मिलिये ‘मजबूत’ भाजपा के साथी निडर सैकुलर दलों से
Nda New Secular Jds Ncp Jdu Support Waqf Bill Bjp And Narendra Modi Changed Scenario Of Politics Congress Rjd Tmc Stand
वक्फ संशोधन बिल ने बदली राजनीति, मुस्लिम वोट बैंक का डर नहीं, भाजपा के ‘नए सेक्युलर’ दोस्तों से मिलिए
अब भारतीय राजनीति में अघोषित तौर से तीन खेमे बन गए हैं। कांग्रेस, वाम दल, आरजेडी, डीएमके, मुस्लिम लीग,एआईएमआईएम, बीआरएस और टीएमसी के लिए भाजपा के लिए अभी भी सांप्रदायिक पार्टी है, जबकि ये खुद को सेक्युलर मानती हैं। तीसरे खेमे में ऐसी राजनीतिक पार्टियां हैं, जो पहले भाजपा को सांप्रदायिक मानती थी, मगर अब उसके नीतिगत फैसलों के साथ है। ये पार्टियां अब मुसलमानों को कथित रूप से आहत होने वाले विषयों पर मोदी सरकार को खुलकर समर्थन देती
मुख्य बिंदू
1-वक्फ बिल से पहले कई विवादित बिल पर भाजपा का समर्थन कर चुके हैं नए सेक्युलर दल
2-370 और सीएए पर समर्थन देने के बाद भी इनका कुछ नहीं बिगड़ा, जबकि कांग्रेस हारती रही
3-वक्फ बिल को मुसलमानों की हितैषी के तौर पर पेश करने की तैयारी, चलेगा स्पेशल कैंपेन
NDA new secular support waqf bill
वक्फ बिल के समर्थन में आए गैर भाजपा का दलों का स्टैंड समझिए
मुंबई 04 अप्रैल 2025: संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने के साथ ही देश की राजनीति में ‘नई सेक्युलर’ पार्टियों की नई जमात भी सामने आ गया, जो मुस्लिम वोटिंग पैटर्न से बेखौफ होकर भाजपा के एजेंडे के साथ खड़ा है। जेडीयू, तेलगूदेशम, जेडी एस, एनसीपी, लोजपा (रामविलास), राष्ट्रीय लोकदल और असम गण परिषद जैसी पार्टियों ने वक्फ संशोधन बिल के समर्थन में मतदान किया।
इन दलों ने माना कि मोदी सरकार इस बिल से वक्फ बोर्ड की संपत्तियां बचाने का प्रयास कर रही है। एनडीए के बाहर रहने वाली बीजू जनता दल ने राज्यसभा में समर्थन देकर नए सेक्युलरों के ग्रुप को और विस्तार दे दिया। मुस्लिम वोट बैंक के सहारे चलने वाले इन राजनीतिक दलों ने वक्फ बिल पर न सिर्फ भाजपा के साथ कंधा मिलाया बल्कि चर्चा के दौरान सेक्युलरिज्म की नई परिभाषा भी गढ़ी। इन नव धर्मनिरपेक्ष दलों के लिए भाजपा सांप्रदायिक नहीं रही। इस बदलाव का असर दशकों तक दिखेगा।
देवगौड़ा की प्रशंसा, प्रफुल्ल पटेल के व्यंग्य के अर्थ समझिए
राज्यसभा में स्थिति यह थी कि जनता दल (सेक्युलर) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने वक्फ संपत्तियों की रक्षा के लिए प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की। उद्धव सेना के सांसद संजय राउत से जो भाजपा नहीं कह सकी, उसे एनसीपी सांसद प्रफुल्ल पटेल ने सीना ठोककर सुना दिया। उन्होंने कांग्रेस से भी सवाल किया कि क्या वह शिवसेना के साथ रहकर खुद को सेक्युलर मानती है। जेडीयू के ललन सिंह ने भाजपा के मुस्लिम विरोधी होने के आरोपों निरस्त किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह नैरेटिव बनाने का प्रयास किया जा रहा है कि वक्फ संशोधन बिल मुसलमान विरोधी है। उनका एक बयान काफी चर्चा में रहा, जिसमें उन्होंने विपक्ष ललकारते हुए कहा कि आपको मोदी का चेहरा पसंद नहीं है तो मत देखिए। पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा और प्रफुल्ल पटेल सेक्युलर पॉलिटिक्स के दो बड़े चेहरे रहे, जिन्होंने वक्फ बिल के पक्ष में भाजपा की नीति का समर्थन किया।
