तो ट्रंप चाहे मुनीर-मोदी मांगें उनको शांति नोबेल प्राइज, जवाब मिला भाड में जाओ
Why Donald Trump Invite Narendra Modi To Visit Us During Lunch With General Asim Munir At White House
मोदी को अमेरिका क्यों बुला रहे थे ट्रंप?अमेरिकी ‘नोबेल’ चाल खुली, बाल-बाल बचा भारत!
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की है। दौरान ट्रंप ने पीएम मोदी से पूछा कि क्या वह कनाडा से लौटते समय अमेरिका में रुक सकते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री ने पूर्व निर्धारित व्यस्तताओं के कारण ऐसा करने में अपनी असमर्थता व्यक्त की।
देहरादून/वॉशिंगटन 18 जून 2025 । : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की है। दरअसल, ट्रंप इजरायल-ईरान संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बीच जी7 शिखर सम्मेलन के लिए कनाडा के कनैनिस्किस की अपनी यात्रा को बीच में ही छोड़कर मंगलवार सुबह वाशिंगटन लौट आए थे। ऐसे में उन्होंने पीएम मोदी से फोन पर ही बात करने का फैसला किया था। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी से पूछा कि क्या वह कनाडा से लौटते समय अमेरिका में रुक सकते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री ने पूर्व निर्धारित व्यस्तताओं के कारण ऐसा करने में अपनी असमर्थता व्यक्त की।

Donald Trump Invite PM Modi for US Visit
डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को दिया अमेरिका आने का न्योता
एक स्टेज पर भारत-पाकिस्तान?भूल जाओ!भारत ने ट्रंप प्लानिंग पर चलाया डिप्लोमैटिक बुलडोज़र
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप के वाशिंगटन निमंत्रण को ठुकराया. पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर से ट्रंप की मुलाकात ठीक उसी दिन पहले से तय थी. मोदी ने क्रोएशिया यात्रा को प्राथमिकता दी, जिससे भारत की विदेश नीति की परिपक्वता दिखती है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ल्ड लीडर से मिलने जी7 गए तो अमेरिकी राष्ट्रपति मिडिल-ईस्ट तनाव की बात कहकर जल्द ही वहां से वापस आ गए. बाद में ट्रंप और मोदी में फोन वार्ता हुई. ट्रंप ने वापस लौटते प्रधानमंत्री मोदी को वाइटहाउस होते हुए जाने का प्रस्ताव दिया. चाहते तो प्रधानमंत्री मोदी थोड़ा वक्त निकलकर कनाडा से वाशिंगटन जा सकते थे, लेकिन प्रधानमंत्री ने ऐसा करने से कन्नी काट ली. इसकी मुख्य वजह पड़ोसी देश पाकिस्तान बना. दरअसल, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर का ठीक उसी दिन ट्रंप के साथ लंच पहले से तय था. एक स्टेज पर भारत और पाकिस्तान दोनों हों, यह बात प्रधानमंत्री मोदी क्यों सहन करते?.
भारत की विदेश नीति पर पड़ता असर
इस तरह अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में एक अजीबोगरीब पॉलिटिकल सिनेरियों बनने-बनते रह गया. एक ही दिन एक ही वक्त के आसपास भारतीय प्रधानमंत्री और आसिम मुनीर वाइटहाउस में होते तो इसका असर भारतीय विदेश नीति पर पड़ना तय था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वाशिंगटन में स्टॉपओवर पर मिलने का निमंत्रण दिया था, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने ठुकरा दिया. इस निर्णय के पीछे केवल व्यस्तता ही नहीं थी, बल्कि एक गहरी राजनीतिक समझ और सतर्कता भी छुपी थी.
ओवर-स्मार्ट बन रहे थे ट्रंप
यह घटना तब सामने आई जब व्हाइट हाउस ने घोषणा की कि डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को व्हाइट हाउस कैबिनेट रूम में दोपहर 1 बजे लंच पर आमंत्रित करेंगे. पाकिस्तानी शीर्ष सैन्य अधिकारी से अमेरिकी राष्ट्रपति का यह औपचारिक मिलन निश्चित ही एक राजनीतिक संदेश था. ऐसे में अगर प्रधानमंत्री मोदी भी उसी दिन वाशिंगटन में ट्रंप से मिलते, तो दोनों मुलाकातें एक ही दिन होतीं. यह राजनीतिक रूप से बेतुकी स्थिति होती. ट्रंप भारत के लिए ऐसी परिस्थिति पैदा कर ओवर-स्मार्ट बन रहे थे, जिसे भारत ने समय रहते भांप लिया.
