लापरवाह और कायर तंत्र ने ले ली युवा इंजीनियर की जान

Noida Software Engineer Death: ‘पापा मैं मरना नहीं चाहता…’, कैसे सिस्टम ने इंजीनियर को मार डाला ?

सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता ( Software Engineer Yuvraj Mehta ) नोएडा ( Noida Engineer Death ) के सेक्टर 150 एटीएस ले-ग्रैंडियोज के पास टी-प्वाइंट पर घने कोहरे से दुर्घटना के शिकार हो गए. ये सब तक हुआ जब शुक्रवार की रात 12 बजे युवराज गुरुग्राम से अपने ऑफिस से घर ग्रेटर नोएडा आ रहे थे..तभी घना कोहरा होने के कारण उनकी कार नाले की दीवार को तोड़कर एक निर्माणाधीन मॉल ( Noida Engineer Drowned News ) के परिसर में जा गिरी. जहां पानी भरा हुआ था. बताया जा रहा है कि युवराज को तैरना नहीं आता था. कार के पानी में गिरने के बाद युवराज ने बाहर निकलने की काफी कोशिश की, लेकिन दलदल होने कारण कामयाब नहीं हुए. इस दौरान मौके पर पहुंची प्रशासन और रेस्क्यू टीम मूकदर्शक बनी रही.

नोएडा: पानी में डूब रहा था इंजीनियर, डिलीवरी वाले ने बचाने को लगाई छलांग, मोनिंदर बना वीरता का उदाहरण 

Noida Engineer Car Drown: जब तंत्र कांप रहा था और वर्दीधारी ठंडे पानी की गहराई नाप रहे थे, तब डिलीवरी ब्‍वॉय मोनिंदर उद्धारक बनकर पाताल में कूद गया. 70 फीट गहरे मौत के गड्ढे में डूबते इंजीनियर की टॉर्च और चीखें देख मोनिंदर ने अपनी जान दांव पर लगा दी. प्रशासनिक कायरता में उसकी ये छलांग उस खोखले तंत्र पर तमाचा थी, जो पहले हुई दुर्घटनाओं के बाद भी सोया रहा.

नोएडा की उस काली रात में जब सिस्टम के सायरन वाली गाड़ियां किनारे खड़ी तमाशा देख रही थीं, तब फ्लिपकार्ट के एक डिलीवरी एजेंट ‘उद्धारक’ बन कूद गया. 70 फीट गहरा मौत का वो गड्ढा जिसे देख दमकल जवानों के पैर कांप रहे थे, वहां मोनिंदर ने अपना जीवन दांव पर लगा दिया. कार के शीशे के पीछे से आती टॉर्च की आखिरी टिमटिमाती रोशनी और युवराज की दम तोड़ती चीखें मोनिंदर चुपचाप नहीं देख पाया. जब वर्दीधारियों ने गहरा पानी देखकर कदम पीछे खींच लिए तब यह वीर कमर में रस्सी बांध ठंडे काले पाताल में कूद पड़ा. मोनिंदर की छलांग उस खोखले तंत्र के मुंह पर करारा तमाचा था, जिसने 10 दिन पहले दुर्घटना के बाद भी वहां एक चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाया. वह अकेले मौत से लड़ रहा था, जबकि पूरा प्रशासन किनारे खड़ा होकर बस बचाव के नाम पर वक्त काट रहा था. हालांकि युवक बच नहीं पाया.

नोएडा डूब रहा था इंजीनियर, बचाने को पानी में कूदा डिलीवरी बॉय,बना उदाहरण

…तो बच जाता युवराज
मोनिंदर ने बताया कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने एक जीवन बुझते देखा. उनके अनुसार, “युवराज आखिरी पल तक टॉर्च जलाकर मदद मांग रहा था. वें सांस नही ले पा रहे थे, लेकिन अधिकारी पानी में उतरने में डर रहे थे.” मोनिंदर की वीरता ने यह सिद्ध किया कि मानवता को पद की जरूरत नही. उन्होंने बताया कि 10 दिन पहले इसी जगह ट्रक गिरने पर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.

