मत: ‘Four Stars of Destiny’ लीक का खलनायक कौन? पेंग्विन कि नरवणे?

🚨 काला सौदा एक्सपोज़्ड: जनरल नरवाणे या पेंग्विन – ‘Four Stars of Destiny’ लीक का मास्टरमाइंड कौन?

#भारत की सैन्य और रणनीतिक हलचलों के बीच एक बड़ी सनसनी फैल गई है।
#जनरल मनोज मुकुंद नरवाणे की बहुचर्चित और अभी तक अप्रकाशित किताब “Four Stars of Destiny” कथित रूप से डार्क वेब पर लीक हो गई है।

क्या यह किताब बेचने को मात्र “योजनाबद्ध पब्लिसिटी स्टंट” है ?

कम से कम मुझे तो यह नहीं लगता क्योंकि ऐसा सोचने के पीछे पर्याप्त कारण भी हैं।

#किताब में भारतीय सेना की आंतरिक कार्यप्रणाली, रणनीतिक निर्णयों और युद्धकालीन अनुभवों के ऐसे रहस्य बताए जाने की बात कही जा रही है जिन्हें कभी #सार्वजनिक नहीं किया गया था और ना ही किया जाना चाहिए।

फिर जनरल नरवाणे ने यह धृष्टता कैसे की?

क्या यह माना जाये कि वो सम्वेदनशील पद पर बैठे एक ऐसे अधिकारी थे जो #compromised थे, क्या वो किसी विदेशी खुफिया एजेंसी अथवा सरकार के पेरोल पर थे या फिर हनी ट्रैप किये गये थे और सैन्य गोपनीयता लीक करना उनकी मजबूरी बन गयी?

सूत्रों के अनुसार, इस पुस्तक में चीन और #पाकिस्तान से जुड़े कई महत्वपूर्ण अध्याय शामिल थे, जिनमें गलवान संघर्ष, सीमा रणनीति और उच्चस्तरीय सैन्य बैठकों के विवरण का जिक्र है। यही वजह है कि इस लीक ने केवल रक्षा मंत्रालय ही नहीं, बल्कि पूरे सुरक्षा तंत्र में हलचल मचाकर रख दी है।

शुरुआती अनुमानों के अनुसार यह लीक एक संगठित साइबर #ऑपरेशन का नतीजा हो सकती है, जो भारत की सैन्य गोपनीयता को नुकसान पहुँचाने कौ रचा गया। हालांकि, पर्दे के पीछे के सच का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

अगर यह लीक सायास (intentional) सिद्ध होती है, तो यह न केवल सशस्त्र #सेनाओं की गोपनीयता पर सवाल उठाएगा, बल्कि भविष्य में रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन पर भी नई बहस खड़ी करेगा।

“कौन है लीक का मास्टरमाइंड?”

#दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने FIR लिख ली है। जांच में पता चला कि ‘पेंग्विन रैंडम हाउस’ की तैयारी वाला टाइपसेट PDF कुछ वेबसाइट्स पर उपलब्ध था, और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कवर तक बिक्री कौ लिस्टेड दिखा।

#प्रकाशक ने साफ कहा — “कोई कॉपी रिलीज़ नहीं हुई, यह कॉपीराइट उल्लंघन है, कानूनी कार्रवाई होगी!”

#जनरल नरवाणे ने X पर यही स्टेटमेंट कॉपी पेस्ट की तरह शेयर किया — “This is the status of the book.”

बस!

न कोई गुस्सा, न अफसोस, न चिंता। क्या ये चुप्पी संकेत है किसी बड़े खेल की?

ये किताब अभी रिलीज़ भी नहीं हुई, #MoD के अनुमोदन की प्रतीक्षा है, फिर भी PDF फॉर्मेट में वायरल कैसे हो गई!

# लीकेज व्हाट्सऐप ग्रुप्स से लेकर संसद के गलियारों तक, डार्क वेब तक पहुँच गई। दिल्ली पुलिस ने FIR ठोक दी, लेकिन सवाल वही — ये लीक किसने कराई? कौन है वो देशद्रोही जो देश की सुरक्षा से खेल रहा?

प्रथम दृष्टया तो “जनरल मनोज मुकुंद नरवाणे” ही हैं, क्योंकि ऐसी किताब उन्होंने बिना रक्षा मंत्रालय के अनुमति के लिखी ही क्यों, या फिर ऐसी सम्वेदनशील जानकारी खोलने को सोचा ही भला किस उद्देश्य से?