प्रधानमंत्री ने क्रोएशिया यात्रा को दी वरीयता
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप का निमंत्रण ठुकरा अपनी पूर्व निर्धारित क्रोएशिया यात्रा को प्राथमिकता दी और कनाडा से मंगलवार शाम 6 बजे रवाना हो गए. इस तरह मोदी अगर अमेरिका आते भी तो बुधवार आधी रात बाद वाशिंगटन पहुंचते. इस फैसले से साफ है कि भारत जान-बूझकर ऐसी परिस्थिति में पडना नही चाहता था, जिसमें एक दिन में भारत के प्रधानमंत्री और पाकिस्तान के सेना प्रमुख दोनों अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति से मिलते.
भारत की राजनीतिक परिपक्वता दिखी
यह राजनीतिक सतर्कता भारत की विदेश नीति की परिपक्वता है, जहां रिश्तों की जटिलता और संवेदनशीलता समझते हुए रणनीतिक फैसले लिए जाते हैं. मोदी की चतुराई ने भारत को उस राजनीतिक ब्लंडर से बचा लिया, जो दोतरफा संवाद की बजाय कई गलतफहमियों और अटकलों को जन्म देती . अंततः डोनाल्ड ट्रंप और आसिम मुनीर के व्हाइट हाउस लंच की खबर ने भारत के इस निर्णय को और भी महत्वपूर्ण बना दिया. एक तरफ जहां पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख का अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति से मिलना एक संदेश था वहीं मोदी का इस दौर में दूरी भारत की विदेश नीति की सूझबूझ और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा का मुखर संदेश है.
मुनीर ने मांगा ट्रंप के लिए नोबेल पुरस्कार
व्हाइट हाउस प्रवक्ता अन्ना केली ने कहा कि ट्रंप मुनीर का स्वागत करेंगे, क्योंकि मुनीर ने भारत और पाकिस्तान में परमाणु युद्ध रोकने को राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार नामांकन का आह्वान किया है।
ट्रंप ने गलत समय मोदी को दिया न्योता?
ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को व्हाइट हाउस आने का न्योता तब दिया, जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर अमेरिका में ही थे।भारतीय समयानुसार रात 10 बजे डोनाल्ड ट्रंप असीम मुनीर के साथ दोपहर भोजन करेंगे। मुनीर को यह निमंत्रण वाशिंगटन का किसी सेवारत पाकिस्तानी सेना प्रमुख को दिया एक दुर्लभ संकेत है। अयूब खान, जिया उल-हक और परवेज मुशर्रफ जैसे पाकिस्तानी सेना प्रमुखों को इस तरह के निमंत्रण मिले हैं, लेकिन वे राष्ट्रपति भी थे। पाकिस्तान जनरल मुनीर को व्हाइट हाउस का निमंत्रण मिलने को एक बड़ी कूटनीतिक जीत बता रहा है.
प्रधानमंत्री मोदी को बुलाकर क्या करना चाहते थे ट्रंप?
इंडो पैसिफिक एनालिस्ट डेरेक जे ग्रॉसमैन ने ट्रंप के इस न्योते को अमेरिका की एक चाल बताया। उन्होंने एक्स पर लिखा, “यह बहुत अजीब है कि ट्रंप ने आज मोदी को चुपके से व्हाइट हाउस आमंत्रित करने की कोशिश की, संभवतः उस समय जब असीम मुनीर भी दोपहर के भोजन को मौजूद होंगे। वह भारत-पाकिस्तान तनाव के संदर्भ और इतिहास को बिल्कुल नहीं समझते हैं, और बाद में नोबेल शांति पुरस्कार जीतने को बस फोटो खिंचवाना चाहते हैं।”

ब्रह्मा चेलानी ने ट्रंप के न्योते पर यह कहा
जाने-माने कूटनीति विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने कहा, “शांतिदूत के रूप में पेश आने वाले आगजनी के शौकीन ट्रंप ने भारतीय उपमहाद्वीप में मध्यस्थ के रूप में अपनी स्व-नियुक्त भूमिका नहीं छोड़ी है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख के साथ अपने नियोजित लंच का खुलासा किए बिना, उन्होंने चुपचाप मोदी को व्हाइट हाउस आमंत्रित किया। लगातार होने वाली बैठकों ने कूटनीतिक जाल बिछा दिया होगा – जिसे मोदी ने कनाडा के अल्बर्टा में जी 7 शिखर सम्मेलन से क्रोएशिया की राजकीय यात्रा तक की यात्रा की पूर्व प्रतिबद्धता का हवाला देकर टाल दिया।”


