गजवा-ए-हिंद: जिंदा है,सिद्धांत भी,व्यवहार भी,दो और सिपाही गये जेल
गजवा-ए-हिंद साजिश केस: 12 दिन से एटीएस की रडार पर था अजमल और उसका परिवार, अमरोहा में एटीएस ने की थी पूछताछ
गजवा ए हिंद केस में अमरोहा का अजमल अली पकड़ा गया है। उससे एटीएस ने कई बार पूछताछ की थी। अजमल के पकड़े जाने के बाद मोहल्ले के लोग हैरान है। स्थानीय पुलिस भी इसकी जांच करने में जुट गई है।
Ghazwa-e-Hind conspiracy case: Ajmal and his family were radar ATS for twelve days, ATS interrogated them
अजमल और उसामा
राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में एटीएस द्वारा गिरफ्तार अजमल अली करीब दो सप्ताह से एटीएस की रडार पर था। करीब 12 दिन पहले एटीएस के अधिकारी उनके घर पहुंचे थे और दो घंटे पूछताछ के बाद तीनों पिता-पुत्र को अपने साथ ले गई थी। मुरादाबाद में किसी गुप्त स्थान पर पूछताछ के बाद शाम को छोड़ दिया था।
नौगांवा सादात थानाक्षेत्र के गांव देहरा निवासी असगर खान का बेटा अजमल अली बीएससी का छात्र है, जबकि असगर खान कस्बा में स्थित एक डिग्री काॅलेज में संविदा शिक्षक हैं। इसके अलावा घर पर जैकेट सिलाई का काम भी करते हैं। उनके परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटे अनस व अजमल और एक बेटी भी है।
अनस भी जैकेट सिलाई का काम करता है। असगर खान मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनका मंझला बेटा अजमल बिजनौर के एक डिग्री काॅलेज में बीएससी का छात्र है। बेहद शांत स्वभाव का अजमल गांव में लोगों से बात नहीं करता था। उसकी गांव में किसी से दोस्ती भी नहीं है।
करीब 12 दिन पहले एटीएस की टीम में शामिल छह लोग उनके घर पहुंचे और खुद को एटीएस के अधिकारी बताते हुए गेट बंद कर लिया। करीब दो घंटे पूछताछ करने के बाद असगर खान, अनस और अजमल को अपने साथ ले गए थे। तीनों पिता-पुत्रों से मुरादाबाद में किसी स्थान पर पूछताछ की गई और शाम को उन्हें घर भेज दिया था।
एटीएस की पूछताछ का यह सिलसिला तीन दिन तक चलता रहा। आठ दिन पहले टीम अजमल और उसके पिता को अपने साथ लखनऊ ले गई थी। वहां भी दोनों से चार दिन तक रोजाना पूछताछ की गई। एटीएस की पूछताछ के चलते पिता-पुत्र एक होटल में रुकते थे। इसके बाद एक अगस्त को एटीएस ने अजमल को गिरफ्तार कर लिया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
अजमल अली की गिरफ्तारी के बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासन भी सतर्क हो गया है। जिले की खुफिया एजेंसी ने भी अजमल अली के गांव पहुंचकर बारीकी से पूरी जानकारी जुटाई है। सीओ अवधभान भदौरिया ने अजमल की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि नौगांवा सादात थाने में अजमल या उनके परिवार के किसी सदस्य का आपराधिक रिकार्ड नहीं है।
अजमल की गिरफ्तारी के बाद ग्रामीणों में दबी जुबान में उसके व्यवहार को लेकर चर्चा रही। परिजनों ने घर का गेट बंद रखा और उन्होंने किसी से बात नहीं की है।
अजमल अली पर ये है आरोप
यूपी एटीएस की जानकारी के मुताबिक अजमल अली रिवाइविंग इस्लाम ग्रुप में जुड़ा था। ग्रुप में तीन एडमिन समेत 400 पाकिस्तानी सदस्य हैं। अजमल अली विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से राष्ट्र विरोधी व गैर मुस्लिम धर्म के व्यक्तियों के प्रति कट्टरपंथी विचारधारा को प्रसारित-प्रचारित कर रहा था।
इतना ही नहीं, रिवाइविंग इस्लाम ग्रुप के अलावा वह अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी कई पाकिस्तानियोः के संपर्क में था। अजमल अली महाराष्ट्र राज्य के जिला ठाणे के थाना बादलापुर पश्चिम के दरगाह बदलापुर गांव के रहने वाले डॉ. उसामा माज शेख को अपना सीनियर और गुरु मानता था।
