किसका प्यादा है कोटद्वार का मौहम्मद दीपक? देवभूमि से दुबई तक तार

पहलगाम हमले में हिंदुओं का मजाक बनाने वाले मोहम्मद दीपक का दुबई से क्या है संबंध.? ऑपइंडिया ने खोली पोल तो फेसबुक पोस्ट हो रहे डिलीट..??

उत्तराखंड के कोटद्वार में एक दुकान के नाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यहाँ शोएब अहमद नाम का एक मुस्लिम युवक ‘बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर’ नाम से दुकान चला रहा था। इस दुकान के नाम में इस्तेमाल किए गए ‘बाबा’ शब्द को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया।

कोटद्वार के बारे में जानने वाले लोग जानते हैं कि यहाँ ‘बाबा’ शब्द का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, जिसका मतलब है ‘सिद्धबली बाबा’। कोटद्वार में स्थित भगवान हनुमान को समर्पित सिद्धबली बाबा मंदिर न केवल एक प्राचीन और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है बल्कि शहर की पहचान और आस्था का केंद्र भी माना जाता है। स्थानीय सनातन समाज की भावनाएँ सिद्धबली बाबा से गहराई से जुड़ी हुई हैं। इस मंदिर की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ भंडारा आयोजित करने के लिए लोगों को वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है।

बताया जा रहा है कि शोएब अहमद कई वर्षों से ‘बाबा’ नाम का उपयोग कर दुकान चला रहा था। इस बात पर बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि जब दुकानदार सिद्धबली बाबा में आस्था नहीं रखता तो निजी लाभ के लिए ‘बाबा’ नाम का उपयोग करना उचित नहीं है। इसी आधार पर उन्होंने दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटाने की माँग की।

इस बीच मामला और गर्म हो गया जब यूथ कॉन्ग्रेस के जिलाध्यक्ष विजय रावत और पास में ही जिमखाना चलाने वाले दीपक कुमार कुछ युवकों के साथ मौके पर पहुँचे। बताया जा रहा है कि दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटाने की माँग को लेकर वे नाराज हो गए और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं से उनकी बहस शुरू हो गई। घटना के दौरान जब दीपक कुमार से नाम पूछा गया तो उसने अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बताया। इसके बाद विवाद और बढ़ गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

कोटद्वार में दुकान के नाम को लेकर शुरू हुआ विवाद धीरे-धीरे हिंसक झड़प में बदल गया। यूथ कॉन्ग्रेस पदाधिकारी विजय रावत और मोहम्मद दीपक बजरंग दल के कार्यकर्ताओं से भिड़ गए और दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। घटना से जुड़े वीडियो में दिखा कि हाथापाई की शुरुआत विजय रावत और मोहम्मद दीपक की ओर से हुई थी। वीडियो में यह भी देखा जा सकता है कि मोहम्मद दीपक बजरंग दल के एक बुजुर्ग कार्यकर्ता के साथ बदसलूकी और धक्का-मुक्की करता नजर आ रहा है।

इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। इसके बाद मामला केवल स्थानीय विवाद न रहकर राजनीतिक और वैचारिक बहस में बदल गया। सोशल मीडिया पर मोहम्मद दीपक को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आने लगीं। कुछ वर्गों ने उसे ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ का प्रतीक बताना शुरू कर दिया। रातों-रात मोहम्मद दीपक वामी-इस्लामी, LibTard और कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम की आँखों का तारा बन गया। इसके साथ ही, उत्तराखंड में इस्लामी जिहाद से लड़ने वालों को जमकर बदनाम किया जाने लगा।

इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मोहम्मद दीपक को ‘मुहब्बत का दीपक’ बताया और RSS पर समाज में नफरत फैलाने का आरोप लगाया।

