होमवर्क जीरो,जनसमर्थन शून्य: वक्फ संशोधन बिल का विरोध क्यों सिद्ध हुआ सतही?
वक्फ बिल पर विपक्ष का विरोध इन चार बिंदुओं पर, लेकिन ये इतने बेदम क्यों?
वक्फ बोर्ड संशोधन के विरोध के नाम पर विपक्ष को सिर्फ इतना ही पता है कि सरकार मुसलमानों को परेशान कर रही है. केंद्र सरकार जिन मुद्दों के आधार पर ये बिल पेश कर रही है उनका जवाब किसी ने नहीं दिया. किसी ने ये बताने की जहमत नहीं उठाई कि वक्फ बोर्ड की मनमानी के खिलाफ क्या होना चाहिए? किसी ने इस सवाल का उत्तर नहीं दिया कि 39 लाख एकड़ जमीन का फायदा गरीब मुसलमान को क्यों नहीं मिलना चाहिए?
लोकसभा में वक्फ बिल पर बोलते हुए अखिलेश यादव, केसी वेणुगोपाल और असदुद्दीन ओवैसी
नई दिल्ली,03 अप्रैल 2025,अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू के वक्फ संशोधन विधेयक पेश किए जाने के बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव और टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी, एआईएमआईएम के असद्दुदीन ओवैसी आदि ने सरकार के खिलाफ लोकसभा में मोर्चा खोला. पर हैरानी की बात यह रही है कि किसी के पास फैक्ट नहीं थे. विरोध के नाम पर सिर्फ इतना ही था कि सरकार मुसलमानों को परेशान कर रही है. केंद्र सरकार जिन मुद्दों के आधार पर ये बिल पेश कर रही है उनका जवाब किसी ने नहीं दिया. किसी ने ये बताने की जहमत नहीं उठाई कि वक्फ बोर्ड की मनमानी और बदइंतजामी के खिलाफ क्या होना चाहिए?
किसी ने इस सवाल का उत्तर नहीं दिया कि 39 लाख एकड़ जमीन का फायदा गरीब मुसलमान को क्यों नहीं मिलना चाहिए. किसी ने नहीं बताया कि कई सौ एकड़ जमीन का किराया सालों से मात्र कुछ हजार क्यों वसूला जा रहा है. आखिर सरकार इन समस्याओं को हल करने को ही तो 2013 में हुए संशोधन को खत्म कर रही है. नेता विपक्ष राहुल गांधी के पास तो बोलने को कुछ था ही नही, विपक्ष में दूसरी सबसे बडी पार्टी सपा नेता अखिलेश यादव वक्फ संशोधन बिल के अलावा महाकुंभ, राममंदिर आदि हर विषय के ऊपर बोले। कांग्रेस की सबसे वरिष्ठ और जिम्मेदार नेता सोनिया गांधी तक ने किसी जरूरी बिंदू की बजाय कांग्रेस पार्टी की मीटिंग में कहा कि सरकार ने जबरन वक्फ बोर्ड संशोधन अधिनियम लोकसभा से पास कराया. विपक्ष ने बिल के विरोध का आधार इन खास बिंदुओं को न बनाकर कुछ ऐसे विषयों को बनाया जो वास्तविक रूप से केवल मुस्लिम समुदाय को भड़काना ही है.
1-सतही: कहा, वक्फ में संशोधन नहीं हो सकता जबकि ऐसा कई बार हुआ
वक्फ बोर्ड पर बहस करते हुए बिल के विरोध में बोलने वाले इस संशोधन को असंवैधानिक बता रहे थे. कांग्रेस नेता वेणुगोपाल , असद्द्दीन ओवैसी आदि ने इस संशोधन को ही असंवैधानिक बताने को अपने तर्क दिए. पर देश के संविधान में वक्फ का कहीं भी जिक्र नहीं है. पहला वक्फ अधिनियम 1954 में बना था. इसी में वक्फ बोर्ड गठित किया गया. पहला वक्फ अधिनियम संशोधन 1955 में आया. इसके बाद देश में नया वक्फ कानून 1995 में आया. इस संशोधन से राज्यों को भी वक्फ बोर्ड बनाने की शक्ति मिल गई. फिर 2013 में इसमें संशोधन सेक्शन 40 जोड़ा गया. जो अब तक के सभी संशोधन में सबसे विवादित रहा.
सवाल यह उठता है कि जब इतने संशोधन इसके पहले ही हो चुके हैं तब किसी ने उसे असंवैधानिक क्यों नहीं कहा? आज जब समय की मांग के अनुसार सरकार फिर कानून सुधारना चाहती है तो यह असंवैधानिक कैसे हो गया? संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू सही ही कहते हैं कि आप सब कुछ छोड़कर जिसका लेना-देना नहीं है, उसका जिक्र कर लोगों को बरगला रहे हैं. रिजिजू ने कहा कि 2013 में इलेक्शन में कुछ ही दिन बचे थे. 5 मार्च 2014 को 123 प्राइम प्रॉपर्टी दिल्ली वक्फ बोर्ड को ट्रांसफर कर दी गयी. चुनाव में कुछ दिन बाकी थे, आप इंतजार करते. आपने सोचा कि वोट मिलेंगे, लेकिन आप चुनाव हार गए.
2- भ्रम फैलाया: कहा, सरकार बात नहीं करती जबकि जेपीसी बना दी गई थी
सबसे हास्यास्पद स्थिति यह है कि सरकार का किसी न किसी बहाने विरोध करने वाले लोग बिना किसी तर्क वक्फ बिल का विरोध कह रहे थे कि सरकार बात ही नहीं करना चाहती. कांग्रेस सदस्य के.सी. वेणुगोपाल ने सरकार पर विधेयक को जबरन पारित कराने का प्रयास का आरोप लगाया कि उन्हें अपने संशोधन पेश करने को पर्याप्त समय नहीं दिया. के.सी.वेणुगोपाल ने कहा, आप वास्तव में कानून जबरन थोप रहे हैं, आपको संशोधनों के लिए समय देना चाहिए. उनके पास संशोधनों के लिए समय नहीं है.
आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन के विधेयक पर सरकार की अपनाई प्रक्रिया पर कुछ आपत्तियां उठाए जाने के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष का आग्रह था कि संयुक्त संसदीय समिति बनाई जाए. हमारे पास कांग्रेस जैसी समिति नहीं है. हमारे पास लोकतांत्रिक समिति है, जो विचार-विमर्श करती है. कांग्रेस के जमाने में समिति होती थी जो ठप्पा लगाती थी. हमारी समिति चर्चा करती है, चर्चा के आधार पर विचार-विमर्श करती है और बदलाव करती है. अगर बदलाव स्वीकार नहीं किए जाने हैं, तो समिति का क्या मतलब है. इसमें व्यवस्था का कोई मुद्दा नहीं है.
वक्फ संशोधन विधेयक के लिए संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने बताया हमने पिछले छह महीनों में जेपीसी की बैठकें की हैं. हमने विपक्ष को हर दिन 8 घंटे सुना है. रिजिजू ने बताया कि मैं यह कहना चाहता हूं कि वक्फ संशोधन विधेयक पर दोनों सदनों की संयुक्त समिति में जो चर्चा हुई है, वह भारत के संसदीय इतिहास में आज तक कभी नहीं हुई. मैं संयुक्त समिति के सभी सदस्यों को धन्यवाद और बधाई देता हूं.आज तक विभिन्न समुदायों के कुल 284 प्रतिनिधिमंडलों ने समिति के समक्ष अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत किए हैं. 25 राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के वक्फ बोर्डों ने भी अपनी दलीलें पेश की हैं. रिजिजू ने कहा कि पिछले साल अगस्त में पेश इस विधेयक के संबंध में 97.27 लाख याचिकाएं प्राप्त हुईं. जेपीसी ने इसकी जांच की. इससे पहले रिजिजू ने मीडिया से कहा कि यह विधेयक देश के हित में है.
3-गैरइस्लामी लोगों को क्यों बोर्ड में जगह दी जा रही है?
विपक्ष के नेताओं को वक्फ बिल का सबसे बड़ा विषय यही दिखा कि मुसलमानों के मामले में गैरइस्लामी लोग क्यों शामिल किये जा रहे है. शायद नेताओं ने बिल पढ़ा नहीं. उन्हें केवल इतना ही पता है इसलिए इस विषय पर ही खेल रहे हैं. भाजपा सांसद निशिकांत दुबे कहते हैं कि ये पूरी दुनिया के जानने का सवाल है कि हिंदू वक्फ बोर्ड में क्यों आया. पहला वक्फ मोहम्मद साहब को जिसने किया, वो यहूदी था. उसने अपने सात बगीचे मदीना में मोहम्मद साहब को गिफ्ट किये. पहला वक्फ यदि मुसलमानों ने नहीं किया तो मोहम्मद साहब के सिद्धांत के खिलाफ जाकर हिंदुओं को कैसे रोक सकते हो.
