वें क्रांतिकारी थे,आतंकी नहीं… NCERT किताबों में सुधार, जोड़े गए 5 नए विषय
Ncert Class 8 Social Science Book New Sst Syllabus 2026 With Changes And Corrections Director Dinesh Prasad Saklani Tells
वो क्रांतिकारी थे, आतंकवादी नहीं… NCERT की किताब में सुधारी गई गलती, जोड़े गए 5 नए विषय
NCERT ने आठवीं कक्षा की सोशल साइंस की किताब जारी की है। न्यू बुक में स्वामी विवेकानंद, बिरसा मुंडा, काला पानी, कूका आंदोलन, पायका आंदोलन के बारे में पढ़ाया जाएगा। एनसीईआरटी डायरेक्टर ने बताया कुछ गलतियां भी सुधारी गई हैं। जैसे- भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के फ्रीडम फाइटर्स को अंग्रेज अतिवादी या आतंकवादी कहते थे और दुर्भाग्य से किताब में ऐसा ही चला आ रहा था।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने 8वीं क्लास की सोशल साइंस की किताब का दूसरा भाग भी जारी कर दिया है। इस किताब के जरिए स्वामी विवेकानंद , बिरसा मुंडा जैसी महान हस्तियों के बारे में छात्रों को बताया जाएगा। वहीं, काला पानी की सजा, कूका आंदोलन, पायका आंदोलन को भी किताब का अहम हिस्सा बनाया गया है। देश के लिए अपना बलिदान देने वाले ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों का भी उल्लेख किताब में किया गया है, जिनके बारे में कम लोग जानते हैं।
एनसीईआरटी के मुताबिक नई किताब में स्वदेशी विचार को जगह दी गई है। साथ ही क्रांतिकारियों और राष्ट्रवादियों के बारे में तथ्यों को ठीक किया गया है।
NCERT क्लास-8 सोशल साइंस की नई किताब नया क्या?
सोशल साइंस की नई किताब में स्वामी विवेकानंद के जीवन का वर्णन किया गया है। शिकागो में विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध भाषण का उल्लेख है, जहां उन्होंने भारत की सभ्यता और संस्कृति की मजबूती से बात रखी।
पाठ में कूका आंदोलन (जिसे नामधारी आंदोलन भी कहा जाता है) का उल्लेख किया गया है। यह 1860 के दशक में पंजाब में शुरू हुआ एक सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक आंदोलन था, जिसका नेतृत्व बाबा राम सिंह ने किया। कुकाओं ने गौहत्या का भी कड़ा विरोध किया। 1872 में कुकाओं के एक समूह ने कुछ कत्लखानों पर हमला किया था। ब्रिटिश सरकार ने 65 कुकाओं को बिना किसी मुकदमे के फांसी दे दी, जिनमें से कई को तोपों के मुंह से बांधकर उड़ा दिया गया
किताब में बिरसा मुंडा का उल्लेख किया गया। वे छोटा नागपुर क्षेत्र के मुंडा समुदाय के एक महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी थे।
1906 में प्रसिद्ध बंगाली सेनानी बिपिन चंद्र पाल ने अंग्रेजी दैनिक पत्र बंदे मातरम शुरु किया, इस पत्र ने भारत की स्वतंत्रता का विचार जन-जन तक पहुंचाया।
किताब में अंडमान द्वीपसमूह की Cellular Jail की जानकारी भी है, जो काला पानी नाम से प्रसिद्ध थी। यहां अंग्रेजों ने भारतीय क्रांतिकारियों को यातनाएं दी। बारीन्द्र घोष और विनायक दामोदर सावरकर जैसे स्वतंत्रता सेनानी यहीं कैद रखे गये। साथ ही भारत माता का उल्लेख शक्तिशाली राष्ट्रवादी प्रतीक रूप में किया गया है।
क्या कहते हैं एनसीईआरटी के निदेशक?