वहीं, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत भी इस विवाद में कूद पड़े। उन्होंने मोहम्मद दीपक को ‘उत्तराखंड का दीपक’ और ‘न्याय की रोशनी’ देने वाला बताया। हरीश रावत पहले भी मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मुद्दे को लेकर चर्चा में रह चुके हैं, जिसे कुछ राजनीतिक विश्लेषक 2022 के विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की हार से जोड़कर देखते हैं।

मामले को आगे समझने से पहले एक नाम पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है- मोहम्मद दीपक। कोटद्वार में ‘हल्क जिम’ नाम से जिम चलाने वाले मोहम्मद दीपक को स्थानीय स्तर पर एक प्रभावशाली व्यक्ति के तौर पर देखा जाता है। मोहम्मद दीपक के संबंध यूथ कॉन्ग्रेस के जिलाध्यक्ष विजय रावत से काफी करीबी बताए जाते हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर उपलब्ध तस्वीरों से यह भी सामने आता है कि उनकी कॉन्ग्रेस के कई बड़े नेताओं के साथ नजदीकियाँ रही हैं।

मोहम्मद दीपक के फेसबुक अकाउंट से यह भी संकेत मिलता है कि उनके मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ करीबी संबंध हैं। इनमें दुबई में कारोबार करने वाले चाँद मौला बक्श का नाम प्रमुख रूप से सामने आता है। सोशल मीडिया पर मौजूद पोस्ट के मुताबिक, चाँद मौला बक्श मोहम्मद दीपक के लिए बॉडी बिल्डिंग शो आयोजित करवाते हैं। हालाँकि, अब वो धीरे-धीरे इन पोस्ट को चुपचाप डिलीट करने लगा है।

मोहम्मद दीपक द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में एक युवक को नाचते हुए दिखाया गया है, जिसके साथ उन्होंने लिखा है कि ‘चाँद भाई ने कोटद्वार को दुबई बना दिया’।

मोहम्मद दीपक ने एक विज्ञापन भी पोस्ट किया है जिसमें वो दुबई में 4 और 5 सितारा होटलों में नौकरी के लिए युवाओं को इंटरव्यू के लिए बुला रहे हैं। यहाँ चाँद मौला बक्श के बारे में एक और तथ्य बताना आवश्यक है कि वो भी दुबई में होटल व्यवसाय में ही हैं।

दुबई में उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराओं के नाम पर कौथिग नाम से एक फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है। उत्तराखंड के पहाड़ों से बड़ी संख्या में लोग दुबई में रहते हैं लेकिन उनके कौथिग का मुख्य आयोजक चाँद मौला बक्श होता है। दुर्भाग्य की बात ये है कि गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी भी चाँद मियाँ के इस कौथिग में शामिल होते हैं और चाँद भाई को खाँटी उत्तराखंडी बताते हैं।

मोहम्मद दीपक का एक और वीडियो वायरल हो रहा है जिसमे वो बता रहे हैं कि मोहम्मद नाम में बहुत बड़ी ताकत है।

इसके अलावा उनके कई ऐसे फोटोज और वीडियोज वायरल हो रहे हैं जिनमे साफ दिखाई देता है कि उनकी मुस्लिमों से अच्छी यारी दोस्ती है जिनमे से अधिकतर जिम संचालक या सैलून चलाने वाले हैं। मोहम्मद दीपक की एक और पोस्ट वायरल हो रही है जिसमें वे पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों को मुस्लिम कहने वालों को चूति@ कह रहे हैं।

इसी पोस्ट के एक कमेंट में वे कहते हैं कि यदि आतंकियों ने हिंदू मर्दों को मारने से पहले उनकी पैंट उतारी थी तो फिर महिलाओं का क्या उतारा था?

