आर-पार: ट्रंप का चार बार फोन टाला मोदी ने,इसके पहले टाली INDO US व्यापार वार्ता

Pm Narendra Modi Refuse four times To Talk Donald Trump Amid Tariff Controversy Expert Explain Reason
भारत ने साफ संदेश दिया… प्रधानमंत्री मोदी के ट्रंप का 4 बार फोन नहीं उठाने पर आया एक्सपर्ट का रिएक्शन, बोलीं-ड्रैगन-बीयर आए साथ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के हफ्तो में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चार बार बात करने की कोशिश की। भारत की ओर से ट्रंप से कोई भी बातचीत करने से इनकार कर दिया गया।

वॉशिंगटन 25 अगस्त 2025 : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते कुछ दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात करने की कोशिश की। ट्रंप की ओर से कम से कम चार बार फोन किया गया लेकिन भारतीय पीएम ने उनसे बात करने से इनकार कर दिया। ट्रंप ने मोदी से बात करने की कोशिशें ऐसे समय की, जब दोनों देशों के रिश्ते में टैरिफ के मुद्दे पर तनाव बना हुआ है। जर्मन अखबार फ्रैंकफर्टर अल्गेमाइन (FAZ) ने अपनी रिपोर्ट में इसका खुलासा करते हुए कहा है कि टैरिफ मुद्दे पर ट्रंप ने अपने सभी विरोधियों को हरा दिया लेकिन भारत को वह नहीं हरा पाए। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद एक्सपर्ट ने प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यह भारत के कड़े रुख का संकेत है।
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चाकरोवा ने ट्रंप और मोदी के रिश्ते पर प्रतिक्रिया दी है।

विएना की रहने वालीं जियोपॉलिटिकल रणनीतिकार वेलिना चाकरोवा ने जर्मन अखबार के दावे पर प्रतिक्रिया दी कि भारत ने ऐसा कर बहुत साफ संदेश देने की कोशिश की है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि ‘जर्मन FAZ कहता है कि ट्रंप ने मोदी से चार बार संपर्क की कोशिश की और सभी कॉल अस्वीकार कर दी गईं। भारत की आधिकारिक लाइन ऐसे कॉन्टैक्ट से इनकार की है। हालांकि साफ है मोदी ने ट्रंप के ट्रैप से बचने को ड्रैगन बियर (चीन और रूस) की ओर रुख किया है। नई दिल्ली ने अपना विकल्प चुनते हुए अमेरिका को संदेश दिया है।’

क्या कहती है रिपोर्ट
जर्मन अखबार की रिपोर्ट कहती है कि नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत से इनकार किया। साथ ही अमेरिकी डेलीगेशन को भी भारत में आने की अनुमति देने से मना कर दिया। अखबार ने लिखा है कि प्रधानमंत्री   मोदी को ट्रंप के बर्ताव से बहुत ज्यादा बुरा महसूस हुआ। यही वजह है कि उन्होंने कड़ा रुख दिखाया और साफ किया कि वह अमेरिका के सामने झुकने को तैयार नहीं हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रंप ने वियतनाम के सुप्रीम लीडर से टैरिफ मामले को लेकर फोन पर बात की थी। समझौता नहीं होने के बावजूद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर डील का ऐलान कर दिया। ऐसे किसी कंट्रोवर्सी से बचने के लिए भी मोदी ने बात करने से बचना का रास्ता अपनाया। इसीलिए मोदी ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की प्रस्तावित दिल्ली यात्रा भी रद्द कर दी।

भारत-अमेरिका के रिश्ते
भारत और अमेरिका के रिश्ते बीते कुछ समय से तनातनी के हैं। दोनों देशों के रिश्ते में गिरावट ऑपरेशन सिंदूर के समय ही गई थी, जब ट्रंप ने सीजफायर का दावा किया। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने भारत को रूस से तेल खरीद के लिए धमकाने की कोशिश की और भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया। ट्रंप ने भारत को ‘डेड इकोनॉमी’ तक कह दिया, जिसने संबंधों को और ज्यादा खराब कर दिया।

