मुस्लिमों का विरोध निरस्त,केरल के स्कूलों में बंद नहीं होगी जुम्बा क्लासेस

आखिर क्या होता है जुम्बा और कैसे करते हैं ये डांस, जिसका मुस्लिम संगठन कर रहे विरोध

Who Introduced Zumba: एक्सरसाइज के इस फॉर्म की शुरुआत एक एरोबिक्स ट्रेनर अल्बर्टो बेटो पेरेज़ ने की थी. साल 1986 से पहले फिट रहने के लिए लोग एरोबिक्स किया करते थे. एक दिन बेटो पेरेज़ ने सोचा कि इसे और मजेदार बनाने के लिए इसमें डांस फॉर्म जोड़ा जा सकता है ताकि लोगों को मजा भी आए और वे फिट भी रहें.

नई दिल्ली,30 जून 2025,केरल के स्कूलों में हाल ही में शिक्षा विभाग ने जुम्बा क्लासेस की शुरुआती की, लेकिन अब मुस्लिम समूह द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है. उनका कहना है कि लड़के-लड़कियों का एकसाथ नाचना, वो भी ‘कम कपड़ों में’ कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता’. इस बीच आइए जानते हैं पूरा मामला क्या है, जुम्बा क्या है, इसमें क्या होता है और इसकी शुरुआत कैसे हुई.

Zumba क्या होता है?

आजकल फिट रहने के लिए लोग जिम, योगा के अलावा जुम्बा (Zumba) क्लासेस भी ले रहे हैं. इसमें डांस मूव्स के जरिये एक्सरसाइज की जाती है. जुम्बा अधिकतर लोग इसलिए भी ज्वॉइन करते हैं क्योंकि इसे करने में थोड़ा मजा आता है. इसमें डांस और ऐरोबिक्स एक साथ किया जाता है. जुम्बा की खास बात ये है कि इसके लिए जिम की तरह किसी भी तरह के उपकरण की जरूरत नहीं होती. इसमें सिर्फ आरामदायक जूते और कपड़े चाहिए होते हैं. हर क्लास में अलग गाने और मूव्स होते हैं, जिससे यह वर्कआउट काफी मज़ेदार और एनर्जेटिक बन जाता है.

जुम्बा एक ऐसी एक्सरसाइज है जिसे आमतौर पर खड़े होकर किया जाता है, लेकिन इसे करने का कोई सख्त नियम नहीं है, जैसे डांस में अलग-अलग स्टेप्स होते हैं, वैसे ही जुम्बा को भी विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है. इस वर्कआउट की सबसे खास बात यह है कि इसे किसी भी गाने पर किया जा सकता है, इसमें संगीत को लेकर कोई बाध्यता नहीं होती. हालांकि, इसमें मुख्य रूप से साल्सा (Salsa), मेरेंग (Merengue), कुम्बिया (Cumbia), रेगेटॉन (Reggaeton), और हिप-हॉप (Hip-hop) जैसे लैटिन और अंतरराष्ट्रीय डांस स्टाइल शामिल होते हैं. भारत में अधिकतर लोग बॉलीवुड गानों पर जुम्बा करना पसंद करते हैं.

Zumba के कितने प्रकार होते हैं?

जुम्बा में म्यूजिक थोड़ा फास्ट होता है. फास्ट बीट वाले म्यूजिक पर एक्सरसाइज की तरह डांस किया जाता है. छोटे बच्चों के लिए जुम्बा किड्स के सेशन लिए जाते हैं, इसमें थोड़े आसान स्टेप्स होते हैं. बच्चों वाले जुम्बा को Zumbini कहा जाता है. इसके बाद सीनियर सिटीजन के लिए जुम्बा गोल्ड होता है. इसके अलावा पानी में भी जुम्बा किया जाता है, जिसे Aqua जुम्बा कहते हैं. कभी-कभी मसल्स को टोन करने के लिए हल्के वज़न के साथ जुम्बा किया जाता है, जिसे जुम्बा टोनिंग किया जाता है.