अजमल अली की डॉ. उसामा से उसकी इंस्टाग्राम व सिग्नल एप के माध्यम से भारत विरोधी बातें होती थी। भारत की चुनी हुई सरकार गिरकर शरिया लागू करने की बात की जाती थी। हिंसात्मक जिहाद के माध्यम से भारत में गजवा-ए-हिंद करके शरिया का कानून लागू करना चाहते थे। इस मामले में एटीएस ने अजमल के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
बाद में उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। इसके बाद एटीएस ने सोमवार को डॉ. उसामा माज शेख को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपी नवयुवकों को गैर मुसलमानों के प्रति भड़काकर उनमें रोष पैदा करते थे, उन्हें भारत विरोधी और अपराधी गतिविधियों को प्रेरित करते थे।
सोशल मीडिया पर रच रहे थे भारत विरोधी षडयंत्र
एटीएस ने गजवा-ए-हिंद की साजिश रचने वाले दो कट्टरपंथी युवकों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान अमरोहा के थाना नौगवां सादात के ग्राम देहरा निवासी अजमल अली व महाराष्ट्र के थाणे निवासी डॉ. उसामा माज शेख के रूप में हुई है। दोनों आरोपित पाकिस्तान के व्हॉट्सएप ग्रुप पर जुड़कर भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे थे और गैर मुस्लिमों के विरुद्ध जिहाद की साजिश रच रहे थे।
गजवा-ए-हिंद साजिश रचने वाले दो युवक गिरफ्तार।- आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने गजवा-ए-हिंद की साजिश रचने वाले दो कट्टरपंथी युवकों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान अमरोहा के थाना नौगवां सादात के ग्राम देहरा निवासी अजमल अली व महाराष्ट्र के थाणे निवासी डॉक्टर उसामा माज शेख के रूप में हुई है। दोनों आरोपित पाकिस्तान के व्हॉट्सएप ग्रुप पर जुड़कर भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे थे और गैर मुस्लिमों के विरुद्ध जिहाद की साजिश रच रहे थे।एटीएस को कुछ समय पहले सूचना मिली थी कि ”रिवाइविंग इस्लाम” व्हाट्सएप ग्रुप पाकिस्तान से संचालित हो रहा है। ग्रुप के 400 सदस्यों में भारत से भी दो युवक हैं। इनके फोन नंबरों से एटीएस ने इनकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। इसीमें एटीएस ने लखनऊ मुख्यालय में पूछताछ को अजमल अली को बुलाया था। उसने कबूला कि वह लंबे समय से पाकिस्तानी व्हाट्सएप ग्रुप के कट्टरपंथ के एजेंडे पर काम कर रहा था। साथ ही इंस्टाग्राम व सिग्नल एप से वह महाराष्ट्र निवासी डॉक्टर उसामा से संपर्क में था। अपने मार्गदर्शक डॉक्टर उसामा के कहने पर वह इंटरनेट मीडिया से भारत-विरोधी गतिविधियों में लिप्त था और सरकार को गिरा कर शरिया लागू करने का ताना-बाना बुन रहा था। इसके लिए दोनों आरोपित मुस्लिम युवकों को देश विरोधी गतिविधियों के लिए भड़का रहे थे।
अजमल के राजफाश बाद एटीएस ने मुकदमा लिख उसे जेल भेज दिया है। वहीं, महाराष्ट्र एटीएस और थाणे पुलिस के सहयोग से सोमवार को डा. उसामा को भी दबोच लिया गया है। उसे ट्रांजिट रिमांड पर एटीएस की टीम लखनऊ लेकर आ रही है। दोनों को अदालत में पेश किया जाएगा और कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी।
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आगरा: धर्मांतरण के पीछे गजवा-ए-हिंद की साजिश! दिल्ली से कम पश्चिम बंगाल से ऑपरेट हो रहा गैंग
कई साल से कुछ संगठन गजवा-ए-हिंद मुहिम की साजिश के चलते संदेह के घेरे में आए थे। जब इसका खुलासा हुआ तो केंद्र सरकार ने कई संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया। अब आगरा से महजब तब्दीली गैंग पकड़े जाने के बाद गजवा-ए-हिंद का जिन्न फिर बाहर निकला है।
Fri, 25 Jul 2025, 12:46:PM
Srishti Kunjमुख्य संवाददाता, आगरा
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आगरा: धर्मांतरण के पीछे गजवा-ए-हिंद की साजिश! दिल्ली से कम पश्चिम बंगाल से ऑपरेट हो रहा गैंग
कई साल से कुछ संगठन गजवा-ए-हिंद मुहिम की साजिश के चलते संदेह के घेरे में आए थे। जब इसका खुलासा हुआ तो केंद्र सरकार ने कई संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया। अब आगरा से महजब तब्दीली गैंग पकड़े जाने के बाद गजवा-ए-हिंद का जिन्न फिर बाहर निकला है। पुलिस की मानें तो धर्मांतरण गैंग के मास्टर माइंड अब्दुल रहमान के गिरफ्तार बेटे ने खुलासा किया है कि धर्मांतरण के पीछे का मकसद गजवा-ए-हिंद साजिश है। गैंग के सदस्य कोलकाता को धर्मांतरण का मरकज मानते हैं। वहां उन्हें आसानी से धर्मांतरण, ब्रेनवॉश और ट्रेनिंग की सहूलियत मिल जाती है।
आगरा की सगी बहनों के धर्मांतरण मामले में अब तक मास्टर माइंड समेत गैंग के 14 लोग पकड़े जा चुके हैं। जांच एजेंसियों की पूछताछ में तब रहमान ने सच नहीं कबूला तो उसे पूरे परिवार के फंसने का डर दिखाया गया तो वह टूट गया और धीरे-धीरे गैंग की करतूत उजागर कर दीं। वह बेटों से बोला कि परेशान न होगा, जन्नत मिलेगी। अब पुलिस की पूछताछ में अब्दुल रहमान के बेटे ने बताया कि दिल्ली में भाजपा सरकार बनने के बाद खतरा बढ़ गया है। पहले दिल्ली में कोई खतरा नहीं था। बेवजह पुलिस उन्हें परेशान नहीं करती थी।
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वे आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त नहीं है मगर गजवा-ए-हिंद मुहिम से जरूर जुड़े हैं। उनका काम सिर्फ कलमा पढ़वाना है। वे किसी को फंसाकर नहीं लाते। गैंग के सदस्य जिन्हें फंसाते हैं, उनके पास भेजते हैं। पहले लोगों को दिल्ली में ही रखा जाता था। वहां गतिविधियों पर नजर बढ़ने के चलते कोलकाता को मरकज बना दिया है। वहां बड़ी संख्या में मुहिम चल रही है। आराम से सारे कागजात तैयार हो जाते हैं। घनी मुस्लिम बस्तियाों में किराए पर कमरे सस्ते में मिल जाते हैं। जिनका धर्मांतरण कराया जाता है, वे उनके लोगों के बीच ही रहते हैं। कोई खतरा कभी महसूस नहीं होता।
अब्दुल रहमान के बेटों ने पुलिस को बताया कि उनके पिता सबसे ज्यादा पश्चिमी बंगाल ही जाया करते थे। दिल्ली में उन्होंने कुछ समय से अपनी गतिविधियां कम कर दी थीं। पुलिस आरोपियों की यह बात सुनकर हैरान रह गई कि कोलकाता में जांच कराई जाए तो गली-गली में अब्दुल रहमान मिलेंगे। वहां धर्मांतरण के खिलाफ कोई कानून नहीं है। हालांकि गैंग ने किसी नाबालिग का धर्मांतरण नहीं कराया। जाल में फंसाने के बाद बालिग होने का इंतजार किया ।
गजवा -ए- हिंद का सपना पाले बैठा था यूपी में ISI का जासूस तुफैल! पड़ोसियों ने बताई बड़ी बातें
UP ATS ने वाराणसी निवासी तैफूल को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया है. अब उसको लेकर पड़ोसियों ने बड़ी बातें बताई हैं. 
उत्तर प्रदेश स्थित वाराणसी के आदमपुर क्षेत्र से पाकिस्तानी जासूस मोहम्मद तुफैल को UP ATS ने गिरफ्तार किया है. आरोप है कि वह भारत के महत्वपूर्ण स्थलों के सुरक्षा से संबंधित जानकारी पाकिस्तान को भेज रहा था? मोहम्मद तुफैल के परिजन और स्थानीय लोगों से बातचीत की है. इसमें लोगों ने चौंकाने वाली बातें बताई हैं.
संदिग्ध लगती थी उसकी गतिविधियां – पड़ोसी
आदमपुर स्थित मोहम्मद तुफैल के पड़ोसी राम प्रकाश का कहना है कि – तुफैल अपने मामा के यहां रह रहा था. वह बेहद शांत स्वभाव का था. परिवार में अन्य लोग अपने व्यापार में काफी व्यस्त रहते थे. जब भी उनके परिवार में कोई जलसा आयोजित किया जाता था, लोग उमड़ते थे. इसके अलावा परिवार 2 से 3 बार हज यात्रा भी कर चुका हैं. आसपास के लोगों से संपर्क काफी सीमित था, लेकिन कभी ऐसा आभास नहीं हुआ कि तुफैल पाकिस्तान के लिए तुफैल जासूसी भी कर सकता है.
वहीं एक अन्य पड़ोसी विनोद का भी कहना है कि – तुफैल का पहनावा और उसका हाव-भाव बेहद संदिग्ध लगता था. उसके पहनावे और बोलचाल में भी गजवा -ए- हिंद की बातें समझ में आती थी.
देश के साथ गद्दारी पाप होगा – ममेरा भाई
वहीं इस मामले पर मीडिया से बातचीत के दौरान तुफैल के ममेरा भाई सकलैन ने कहा कि – परिवार के किसी भी व्यक्ति का पाकिस्तान से कोई संपर्क नहीं है. तुफैल कैसे उनसे संपर्क रखता था, इसके बारे में कोई को आभास नहीं था. लेकिन अगर यह आरोंप सही साबित हो रहा है तो निश्चित ही यह पाप होगा. देश विरोधी गतिविधियों में जाना यह किसी को भी स्वीकार नहीं होगा. वीडियो से लेकर अलग-अलग जगह की जानकारी साझा करने के संबंध में परिवार के किसी भी सदस्य को जानकारी नहीं थी कि तुफैल पाकिस्तान के संपर्क में है. हम बिल्कुल भी पक्ष में नहीं है कि कोई भी व्यक्ति देश से धोखा करें. यह पाप जैसा होगा. और इसमें कानून का हर आदेश हमें स्वीकार होगा.
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क्या है गजवा-ए-हिंद का मकसद? विवादित फतवे जारी करने वाले दारुल उलूम का कच्चा चिठ्ठा भी जान लीजिए
विश्व प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद एक फतवे से चर्चा में आ गया है। दारुल उलूम देवबंद इस्लामी तालीम के लिए मशूहर है।
Curated by: अभिषेक शुक्ला
Updated: 23 Feb 2024, 3:43 pm
मुख्य बिंदू
गजवा-ए-हिंद के महिमामंडन को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने गंभीरता से लिया है
फतवे के बाद चर्चा में आया दारुल उलूम देवबंद, NCPCR ने कार्रवाई का दिया निर्देश
गजवा-ए-हिंद का मतलब जंग में भारत को जीतकर इसका इस्लामीकरण करने से है
देश की सबसे बड़ी इस्लामिक संस्था दारुल उलूम देवबंद (सहारनपुर, उत्तर प्रदेश) अपने फतवे को लेकर एकबार फिर चर्चाओं में है। इसमें उन्होंने गजवा ए हिंद को मान्यता दी है। इस्लामिक संस्था ने अपनी वेबसाइट से ये फतवा जारी किया है। जिसमें उन्होंने गजवा-ए-हिन्द को इस्लामिक दृष्टि से सही माना है। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने एक्शन ले फतवे को देश विरोधी बताया है।
क्या है दारुल उलूम देवबंद
दारुल उलूम देवबंद की स्थापना 30 मई 1866 में हाजी आबिद हुसैन और मौलाना कासिम नानौतवी ने की थी। दारुल उलूम अरबी शब्द है जिसका मतलब ‘ज्ञान का घर’ है। यहां भारत के साथ ही दुनिया के कई देशों से स्टूडेट्स इस्लाम की तालीम हासिल करने आते हैं।
गजवा-ए-हिंद को जान लीजिए
गजवा-ए-हिंद में गजवा का अर्थ ‘इस्लाम को फैलाने को जंग’ होता है। इस युद्ध के इस्लामिक लड़ाके ‘गाजी’ कहलाते हैं। मोटे तौर पर गजवा-ए-हिंद के मायने भारत में जंग से इस्लाम की स्थापना करना है। गजवा-ए-हिंद का मतलब भारतीय उपमहाद्वीप के काफिरों को जीतकर उन्हें मुस्लिम बनाने और दुनिया के इस हिस्से के निवासियों से युद्ध से है। आसान भाषा में गजवा-ए-हिंद का मतलब जंग में भारत जीतकर इसका इस्लामीकरण करने से है।
कहां से आया गजवा-ए-हिंद
इस्लाम में दुनिया को दो हिस्सों में बांटकर देखा गया है। एक, जहां इस्लाम मानने वालों का शासन है। दूसरा, जहां इस्लाम के अनुयायी रहते तो हैं, लेकिन वहां शासन किसी दूसरे धर्म का है। इस्लाम में मुस्लिम शासन वाला देश दारुल इस्लाम और गैर मुस्लिम शासन वाले देश दारुल हर्ब कहे गये है।
फतवों के कारण रहता है चर्चाओं में
दारुल उलूम से देवबंद फतवों की नगरी भी मानी जाती है। दारुल उलूम से जारी फतवे दुनियाभर के मुसलमानों की शरीयत की रोशनी में रहनुमाई करते है। दारुल उलूम के फतवा विभाग से प्रति वर्ष लगभग 7-8 हजार फतवे जारी होते
गजवा-ए-हिंद पर दिया फतवा सही, कार्रवाई हुई तो जाएंगे अदालत: दारुल उलूम
दारुल उलूम की वेबसाइट पर गजवा-ए-हिंद को वैध बताने वाले फतवे पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने घोर आपत्ति जताई थी। आयोग ने डीएम व एसएसपी को संस्था पर एफआइआर दर्ज करने को कहा था। अधिकारियों ने दारुल उलूम पहुंचकर पूरे मामले में जानकारी ली थी। बाद में संस्था ने अपने स्पष्टीकरण में फतवा नौ साल पुराना बताया था।
मजलिस-ए-शूरा की बैठक में सदस्यों ने गजवा-ए-हिंद पर दिए फतवे को ठहराया सही।
शूरा की बैठक के अंतिम दिन सदस्यों ने प्रशासन को दिए जवाब पर जताई संतुष्टि
दारुल उलूम की सुप्रीम पावर कमेटी मजलिस-ए-शूरा की बैठक में सदस्यों ने गजवा-ए-हिंद पर दिया फतवा सही ठहराते हुए कहा कि किसी तरह कानूनी कार्रवाई दारुल उलूम पर होती है तो अदालत का रुख करेंगें। इतना ही नहीं, संस्था की वेबसाइट बंद नहीं की जाएगी। पहले की तरह ऑनलाइन फतवे दिए जाते रहेंगें। संस्था द्वारा प्रशासन को दिए जवाब पर भी शूरा सदस्यों ने संतुष्टि जताई।
दारुल उलूम के अतिथिगृह में शूरा की दो दिवसीय बैठक में मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने बताया कि गजवा-ए-हिंद पर दिए फतवे के मामले में भविष्य में कोई भी कार्रवाई हुई तो उसका कानूनी रूप से जवाब दिया जाएगा।
यह था फतवे का मामला
दारुल उलूम की वेबसाइट पर गजवा-ए-हिंद को वैध बताने वाले फतवे पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने घोर आपत्ति जताई थी। आयोग ने डीएम व एसएसपी को संस्था के खिलाफ एफआइआर को कहा था। अधिकारियों ने दारुल उलूम पहुंचकर पूरे मामले में जानकारी ली थी। बाद में संस्था ने अपना स्पष्टीकरण देते हुए फतवे को नौ साल पुराना बताया था।
जवाब में संस्था ने कहा था कि यह फतवा वर्ष 2015 में दिया गया था और यह एक किताब में दी गई हदीस के हवाले से एक सवाल के जवाब में दिया गया था। डीएम डॉक्टर दिनेश चंद्र ने बताया कि फतवा प्रकरण में जिला प्रशासन की प्राथमिक जांच रिपोर्ट राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को गई है। आयोग के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई होगी।
‘भारत की तबाही’ का सपना है ‘ग़ज़वा-ए-हिन्द’, ‘हदीस’ में लिखा है: बड़बड़ाता मर गया औरंगज़ेब, कट्टरपंथियों को भी इस पर फख्र
17 May, 2022
अनुपम कुमार सिंह
गज़वा-ए-हिन्द, औरंगज़ेब, इस्लाम, भारत
औरंगजेब की भक्ति करने वाले इस्लामी कट्टरपंथियों के मन में ‘गजवा-ए-हिन्द’ (फोटो साभार: Wikimedia/Blitz)
इतिहास में कुछ व्यक्ति अच्छे होते हैं, तो कुछ बुरे होते हैं। कुछ ऐसे होते हैं, जिनकी अच्छे-बुराई पर बहस चलती रहती है। जबकि कुछ ऐसे होते हैं, जिसने हजारों-लाखों निर्दोषों का खून बहाया हो। औरंगजेब ऐसे ही लोगों में से एक था, जिसका मकसद था पूरे हिंदुस्तान पर इस्लामी शासन। हिन्दुओं के इस हत्यारे का आज इस्लामी कट्टरपंथी गुणगान करते नहीं थक रहे। क्या इसके पीछे उनकी ‘गज़वा-ए-हिन्द’ वाली सोच है? आइए, समझाते हैं ये होता क्या है।
असल में ‘गज़वा-ए-हिन्द’ का अर्थ है, पूरे भारतीय उप-महाद्वीप में इस्लाम का शासन। इसमें भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, बांग्लादेश और भूटान – ये सभी आते हैं। हालाँकि, अभी तक किसी ऐसा इस्लामी शासक नहीं हुआ जिसका इस पूरे क्षेत्र पर एक साथ शासन रहा हो। इस्लाम के शुरुआती दौर में तो दिल्ली से विंध्य तक ही उनका ‘हिंदुस्तान’ था। खुद औरंगजेब दक्कन-दक्कन करते-करते बुढ़ापे में दाढ़ी नोचते हुए किसी तंबू में मर गया।
आज भी कट्टरपंथी मुस्लिमों के मन में चलता रहता है ‘गज़वा-ए-हिन्द’
‘गज़वा-ए-हिन्द’ का अर्थ है मुस्लिम फ़ौज द्वारा हमला कर के भारत को ‘दारुल इस्लाम’ बनाना। ये ‘जिहाद’ का ही एक हिस्सा है। वही ‘जिहाद’, जिसके नाम पर अलकायदा ने अमेरिका में तबाही मचाई थी। वही ‘जिहाद’, जिसका नाम लेकर जम्मू कश्मीर और पाकिस्तान में कई आतंकी संगठन उठ खड़े हुए। वही ‘जिहाद’, जिसके नाम पर सीरिया में ISIS, नाइजीरिया में ‘बोको हराम’ और अफगानिस्तान में तालिबान निर्दोषों का खून बहाता है।
जवाब में कोई कह सकता है कि ये सब पुरानी बातें हैं और अब ऐसा कुछ नहीं रहा, लेकिन सच्चाई ये है कि पूरे भारत पर मुस्लिमों के कब्जे का सपना अधूरा ही रहा है और आज भी इसकी बात की जाती है। इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा ही खूब की जाती है। क्रिकेट के इतिहास में सबसे तेज़ गेंद फेंकने का रिकॉर्ड बनाने वाले शोएब अख्तर ने चर्चा की थी कि कैसे इस्लाम की पुस्तकों में ‘गजवा-ए-हिन्द’ के बारे में लिखा है और अटैक की नदी दो बार खून से लाल होगी। उन्होंने कहा था कि हमारी फ़ौज कश्मीर फतह कर के आगे बढ़ेगी।
सितंबर 2021 में अलकायदा ने अफगानिस्तान पर कब्ज़ा करने वाले तालिबान से कहा कि वो अब कश्मीर को भारत से ‘आज़ाद’ कराए। इसे भी ग़ज़वा-ए-हिन्द के एक रूप में ही देखा जाना चाहिए। ‘गज़वा’ का क्या अर्थ हुआ? इसका मतलब है युद्ध अथवा जंग। लेकिन, ये अलग है। इस अरबी शब्द का मतलब है ऐसा युद्ध जो किसी वस्तु वगैरह या साम्राज्य विस्तार और जमीन के लिए नहीं हो रहा हो। ये वो युद्ध है, जो मज़हब के लिए है।
‘गज़वा-ए-हिन्द’ की उत्पत्ति कहाँ से हुई? ऐसा नहीं है कि अलकायदा या शोएब अख्तर जैसों से इसका अविष्कार कर दिया, बल्कि इस्लाम की शुरुआत में ही इसका जिक्र मिलता है। ‘हदीस’ में इसके बारे में बताया गया है। अब ‘हदीस’ क्या है? ‘हदीस’ इस्लाम के संस्थापक पैगंबर मुहम्मद द्वारा कही गई बातों और उनके द्वारा किए गए कार्यों का संकलन है, जिसे सुन-देख कर लिखा गया बताया जाता है। मुहम्मद ने क्या-क्या किया और क्या-क्या कहा, ‘हदीस’ में वही सब है।
पैगंबर मुहम्मद ने भारत की तबाही को लेकर क्या-क्या कहा था, ‘हदीस’ में लिखा है
कुरान के बाद अगर मुस्लिमों के लिए कोई साहित्य सबसे ज्यादा मायने रखता है, तो वो ‘हदीस’ ही है। हालाँकि, कई मुस्लिम ‘विद्वानों’ और संगठनों का ये भी कहना है कि ‘गज़वा-ए-हिन्द’ का गलत मतलब निकाला गया है। ‘हदीस’ की मानें तो पैगंबर मुहम्मद ने कहा था, “मेरे उम्माह में से दो समूहों को अल्लाह ने जहन्नुम की आग से बचा लिया है। एक वो है जो भारत पर आक्रमण करेगा, जबकि दूसरा वो है जो ईसा इब्न मरयम के साथ रहेगा।”
बता दें कि ‘उम्माह’ का मतलब होगा है समुदाय। जैसे इस्लामी मुल्क आपस में मिल कर ‘उम्माह’ कहलाते हैं। इसी तरह ईसा बिन मरयम इस्लाम में जीसस क्राइस्ट को ही कहा जाता है। ‘हदीस’ में एक अन्य जगह लिखा है, ‘अल्लाह के पैगंबर ने वादा किया है कि हमलोग भारत पर आक्रमण करेंगे। अगर मैं तब तक जीवित रहा तो मैं इसके लिए अपनी सारी संपत्ति सहित खुद को भी कुर्बान कर दूँगा। अगर मैं मारा गया तो मुझे शहीदों में उच्च दर्जा मिलेगा, फिर मैं वापस आकर अबू हुरैया अल मुहर्रर (जहन्नुम की आग से मुक्त) कहलाऊँगा।’
‘हदीस’ में एक अन्य जगह भी ‘उम्माह’ का जिक्र करते हुए लिखा है कि सिंध और हिन्द की तरफ फौज को भेजा जाएगा। एक अन्य जगह पैगंबर मुहम्मद का वक्तव्य है, “तुमलोगों में से एक समूह भारत को फतह करेगा। जब तक वो लोग भारत के राजाओं को जंजीरों से बाँध कर लाएँगे, अल्लाह उनका साथ देगा। अल्लाह उन योद्धाओं को माफ़ी देगा। जब वो भारत से वापस लौटेंगे तो सीरिया में इसा इब्न मरयम को पाएँगे।” अर्थात, इस्लाम का शुरुआत से ही सपना रहा है भारत के शासकों को जंजीरों में बाँधना।
‘हदीस’ में ही पैगंबर मुहम्मद का इसी से सम्बंधित एक अन्य उद्धरण है, “येरुशलम का राजा योद्धाओं को हिन्दुओं की तरफ कूच करने का आदेश देगा। ये योद्धा हिन्द की सरजमीं को तबाह कर देंगे। वहाँ के सारे खजाने को जब्त कर के लाएँगे, जिसका इस्तेमाल येरुशलम को सजाने के लिए किया जाएगा। राजा के आदेश से ये योद्धा पूर्व से पश्चिम तक सारे क्षेत्र पर कब्ज़ा कर लेंगे, और ‘दज्जाल’ (क़यामत से पहले आने वाला झूठा मसीहा) के आने तक वहीं रहेंगे।”
औरंगज़ेब का गुणगान करने वाले भी इसी सोच को लेकर चल रहे
औरंगज़ेब पूरे हिंदुस्तान पर कब्जा कर के इस्लामी शासन के अंतर्गत लाना चाहता था, भले ही इसके लिए उसे कितने ही हिन्दुओं का खून क्यों न बहाना पड़े। औरंगज़ेब के बारे में कहा जाता है कि वो इस्लाम के सारे क्रियाकलापों का पालन करता था और उसने कुरान और हदीस पढ़ रखा था। स्पष्ट है, हदीस में उसने ‘भारत की तबाही’ के बारे में भी पढ़ा होगा और इस पर वो उतारू भी था। हालाँकि, जाट, मराठा, अहोम, सतनामी और सिख समुदाय ने इस दौरान हिंदुत्व की बागडोर सँभाले रखी और औरंगज़ेब से युद्ध करते रहे।
औरंगज़ेब के शासनकाल के अंतिम 26 साल दक्कन में युद्ध लड़ते-लड़ते ही बीते, जिसमें हर साल एक लाख से भी अधिक लोगों की मौत हुई। सूखे और प्लेग से जूझते भारत में उस समय औरंगजेब के खजाने की भी खस्ता हालत थी, यही कारण है कि उसके बाद मुग़ल कंगाल ही होते चले गए। 90 साल के औरंगज़ेब को चीजें ठीक से समझ भी नहीं आती थीं। वो अपने बेटे से पागलों की तरह ‘अकेला आने, अकेला जाने’ और ‘मुझे नहीं पता मैं कौन हूँ, क्या कर रहा हूँ’ जैसी बातें बड़बड़ा रहा था।
हाल ही तीन ख़बरें गौर करने लायक है। पहली, AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के भाई अकबरुद्दीन ओवैसी महाराष्ट्र के औरंगाबाद में मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र पर चादर चढ़ाने गए। दूसरा, श्रीनगर के मेयर जुनैद अजीम मट्टू ने लिखा, “हाफिज-ए-कुरान, शहंशाह हजरत मुही-उद-दीन मुहम्मद औरंगजेब और उनकी कब्र पर अल्लाह की रहमो करम हो।” तीसरा, कॉन्ग्रेस ने दावा किया कि काशी विश्वनाथ मंदिर को औरंगज़ेब ने नष्ट नहीं किया था।
पाकिस्तान भी ‘गज़वा-ए-हिन्द’ वाली सोच से ही चलता है। वहाँ का इस्लामी विशेषज्ञ सैयद जैद जमान हामिद कई बार इसका जिक्र कर चुका है और कहता है कि भारत ‘गजवा-ए-हिन्द’ से डरता है। वहाँ के मंत्री अली मुहम्मद खान ने संसद में इसका जिक्र किया। अब आखिर भारत के ही इस्लामी कट्टरपंथी उस औरंगजेब की आलोचना क्यों करें, जिसने ‘गज़वा-ए-हिन्द’ के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया? वो तो उनके लिए सम्मान का पात्र रहेगा ही। औरंगज़ेब जहाँ भी जीतता था, सबसे पहले वहाँ के मंदिर ध्वस्त किए जाते थे और इस्लाम न अपनाने वाले हिन्दुओं को बेरहमी से मार डाला जाता था।
औरंगजेब ने कैसे सिख गुरु तेग बहादुर की बेरहमी से हत्या करवाई और भाई मति दास के शरीर को बीच से चीर डाला गया, ये सब जानने के बावजूद आज ओवैसी और जुनैद जैसे लोग औरंगजेब को मसीहा बता रहे हैं, टीवी डिबेट में इस्लामी विशेषज्ञ उसे अपने बुजुर्ग बताते हुए उस पर फख्र जता रहे हैं तो इसका कारण है कि उसने ‘गज़वा-ए-हिन्द’ के लिए काम किया। ये तो उसका गुणगान ही करेंगे, क्योंकि ये उसी विचारधारा की उपज हैं।
इनका साथ देने के लिए ‘The Print’ जैसे मीडिया संस्थान मौजूद हैं, जो एक लंबे-चौड़े लेख में पूरे भारत के इस्लामी शासन के अंतर्गत आने के इतिहास का जिक्र करते हुए कहता है कि हिन्दुओं को ‘गजवा-ए-हिन्द’ से डरने की जरूरत नहीं है। उसने लिख दिया कि ‘हिन्द’ का आशय हदीथ में भारत है ही नहीं। फिर सिंध के साथ इसका नाम क्यों लिया जाता? जब ये सब इतिहास है, तो अभी तक दज्जाल और ईसा धरती पर उतरे ही कहाँ हैं? कश्मीर में तो अलकायदा की यूनिट का नाम ही है – ‘अंसार गजवातुल हिन्द’। हिन्दू भले क्यों न इससे लड़ने के लिए तैयार रहे? क्यों न चर्चा करें.