दूबे कहते हैं कि एमपी वक्फ बोर्ड बनाम शुभम साह का ऑर्डर लेकर आया हूं. हिंदू दान दे, बहुत अच्छा लेकिन वक्फ बोर्ड में मुसलमान छोड़कर दूसरा कैसे हो गया. वक्फ की संपत्ति राजा-महाराजा ने दी तो हिंदुओं को क्यों सदस्य नहीं बनाओगे. आज देश में फैसला हो जाना चाहिए. यहां गोरी आए, गजनी आए, बाबर आए. तीनों लुटेरे के तौर पर आए. आप मानते हो कि नहीं. यदि मानते हो तो हिंदुस्तान में पहला वक्फ गोरी ने किया. हिंदुओं की संपत्ति लूटी और उसी में से दो गांव वक्फ को दे दिए. आप इतिहास के पन्नों से नहीं लड़ सकते हो.
गृहमंत्री अमित शाह ने खुद कहा कि कोई मुसलमानों के धार्मिक मामले में कोई भी गैरइस्लामिक व्यक्ति नहीं शामिल होगा. दरअसल वक्फ बोर्ड हिंदुओं और ईसाईयों की भी बहुत सी संपत्तियां वक्फ में शामिल करता है. अगर दूसरे धर्म के जमीन शामिल करनी है तो उसकी वैधता की जांच एक मुसलमान कैसे कर सकता है. इस बात को समझे बिना आप गैर इस्लामिक लोगों को बोर्ड में शामिल करने की बात नहीं समझ सकता.
4– डर फैलाओ: मुसलमानों के अधिकार छीन लिये जाएंगे, उन्हें मार्जिनलाइज किया जा रहा है
विपक्ष का वक्फ बोर्ड बिल के उपबंधों पर बहस करने का इरादा बिल्कुल भी नहीं था. शायद यही कारण है कि विपक्ष के किसी भी नेता उन मुद्दों की चर्चा नहीं की जिसके चलते सरकार अधिनियम में संशोधन करने का विचार कर रही है. विपक्ष का विरोध केवल इस पर फोकस्ड है जिसमें केवल मुस्लिम आम जनता को डराया जा सके. कई मु्स्लिम विचारक , धर्मगुरु इस आधार पर ही बिल का सपोर्ट कर रहे हैं. बुधवार को कई शहरों में मुसलमानों ने पत्थरबाजी की जगह मिठाइयां बांटी .
During Debate In Parliament Bjp Mp Nishikant Dubey Lashed Out At Congress On Wakf Amendment Bill
‘हिंदू दान दे लेकिन वक्फ का मेंबर नहीं होगा’, निशिकांत दुबे ने विपक्ष को दिखाया मोहम्मद साहब वाला आईना
वक्फ बोर्ड संशोधन बिल को लेकर संसद में चल रही बहस के दौरान देवघर से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस को जमकर लताड़ा। उन्होंने संसद में बोलते हुए कई ऐतिहासिक घटनाओं के साथ सबूत देते हुए कांग्रेस और विपक्ष को समझाया कि वक्फ बोर्ड में कैसे हिंदुओं ने अपनी जमीन दी। उन्होंने ये भी बताया कि पहली बार वक्फ बोर्ड के लिए एक यहूदी ने संपत्ति दान की
- वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पर निशिकांत दुबे का बयान
निशिकांत दुबे ने संसद में कांग्रेस और विपक्ष को धोया
मोहम्मद साहब का उदाहरण देकर सांसद ने समझाया
वक्फ संशोधन बिल पर बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि सभापति महोदय मैं दो तीन चीजों की तरफ आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं। मुजफ्फर रिजवी जी ने एक शायरी लिखी। लम्हों ने खता की है, सदियों ने सजा पाई है। पर क्या सजा है। ये पूरी दुनिया को जानने वाला सवाल है, सर कि हिंदू वक्फ बोर्ड में क्यों आएं? पैगम्बर मोहम्मद साहब ने वक्फ करने के लिए कहा। पहला वक्फ जिसने मोहम्मद साहब को किया। वो यहूदी था। उसका नाम मुखेरत था। उसने अपने सात बगीचे मदीना साहब को दे दिए। मोहम्मद साहब ने उसके मारे जाने के बाद उसकी संपत्ति को जब्त किया।
हिंदुओं ने दिया दान
