सनातन तीर्थ भेंट द्वारिका पर कैसे हुआ कब्जा? कैसे मिली “दीनदारों” से मुक्ति?
कुछ वर्ष पहले मोदी जी ने समंदर में डुबकी लगाई थी ।
आखिर क्यों मोदी को समंदर में डुबकी लगाकर द्वारका जी के दर्शन करने जाना पड़ा….?
गुजरात हाईकोर्ट ने भेंट द्वारका (Beyt Dwarka) के 2 द्वीपों पर कब्जा जमाने के सुन्नी वक्फ बोर्ड के सपने को चकनाचूर कर दिया है ।
इस समय गुजरात का यह विषय बहुत चर्चा में है । सोशल मीडिया के माध्यम से हम लोगों को मालूम पड़ गया, वरना पता ही नहीं चलता ।
कैसे पलायन होता है और कैसे कब्जा होता है ? लैंड जिहाद क्या होता है ? यह समझने के लिए आप बस भेंट द्वारका टापू का अध्ययन कर लें तो सब प्रक्रिया समझ आ जायेगी ।
कुछ साल पहले तक यहाँ की लगभग पूरी आबादी हिन्दू थी ।
यह ओखा नगरपालिका के अन्तर्गत आने वाला क्षेत्र है, जहाँ जाने का एकमात्र रास्ता पानी से होकर जाता है । इसलिए भेंट द्वारका से बाहर जाने के लिए लोग नाव का प्रयोग करते हैं ।
यहाँ द्वारकाधीश का प्राचीन मंदिर स्थित है । कहते हैं कि 5 हजार साल से अधिक समय पहले श्रीकृष्ण जी के अभिन्न मित्र सुदामा जब भगवान श्रीकृष्ण से भेंट करने द्वारका आए थे, तब भगवान श्रीकृष्ण जी ने दो मुट्ठी तांदुल (चावल) के बदले अपने मित्र सुदामा को एक आलीशान महल इस द्वीप पर बनवाकर भेंट किया था, जिसके कारण इस द्वीप का नाम भेंट द्वारका पड़ा । इसके पश्चात यहाँ रुक्मिणी ने द्वारकाधीश जी की मूर्ति की स्थापना की थी ।
समुद्र से घिरा यह टापू बड़ा शांत रहता था । लोगों का मुख्य व्यवसाय मछली पकड़ना था । धीरे-धीरे यहाँ बाहर से मछली पकड़ने वाले मुस्लिम आने लगे ।
दयालु हिन्दू आबादी ने इन्हें वहाँ रहकर मछली पकड़ने की अनुमति दे दी । धीरे-धीरे मछली पकड़ने के पूरे कारोबार पर मुस्लिमों का कब्जा हो गया ।
बाहर से फंडिंग के चलते इन्होंने बाजार में सस्ती मछली बेचना प्रारंभ किया, जिससे सब हिन्दू मछुआरे बेरोजगार हो गये। अब हिन्दू आबादी ने रोजगार के लिए टापू से बाहर जाना शुरू किया ।
लेकिन यहां एक और प्रयोग हुआ,भेंट द्वारका से मात्र दो किलोमीटर दूर ओखा तक जाने के लिए नाव में 8 रुपये किराया लगता था ।
अब क्योंकि सब नावों पर मुस्लिमों का कब्जा हो गया था तो उन्होंने किराये का नया नियम बनाया। जो हिन्दू नाव से ओखा जाएगा, वह किराये के 100 रुपये देगा और मुस्लिम वहीं 8 रुपये देगा ।
अब कोई दिहाड़ी हिन्दू केवल आवाजाही के 200 रुपये देगा तो वह बचायेगा क्या ? इसलिए रोजगार के लिए हिन्दुओं ने वहाँ से पलायन शुरू कर दिया ।
अब वहाँ केवल 15 प्रतिशत हिन्दू आबादी रहती है ।
आपने पलायन का पहला कारण यहाँ पढ़ा ।