पिता को आखिरी कॉल
“पापा, मैं पानी भरे गहरे गड्ढे में गिर गया हूं. मैं डूब रहा हूं. प्लीज मुझे बचा लो, मैं मरना नहीं चाहता!” यह 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता के अंतिम शब्द थे. कोहरे की चादर और प्रशासनिक लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं. सेक्टर 150 में निर्माणाधीन ड्रेनेज के पास न कोई साइनबोर्ड, न ही रिफ्लेक्टर. युवराज की कार 70 फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे में समा गई. बेबस पिता दुर्घटनास्थल पर लोगों से अपने बेटे की जान की भीख मांगते रहे. लेकिन प्रशासन के पास न गोताखोर थे और न ही जरूरी संसाधन. नाव पहुंचने तक युवराज की सांसें टूट चुकी थीं. यह दुर्घटनाग्रस्त नही बल्कि सरकारी तंत्र की बड़ी लापरवाही है.

1. फ्लिपकार्ट एजेंट मोनिंदर ने उस रात क्या वीरता दिखाई?
जब बचाव कर्मी  गहरे पानी में उतरने से डर रहे थे, तब मोनिंदर अपने प्राणों की चिंता किए बिना 70 फीट गहरे गड्ढे में कूद गये.

2. मोनिंदर ने युवराज को किस हाल देखा ?
मोनिंदर ने देखा कि युवराज कार में फंसे हुए थे, टॉर्च जलाकर मदद मांग रहे थे । वें सांस नही ले पा रहे थे .

3. मोनिंदर ने प्रशासन पर क्या गंभीर आरोप लगाए ?
मोनिंदर का आरोप है कि दमकल कर्मचारी पानी में उतरने से हिचक रहे थे । प्रशासनिक लापरवाही से ही बचाव लटका।

4. क्या इस स्थान पर पहले भी कोई दुर्घटना हो चुकी थी?
गड्ढे में ट्रक गिरा था, फिर भी अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था नहीं की.

5. अंततः युवराज के साथ क्या हुआ?
मोनिंदर के साहस से भी, संसाधनों की कमी और प्रशासनिक देरी से युवराज बच नहीं सके और उनकी मौत हो गई.

जस्टिस फॉर युवराज’ पोस्टर ले सड़कों पर निकले लोग, सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत पर फूटा गुस्सा

Greater Noida Car Accident live: ग्रेटर नोएडा में हुए कार हादसे को लेकर लोगों में काफी आक्रोश है. स्थानीय निवासियों के अनुसार, यहां पहले भी दुर्घटनाएं हुई हैं, लेकिन तंत्र सोता रहा और अब यह बड़ी दुर्घटना हो गई. वहीं अब दुर्घटना में जान गवाने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर को न्याय दिलाने लोग कैंडल मार्च निकालेंगे.

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में शुक्रवार को हुए कार हादसे में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की जान चली गई. युवक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने न तो सर्विस रोड पर रिफ्लेक्टर लगाए थे और न ही नालियों को ढका था. पिता ने कहा कि घने कोहरे में रिफ्लेक्टर ना होने के कारण उनके बेटे की जान गई है. यहां बचाव के साधन नहीं थे, सिस्टम की कमी ने मेरे बेटे की जान ली.
वहीं अब धीरे-धीरे मामले को लेकर कई और खुलासे हो रहे हैं. खबरों के अनुसार, जिस जगह युवराज मेहता की मौत हुई, वहां पहले भी कई हादसे हो चुके हैं. 31 दिसंबर की रात इसी स्थान पर एक ट्रक अनियंत्रित होकर नाले में गिर गया था. दुर्घटना की तस्वीरें भी सामने आई थीं, जिनमें साफ दिखाई रहा था कि ट्रक का आधा हिस्सा पानी में डूब गया था, उसे बाहर निकालने में दो दिन लगे.
स्थानीय व्यक्ति ने बताये दुर्घटना के विवरण

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *