उमेश कोल्हे हत्या सहअभियुक्त यूसुफ की ज़मानत से बॉम्बे हाको ने क्यों की “न”
‘इसको बताना है… क्या परिणाम होता है’: उमेश कोल्हे की हत्या में यूसुफ खान को जमानत देने से बॉम्बे HC का “न”, कहा- समाज आतंकित करना चाहते थे
उमेश कोल्हे के हत्या मामले में यूसुफ की जमानत याचिका निरस्त
मुंबई 21 जनवरी 2026। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार (20 जनवरी 2026) को अमरावती के केमिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या के मामले में आरोपित पशु चिकित्सक यूसुफ खान को जमानत से मना कर दिया। उमेश कोल्हे की 2022 में हत्या इसलिए हुई थी कि उन्होंने पूर्व भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में वॉट्सऐप पर संदेश भेजा था। जमानत निरस्त करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि पहली नजर में यह मामला सिर्फ हत्या का नहीं बल्कि आतंकी कृत्य का है। अदालत के अनुसार, नूपुर शर्मा के बयान को आरोपितों ने मजहब का अपमान मान प्रतिशोध षड्यंत्र रचा और सामान्य जन में डर फैलाने को यह हत्या की ।
जस्टिस ए.एस. गडकरी और जस्टिस श्याम सी. चांडक की पीठ ने कहा कि NIA के प्रमाण दिखाते हैं कि यह न तो साधारण आपराधिक षड्यंत्र था और न ही कोई अकेली हिंसक घटना। हत्या की योजना, तरीका और उद्देश्य सामाजिक व्यवस्था और सामूहिक चेतना झकझोरता है। इसी से UAPA कानून में आरोपित को जेल में रखना सही ठहराया गया।
यूसुफ खान के वकील ने तर्क दिया कि यह मामला सिर्फ व्यापारिक विवाद का है लेकिन अदालत ने यह तर्क अमान्य कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पूरा घटनाक्रम आरोपित ने जानबूझकर उकसाया, पीड़ित की पहचान बताई और ऐसी घटनाओं की कड़ी में शामिल रहा, जिसका अंत एक निर्मम हत्या में हुआ ताकि समाज में डर फैले।
उमेश कोल्हे की हत्या की पृष्ठभूमि
उमेश कोल्हे, महाराष्ट्र के अमरावती में दवाइयों की दुकान चलाते थे। 21 जून 2022 की रात दुकान बंद कर घर लौटते समय उनकी हत्या हो गई। हत्या नूपुर शर्मा के बयान को लेकर हिंसक पृष्ठभूमि में हुई थी। कोल्हे ने 14 जून 2022 को एक व्हाट्सएप ग्रुप में नूपुर शर्मा के समर्थन में फोटो और संदेश साझा किया था। ऐसे ही पोस्ट करने वाले कई लोगों को माफी मांगने को मजबूर किया गया लेकिन कोल्हे को जानबूझकर निशाना बनाया गया। अभियोजन के अनुसार यह हत्या अचानक नहीं बल्कि सोचे-समझे षड्यंत्र का नतीजा थी।
यूसुफ खान की भूमिका ‘व्यापारिक वैर’ तर्क क्यों हुआ अमान्य
कोर्ट ने यूसुफ खान को इस हत्या की छोटी कड़ी या संयोगवश जुड़ा व्यक्ति मानने से मना कर दिया । पशु चकित्सक यूसुफ खान उमेश कोल्हे को पहले से जानता था। वह नियमित रूप से कोल्हे की दुकान से दवाइयाँ खरीदता था। दोनों एक वॉट्सऐप ग्रुप ‘ब्लैक फ्रीडम’ में थे, जिसमें वेटरनरी केमिस्ट और मेडिकल प्रतिनिधि थे। इस ग्रुप में यूसुफ खान अकेला मुस्लिम सदस्य था। जांच में आया कि यूसुफ ने अपनी बहन की शादी में उमेश से आर्थिक मदद भी ली थी.