रोजगार के 2 मुख्य साधन मछली पकड़ने का काम और ट्रांसपोर्ट दोनों हिन्दुओं से छीन लिए गए । बाकी सब जगह की तरह राज मिस्त्री, कारपेंटर, इलेक्ट्रॉनिक मिस्त्री, ड्राइवर, नाई व अन्य हाथ के काम भी 90% तक हिन्दुओं से हस्तगत कर लिये हैं ।
अब भेंट द्वारका में तो 5 हजार साल पुराना मंदिर है, जिसके दर्शन के लिए हिन्दू जाते थे तो इसमें वहां के जिहादियों ने नया तरीका निकाला ।
क्योंकि *आवाजाही के साधनों पर उनका कब्जा हो चुका था* तो उन्होंने आने वाले श्रद्धालुओं से केवल 20-30 मिनट की जलयात्रा के 4 हजार से 5 हजार रुपये मांगने शुरू कर दिये ।
इतना महंगा किराया आम व्यक्ति कैसे चुका पायेगा, इसलिए लोगों ने वहां जाना बंद कर दिया ।
अब जब वहाँ पूर्ण रूप से जिहादियों की पकड़ हो गई तो उन्होंने जगह-जगह मकान बनाने शुरू किये, देखते ही देखते प्राचीन मंदिर को चारों तरफ से *मजारों* से घेर दिया गया । गुजरात सरकार को इस लैंड जिहाद का पता ही नहीं था ।
वहाँ की बची-खुची हिन्दू आबादी सरकार को अपनी बात कहते-कहते हार चुकी थी, फिर कुछ हिन्दू समाजसेवियों ने इसका संज्ञान लिया और सरकार को चेताया ।
सरकार ने ओखा से भेंट द्वारका तक सिग्नेचर ब्रिज बनाने का काम शुरू करवाया । बाकी विषयों की जांच शुरू हुई तो जांच एजेंसी चौंक गई ।
*गुजरात में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने श्रीकृष्ण की नगरी द्वारका स्थित भेंट द्वारका के दो टापू पर अपना दावा ठोंका है।*
वक्फ बोर्ड ने अपने आवेदन में दावा किया है कि भेंट द्वारका टापू पर दो द्वीपों का स्वामित्व वक्फ बोर्ड का है।
गुजरात उच्च न्यायालय ने इस पर आश्चर्य जताते हुए पूछा कि कृष्ण नगरी पर आप कैसे दावा कर सकते हैं ? और इसके बाद गुजरात उच्च न्यायालय ने इस याचिका को भी खारिज कर दिया।
भेंट द्वारका में करीब आठ टापू हैं, जिनमें से दो पर भगवान कृष्ण के मंदिर बने हुए हैं। प्राचीन कहानियाँ बताती हैं कि भगवान कृष्ण की आराधना करते हुए मीरा यहीं पर उनकी मूर्ति में समा गई थीं ।
भेंट द्वारका के इन दो टापूओं पर करीब 7000 परिवार रहते हैं, इनमें से करीब 6000 परिवार मुस्लिम हैं।
यह द्वारका के तट पर लगभग ४० कि.मी. दूर एक छोटा सा द्वीप है और ओखा से कुछ ही दूरी पर स्थित है ।
वक्फ बोर्ड इसी के आधार पर इन दो टापू पर अपना दावा जताता है । यहां अभी इस साजिश का शुरुआती चरण ही था कि इसका खुलासा हो गया ।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक इस चरण में कुछ लोग ऐसी जमीनों पर कब्जा करके अवैध निर्माण बना रहे थे, जो रणनीतिक रूप से भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता था ।
अब जाकर सब अवैध कब्जे व मजारें तोड़ी जा रही हैं ।