NCERT निदेशक प्रोफेसर दिनेश प्रसाद सकलानी का कहना है कि ‘नई बुक्स में पाठ्यक्रम को ‘औपनिवेशिक मानसिकता’ से मुक्त कर भारतीय गौरव उजागर करने को व्यापक बदलाव किए गए हैं। शिक्षा प्रणाली औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त कर पुनर्परिभाषित करने का समय आ गया है। नई किताबों में देश के क्रांतिकारियों व स्वतंत्रता सेनानियों की वीरता व शौर्य को वैसे ही बताया गया है, जिसके वे वास्तव में हकदार हैं।’
एनसीईआरटी डायरेक्टर प्रोफेसर सकलानी ने कहा कि ‘अंग्रेज शासक भारत की आजादी के लड़ाकों को अतिवादी और आतंकवादी तक कहते थे और दुर्भाग्य से पाठ्यपुस्कों में भी इस प्रकार का संबोधन दिखता था। लेकिन अब वे सभी गलतियां ठीक की गयी हैं। राष्ट्रवादी और क्रांतिकारियों के बारे में गलत उल्लेख हटा दिये गये हैं। अब क्रांतिकारी को क्रांतिकारी, राष्ट्रवादी को राष्ट्रवादी ही लिखा गया है। जैसे पहले बताया गया था कि किताब में पायका आंदोलन शामिल किया जाएगा,अब दूसरे भाग में इसे जगह दी गई है।’
जलियांवाला बाग हत्याकांड पर NCERT का नया सच! पहले कभी नहीं बताई ‘माफी’ वाली बात
नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 और स्कूल एजुकेशन के लिए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2023 के हिसाब से NCERT नई टेक्स्टबुक्स बना रहा है। क्लास 1 से 8 तक के लिए टेक्स्टबुक्स अब तक बन चुकी हैं। 8वीं क्लास की पार्ट-2 बुक में ब्रिटिश राज, स्वतंत्रता संग्राम, जलियांवाला बाग और पार्टीशन को लेकर लेटेस्ट वर्जन जोड़ा है।
13 अप्रैल 1919 का दिन जलियांवाला बाग में हजारों भारतीयों की निर्मम हत्या और ब्रिटिश हुकूमत की क्रूरता का प्रतीक है। अमृतसर में बैसाखी मेले में पहुंची हजारों निहत्थी जनता को जनरल डायर ने अंग्रेज सिपाही के साथ घेरकर गोलियों से छलनी कर दिया था। इनमें औरतें, बच्चे और बूढ़े भी थे। ब्रिटिश सरकार की क्रूरता और गोलियों के निशान बाग की दीवारों पर आज तक मौजूद हैं। लेकिन क्या कभी ब्रिटिश सरकार ने इस नरसंहार के लिए माफी मांगी? NCERT ने 8वीं क्लास की नई बुक में इस ‘नए सच’ पर बड़ा अपडेट दिया है।
जनरल डायर और जलियांवाला बाग की फाइल फोटो (फोटो सोर्स- indianculture.gov.in/incredibleindia)
दरअसल, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) में नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 23 फरवरी, 2026 को क्लास 8 की सोशल साइंस की नई टेक्स्टबुक जारी की। बुक में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की कई घटनाओं के बारे में डिटेल्ड वर्णन है और लेटेस्ट वर्जन जोड़ा है। जनरल नॉलेज ( जीके) की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी किताब ने नए अध्याय खोले हैं।
नई बुक के ‘इंडियाज लॉन्ग रोड टू इंडिपेंडेंस’ नाम के चैप्टर में, एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2 — 1857 के विद्रोह के बाद से लेकर 1947 तक का समय कवर करती है, जो आजादी के आंदोलन, बंगाल के बंटवारे और भारत के बंटवारे पर है। बुक में 1919 जलियांवाला बाग हत्याकांड पर एक नया वर्जन छापा गया है जिसमें इस हत्याकांड के लिए ब्रिटिश सरकार से माफी मांगने की रिक्वेस्ट का उल्लेख भी है।
1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड पर, किताब में कहा गया है कि ‘आज तक, कई रिक्वेस्ट के बावजूद, ब्रिटिश सरकार ने इस जुल्म के लिए माफी नहीं मांगी है, बस इसे ‘ब्रिटिश इतिहास की एक बहुत शर्मनाक घटना’ बताया है।’ पुरानी किताब में माफी मांगने का जिक्र नहीं है। पुरानी किताब में यह नहीं था। हालांकि यहां माफी मांगने की कई रिक्वेस्ट का मतलब पब्लिक या राजनीतिक मांगों से है, भारत सरकार ने कभी ऐसी कोई रिक्वेस्ट नहीं की।
क्या जलियांवाला बाग के दोषी जनरल डायर को कोई सजा मिली?