दीपक कुमार से मोहम्मद दीपक बनने की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल सामने आ रहे हैं। उपलब्ध तथ्यों से यह संकेत मिलता है कि उनके नाम परिवर्तन के पीछे कुछ सामाजिक और वैचारिक कारण हो सकते हैं, जिन पर चर्चा की जा रही है।

दीपक कुमार के सोशल मीडिया अकाउंट का विश्लेषण करने पर यह बात सामने आती है कि उनकी फेसबुक वॉल पर हिंदू त्योहारों से जुड़ी शुभकामना पोस्ट लगभग नहीं दिखाई देतीं जबकि ईद जैसे मुस्लिम त्योहारों पर शुभकामनाओं से जुड़ी कई पोस्ट मौजूद हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अपने नाम में गर्व से मोहम्मद जोड़ने वाले और मोहम्मद को अपनी ताकत का सोर्स बताने वाले दीपक के ब्रेनवॉश के पीछे क्या कोई इस्लामी तंत्र काम कर रहा था?

मोहम्मद दीपक को सेक्युलर जरूर बताया जा रहा है लेकिन उसकी हरकतों से साफ दिखता है कि वह इस्लाम से काफी प्रभावित है। ऐसे में क्या यह संभावना नहीं बनती है कि इसे हथियार बनाकर ‘जिम जिहाद’ का षड्यंत्र चल रहा हो? मोहम्मद दीपक के बहाने अब देवभूमि पर लांछन लगाने का खेल भी शुरू हो चुका है। इससे पहले देहरादून के विकासनगर में कश्मीरी मुसलमानों और मसूरी के बुल्लेशाह मजार के मामले में भी यही नैरेटिव बनाने की कोशिश की गई थी कि देवभूमि उत्तराखंड अब नफरतों का प्रदेश बन चुका है। लेकिन इस नैरेटिव के खिलाफ लोगों की मुखरता है से कट्टरपंथी घबराए हुए हैं।

मुसलमानों के षड्यंत्रों के खिलाफ पहाड़ी समाज अब मुखर होकर सामने आ रहा है, उसे देखकर जिहादियों और दंगाइयों की देवभूमि को निगलने की योजनाएँ खटाई में पड़ती हुई नजर आ रही हैं। ऐसे में अब यह एक नया फॉर्मूला निकाला गया है कि जिहादियों के खिलाफ लड़ने वालों को जमकर बदनाम किया जाए। ऐसा माहौल तैयार किया जाए जिससे संदेश जाए कि देवभूमि के हिंदू ही सनातन की लड़ाई लड़ने वालों के खिलाफ हैं।

मोहम्मद दीपक और कुछ नहीं बस जिहादियों के इस शतरंज का एक छोटा सा प्यादा है, जिसे अंतिम खाने तक चढ़ाकर घोड़ा बना दिया गया है। मोहम्मद दीपक को भारत का हीरो बताने वाले इसके मजे ले रहे हैं और दीपक इसे अपना प्रमोशन समझ रहा है लेकिन उसे पता नहीं है कि अगली कुछ चालों में राजा को फँसाने के लिए उसे क़ुर्बान कर दिया जाएगा।

ये शतरंज इस्लामी जिहादियों ने बिछाई है, इसे खेलने राहुल गाँधी जैसे नेता मैदान में मौजूद हैं जो मुस्लिम वोटर्स की खेती कर के सत्ता तक पहुँचना चाहते हैं और इन सबकी नजर मिला-जुलाकर देवभूमि में दारुल इस्लाम की स्थापना ही है। अगर ऐसा ना होता तो मोहम्मद दीपक को मोहम्मद नाम में ताकत नहीं दिख रही होती और राहुल गाँधी उसे उकसा नहीं रहे होते।

हालाँकि, इस नाम ने क्या खेल किए हैं, इसके प्रमाण इतिहास के साथ साथ भूगोल में भी दर्ज हैं और इन सभी का एक ही मकसद है और वो है सीरिया से लेकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश वाला मॉडल ही उत्तराखंड में लागू करना। देवभूमि के लोग इस बात को जितना जल्दी हो सके समझें, वरना इस सेक्युलर कॉकटेल की जद में जब आएँगे, तो वो ये नहीं पूछेंगे कि आप कॉन्ग्रेसी हैं या फिर भाजपाई, आप उनके लिए सिर्फ और सिर्फ काफिर रहेंगे।

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