अब भव्य सी लिंक सुदर्शन सेतु का उद्घाटन हो गया है, जिससे मुसलमानों के नौका/छोटे पानी के जहाज से यात्रा करवाने का धंधा भी चौपट हो गया है । समुद्र तट पर ऐसी सैकड़ों नौकाएं बेकार खड़ी पड़ी हैं ।
बेट द्वारका में आने वाला कोई भी मुसलमान वहाँ का स्थानीय नहीं है, सब बाहर के हैं ।
फिर भी उन्होंने धीरे-धीरे कुछ ही वर्षों में वहां के हिन्दुओं से सब कुछ छीन लिया और भारत के गुजरात जैसे एक राज्य का टापू *सीरिया* बन गया ।
सावधान व सजग रहना अत्यंत आवश्यक है ।।
जागो हिन्दू जागो… 🙏🕉️
जय द्वारकाधीश 🙏🚩🚩
(एक वर्ष पुरानी पोस्ट)
पोस्ट साभार फोटो सोर्स इंटरनेट
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भेंट द्वारिका
भेंट द्वारिका (जिसे बेट द्वारका या Beyt Dwarka भी कहते हैं) गुजरात के द्वारका क्षेत्र में स्थित एक पवित्र द्वीप है। यह कच्छ की खाड़ी के मुहाने पर है, मुख्य द्वारका शहर से लगभग 25-30 किमी उत्तर में, ओखा बंदरगाह से मात्र 2 किमी दूर।नाम का अर्थ और महत्वगुजराती में “बेट” का मतलब द्वीप (island) होता है।
साथ ही “भेंट” (उपहार या मिलन) से जुड़ा होने के कारण इसे भेंट द्वारका भी कहा जाता है।
लोकप्रिय कथा के अनुसार, यही वह पवित्र स्थल है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बचपन के गरीब लेकिन सच्चे मित्र सुदामा से मिलन (भेंट) किया था। सुदामा जी ने कृष्ण को केवल थोड़ा-सा चावल (पोहा/चिवड़ा) भेंट में दिया था, और कृष्ण ने उस सादगी और प्रेम को स्वीकार कर सुदामा को अपार धन-धान्य प्रदान किया। इसी अमर भेंट की याद में इस द्वीप को भेंट द्वारका कहा जाता है।
मुख्य आकर्षणश्री बेट द्वारकाधीश मंदिर — भगवान कृष्ण का मुख्य मंदिर, जहाँ उनकी भव्य मूर्ति विराजमान है। मान्यता है कि यहाँ कृष्ण का निवास स्थान था और रानी रुक्मिणी द्वारा स्थापित मूर्ति है।
दंडी हनुमान मंदिर — द्वीप के पूर्वी छोर पर स्थित, बहुत प्रसिद्ध।
शिवराजपुर बीच — नीले पानी और सफेद रेत वाला खूबसूरत समुद्र तट (Blue Flag certified)।
अन्य छोटे मंदिर और प्राकृतिक सौंदर्य।
कैसे पहुँचें (2026 तक की स्थिति)-ओखा से फेरी (नाव) से 15-20 मिनट में।
अब सुदर्शन सेतु (Okha–Beyt Dwarka Signature Bridge) बन चुका है — भारत का पहला समुद्री पुल, जो पैदल, साइकिल और वाहनों के लिए खुला है। इससे यात्रा बहुत आसान हो गई है।
मुख्य द्वारका से टैक्सी/बस द्वारा ओखा तक, फिर पुल या नाव से।
यह स्थान द्वारका धाम यात्रा का अनिवार्य हिस्सा है। यहाँ आकर भक्त चावल दान की परंपरा भी निभाते हैं, जो सुदामा की भेंट की याद दिलाती है और गरीबी दूर करने की मान्यता है।जय द्वारकाधीश!