90 के दशक में कई दलों के लिए अछूत थी भाजपा
90 के दशक में भाजपा शिवसेना, अकाली दल और जेडीयू के अलावा करीब-करीब सभी पार्टियों के लिए अछूत थी। जेडीयू लालू विरोध और बिहार की राजनीतिक मजबूरी के कारण एनडीए का हिस्सा बनी। 1998 और 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी ने गठबंधन की सरकार बनाई मगर उन्हें तेलगूदेशम, डीएमके, एआईएडीएमके जैसे दलों का बारी-बारी समर्थन भी शर्तों के साथ मिला। शर्त यह थी कि भाजपा मुसलमानों को आहत करने वाले विषयों से दूर रहेगी। इन शर्तों के साथ असम गण परिषद और आरएलडी जैसी पार्टियां भी एनडीए में आती-जाती रहीं। गठबंधन की मजबूरियों के कारण भाजपा ने भी दो दशक तक धारा-370, राम मंदिर, समान नागरिक संहिता जैसे कोर मुद्दों को ठंडे बस्ते में डाल दिया। रामबिलास पासवान जैसे नेता ने भी गुजरात दंगों के बाद वाजपेयी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था और सेक्युलर जमात में शामिल हो गए थे।
भाजपा के लिए क्यों नरम पड़े पुराने सेक्युलर
2019 में भाजपा की दूसरी पूर्ण बहुमत सरकार बनने के बाद सीएए और धारा-370 पर बड़ा फैसला हो गया। वैचारिक तौर से भाजपा के साथ रही शिवसेना ने इन फैसलों का समर्थन किया। जेडीयू और बीजेडी ने बिना शोर मचाए संसद में इन बिलों का समर्थन किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ कर दिया। इसके साथ ही राम मंदिर और धारा 370 जैसे विषय विवादित राजनीतिक मुद्दों की लिस्ट से बाहर हो गए। भाजपा ने चुनावों में खुलकर इन मुद्दों पर अपनी पीठ थपथपाई। नरेंद्र मोदी सरकार और अमित शाह बोल्ड फैसले के नायक बन गए। एनडीए समर्थक राजनीतिक दलों ने भी भाजपा को इसका क्रेडिट देकर अपनी मुस्लिम समर्थक छवि बनाये रखी।
चुनावी जीत ने नए सेक्युलर दलों को निडर बनाया
सबसे बड़ा फर्क यह आया कि 370 और सीएए के समर्थन देने के बाद एनडीए के पार्टनर रही पार्टियों के जनसमर्थन में कमी नहीं आई। 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा-जेडीयू को पूर्ण बहुमत मिला। महाराष्ट्र में भाजपा-शिंदे सेना और अजित पवार को बड़ी जीत मिली। आंध्र प्रदेश में चंद्राबाबू नायडू को ऐतिहासिक जीत पर सीएए और 370 की छाया भी नहीं पड़ी। लोकसभा चुनावों में लोजपा, असम गण परिषद, आरएलडी को भाजपा के वोट बैंक का फायदा मिला। भाजपा ने असम, उत्तरप्रदेश, हरियाणा समेत कई राज्यों में सरकार बनाई। एनडीए में शामिल पार्टियों ने राज्यों में सेक्युलर दलों कांग्रेस, आरजेडी, सपा को हराया, जो मुस्लिम वोट बैंक का काफी ख्याल रखती हैं। इन चुनावी नतीजों ने एनडीए में शामिल दलों के लिए मुस्लिम वोटरों के सामने यह जताने की मजबूरी भी खत्म कर दी कि वह इन मुद्दों पर भाजपा से अलग स्टैंड रखते हैं। -विश्वनाथ सुमन