#रिटायर्ड आर्मी चीफ के रूप में संवेदनशील जानकारी किताब में लिखना और MoD क्लियरेंस के बिना प्रोसेस आगे बढ़ना संदेहास्पद है।

#नियम बताते हैं कि सर्विंग ऑफिसर्स को MoD से पूर्व अनुमति लेनी पड़ती है, लेकिन रिटायर्ड अधिकारियों के लिए ये वैकल्पिक है। फिर भी परंपरा रही है – Directorate of Military Intelligence को प्रकाशन के लिये भेजने से पहले दिखाओ, और उनकी सलाह से आगे बढ़ो।

किन्तु जनरल नरवाणे ने इस परंपरा का पालन नहीं किया। बल्कि प्रकाशक पेंग्विन ने किताब को प्रकाशित करने की अनुमति लेने को इसे पीडीएफ फॉर्म में रक्षा मंत्रालय को भेजा।

2020-24 में 35 ऐसी किताबें पास हुईं, पर नरवाणे की अटक गई। क्यों? क्योंकि #संवेदनशील कंटेंट था।

PDF वायरल हो गयी। अमेज़न पर प्री-ऑर्डर लिस्टिंग, फ्लिपकार्ट पर कवर – ये सब प्रकाशक के कंट्रोल में होता है।

#पेंग्विन ने बयान दिया, “किताब अप्रकाशित है, ये कॉपीराइट चोरी है!” लेकिन सवाल उठता है – इतनी महंगी और महत्वपूर्ण फाइल उनके सिस्टम से कैसे लीक हुई? #सिक्योरिटी ब्रीच? या जानबूझकर?

अब सब डॉट्स को जोड़ते हैं। MoD ने किताब रोकी तो दोनों का नुकसान – जनरल का रॉयल्टी का सपना टूटा, पेंग्विन का मार्केटिंग प्लान बर्बाद।

पेंग्विन की थ्योरी: प्रकाशन रुक गया तो पब्लिसिटी स्टंट के लिए PDF लीक कर हाइप बनाया। फायदा? कंट्रोवर्सी से बिक्री बढ़ेगी।

लेकिन कमजोरी – वे लीगल एक्शन की धमकी दे रहे हैं, जो डिफेंसिव लगता है।

जनरल की थ्योरी: क्लियरेंस नहीं मिली तो फ्रस्ट्रेशन। रिटायर्ड चीफ़ के पास ऑथर कॉपी ज़रूर रही होगी। क्या उन्होंने किसी प्राइवेट कॉन्टैक्ट को भेजा?

#डार्क वेब अफवाहें कहती हैं कि ऐसे कंटेंट स्पाई मार्केट में करोडों डालर में बिकते हैं। मोटिव? पर्सनल गेन।

अब यहीं पर जनरल की चुप्पी संदिग्ध हो जाती है।

#पुलिस जांच इसी पर फोकस करेगी। PDF का मेटाडेटा बताएगा – किस डिवाइस से क्रिएट/शेयर हुआ। IP ट्रेस से लोकेशन मिलेगी।

जनरल अथवा उनके निकट संबंधियों के बैंक अकाउंट्स के ट्रांजेक्शन और उनकी चल-अचल सम्पत्ति की जांच बताएगी क्या खुद उन्होंने इसे डार्क वेब पर बेचा।

पेंग्विन के सर्वर्स में सिक्योरिटी लॉग?
#रियलिस्टिक नज़रिए से पेंग्विन का हाथ लगता है – फाइल उनके पास थी, लीक का सोर्स वही हो सकते हैं।

लेकिन जनरल का ऐसे गोपनीय विषय पर लिखना और इतने हंगामे के बाद भी उनकी साइलेंस स्मोक है – अगर निर्दोष होते तो ज़ोर से चीखते।
#विलेन इन दोनों में से ही कोई एक है।

दोनों के स्टाफ और निकटवर्तियों से पूछताछ आगे के दरवाजे खोलेगी।

इसकी पुलिसिया जांच नहीं बल्कि इसे NIA को सौंपा जाना चाहिये,क्योंकि देश की सुरक्षा दाँव पर है। ये लीक दुश्मनों को #रोडमैप दे सकती है।

हमारा काम है सवाल पूछना, सच का हिसाब माँगना।
आपका क्या मानना – जनरल या पेंग्विन ?
Manoj Kumar

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