शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर होगा मुकदमा, यौन शोषण के मामले में कोर्ट का आदेश

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर होगी FIR, यौन शोषण मामले में कोर्ट का आदेश
प्रयागराज में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर यौन शोषण आरोपों में एडीजे रेप एवं पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने झूंसी थाना पुलिस को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ एफआईआर लिख विवेचना के निर्देश दिए हैं.

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ FIR  होगी. (Photo: ITG)
प्रयागराज,21 फरवरी 2026,प्रयागराज में ज्योतिष पीठ के विवादास्पद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर यौन शोषण के आरोपों के मामले में एडीजे रेप एवं पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने झूंसी थाना पुलिस को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी पर एफआईआर लिख विवेचना के निर्देश दिए हैं.

एडीजे पॉक्सो कोर्ट का आदेश
एडीजे पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया ने अपने आदेश में कहा कि दोनों आरोपितों के खिलाफ मुकदमा लिख विधिवत जांच की जाए. कोर्ट के निर्देश के बाद अब झूंसी थाने में एफआईआर लिख अग्रिम कार्रवाई होगी. माना जा रहा है कि इस आदेश से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

धारा 173(4) में दाखिल हुई थी अर्जी
शाकुंभरी पीठाधीश्वर और श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट से जुड़े आशुतोष ब्रह्मचारी ने 28 जनवरी को धारा 173(4) में प्रार्थना पत्र दे एफआईआर की मांग की थी. उनका आरोप है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के आश्रम में  बच्चों का यौन शोषण होता है. उन्होंने इस संबंध में एक सीडी अदालत को सौंपने का भी दावा किया है.

अवयस्कों के बयान
मामले में 13 फरवरी को आरोप लगाने वाले दोनों अव्यस्कों  के बयान अदालत में वीडियोग्राफी के साथ अंकित हुए थे. कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट को भी संज्ञान में लिया और सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब अदालत ने एफआईआर के आदेश कर दिये है.

आशुतोष ब्रह्मचारी ने जताई संतुष्टि
कोर्ट के आदेश के बाद आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा कि उन्हें न्याय मिला है. उन्होंने घोषणा की कि वह प्रयागराज से विद्या मठ वाराणसी तक पैदल सनातन यात्रा निकालेंगे और लोगों के सामने सच्चाई लाएंगे. उनका आरोप है कि विद्या मठ में ही नाबालिग बच्चों के साथ शोषण होता था.

कौन हैं आशुतोष ब्रह्मचारी, जिन आवेदन  पर कोर्ट ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर दिया Avimukteshwaranand Saraswati:
आइए जानते हैं कि कौन हैं आशुतोष ब्रह्मचारी।

Ashutosh Brahmachari
आशुतोष ब्रह्मचारी

रामभद्राचार्य से दीक्षित 
आशुतोष ब्रह्मचारी जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य बताए जाते हैं। आशुतोष ब्रह्मचारी श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट अध्यक्ष भी हैं और मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, उनका जन्म उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक पंडित परिवार में हुआ था। आशुतोष ब्रह्मचारी के पिता रोडवेज बस में कंडक्टर थे। साल 2022 में रामभद्राचार्य से दीक्षा ले उन्होंने संन्यासी जीवन अपना लिया।  आशुतोष ब्रह्मचारी चर्चा में हैं तो इसलिये कि उनके आवेदन पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ मुकदमा लिखने का आदेश दिया गया है।

कौन हैं विवादास्पद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
वहीं, कथित  शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के पट्टी तहसील स्थित ब्राह्मणपुर गांव में हुआ। उनका मूल नाम उमाशंकर उपाध्याय है।

वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शिक्षा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री और आचार्य शिक्षा प्राप्त है। छात्र जीवन में  1994 में छात्र संघ चुनाव जीता। उन्हें 15 अप्रैल 2003 को दंड संन्यास की दीक्षा ली। सितंबर 2022 में उनके गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद उन्होने गुरू की वसीयत के नाम से खुद को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य घोषित कर दिया।

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