Us House Foreign Affairs Committee Slams Donald Trump Nominee For Us Ambassador To India Sergio Gor
सर्गियो गोर को भारत का राजदूत नॉमिनेट करने पर अमेरिका में बवाल,फॉरेन अफेयर्स कमेटी ने उठाए सवाल,ट्रंप को बड़ा झटका
डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर्स और हाउस ऑफ फॉरेन अफेयर्स का तर्क है कि भारत जैसे जटिल और महत्वपूर्ण देश में अमेरिकी हितों की रक्षा को करियर डिप्लोमैटिक अनुभव और योग्यता जरूरी है,जो गोर में नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप के लिए ये एक बड़ा झटका हो सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना वफादार सर्गेई गोर भारत में राजदूत नॉमिनेट किया है। लेकिन ट्रंप के इस फैसले से अमेरिका की राजनीति में बहस शुरू हो गई है। डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर्स ने ट्रंप के इस फैसले पर गंभीर सवाल उठाते हुए,भारत जैसे महत्वपूर्ण सहयोगी में नौसिखिया राजदूत बनाने के फैसले की आलोचना की है। डेमोक्रेटिक सांसद और हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के सीनियर सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने इसकी कठोर शब्दों में आलोचना की है।

सर्गेई गोर को भारत भेजने के ट्रंप के फैसले की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि “अमेरिका-भारत संबंधों के इतने संवेदनशील मोड़ पर वॉशिंगटन को एक अनुभवी और विश्वसनीय राजदूत की जरूरत थी,ना कि एक MAGA (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) वफादार की।” उन्होंने ट्रंप पर आरोप लगाया कि “उन्होंने 1,300 करियर डिप्लोमैट्स हटा कर स्टेट डिपार्टमेंट कमजोर किया है और अब अनावश्यक स्पेशल दूत पद जोड़कर संस्थान को और बोझिल बना रहे हैं।” डोनाल्ड ट्रंप के लिए ये आलोचना एक बड़ा झटका है, क्योंकि सीनेट को ही सर्गेई गोर के नाम पर मुहर लगाना है।

सर्गेई गोर को भारत का राजदूत नॉमिनेट करने पर बवाल क्यों?
आपको बता दें कि सर्गेई गोर सिर्फ 38 साल के हैं और उनके पास डिप्लोमेसी का कोई अनुभव नहीं है। उन्होंने किसी भी देश में अमेरिका के लिए काम नहीं किया है। उनके पास सबसे बड़ी योग्यता ये है कि वो डोनाल्ड ट्रंप के ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ कैम्पेन के जोरदार समर्थक हैं, ट्रंप से उनकी सीधी बात होती है और उनकी कैम्पेन टीम के प्रमुख कार्यकर्ता हैं। उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा ट्रंप परिवार के आसपास ही गुजारा है। सर्गेई गोर का नाम डोनाल्ड ट्रंप के बेटे की किताब प्रकाशित करवाने से लेकर ट्रंप के सुपर PAC तक चलाने से जुड़ा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप को भारत में एक ऐसे वफादार की जरूरत थी, जिस पर वो आंख मूंदकर भरोसा कर सकें। लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं का कहना है कि विश्वसनीय होने और डिप्लोमेटिक अनुभव होने में आकाश पाताल का अंतर है।

डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर्स और हाउस ऑफ फॉरेन अफेयर्स का तर्क है कि भारत जैसे जटिल और महत्वपूर्ण देश में अमेरिकी हितों की रक्षा को करियर डिप्लोमैटिक अनुभव और काबिलियत जरूरी है,जो गोर के पास नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप को ये एक बड़ा झटका हो सकता है क्योंकि सीनेटर्स की मंजूरी से ही उन्हें भारत में राजदूत की नियुक्ति मिलेगी। ऐसे में ग्रेगरी मीक्स की सार्वजनिक आपत्ति से संकेत मिलता है कि यह रास्ता इतना आसान नहीं होगा। डेमोक्रेटिक सीनेटर्स पहले से ही डोनाल्ड ट्रंप पर अमेरिकी विदेश विभाग कमजोर करने का आरोप लगा रहे हैं।

भारत-अमेरिका रिश्तों में गहराता अविश्वास
सर्गेई गोर के नाम की घोषणा डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसे समय की है, जब उन्होंने भारत के खिलाफ एक के बाद एक कई फैसले लिए हैं जिनमें 27 अगस्त से लागू होने वाला 50 प्रतिशत टैरिफ भी है। ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ को लेकर आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है,जिससे दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को बहुत बड़ा झटका लगा है। अमेरिका से लेकर भारत तक के जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट ऐसे राजदूत की आशा में थे जो दोनों देशों में पुल का काम करे और जो तनावपूर्ण रिश्ता बना हुआ है,उसे गंभीरता से हैंडल करते हुए रिश्ते सामान्य करे। लेकिन सर्गेई गोर को लेकर ऐसा होने की संभावना काफी कम है।

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