दुनिया का एकमात्र खाद्य आत्मनिर्भर देश आकार में गुजरात और जनसंख्या में
दुनिया का अकेला देश, जो अपने खाने की हर चीज खुद उगाता है, बाहर से कुछ नहीं मंगाता
कहते हैं, दुनिया की सारी खाद्य चीजें सात श्रेणियों में होती है, अगर कोई इन सातों श्रेणियां पर्याप्त पैदा कर रहा है तो वो खानपान में आत्मनिर्भर माना जाता है. दुनिया के सारे देशों में केवल एक ही देश ऐसा कर रहा है. संयोग ये इस छोटे से देश के निर्माण में भारतीय मूल के लोगों का बहुत बड़ा योगदान है. अगर दुनियाभर के देशों से उसका व्यापार खत्म भी हो जाए तो वो आराम से खाना पीना कर सकेगा.
गुयाना दुनिया का इकलौता देश है जो पूरी तरह खाद्य आत्मनिर्भर है
गुयाना की 40% जनसंख्या भारतीय मूल की है, भारतीय व्यंजन भी यहां लोकप्रिय हैं
गुयाना ने 7 श्रेणियों के सभी खाद्य पदार्थ खुद उगाने की क्षमता विकसित की
दुनिया में केवल एक ही देश है, जो अपनी जरूरत का सारा भोजन खुद उगा रहा है और इतना पैदा कर रहा है जो उसकी पूरी आबादी के लिए पर्याप्त है. बाहर से वह कुछ नहीं मंगा रहा है. क्या आप अंदाज लगा सकते हैं कि वो देश कौन सा है. ये एक छोटा सा देश है. एक दिलचस्प बात इसे भारत से भी जोड़ती है, क्योंकि यहां की 40 प्रतिशत जनसंख्या भारतीय मूल के लोगों की है. जो एक जमाने में वहां भेजे गए थे. अब वहां के स्थायी बासिंदे हैं.
दुनिया का अकेला देश, जो अपने खाने की हर चीज खुद उगाता है, बाहर से कुछ नहीं मंगाता
कहा जा सकता है कि जहां दुनिया भर में करोड़ों लोग खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, वहीं ये छोटा सा देश ऐसा देश बन चुका जो पूर्ण आत्मनिर्भर है. अगर अब तक इस देश के बारे में अनुमान नहीं लगा पाये तो जान लें,वह नन्हा सा देश गुयाना हैं.
दक्षिण अमेरिका का ये देश गुयाना है. इसकी कुल जनसंख्या केवल 8 लाख है, जिसमें भारतीय मूल के लोगों की संख्या ही 3.2 लाख से 3.5 लाख के बीच है. 19सदी में जब भारत ब्रिटिश राज के अधीन था, तब भारत से यहां बड़े पैमाने पर लोगों को गन्ना बागानों में काम करने भेजा गया था. ये लोग उत्तर प्रदेश, बिहार और आसपास के क्षेत्रों से भेजे गए थे.
क्षेत्रफल में गुजरात के बराबर
ये देश क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत के गुजरात के बराबर है लेकिन आबादी की दृष्टि से काफी कम, क्योंकि गुजरात की जनसंख्या 6 करोड़ के आसपास है. इस देश का 85 प्रतिशत भाग घने, दुर्गम वर्षा वनों से ढका हुआ है. इस देश ने चुपचाप वह उपलब्धि पा ली है जो पृथ्वी पर कोई अन्य देश नहीं प्राप्त कर पाया. उसने सभी जरूरी खानपान में आत्मनिर्भरता पा ली है.
यह जानकारी नेचर फूड नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अभूतपूर्व शोध से हुआ है , जिसमें 186 देशों का विश्लेषण करके यह पाया गया कि अगर कोई भी देश चाहे तो अपने घरेलू उत्पादन से ही अपनी आबादी का पेट भर सकता है.
खानपान की 7 श्रेणियां क्या हैं?
चौंकाने वाली बात ये है कि गुयाना में फल, सब्जी, अनाज, मेवों से लेकर जो कुछ भी खाया जाता है, वो सब यहीं पर पैदा किया जा रहा यानि वो सभी 7 श्रेणियां खानपान में जरूरी हैं, वो सब यहां होती हैं, यानि फल, सब्जियां, डेयरी, मछली, मांस, फलियां, मेवे, बीज और स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थ, जिसमें अनाज भी आते हैं.
1. स्टार्च वाले मुख्य खाद्य पदार्थ – इस श्रेणी में अनाज जैसे चावल, मक्का, गेहूं और कंद-मूल जैसे आलू, कसावा, शकरकंद को शामिल किया जाता है. गुयाना चावल के उत्पादन में बहुत समृद्ध है. अपनी जरूरत से ज्यादा चावल पैदा करता है.
2. फलियां, मेवे और बीज – इसमें दालें, सोयाबीन, मूंगफली और कई प्रकार के बीज आते हैं.
3. सब्जियां – सभी प्रकार की हरी और अन्य सब्जियां.
4. फल – स्थानीय स्तर पर उगने वाले फल.
5. डेयरी – दूध, पनीर और अन्य दुग्ध उत्पाद
6. मांस – मुर्गी पालन, पोर्क, बीफ आदि.
7. मछली – समुद्री और मीठे पानी की मछली.
तो ये गुयाना की विशेषता है कि उसने अपनी 8 लाख की आबादी के लिए इन सभी सात श्रेणियों में उत्पादन क्षमता विकसित कर ली है.
देश की राजधानी जॉर्जटाउन के किसी भी बाजार में घूमिए और तस्वीर साफ हो जाएगी – स्थानीय चावल, ताजी सब्जियां, ताजी मछली, फल और अन्य उत्पादों से भरे स्टॉल, जिनमें से अधिकांश गुयाना की सीमाओं के भीतर ही पैदा होते हैं.
अपनी मिट्टी-पानी से सब पैदा करता है
गुयाना ने खुद को दुनिया से अलग नहीं किया है; यह आज भी किसी भी आधुनिक राष्ट्र की तरह व्यापार करता है लेकिन ये इसकी खासियत है कि यह देश अपने नागरिकों के खानपान की सारी जरूरत अपनी मिट्टी और पानी से पूरी करने की अनूठी क्षमता रखता है.
हैरानी की बात यह है कि अमेरिका, चीन, रूस और भारत जैसे बड़े कृषि प्रधान देश भी सातों श्रेणियों में आत्मनिर्भर नहीं हैं.
– अमेरिका केवल 4 श्रेणियों में पूरी तरह आत्मनिर्भर है.
– ब्रिटेन केवल 2 श्रेणियों में आत्मनिर्भर है।
– चीन और वियतनाम जैसे देश 6 श्रेणियों में तो आगे हैं, लेकिन सातवीं श्रेणी यानि डेयरी या दालों में आत्मनिर्भर नहीं, इसे उन्हें आयात करना पड़ता है.
भारत क्यों पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं
1. अनाज में आत्मनिर्भर. चावल और गेहूं में भारत न केवल आत्मनिर्भर है, बल्कि दुनिया का बड़ा निर्यातक भी.
2. डेयरी में आत्मनिर्भर. दुनिया का नंबर 1 दूध उत्पादक देश.
3. मछली में आत्मनिर्भर. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक. अपनी जरूरतें पूरी करता है.
4. फल और सब्जियों में आत्मनिर्भर. इस मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है.
5. मांस में मिश्रित स्थिति.
6. फलियों और दालों में आंशिक निर्भर. अपनी खपत पूरी करने के लिए 10-15% आयात करता है.
7. मेवे और तिलहन में निर्भर. अपनी जरूरत का लगभग 55-60% खाद्य तेल बाहर से मंगाता है.
गुयाना ने ये कैसे किया
पिछले कुछ वर्षों में गुयाना सरकार ने कृषि क्षेत्र में अपने बजट को लगभग 468 प्रतिशत तक बढ़ा दिया. गुयाना केवल चावल या चीनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने मक्का, सोयाबीन और डेयरी के क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर काम किया.
अगर आज दुनिया के व्यापारिक रास्ते बंद हो जाएं, तो गुयाना इकलौता देश होगा जो अपने नागरिकों को भूखा नहीं रहने देगा. उन्हें संतुलित आहार देता रहेगा.
गुयाना ने अपनी प्राकृतिक धरोहर को नष्ट किए बिना बल्कि अपनी सीमित कृषि भूमि का अधिकतम उपयोग करके खाद्य आत्मनिर्भरता हासिल की है. जबकि दक्षिण अमेरिका के अधिकांश देशों में खेती और पशुपालन के लिए भूमि साफ करने के कारण वनों की कटाई हो रही है, गुयाना ने अपने मूल वन क्षेत्र का 85 प्रतिशत से अधिक संरक्षित रखा है.
यह देश भूमध्य रेखा के एक से नौ डिग्री उत्तर में स्थित है, जो पूरे वर्ष गर्म मौसम, प्रचुर वर्षा, उच्च आर्द्रता और सबसे महत्वपूर्ण बात, अमेज़न नदी प्रणाली द्वारा सहस्राब्दियों से जमा की गई उपजाऊ चिकनी मिट्टी से समृद्ध है.
रातोंरात नहीं मिली सफलता
गुयाना की फसल विविधता से भी अधिक उल्लेखनीय बात यह है कि इसने पोषक तत्वों को उनकी बहाली की गति से अधिक तेजी से नष्ट किए बिना खाद्य उत्पादन को किस तरह बढ़ाया है. गुयाना को सफलता रातोंरात नहीं मिली. उसने इसके लिए सिंचाई, जल निकासी, प्रसंस्करण सुविधाओं, बुनियादी ढांचे और किसानों की शिक्षा में निरंतर निवेश किया.
गुयाना में खाए जाने वाले भारत जैसे व्यंजन
1. दाल पूरी – यह गुयाना का सबसे लोकप्रिय व्यंजन है. यह बिल्कुल वैसी ही होती है जैसी बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बनाई जाती है. यह एक नरम रोटी है जिसके अंदर पीली पिसी हुई दाल, हल्दी और जीरे के साथ भरी जाती है. वहां इसे अक्सर करी के साथ खाया जाता है.
2. ‘कढ़ी’ और ‘भजिया’ – वहां के स्ट्रीट फूड में आपको ये भारतीय स्वाद खूब मिलेगा.बेसन के छोटे-छोटे पकोड़े होते हैं, जो बिल्कुल भारत के ‘भजिया’ या ‘पकोड़े’ जैसे दिखते हैं. इन्हें आम की चटनी के साथ परोसा जाता है. दक्षिण भारत के ‘वड़ा’ या उत्तर भारत के ‘दाल वड़ा’ की तरह बारा व्यंजन है.
3. रोटियां – गुयाना में रोटी खाने का बहुत चलन है, लेकिन वहां के नाम थोड़े अलग हैं, इसको सदा रोटी कहते हैं, जो हमारी साधारण तवा रोटी जैसी होती है. भारत के पराठा या रूमाली रोटी की तरह एक और रोटी होती है, जिसको बश-अप-शर्ट कहते हैं, यह बहुत नरम और परतों वाली होती है। इसका नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह “फटी हुई कमीज” जैसी दिखती है.
4. गुयानी करी – वहां करी बनाने का तरीका भारतीय मसालों हल्दी, धनिया, जीरा पर ही आधारित है. वहां ‘चिकन करी’, ‘डक करी’ और ‘पनीर करी’ बहुत प्रसिद्ध है. अंतर केवल इतना है कि वे इसमें स्थानीय कैरिबियन मिर्च का इस्तेमाल करते हैं, जिससे इसका स्वाद थोड़ा तीखा और अलग हो जाता है.
5. सात भाजी – ये गुयाना के हिंदू परिवारों में शादियों और पूजा के अवसरों पर बनाया जाने वाला सबसे खास भोजन है. इसमें केले के पत्ते पर 7 अलग-अलग तरह की सब्जियां जैसे कद्दू, आलू, सहजन, पालक आदि को चावल और दाल पूरी के साथ परोसी जाता है. .ये दक्षिण भारतीय ‘साद्य’ या उत्तर भारतीय ‘भंडारे’ की थाली जैसा अनुभव देता है.
6. मीठे व्यंजन – पर्मिगी भारत की ‘सेवई’ या ‘खीर’ ही है. गुयाना में शक्करपारे जैसी एक मिठाई को सीधा ‘मिठाई’ ही कहा जाता है।