कोर्ट ने कहा कि खान कोल्हे की नूपुर शर्मा समर्थक पोस्ट से आहत था। उसने दावा किया कि वह सिर्फ कोल्हे का व्यवसाय नष्ट करना चाहता था । हालाँकि, हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद प्रमाण के आधार पर इस तर्क को अविश्वसनीय बताया।
कोर्ट ने कहा कि अगर उद्देश्य सिर्फ व्यापार रोकना होता तो यह संदेश केवल ग्राहकों तक सीमित रहता। खान ने वह पोस्ट कई वॉट्सऐप ग्रुपों और ऐसे लोगों तक फैलाया जिनका कोल्हे से कोई व्यवसायिक संबंध नहीं था। इससे साफ है कि उसका उद्देश्य आर्थिक दबाव नहीं बल्कि उकसा कर निशाना बनाना था।
कोर्ट ने यह भी कहा कि खान पढ़ा-लिखा पेशेवर व्यक्ति था जो तब के संवेदनशील वातावरण को समझता था। इसके बावजूद उसने हालात शांत करने के बजाय भड़काऊ संदेश फैलाया। यही बात जमानत के समय उसके खिलाफ गई।
वॉट्सऐप संदेश,मोबाइल नंबर परिवर्तन और उद्देश्य कैसे सिद्ध हुआ
कोर्ट निर्णय में यूसुफ खान के भेजे व्हाट्सएप संदेश को बेहद महत्वपूर्ण माना गया। कोर्ट ने पाया कि उमेश कोल्हे की पोस्ट का स्क्रीनशॉट लेने से पहले खान ने जानबूझकर कोल्हे के मोबाइल नंबर में हेर-फेर कर नंबर दोबारा सेव किया ताकि उसकी पहचान और संपर्क जानकारी ज्यादा लोगों तक पहुँचे।
इसके बाद यूसुफ खान ने हिंदी में भड़काऊ संदेश लिखकर लोगों से कहा कि कोल्हे को ‘सबक’ सिखाए। मेसेज में लिखा, “अमित मेडिकल प्रभात टाकीज तहसील के सामने, इसे बताना है कि जिन लोगों के भरोसे कमाई की उनसे ही दुश्मनी का अंजाम क्या होता है, इस मेसेज को ज्यादा से ज्यादा ग्रुप में सेंड करें।”
कोर्ट ने नोट किया कि खान ने संदेश सिर्फ एक बार नहीं बल्कि कई प्लेटफॉर्म पर फैलाया और इसके तुरंत बाद एक अन्य आरोपित (आरोपित नंबर-5) से मिला। अदालत के अनुसार, यह घटनाक्रम उकसावे से षड्यंत्र तक साफ कड़ी दिखाता है, न कि कोई भावनात्मक या अचानक की हरकत।
फोन रिकॉर्ड, बैठकें और पर्दे के पीछे की भूमिका पर अदालत की टिप्पणी
कोर्ट ने जमानत निरस्त करते यूसुफ खान और आरोपित नंबर-5 में फोन बातचीत महत्वपूर्ण मानी। रिकॉर्ड के अनुसार, हत्या से पहले और बाद में दोनों में 25 फोन कॉल हुए। गवाहों के बयान और लोकेशन डेटा के साथ इन कॉल्स को षड्यंत्र में शामिल होने का मजबूत प्रमाण माना गया।
अभियोजन ने कहा कि आरोपित नंबर-5, खान और अन्य आरोपितों में कड़ी था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि षड्यंत्र में शामिल होने को हर बैठक में उपस्थिति जरूरी नहीं होती।
कोर्ट ने यह भी पाया कि 9 जून 2022 को खान की लोकेशन रोशन हॉल के पास थी, जहाँ नूपुर शर्मा के बयान के खिलाफ FIR को लेकर बैठक हुई । इसके बाद उसकी लगातार बातचीत और सह-आरोपितों से संपर्क से सिद्ध हुआ कि वह शुरू से ही योजना का हिस्सा था। अदालत ने कहा कि खान ने भड़काऊ संदेश फैला खुद को हत्या की सीधी कार्रवाई से दूर रखा लेकिन पर्दे के पीछे रहकर षड्यंत्र आगे बढ़ाता रहा ।
अदालत ने षड्यंत्र को कैसे समझा और UAPA क्यों लगा
