्ड 30 से पार्षद चुनी गईं सहर शेख की उम्र 29 साल है। उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ़ बिज़नेस मैनेजमेंट (BBM) की डिग्री 2017 में ली। सहर शेख कार वाशिंग सेंटर चलाती थीं। सहर शेख ने चुनावी शपथपत्र में लगभग 6,98,840 रुपये कैश के साथ 120 ग्राम (लगभग 12 लाख) सोने का जिक्र किया है। सहर शेख ने अपने परिवार की सालाना कमाई 23,43,012 रुपये बताई है।
सपना था हिजाब वाली मेयर का, प्रधानमंत्री का पार्षद से करना पड़ा संतोष
ठाणे नगर निगम चुनाव में AIMIM की युवा उम्मीदवार सहर शेख ने वार्ड 30 से जीत हासिल कर पार्षद बनीं. वह `हिजाब वाली पार्षद` के नाम से मशहूर हैं. उनकी जीत ओवैसी के हिजाब पर दिए बयान से जोड़कर देखा जा रहा है.
महाराष्ट्र में नगर पालिका चुनाव के दौरान ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि भारतीय संविधान में हिजाब पहनने वाली महिला प्रधानमंत्री और मेयर भी बन सकती है. उनके बयान के बाद महाराष्ट्र के सियासत में उबाल आ गया. भाजपा नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी, AIMIM नेता वारिस पठान ने इसका पुरजोर समर्थन कर पूरे चुनाव में मुद्दा बना दिया.
नगर पालिका के चुनावी नतीजों में ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने शानदार प्रदर्शन किया. AIMIM की युवा उम्मीदवार सहर शेख की जीत ने सबका ध्यान खींचा. सबसे खास यह है कि सोशल मीडिया पर सहर शेख “हिजाब वाली पार्षद” बन गई. सहर शेख की जीत असदुद्दीन ओवैसी के बयान से मेल खाती है, इसी से यह जीत चर्चा का विषय बनी.
महाराष्ट्र के ठाणे महानगरपालिका चुनाव में वार्ड नंबर 30 से AIMIM की युवा उम्मीदवार सहर शेख जीत कर पार्षद बनी हैं. जीत बाद सहर शेख और उनके वालिद यूनुस शेख की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई.वीडियो में वह जीत बाद जश्न मना रहे हैं. इसी में AIMIM की नवनिर्वाचित पार्षद के वालिद यूनुस शेख ने बड़ा बयान दिया कि अल्लाह ने उनकी “हिजाब वाली” बेटी पूरे भारत में फेमस कर दी. उनकी बेटी की पहचान अब सिर्फ ठाणे तक नहीं सिमटी है, बल्कि पूरे देश में चर्चा में है.
जीत के बाद भाषण में यूनुस शेख ने जितेंद्र आव्हाड को चेताया कि, “अभी एक वॉर्निंग देता हूं. फ्यूचर में कभी किसी लड़की के मुस्तकबिल से मत खेलना. वरना हमारी आवाम एक होकर कैसे विकेट गिराती है, देखा न? हालांकि जख्मी आव्हाड का भी बयान आया है – (अपनी गली में..) कुत्ता भी शेर होता है..
देखते हैं..
`मुंब्रा को हरा कर देने` वाली AIMIM पार्षद ने माफी मांग फिर उगली आग, बोली- किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़े ही है

बीएमसी चुनाव में पार्षद का चुनाव जीतने के बाद ‘पूरे मुंब्रा को हरा कर देने’ का बयान देने वाली AIMIM नेता सहर शेख ने एक बार फिर पलटी मारी है. उन्होंने कहा कि इस मुल्क में हम मुसलमानों का खून भी शामिल है. ये किसी के बाप का हिंदुस्तान नहीं ।
सहर यूनुस शेख ने कहा, ‘कई लोग मेरे पहले के बयान का विरोध करते हुए पाकिस्तान जाने की बात कर रहे हैं. लेकिन हम भारतीय मुसलमान हैं और यह हमारा मुल्क है.कोई भी व्यक्ति हमें कहीं जाने की बात नहीं कह सकता.’
‘मेरा बयान अधूरा दिखाया गया’
AIMIM ने कहा, ‘मेरे पहले के बयान की क्लिप काटकर गलत तरीके से चलाया गया. मीडिया ने पूरी बात नहीं दिखाई. इसे मुंब्रा के सब लोग समझ रहे हैं. कई हिंदुओं ने मेरे पास आकर उसका समर्थन भी किया है.’
सहर शेख ने आरोप लगाया, ‘मेरे भाषण का एक हिस्सा वायरल कर चाहते थे कि मुंब्रा के लोग भड़कें. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. यहां लोग समझदार हैं. मुंब्रा में हिंदू और मुस्लिम सब मिलकर आपसी सद्भाव से रहते हैं. वे उकसावे में नहीं आए.’
‘किसी के बाप का मुसलमान थोड़े ही है’
राहत इंदौरी का शेर सुनाकर सहर शेख ने व्यंग्य किया, ‘इस मिट्टी में हम मुसलमानों का भी खून शामिल है. किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़े ही हैं.’
सहर शेख पहले एनसीपी (शरद पवार गुट) में थीं. टिकट नहीं मिला तो पाला बदलकर ओवैसी की पार्टी में आ गईं. चुनाव जीत सहर शेख ने आपत्तिजनक भाषण दिया था, ‘पूरे मुंब्रा को हरा रंग देंगे.’
नोटिस मिलने के बाद मांगी थी माफी
अब यह हरा रंग इस्लाम था या ओवैसी की पार्टी का. यह स्पष्ट नहीं हो पाया. लेकिन बयान आपत्तिजनक मानते हुए सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हुई थी. भाजपा नेता किरीट सोमैया की शिकायत पर पुलिस ने सहर शेख को नोटिस दे स्पष्टीकरण मांगा. शेख ने कानून का शिकंजा फंसता देख थाने में लिखित में माफीनामा जमा करवा दिया. हालांकि अब फिर से इंदौर के शेर के बहाने उन्होंने फिर से हिंदुओं पर व्यंग्य कस दिया ।
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