सत्य नही,शक्ति की भाषा समझता है विश्व:डॉ. मोहन भागवत _यूजीसी इक्विटी रेगूलेशन्स पर टिप्पणी से इंकार
सत्य नही,शक्ति की भाषा समझता है विश्व:डॉ. मोहन भागवत
_यूजीसी इक्विटी रेगूलेशन्स पर टिप्पणी से इंकार_
*रवींद्र नाथ कौशिक*
देहरादून 22 फरवरी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक डॉक्टर मोहन भागवत ने आज यहां दो टूक कहा कि विश्व शक्ति की भाषा समझता है,सत्य की नही. सत्य के पीछे शक्ति नही होगी तो कोई नही मानता.
डॉक्टर भागवत आज यहां हिमालयन कल्चरल सेंटर गढ़ी कैंट में संघ शताब्दी वर्ष में प्रमुख जन गोष्ठी के दूसरे सत्र में आये 190 प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे.
उन्होने कहा कि भारत सशक्त होगा तो विदेशों में भी देशवासियों को सम्मान मिलेगा वरना जैसे युगांडा से ईदी अमीन ने पीढियों से बसे भारतीयों को रातोंरात देश छोडने का आदेश दे दिया था,वैसे ही दोबारा और देशों में भी होगा. यदि प्रतिष्ठा,चरित्र और एकता नही होगी तो हिंदू अपने देश में भी सुरक्षित नही रहेगा. उन्होंने कहा कि इतिहास में बडे देश समाप्त हो गये क्योकि निस्वार्थ जागरुक लोगों से ही बड़े और शक्तिशाली देश बनते हैं, समाज सो जाता है तो देश को बड़ा बनाने वाले लोग ही भक्षक बन जाते हैं.
उन्होने बताया कि संघ ने जनसंंख्याको लेकर अपने विचार 2017 में प्रकाशित कर दिये थे. उन्होंने कहा कि तीन संतान पालने में आर्थिक असमर्थता के बहाने को मानने से इंकार कर दिया और कहा कि सबको अपनी संतान आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर और इंजीनियर ही क्यों बनानी है? दूसरा बहुत व्यवसायों में इनसे ज्यादा पैसा है. हर बच्चा तो यह बन भी नही सकता, न इतनी जरूरत ही है. उन्होने प्रश्न किया कि क्या मंहगी शिक्षा ही अच्छी होती है?
उन्होने हिंदुओं के हर बात के लिए संघ की ओर ताकने को भी गलत बताया और कहा कि जब तक आप स्वयं जिम्मेदारी नही लेंगें तो कोई संस्था, सरकार या अवतार उद्धार नही कर सकता. भगवान कृष्ण भी तभी अर्जुन के सारथी बने जब वे युद्ध को तत्पर हुए. उन्होने कहा कि संघ केवल व्यक्ति निर्माण से हिंदू समाज को संगठित करने के अतिरिक्त और कुछ नही करता. हां,संघ से प्रशिक्षित कार्यकर्ता देश और समाज के लिए आवश्यक सभी क्षेत्रों में काम करते हैं . स्वयंसेवक ऐसे सैंकडों संगठन चला रहे हैं लेकिन वे सब अपने कार्य में पूरी तरह स्वतंत्र-स्वायत्त हैं.
डॉक्टर भागवत ने कहा कि किसी नीति से समाज और देश नही चलते, ये जनता और उसके व्यवहार से चलते हैं. वरना तो भ्रष्टाचार के विरुद्ध नीतियां और कानून है,फिर भी लोग ईमानदारी का पालन नही करते तो इसके लिए नीति का अभाव तो जिम्मेदार नही है.
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होने कहा कि इतिहास में भारतीय हिंसक और लुटेरे नही बने तो उसके लिए यहां की शस्यश्यामला,हरीभरी समृद्ध भूमि है जिसके लिये हमें इस मातृभूमि का आभारी होना चाहिए. वरना रेगिस्तान और पश्चिम के अभावग्रस्त लोगों की तरह भारतीयों को भी पेट भरने को युद्ध, लूटमार और दुनियाभर में शस्त्र लेकर भटकना पडता.
डॉक्टर भागवत ने कहा कि संघ ने पाया कि संगठित और जागरूक न होने से मुट्ठीभर लोग शताब्दियों तक हमें गुलाम बनाने और लूटने में सफल हुए तो हमने चरित्रवान और देशभक्त नागरिक निर्माण को अपना ध्येय बनाया. अच्छे नागरिकों से ही अच्छे परिवार और अच्छे परिवारों से अच्छा समाज और देश बनता है. यह साल के 365 दिन का काम है. इसका कोई शार्टकट नही है. यह इतना बडा काम है कि संघ के पास और कामों के लिए ना समय है ना सामर्थ्य। उन्होने कहा कि समाज में ऐसे कुछ लोग खड़े हों तो लोग उनका अनुकरण करते हैं और इससे काम आसान हो जाता है.
उन्होने कहा कि बच्चे अपने बडों से ही सीखते हैं और अब वे सवाल भी करने लगे हैं जिसके लिये पालकों के पास उनके जवाब होने चाहिए. उन्होने कहा कि हमें तकनीक को अपना सेवक बनाकर रखना है,उसे अपने ऊपर हावी नही होने देना चाहिए. उन्होने कहा कि तकनीक मानव का विकल्प नही बन सकती.
डॉक्टर मोहन भागवत ने कहा कि
एक और प्रश्न के उत्तर में उन्होने कहा कि यूजीसी इक्विटी रेगूलेशन्स की नई गाइडलाइंस अभी सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं,इसलिए उन कोई टिप्पणी अप्रासंगिक है.
इस गोष्ठी के साथ ही उत्तराखंड भर में संघ की विचार गोष्ठियों की शुरुआत हो गई.
इसके पहले उन्होने अपने संबोधन में कहा कि संघ समझने को propaganda या perception पर जाने की बजाय इसकी गतिविधियों में शामिल होने के अलावा और कोई उपयुक्त साधन नही है. संघ के स्वयंसेवकों के चलाये जा रहे संगठनों से भी संघ को नही समझा जा सकता. उन्होने कहा कि संघ को दूर से देखने से भ्रम और गलतफहमी हो सकती है. संघ पथ संचलन करता है और शारीरिक कौशल भी सिखाता-अभ्यास कराता है लेकिन यह पैरा मिलिट्री संगठन नही है. न इसका कोई अखिल भारतीय अखाड़ा है. शाखाओं में अभियान गीत-संगीत होते हैं लेकिन यह संगीत शाला नही है. कार्यकर्ता एक लाख 30 हजार सेवाकार्य चलाते हैं लेकिन संघ सेवा संस्था नही है. उन्होने कि संघ प्रतिक्रिया में बनाया गया संगठन नही है. यह ठीक है कि संघ बनने पर हिंदूओं की सांप्रदायिक दंगों में हानि कम हुई लेकिन संघ दंगों से बचाव के लिए भी नही बना है. यह न लोकप्रिय होने को बना,न प्रेशर ग्रुप के रुप में,न सत्ता को और न विरोध या स्पर्धा को।
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इस अवसर पर संघ के प्रदेश संघचालक बहादुर सिंह बिष्ट पश्चिम उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संघचालक सूर्य प्रकाश टांक तथा उत्तराखंड के प्रचारक डॉक्टर शैलेन्द्र भी थे. गोष्ठी में प्रदेश भर के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय 800 से अधिक प्रमुख हस्तियां उपस्थित रही. संचालन नीरज जी ने किया।