बेट द्वारका (Bet Dwarka) को लेकर मुख्य विवाद अवैध अतिक्रमण (Encroachments) और उन पर की गई प्रशासनिक कार्रवाई से संबंधित है। पिछले कुछ वर्षों में, विशेषकर 2022 से लेकर 2025 की शुरुआत तक, यहां बड़े पैमाने पर “बुलडोजर एक्शन” हुआ है।
इस विवाद के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. अवैध अतिक्रमण और विध्वंस (Demolition Drive)
गुजरात सरकार और स्थानीय प्रशासन ने बेट द्वारका और उसके आसपास के द्वीपों पर सरकारी जमीन, गोचर (चरागाह) और वन भूमि पर बने अवैध ढांचों को हटाने के लिए कई अभियान चलाए हैं।
बड़ी कार्रवाई (जनवरी 2025): जनवरी 2025 में प्रशासन ने एक मेगा अभियान चलाया, जिसमें 500 से अधिक अवैध निर्माणों (मकानों, दुकानों और धार्मिक स्थलों) को ध्वस्त किया गया।
तर्क: सरकार का कहना है कि ये निर्माण बिना अनुमति के सरकारी जमीन पर बनाए गए थे और तटीय सुरक्षा (Coastal Security) के लिए खतरा थे।
2. तटीय सुरक्षा का मुद्दा (Coastal Security)
प्रशासन के अनुसार, बेट द्वारका की भौगोलिक स्थिति अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के करीब है। यहाँ अवैध बस्तियों के बढ़ने से नशीली दवाओं की तस्करी (Drugs Trafficking) और घुसपैठ जैसी संदिग्ध गतिविधियों का जोखिम बढ़ गया था। सुरक्षा एजेंसियों ने इन अवैध ढांचों को हटाने की सिफारिश की थी ताकि तटीय निगरानी बेहतर हो सके।
3. वक्फ बोर्ड से जुड़ा विवाद
एक समय यह चर्चा जोरों पर थी कि वक्फ बोर्ड ने बेट द्वारका के कुछ हिस्सों पर अपना दावा पेश किया है।
हाईकोर्ट का रुख: 2021-22 के दौरान गुजरात हाईकोर्ट में कुछ याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें कुछ संपत्तियों को वक्फ की संपत्ति बताया गया था। अदालत ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए पूछा था कि “कृष्ण की नगरी में वक्फ का दावा कैसे हो सकता है?”
ताजा स्थिति (फरवरी 2025): हाल ही में गुजरात हाईकोर्ट ने बालापर गांव में वक्फ के दावों को खारिज कर दिया और प्रशासन को अवैध धार्मिक अतिक्रमण हटाने की अनुमति दी।
4. मानवीय और राजनीतिक पक्ष
विस्थापन: इस कार्रवाई से बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, विशेषकर मछुआरे विस्थापित हुए हैं। नागरिक समूहों और कुछ संस्थाओं (जैसे APCR) ने आरोप लगाया है कि यह अभियान एक खास समुदाय को निशाना बनाकर किया गया है।
सुदर्शन सेतु (Sudarshan Setu): हाल ही में ओखा और बेट द्वारका को जोड़ने वाले “सुदर्शन सेतु” के बनने के बाद से यहाँ पर्यटन की संभावनाएं बढ़ी हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि विकास के नाम पर गरीबों की बस्तियां हटाई जा रही हैं।
निष्कर्ष: संक्षेप में, यह विवाद “धार्मिक आस्था बनाम सरकारी जमीन पर अतिक्रमण” और “विकास एवं राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम स्थानीय विस्थापन” के इर्द-गिर्द घूमता है। फिलहाल प्रशासन ने अधिकांश अवैध कब्जों को मुक्त करा लिया है, लेकिन पुनर्वास और कानूनी चुनौतियों को लेकर बहस जारी है।
Grok पर सवाल- भेंट द्वारका को लेकर कोई विवाद भी है?