Zumba की शुरुआत कब और कैसे हुई?

एक्सरसाइज के इस फॉर्म की शुरआत एक एरोबिक्स ट्रेनर अल्बर्टो बेटो पेरेज़ ने की थी. साल 1986 से पहले फिट रहने के लिए लोग एरोबिक्स किया करते थे.एक दिन वह अपनी क्लास के लिए पॉप म्यूज़िक की कैसेट भूल गए, तो उन्होंने कार में रखे लैटिन गानों (जैसे साल्सा और मेरेंग) की मदद से 30 मिनट की एक क्लास ली.

एक्सरसाइज कराने का यह तरीका उनके स्टूडेंट्स को बेहद पसंद आया और फिर रोज इसी तरह एक्सरसाइज होने लगी. धीरे-धीरे हर कोई इसे फॉलो करने लग गया और समय के साथ जुम्बा लोकप्रिय होता चला गया. ये इतना लोकप्रिया हो गया कि बेतो पेरेज़ ने साल 2001 में ‘ज़ुम्बा फिटनेस’ की कंपनी शुरू कर दी. विदशों में लोग अपने गानों में डांस करके एक्सरसाइज करते हैं और भारत में जुम्बा बॉलीवुड और रीजनल सॉन्ग पर होता है.

केरल में जुम्बा पर विवाद क्यों हो रहा है?

केरल के स्कूलों में कुछ दिन जुम्बा क्लासेस शुरू होने के बाद ही इसको लेकर हंगामा शुरू हो गया है. यह प्रोग्राम सरकार के नशा विरोधी अभियान का हिस्सा है. विजडम इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन’ के महासचिव और टीचर टी. के. अशरफ ने फेसबुक पर लिखा, ‘मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता और न ही मैं और मेरा बेटा इन सेशन्स में भाग लेंगे.’ वहीं, ‘समस्ता’ (एक प्रमुख मुस्लिम संगठन) के नेता नसर फैज़ी कूड़ाथाय ने भी इसे लेकर आपत्ति जताई है.

उन्होंने फेसबुक पर जुम्बा क्लासेस के खिलाफ पोस्ट किया. पोस्ट में उन्होंने लिखा, ”केरल सरकार ने स्कूलों में जुम्बा डांस लागू किया है. जुम्बा एक ऐसा डांस है जिसमें कम कपड़ों में एकसाथ डांस किया जाता है. अगर सरकार ने इसे बड़े बच्चों के लिए भी अनिवार्य किया है, तो यह आपत्तिजनक होगा. मौजूदा शारीरिक शिक्षा को सुधारने के बजाय अश्लीलता थोपना ठीक नहीं. यह उन छात्रों की निजी स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, जिनका मॉरल सेंस उन्हें इस तरह गुस्सा निकालने और साथ नाचने की इजाजत नहीं देता.’ The Hindu के अनुसार, इस बीच, सरकार ने मुस्लिम समूहों के विरोध के बावजूद जुम्बा को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी के अनुसार, छात्र अपनी नियमित वर्दी में जुम्बा में भाग ले सकते हैं।

एक डांस, कुछ बच्चे और ढेर सारी कट्टरता…
बीजेपी नेता वी. मुरलीधरन ने कहा कि ‘किसी धार्मिक संगठन की ओर से जारी किया गया फतवा, यह तय करने का मापदंड नहीं होना चाहिए कि एजुकेशन डिपार्टमेंट जुम्बा के पक्ष में है या विरोध में. सरकार को आम जनता के विचारों और छात्रों के कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए.’

केरल के शिक्षा मंत्री की ओर से पोस्ट किए गए जुम्बा वीडियो का स्क्रीनशॉट

देश का सबसे साक्षर राज्य केरल सुर्खियों में है. वजह है एक विवाद जिसकी शुरुआत केरल के स्कूलों से हुई. दरअसल केरल सरकार ने ड्रग्स के खिलाफ अपने अभियान के तहत राज्य के स्कूलों में जुम्बा क्लासेस की शुरुआत की है. जुम्बा यानी डांस-बेस्ड फिटनेस वर्कआउट जिसमें एरोबिक्स और डांस मूवमेंट्स को मिलाकर व्यायाम किया जाता है. लेकिन कुछ मुस्लिम समूहों ने इसका विरोध किया है. जवाब में सरकार से लेकर विपक्ष एकजुट हो गया है. आइए जानते हैं कि पूरा विवाद क्या है.

विरोध में उतरे मुस्लिम संगठन

कुछ दिनों पहले केरल के शिक्षा विभाग ने स्कूलों में जुम्बा प्रोग्राम की शुरुआत की थी. यह प्रोग्राम सरकार के नशा विरोधी अभियान का हिस्सा है. लेकिन कुछ मुस्लिम संगठन इसके विरोध में आ गए. उन्होंने कहा कि ‘लड़के-लड़कियों का एकसाथ नाचना, वो भी ‘कम कपड़ों में’ कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता’. विजडम इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन’ के महासचिव और टीचर टी. के. अशरफ ने फेसबुक पर लिखा, ‘मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता और न ही मैं और मेरा बेटा इन सेशन्स में भाग नही लेगा।
एक डांस, कुछ बच्चे और ढेर सारी कट्टरता… केरल के स्कूलों में जुम्बा पर क्यों बरपा है हंगामा
भाजपा नेता वी. मुरलीधरन ने कहा कि ‘किसी धार्मिक संगठन की ओर से जारी किया गया फतवा, यह तय करने का मापदंड नहीं होना चाहिए कि एजुकेशन डिपार्टमेंट जुम्बा के पक्ष में है या विरोध में. सरकार को आम जनता के विचारों और छात्रों के कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए.’

केरल के शिक्षा मंत्री की ओर से पोस्ट किए गए जुम्बा वीडियो का स्क्रीनशॉट

देश का सबसे साक्षर राज्य केरल सुर्खियों में है. विवाद की शुरुआत केरल के स्कूलों से हुई. केरल सरकार ने ड्रग्स विरोधी अभियान में राज्य के स्कूलों में जुम्बा क्लासेस की शुरुआत की है. जुम्बा यानी डांस-बेस्ड फिटनेस वर्कआउट जिसमें एरोबिक्स और डांस मूवमेंट्स को मिलाकर व्यायाम किया जाता है. लेकिन मुस्लिम समूह इसके विरोध में है. जवाब में सरकार से लेकर विपक्ष एकजुट हो गया है. आइए जानते हैं कि पूरा विवाद क्या है.

विरोध में उतरे मुस्लिम संगठन

कुछ दिनों पहले केरल के शिक्षा विभाग ने स्कूलों में जुम्बा प्रोग्राम की शुरुआत की थी. यह प्रोग्राम सरकार के नशा विरोधी अभियान का हिस्सा है. लेकिन कुछ मुस्लिम संगठन इसके विरोध में आ गए. उन्होंने कहा कि ‘लड़के-लड़कियों का एकसाथ नाचना, वो भी ‘कम कपड़ों में’ कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता’. विजडम इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन’ के महासचिव और टीचर टी. के. अशरफ ने फेसबुक पर लिखा, ‘मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता और न ही मैं और मेरा बेटा इन सेशन्स में भाग नहीं लेगा।

‘समस्ता’ (एक प्रमुख मुस्लिम संगठन) के नेता नसर फैज़ी कूड़ाथाय ने भी फेसबुक पर जुम्बा के खिलाफ पोस्ट किया. उन्होंने लिखा, ‘केरल सरकार ने स्कूलों में जुम्बा डांस लागू किया है. जुम्बा एक ऐसा डांस है जिसमें कम कपड़ों में एकसाथ डांस किया जाता है. अगर सरकार ने इसे बड़े बच्चों के लिए भी अनिवार्य किया है, तो यह आपत्तिजनक होगा. मौजूदा शारीरिक शिक्षा को सुधारने के बजाय अश्लीलता थोपना ठीक नहीं. यह उन छात्रों की निजी स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, जिनका मॉरल सेंस उन्हें इस तरह गुस्सा निकालने और साथ नाचने की इजाजत नहीं देता.’

‘बच्चों को स्वस्थ रूप से बड़ा होने दो’

जवाब में राज्य के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने एक फेसबुक पोस्ट में हिजाब पहने छात्राओं का जुम्बा करते हुए वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ‘बच्चों को खेलने, हंसने, मस्ती करने और स्वस्थ रूप से बड़ा होने दो.’ उन्होंने कहा, ‘ऐसी आपत्तियां समाज में उस जहर से भी ज्यादा खतरनाक जहर घोलेंगी जो नशे से फैलता है. कोई भी बच्चों को कम कपड़े पहनने के लिए नहीं कह रहा है. बच्चे स्कूल यूनिफॉर्म में ही ये एक्टिविटी कर रहे हैं. केरल जैसे समाज में, जहां लोग सामूहिक सौहार्द से रहते हैं, ऐसी आपत्तियां बहुसंख्यक सांप्रदायिकता को बढ़ावा देंगी.’

‘फतवे से नहीं तय होगा शिक्षा विभाग का काम’

बीजेपी नेता वी. मुरलीधरन ने कहा कि ‘किसी धार्मिक संगठन की ओर से जारी किया गया फतवा, यह तय करने का मापदंड नहीं होना चाहिए कि एजुकेशन डिपार्टमेंट जुम्बा के पक्ष में है या विरोध में. सरकार को आम जनता के विचारों और छात्रों के कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए.’

उन्होंने आगे कहा, ‘क्या मदरसा यह तय करेगा कि स्कूल की टाइमिंग क्या होगी? हमें ऐसे लोगों को हर चीज धर्म के आधार पर मांगने का अनावश्यक अवसर नहीं देना चाहिए. धर्म जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है, लेकिन शैक्षणिक संस्थानों में क्या पढ़ाया जाएगा, यह ये तथाकथित धार्मिक नेता तय नहीं कर सकते.’

‘शिक्षा के क्षेत्र में कट्टरता को नहीं लाना चाहिए’

सीपीआई(एम) नेता एम.ए. बेबी ने कहा, ‘ये डांस फॉर्म 180 से ज्यादा देशों में लोकप्रिय है. करोड़ों नई पीढ़ी के लोग जुम्बा को अपनाते हैं. यह व्यक्ति के समग्र शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ा है. शारीरिक फिटनेस बहुत जरूरी है. धार्मिक नेताओं की ओर से जो कहा जा रहा है, वह सच्चाई नहीं है. छात्र-छात्राएं स्कूल यूनिफॉर्म में जुम्बा कर रहे हैं. सरकार जुम्बा को आगे बढ़ाना चाहती है. शिक्षा के क्षेत्र में धार्मिक कट्टर सोच को नहीं लाया जाना चाहिए.’

कहां से आया जुम्बा?

फिटनेस वर्कआउट डांस जुम्बा आज पूरी दुनिया में लोकप्रिय है. इसमें डांस और एरोबिक्स एकसाथ किया जाता है. लोग मजेदार तरीके से शरीर फिट रखने, वजन कम करने और मजेदार तरीके से एक्सरसाइज करने के लिए जुम्बा करते हैं. इसकी शुरुआत 90 के दशक में हुई थी.

कहा जाता है कि कोलंबियाई डांस इंस्ट्रक्टर अल्बर्टो ‘बेटो’ पेरेज़ एक दिन अपनी एरोबिक क्लास में म्यूजिक टेप लाना भूल गए. तो उस दिन उन्होंने लैटिन म्यूजिक टेप का इस्तेमाल किया जो उनकी कार में पड़ा हुआ था. उन्होंने इंप्रोवाइज कर डांस और एक्सरसाइज को मिलाकर एक नया डांस फॉर्म विकसित किया जो बाद में जुम्बा कहलाया.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *