नये दिशा-निर्देश जारी,वंदे मातरम को राष्ट्रगान जैसा सम्मान, पूरे 3 मिनट 10 सेकंड का होगा
वंदे मातरम अब 65 सेकंड का नहीं, पूरे 3 मिनट 10 सेकंड का होगा, देना होगा राष्ट्रगान जैसा सम्मान
गृह मंत्रालय के निर्देशों में साफ है कि वंदे मातरम् बजने पर सभी का खड़ा होना अनिवार्य है. हालांकि सिनेमा हॉल जैसे स्थलों पर यह अनिवार्यता नहीं होगी.
नई दिल्ली 11 फरवरी 2026। केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन और वादन को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं.सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के 6 आधिकारिक अंतरों का गायन या वादन तीन मिनट दस सेकंड तक अनिवार्य होगा. वंदे मातरम् बजने पर सभी उपस्थित लोगों का खड़ा होना आवश्यक होगा, पर सिनेमा हॉल में यह नियम लागू नहीं होगा.
वंदे मातरम् रचना के 150 वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत के गायन और वादन को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. गृह मंत्रालय के अनुसार अब विशेष सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के आधिकारिक छह अंतरों का गायन या वादन अनिवार्य होगा, जिसकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड तय हुई है. साथ ही नए प्रोटोकॉल में तिरंगा फहराने, राष्ट्रपति और राज्यपालों के आगमन–प्रस्थान और राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में वंदे मातरम् प्रस्तुत किया जाएगा. साथ ही कहा गया है कि यदि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत एक ही साथ गाए जाने हैं तो पहले राष्ट्र्रगीत गाया जाएगा.
गृह मंत्रालय के निर्देशों में यह साफ है कि वंदे मातरम् बजने पर सभी को खड़ा होना अनिवार्य रहेगा. हालांकि सिनेमा हॉल जैसे स्थलों पर यह अनिवार्यता लागू नहीं होगी. सरकार ने यह भी कहा है कि देशभर के स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन से होनी चाहिए.
कब होगा राष्ट्र गीत का वादन
सिविल सम्मान समारोहों के अवसर पर;औपचारिक राजकीय समारोहों और सरकार के आयोजित समारोहों में राष्ट्रपति के आने और ऐसे समारोहों से उनके जाते समय;आकाशवाणी और दूरदर्शन से राष्ट्र के नाम राष्ट्रपति के संदेश प्रसारित किए जाने से पहले और बाद में;राज्यपाल / उपराज्यपाल के अपने राज्य संघ शासित क्षेत्र में औपचारिक राजकीय समारोहों में आने पर और ऐसे समारोहों से उनके जाते समय;राष्ट्रीय झंडे को परेड में ले जाने पर किसी भी ऐसे अन्य अवसर पर राष्ट्र गीत बजाया जाएगा, जिसको भारत सरकार ने विशेष आदेश जारी किए हों.
राष्ट्र गीत का सामूहिक गायन
परेडों को छोड़कर अन्य सांस्कृतिक अवसरों अथवा समारोहों पर राष्ट्रीय झंडा फहराए जाने पर; (इसके आयोजन में गायक मंडली की उचित स्थान पर व्यवस्था होगी और बैंड आदि की ताल के साथ गायन प्रशिक्षण दिया जाएगा. साउंड सिस्टम सहित और अन्य जरूरी चीजें उपलब्ध करायी जाएगी; जरूरत पर राष्ट्र गीत की लिखित प्रति वितरित की जा सकती है.)किसी सरकारी अथवा सार्वजनिक समारोह में (परन्तु औपचारिक राज्य समारोहों को छोड़कर) राष्ट्रपति के आने पर तथा ऐसे समारोहों से उनके जाने से तत्काल पहले भी. उन अवसरों पर जो पूरी तरह औपचारिक न होते हुए भी मंत्रियों आदि की उपस्थिति के कारण महत्वपूर्ण हैं, राष्ट्र गीत गाया जा सकता है. सभी स्कूलों में दिन के कार्य की शुरुआत राष्ट्र गीत से होनी चाहिए.
ये है राष्ट्र गीत का आधिकारिक संस्करण
वन्दे मातरम्।
सुजलाम् सुफलाम् मलयजशीतलाम,
शस्यश्यामलाम् मातरम्। वन्दे मातरम्।
शुभज्योत्स्ना पुलकितयामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीम् सुमधुरभाषिणीम्,
सुखदाम् वरदाम् मातरम् । वन्दे मातरम्।
कोटि-कोटि कण्ठ कल-कल निनाद कराले,
कोटि-कोटि भुजैधृत खरकरवाले,
के बाले मां तुमि अबले,
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीम्,
रिपुदलवारिणी मातरम्। वन्दे मातरम्।
तुमि विद्या तुमि धर्म, तुमि हृदि तुमि मर्म,
त्वम् हि प्राणाः शरीरे, बाहुते तुमि मां शक्ति,
हृदये तुमि मां भक्ति, तोमारेई प्रतिमा गड़ि मन्दिरे-मन्दिरे।
वन्दे मातरम्।
त्वम् हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,
कमला कमलदलविहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्,
नमामि कमलाम् अमलाम् अतुलाम्,
सुजला सुफलां मातरम् । वन्दे मातरम्।
श्यामलाम् सरलाम् सुस्मिताम् भूषिताम्,
धरणीम् भरणीम् मातरम् । वन्दे मातरम्।
स्वतंत्रता संग्राम में देशभक्ति का भरा उत्साह
भारत का राष्ट्र गीत वंदे मातरम है. इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा और ये उनके उपन्यास आनंद मठ से लिया गया है. वंदे मातरम् को पहली बार 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में सार्वजनिक रूप से गाया गया और 26 जनवरी 1950 को भारत का राष्ट्र गीत घोषित किया गया. स्वतंत्रता संग्राम में यह देशभक्ति और बलिदान की भावना जगाने का सबसे बड़ा माध्यम बना. राष्ट्रगीत के पहले दो छंद लगभग 65 सेकंड में गाये जाते थे. अब छह छंदों का राष्ट्रगीत गाने को 3 मिनट 10 सेकंड समय निर्धारित किया गया है.