हाँ, भेंट द्वारका (बेट द्वारका या Beyt Dwarka) को लेकर मुख्य रूप से दो प्रकार के विवाद या विवादास्पद मुद्दे सामने आए हैं, खासकर हाल के वर्षों में:1. अवैध अतिक्रमण और बुलडोजर कार्रवाई (2025 का प्रमुख विवाद)जनवरी 2025 में गुजरात सरकार ने बेट द्वारका में बड़े पैमाने पर बुलडोजर एक्शन चलाया।
इसमें 335 से ज्यादा संरचनाएँ (घर, दुकानें, और कुछ धार्मिक ढांचे जैसे मजार/मस्जिदें) गिराई गईं।
प्रशासन का दावा: ये सभी अवैध अतिक्रमण थे, सरकारी/मेरीटाइम बोर्ड की जमीन पर बने थे, जो सुरक्षा, पर्यावरण और विकास के लिए खतरा थे। लगभग 1 लाख वर्ग मीटर जमीन मुक्त कराई गई, जिसकी अनुमानित कीमत करोड़ों में बताई गई।
प्रभावित पक्ष (मुख्यतः मुस्लिम समुदाय के लोग): आरोप लगाया कि कार्रवाई एकतरफा थी, नोटिस कम समय में दिया गया (कुछ को सिर्फ 12 घंटे), और मुख्य रूप से उनके धार्मिक/आवासीय ढांचों को निशाना बनाया गया। कुछ रिपोर्ट्स में इसे सांप्रदायिक रंग दिया गया, और प्रभावितों ने विस्थापन की शिकायत की।
गुजरात हाईकोर्ट ने कुछ याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें धार्मिक संरचनाओं को सुरक्षा देने की मांग थी।
गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि “कृष्ण भूमि में अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं होगा”।
यह कार्रवाई काफी चर्चित रही और सोशल मीडिया/समाचारों में गरमा-गरमी पैदा की।2. वक्फ बोर्ड से जुड़ा दावा (पुराना लेकिन वायरल विवाद, ज्यादातर फेक)2021-2025 के बीच सोशल मीडिया पर बार-बार वायरल हुआ कि गुजरात वक्फ बोर्ड ने बेट द्वारका के दो द्वीपों पर अपना दावा ठोका है।
यह दावा फेक साबित हुआ। फैक्ट-चेक (Alt News, YouTube आदि) से पता चला कि वक्फ बोर्ड ने ऐसा कोई दावा नहीं किया।
असली मामला: अमरेली जिले के शियाल बेट (Shiyal Bet) नामक अलग द्वीप पर एक प्राइवेट सुन्नी मुस्लिम ट्रस्ट की याचिका थी (सवाई पीर दरगाह से जुड़ी), जिसे गलत तरीके से बेट द्वारका से जोड़ा गया।
बीजेपी सांसद पूनमबेन मादम और वक्फ बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यह बेट द्वारका से संबंधित नहीं है।
अन्य छोटे मुद्देसुदर्शन सेतु (Okha-Beyt Dwarka Bridge) को लेकर कोई बड़ा विवाद नहीं रहा, बल्कि इसे विकास का प्रतीक माना गया। हाँ, उद्घाटन के बाद कुछ गड्ढे/सड़क खराब होने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए थे, लेकिन यह सामान्य निर्माण संबंधी मुद्दा था।
कभी-कभी सुरक्षा (पाकिस्तान बॉर्डर के नजदीक होने से) या अवैध निर्माण से जुड़ी पुरानी खबरें आती हैं, लेकिन मुख्य विवाद ऊपर वाले ही हैं।
कुल मिलाकर, भेंट द्वारका का धार्मिक महत्व अटल है, लेकिन विकास, अतिक्रमण हटाओ अभियान और कुछ अफवाहों ने विवाद पैदा किए। यात्रा के लिए यह सुरक्षित और खूबसूरत जगह बनी हुई है।जय द्वारकाधीश!
बुलडोजर कार्रवाई का विस्तार
द्वारका का धार्मिक महत्व
भेंट द्वारिका
भेंट द्वारिका (जिसे बेट द्वारका या Beyt Dwarka भी कहते हैं) गुजरात के द्वारका क्षेत्र में स्थित एक पवित्र द्वीप है। यह कच्छ की खाड़ी के मुहाने पर है, मुख्य द्वारका शहर से लगभग 25-30 किमी उत्तर में, ओखा बंदरगाह से मात्र 2 किमी दूर।नाम का अर्थ और महत्वगुजराती में “बेट” का मतलब द्वीप (island) होता है।
साथ ही “भेंट” (उपहार या मिलन) से जुड़ा होने के कारण इसे भेंट द्वारका भी कहा जाता है।