अदालत ने इस षड्यंत्र को अलग-अलग घटनाओं के बजाय पूरी घटनाक्रम की कड़ी माना। अभियोजन के अनुसार, यूसुफ खान का भड़काऊ संदेश षड्यंत्र की शुरुआत था। इसके बाद वह आरोपित नंबर-5 से मिला, जो कोल्हे की पोस्ट से नाराज था। फिर आरोपित नंबर-5 अन्य आरोपितों से गौसिया हॉल में मिला जहाँ उमेश कोल्हे की सोशल मीडिया पोस्ट पर विस्तार से चर्चा हुई ।
कोर्ट ने बताया कि 19 जून 2022 को हुई बैठक में तय हुआ कि कोल्हे को उनका मजहबी अपमान करने की ‘सजा’ में मारा जाएगा । हत्या का तरीका भी तय हुआ। 20 जून को पहली कोशिश दुकान बंद रहने से विफल रही। 21 जून रात रेकी के बाद कोल्हे की गर्दन चाकू से काट हत्या हुई।
हाईकोर्ट ने कहा कि षड्यंत्र प्रत्यक्ष प्रमाणों से हीं बल्कि व्यवहार, बातचीत और परिस्थिति से सिद्ध है। खान के मामले में रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से षडयंत्र में उसकी सहमति साफ दिखती है।
कोर्ट ने आरोपितों को ‘आतंकी गिरोह’ बता कहा कि यह हत्या निजी बदले नहीं बल्कि समामेंकओ भयभीत करने को की गई थी। अदालत ने माना कि यह संदेश देना उद्देश्य था कि कुछ विचारों का समर्थन करने पर हिंसक परिणाम भुगतना पड़ेगा। इसी से UAPA की धाराएँ लागू हुईं और जमानत से “न” हो गई ।
यूसुफ खान की जमानत निरस्त करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने साफ संदेश दिया कि विचारधारा प्रेरित हिंसा, चाहे वह डिजिटल उकसावे से ही क्यों न शुरू हुई हो उसे हल्के में नहीं लिया जाएगा। अदालत ने कहा कि बोलने की आजादी को ‘सजा’ देने और पूरे समाज को डराने को की गई लक्षित हत्यायें निजी वैर या व्यापारिक विवाद बताकर कमजोर नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि षड्यंत्र हर चरण में नही दिखता। कोई व्यक्ति अंतिम वार से दूर रहकर भी चुपचाप और सोच-समझकर भूमिका निभा सकता है और तब भी उसका आपराधिक उत्तरदायित्व बना रहता है। न्यायालय ने कहा कि जब हिंसा का उद्देश्य केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि समाज को डराना और दूसरों की आवाज दबाना हो, तो UAPA लागू होता है। खान की जमानत निरस्तीकरण सजा नहीं बल्कि अपराध की गंभीरता और शुरुआती प्रमाणों का विधिक परिणाम है।
अन्य आरोपियों की स्थिति (कुल 11)
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस मामले में 11 व्यक्तियों को आरोपित बनाया है। उन पर गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और IPC (भारतीय दंड संहिता) में हत्या और षड्यंत्र के आरोप लगाए गए हैं।
वर्तमान स्थिति: अधिकांश मुख्य आरोपित वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। अदालत ने हाल ही में टिप्पणी की कि चूंकि उन पर UAPA में आरोप लगाए गए हैं, इसलिए “ज़मानत की बाधा” बहुत अधिक है, क्योंकि अभियोजन पक्ष को केवल यह दिखाने की आवश्यकता होती है कि आरोप ‘प्रथम दृष्ट्या’ (prima facie) सत्य हैं।
उदयपुर मामले से तुलना
अदालत ने ज़मानत से इनकार करते समय 2022 के व्यापक वातावरण को भी ध्यान में रख उल्लेख किया कि कोल्हे की हत्या (21 जून) उदयपुर में कन्हैया लाल की इसी तरह की हत्या से ठीक एक सप्ताह पहले हुई। अदालत ने इन्हें अलग-थलग आपराधिक कृत्यों के बजाय “आतंक फैलाने” की प्रवृत्ति देखी।
Amravati Umesh Kolhe Murder Case: अमरावती के उमेश कोल्हे हत्याकांड का मास्टरमाइंड इरफान खान अंदर
