फिर टला: भाजपाध्यक्ष चुनाव अब उप-राष्ट्रपति चुनाव बाद,बिहार चुनाव पूर्व
BJP New President Election: भाजपा ने फिर टाल दिया अध्यक्ष चुनाव, जगदीप धनखड़ से फंस गया
भाजपा ने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा उपराष्ट्रपति चुनाव बाद तक टाल दी है. जेपी नड्डा का कार्यकाल 2024 बाद समाप्त हो गया था, लेकिन यह बार-बार बढ़ता जा रहा है. जानें चुनाव टालने का कारण
मुख्य बिंदू
भाजपा अध्यक्ष की घोषणा उपराष्ट्रपति चुनाव तक टली.
जेपी नड्डा का कार्यकाल 2024 के बाद समाप्त हो गया.
पार्टी स्थिरता और एकता बनाए रखना चाहती है.
मधुपर्णा दास
नई दिल्ली 02 अगस्त 2025 । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा उपराष्ट्रपति चुनाव बाद तक टालने का फैसला किया है. यह कदम 2024 के बाद बदले राजनीतिक हालात में पार्टी के आंतरिक तंत्र संभलकर ढालने की कोशिश है.
भाजपा ने अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा को उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद तक टालने का फैसला किया है.
भाजपा सूत्रों ने बताया कि जेपी नड्डा का कार्यकाल लोकसभा चुनाव 2024 बाद समाप्त होना था, लेकिन अब पार्टी ने तय किया है कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति सितंबर में उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद ही होगी. हालांकि, एक वरिष्ठ नेता ने संकेत दिया है कि बिहार चुनाव से पहले इस पर फैसला हो सकता है.
भाजपा ने क्यों टाला अध्यक्ष का चुनाव
उपराष्ट्रपति देश के दूसरे सर्वोच्च पद पर के साथ-साथ राज्यसभा के सभापति भी होते हैं. एक वरिष्ठ नेता ने कहा, कि ऐसे में पार्टी इस समय दोहरी नेतृत्व संरचना से बचना चाहती है. उन्होंने कहा कि ‘नया अध्यक्ष से संगठन में नई गतिविधियां होती है. राज्य स्तर पर नीतियों में बदलाव, कार्यकर्ताओं की नई जिम्मेदारी, और रणनीति में बदलाव हो सकता है. लेकिन अभी पार्टी को संयम, स्थिरता और एकता की जरूरत है, ताकि संसद के महत्वपूर्ण सत्रों को संभाला जा सके और बिहार व बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारी की जा सके.’
सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने नए अध्यक्ष के लिए कई वरिष्ठ नेताओं के नामों पर चर्चा की है, जिनमें संगठनात्मक अनुभव, प्रशासनिक क्षमता, आरएसएस से संबंध और चुनावी दक्षता जैसे मानदंड देखे जा रहे हैं. नया अध्यक्ष मोदी-शाह की 2029 तक की रणनीति से मेल खाने वाला होना चाहिए.
भाजपा की रणनीति क्या?
पार्टी की रणनीति में यह भी शामिल है कि अगली पीढ़ी के नेताओं को तैयार किया जाए, लेकिन साथ ही पार्टी की मुख्य विचारधारा और नेतृत्व की लय बनाये रखी जाए.
अभी अध्यक्ष की घोषणा टालने से पार्टी को गुटबाजी की अटकलों से बचने में मदद मिलती है, खासकर जब उपराष्ट्रपति चुनाव में हर सहयोगी और हर वोट महत्वपूर्ण हो सकता है. इससे पार्टी को यह सोचने का समय भी मिलेगा कि नए अध्यक्ष में जातीय, क्षेत्रीय और पीढ़ीगत संतुलन कैसे बनाया जाए.
कुल मिलाकर, भाजपा इस समय संसदीय व्यावहारिकता को संगठनात्मक बदलाव से ऊपर रख रही है. जैसे-जैसे 2027 का राष्ट्रपति चुनाव भी नजदीक आ रहा है, पार्टी अपने सभी कदम बहुत सोच-समझकर उठा रही है. उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद, न केवल राष्ट्रीय अध्यक्ष बदला जाएगा, बल्कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी बदलाव की संभावना है.
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Jagdeep Dhankhar