उन्होंने आगे कहा कि पहला चैरिटेबल वक्फ स्टार्ट किया। यदि मुसलमानों ने पहला वक्फ नहीं दिया और यहूदी ने दिया ,आप मोहम्मद साहब के सिद्धांत के खिलाफ जाकर आप हिंदुओं को कैसे रोक सकते हो। दूसरा सवाल ये है। मैं कोर्ट का आदेश लेकर आया हूं। एमपी वक्फ बोर्ड वर्सेस शुभम साह। ये 2007 का ऑर्डर है। जो भोपाल की मस्जिद है। जिसे शहंशाह- ए- मालवा कहते हैं। ये राजा होलकर ने दान दिया वक्फ बोर्ड को। हिंदु दान दे बहुत अच्छा। यहूदी दान दे बहुत अच्छा। लेकिन वक्फ बोर्ड में मुसलमान को छोड़कर कोई दूसरा कैसे होगा। हिंदू ने दिया। ये जितने लोगों ने कहा है उन्होंने पूरी दुनिया को झूठ बोला है। यदि वक्फ की संपत्ति हिंदुस्तान में राजा- महाराजाओं ने दी। आप उसमें हिंदुओं को क्यों नहीं मेंबर बनाओगे।
जिन्ना की चर्चा
उन्होंने आगे कहा कि दूसरा आज इस देश में फैसला हो जाना चाहिए। यहां गोरे आए, गजनी आए और बाबर आए। तीनों लुटेरे के तौर पर आए। गोरे को और गजनी को अक्रांता मानते हो कि नहीं मानते हो। हिंदुस्तान में पहले वक्फ की शुरुआत मोहम्मद गोरी ने की। गोरी ने हिंदुओं की संपत्ति को लूटा। इस देश में ये वक्फ एक्ट आया कैसे। ये जिन्ना को पाकिस्तान बनाने का जिम्मेदार मानते हैं कि नहीं मानते हैं। ये मैं पेपर लेकर आया हूं सर। 1910 में कांग्रेस पार्टी ने मुंबई से। उसने जिन्ना को मेंबर ऑफ पार्लियामेंट बनाया। जिन्ना ने वक्फ बोर्ड बनाया। आज फिर वक्फ के नाम पर इस देश का बंटवारा करना चाहते हैं।
.,प्रमाणों से समझाया
निशिकांत दुबे ने कहा कि आजादी के बाद आज तक किसी का प्राइवेट मेंबर बिल पास हुआ है। मेरा एक रिज्योलूशन पास हुआ है। धारा 370 खत्म होना चाहिए। 35 ए खत्म होना चाहिए। इसलिए पास हुआ कि वो भाजपा की आइडियोलॉजी थी। ये जो 1954 का वक्फ एक्ट है। 1952 में इसे काजमी साहब लेकर आए। जब ये बिल पास हो गया तो सेलेक्ट कमेटी बनी। उसके मेंबर थे अमजद अली। आप मुसलमानों की बात करते हैं। दो लोग थे। एक का नाम था मोहन लाल सक्सेना। दूसरे का नाम अमजद अली। ये लोग खिलाफ थे लेकिन कांग्रेस मुसलमानों को प्रभावित करने के लिए इस बिल को पास कराना चाहती थी। एक गैर सरकारी बिल को सरकारी बिल बताकर मुसलमानों की राजनीति करते हो आप।
मुसलमानों की बात
उन्होंने कहा कि हमारे यहां से ज्यादा मुसलमान तुर्की में, इंडोनेशिया में और सऊदी में हैं। हम लोग बहुत संविधान की शपथ लेते हैं। संविधान की बात करते हैं। अमेरिका सेक्युलर है कि नहीं। अंग्रेज सेक्य़ुलर थे की नहीं। आप साउथ ब्लॉक, नार्थ ब्लॉक और प्रधानमंत्री के ऑफिस चले जाइए। राष्ट्रपति भवन जाइए। पुराना संसद भवन जाइए। आपको सब जगह गीता का श्लोक दिखाई देगा। एक बार ऊर्दू में नहीं और एक बात संस्कृत में नहीं। अमेरिका का राष्ट्रपति यदि शपथ लेगा, तो बाइबल पर लेगा। पूरी दुनिया में कोई मुस्लिम कंट्री नहीं है, जिसमें वक्फ बोर्ड कोई अधिकार दिया हुआ है। क्या भारत को आप मुस्लिम कंट्री बनाना चाहते हो। नेहरू ने गीता पर हाथ रखकर शपथ ली थी। संविधान पर हाथ रखकर शपथ नहीं ली थी।
गृहमंत्री शाह ने कहा कि वक्फ में एक भी गैर इस्लामिक नहीं आएगा. ऐसा कोई प्रोविजन भी नहीं है. वोट बैंक के लिए माइनॉरिटीज को डराया जा रहा है. वक्फ एक अरबी शब्द है. इसका मतलब है अल्लाह के नाम पर धार्मिक उद्देश्यों के लिए संपत्ति का दान. दान उसी चीज का किया जाता है, जिस पर हमारा हक है.
शाह ने कहा- जहां तक भारत का सवाल है। आजादी के बाद इसे बदला गया. ये पूरा झगड़ा 1995 से चल रहा है. ये पूरा झगड़ा वक्फ में दखल का है. सुबह से जो चर्चा चल रही है. उसे मैंने बारीकी से सुना है. ढेर सारी भ्रांतियां सदस्यों में हैं. कई भ्रांतियां देश में फैलाई जा रही हैं.
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