नागपुर से पकड़ा गया 35 वर्षीय इरफान अमरावती में ही एक NGO चलाता है और खुद को सोशल वर्कर बताता है।
हत्याकांड आरोपित इरफान को पुलिस ने नागपुर से पकड़ा।इरफान पर ही उमेश कोल्हे की हत्या का षड्यंत्र रचने का आरोप है।इरफान NGO चलाता है और उसकी एक एम्बुलेंस सर्विस भी है।
महाराष्ट्र के अमरावती में कथित तौर पर नूपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से केमिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या का मास्टरमाइंड इरफान खान गिरफ्तार हो गया है। पुलिस ने इरफान को नागपुर से गिरफ्तार किया है और वह उमेश कोल्हे हत्याकांड में गिरफ्तार होने वाला 7वां आरोपी है। इरफान खान एक NGO चलाता है और आरोप है कि उसी ने शमीम और उसके दोस्तों को हत्या के मोटिवेट किया था। बताया जा रहा है कि इरफान ने हत्यारों को लॉजिस्टिक सपोर्ट भी दिया था। शमीम अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
नागपुर में पकड़ा गया मास्टरमाइंट इरफान
नागपुर से पकड़ में आया 35 वर्षीय इरफान अमरावती में ही एक NGO चलाता है और खुद को सोशल वर्कर बताता है। इरफान की ऐम्बुलेस सर्विस भी है। उमेश कोल्हे की हत्या के बाद वह फरार हो गया था। वहीं, इस हत्याकांड में युसूफ खान नाम के एक वेटरनरी डॉक्टर का भी रोल सामने आया है जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उमेश कोल्हे मर्डर केस में IPC की धारा 120B और 109 को जोड़ा है। अन्य आरोपितों के नाम मुदस्सिर अहमद उर्फ सोनू रजा (22 वर्ष), शाहरुख पठान उर्फ नानु शेख (24 वर्ष), शोएब खान (22 वर्ष), आतिब रशीद (22 वर्ष) और युसूफ खान (44 वर्ष) हैं।
केंद्र ने उमेश कोल्हे केस की जांच NIA को सौंपी
बता दें कि केंद्र सरकार ने शनिवार को उमेश कोल्हे हत्याकांड की जांच NIA को सौंप दी है। केंद्र ने यह फैसला इन खबरों के सामने आने के बाद कि केमिस्ट की हत्या नुपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट का नतीजा है,लिया। NIA ने हत्या के षडयंत्र और इस घटना के तार अंतरराष्ट्रीय संगठनों से जुड़े होने की भी गहन जांच की। कोल्हे की हत्या 21 जून की रात 10 बजे से 10.30 बजे के बीच की गयी, जब वे दुकान बंद कर दोपहिया गाड़ी से घर लौट रहे थे।
राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के सूत्रों के मुताबिक अमरावती के उमेश कोल्हे हत्याकांड के आरोपितों में से 3 आरोपितों को संदिग्ध इंटरनेशनल कॉल्स आए थे. ये संदिग्ध कॉल्स हत्याकांड के आरोपित इरफान शेख,अब्दुल तौफीक और आतिब राशिद को 25 मई को जर्मनी, ब्रिटेन और पाकिस्तान से आए थे. हालांकि, पूछताछ में आरोपितों ने ये इंटरनेशनल कॉल्स नकार दिये, लेकिन आरोपितों के सीडीआर में मिले ये नम्बर एजेंसियों की संदिग्ध सूची में मौजूद हैं.
एनआईए के अनुसार उदयपुर में दर्जी की हत्या के आरोपितों के पाकिस्तान लिंक में मौजूद प्रोपगेंडा मास्टरमाइंड और अमरावती हत्याकांड के आरोपितों के विदेशों में बैठे प्रोपगेंडा मुखिया या तो एक दूसरे से जुड़े हैं या तो एक ही हैं । एनआईए उन्हें इस मामले की जांच को राजस्थान ले गई.