नहीं, जलियांवाला बाग में हजारों लोगों की जान लेने का ऑर्डर देने वाले जनरल डायर को कोई कठोर सजा या कोई कानूनी सजा नहीं मिली। हालांकि ब्रिटिश सरकार ने जनरल रेजिनाल्ड डायर की कार्रवाई को ‘Inhuman’ और ‘Un-British’ करार दिया था, लेकिन कभी कोई सजा नहीं दी। जलियांवाला बाग गोलीकांड के एक साल बाद यानी 1920 में ब्रिटिश सरकार ने एक जांच कमेटी बनाई जिसने हंटर कमीशन रिपोर्ट 1920 दी। इस रिपोर्ट में माना गया कि डायर के आदेश पर जलियांवाला बाग में 379 मौतें हुईं, ये आंकड़ा सरकारी है। असल में वहां हजारों लोगों की जान गई थी। लेकिन रिपोर्ट में भी इस क्रूरता के लिए माफी को लेकर कोई सवाल नहीं था। रिपोर्ट में सिर्फ डायर की निंदा करके छोड़ दिया गया।
पार्टीशन पर क्या कहती है नई बुक
एनसीईआरटी की नई किताब में और भी कई चीजों को जोड़ा गया है, जो पहले नहीं थीं। पार्टीशन वाले सेक्शन के आखिर में, लिखा है कि हालांकि महात्मा गांधी और ज्यादातर कांग्रेस नेताओं ने 1947 में देश के बंटवारे के विचार का विरोध किया था, लेकिन ‘उन्होंने आखिर में इसे ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता मान लिया, भले ही यह भी साफ था कि भारतीय मुसलमानों का एक खास हिस्सा बंटवारे के पक्ष में नहीं था।’
क्लास 8 की पुरानी हिस्ट्री की किताब में सिर्फ इतना लिखा था कि ‘ब्रिटिश राज से हमारे देश की आजादी की खुशी, पार्टीशन के दर्द और हिंसा के साथ मिली-जुली थी।’ लेकिन नई किताब बताती है कि इतिहासकारों ने भारत से ब्रिटिश सरकार के बाहर निकलने के कारणों पर बहस की है, और ‘पहले यह माना जाता था कि यह ज्यादातर गांधी, उनके अहिंसा के सिद्धांत और कांग्रेस की नीतियों की वजह से हुआ।’
इसमें आगे कहा है, ‘इस नजरिए ने इस बात को माना है कि कई और वजहें भी काम कर रही थीं – आम लोगों का विद्रोह, क्रांतिकारियों की कई कोशिशें, रॉयल इंडियन एयर फोर्स और रॉयल इंडियन नेवी में बगावत।’ इसमें कहा गया है, ‘इसके अलावा, दूसरे विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन का कम होता रुतबा, और दुनिया भर में डीकोलोनाइजेशन का ट्रेंड-साम्राज्यों का दौर खत्म हो गया था, कम से कम उस रूप में तो।’
बता दें कि NCERT, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 और स्कूल एजुकेशन के लिए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2023 के हिसाब से नई टेक्स्टबुक्स बना रहा है। क्लास 1 से 8 तक टेक्स्टबुक्स अब तक बन चुकी हैं। क्लास 8 की सोशल साइंस की टेक्स्टबुक का पार्ट 1 गत वर्ष जुलाई में रिलीज हुआ था।