लोकप्रिय कथा के अनुसार, यही वह पवित्र स्थल है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बचपन के गरीब लेकिन सच्चे मित्र सुदामा से मिलन (भेंट) किया था। सुदामा जी ने कृष्ण को केवल थोड़ा-सा चावल (पोहा/चिवड़ा) भेंट में दिया था, और कृष्ण ने उस सादगी और प्रेम को स्वीकार कर सुदामा को अपार धन-धान्य प्रदान किया। इसी अमर भेंट की याद में इस द्वीप को भेंट द्वारका कहा जाता है।
मुख्य आकर्षणश्री बेट द्वारकाधीश मंदिर — भगवान कृष्ण का मुख्य मंदिर, जहाँ उनकी भव्य मूर्ति विराजमान है। मान्यता है कि यहाँ कृष्ण का निवास स्थान था और रानी रुक्मिणी द्वारा स्थापित मूर्ति है।
दंडी हनुमान मंदिर — द्वीप के पूर्वी छोर पर स्थित, बहुत प्रसिद्ध।
शिवराजपुर बीच — नीले पानी और सफेद रेत वाला खूबसूरत समुद्र तट (Blue Flag certified)।
अन्य छोटे मंदिर और प्राकृतिक सौंदर्य।
कैसे पहुँचें (2026 तक की स्थिति)ओखा से फेरी (नाव) द्वारा 15-20 मिनट में।
अब सुदर्शन सेतु (Okha–Beyt Dwarka Signature Bridge) बन चुका है — भारत का पहला समुद्री पुल, जो पैदल, साइकिल और वाहनों के लिए खुला है। इससे यात्रा बहुत आसान हो गई है।
मुख्य द्वारका से टैक्सी/बस द्वारा ओखा तक, फिर पुल या नाव से।
यह स्थान द्वारका धाम यात्रा का अनिवार्य हिस्सा है। यहाँ आकर भक्त चावल दान की परंपरा भी निभाते हैं, जो सुदामा की भेंट की याद दिलाती है और गरीबी दूर करने की मान्यता है।जय द्वारकाधीश!
बेयट (बेट) द्वारका: बेट द्वारका (शंखोद्धार) द्वीप, समुद्र तट से 30 किमी दूर स्थित है और ओखा बंदरगाह के माध्यम से यहाँ पहुँचा जा सकता है, महाभारत में इसकी पहचान अंतरद्वीप के रूप में की गई है।
गुरु वल्लभाचार्य का संबंध इस द्वीप पर स्थित एक मंदिर से है।
द्वीप पर उत्खनन से हड़प्पा और मौर्य काल के निवास स्थान का पता चलता है।
मध्यकालीन समय में यह क्षेत्र बड़ौदा के गायकवाड़ के अधीन था, जिसे वर्ष 1857 में कुछ समय के लिये वाघेरों ने अपने अधीन कर लिया था।
Sudarshan Setu Dwarka: भारत का सबसे लंबा सिग्नेचर ब्रिज सुदर्शन सेतु, एक से एक विशेषताओं से है लैस
2.5 किलोमीटर लंबा सुदर्शन सेतू द्वारका के ओखा और बेट को जोड़ता है। इससे द्वारकाधीश मंदिर तक कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिला है। ₹978 करोड़ की लागत से निर्मित इस ब्रिज को मोदी सरकार ने 2017 में बनाना शुरू किया था।
भारत का सबसे लंबे ओखा-बेट द्वारका सिग्नेचर ब्रिज का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने किया था। ओखा-बेट सिग्नेचर ब्रिज के निर्माण मोदी का ही विजन था। यह पुल द्वारकाधीश मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों की सुविधा है। इससे पानी के रास्ते जो सफर पांच घंटे में होता था, वह अब तीन घंटे में ही पूरा होता है। इस सिग्नेचर ब्रिज की कई विशेषताओं ने इसे एक अनूठी पहचान दी है।
Dwarka Signature Bridge gujarat
सुदर्शन सेतु ओखा-बेट द्वारका सिग्नेचर ब्रिज (फोटो-AIR)
द्वारकाधीश मंदिर तक कनेक्टिविटी को बढ़ावा
2.5 किलोमीटर लंबा सुदर्शन सेतू द्वारका के ओखा और बेट को जोड़ता है। इससे द्वारकाधीश मंदिर तक कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिला। ₹978 करोड़ की लागत से निर्मित इस ब्रिज को मोदी सरकार ने 2017 में बनाना शुरू किया था। मोदी ने ही सुदर्शन सेतू की आधारशिला रखी थी।
सुदर्शन सेतू की विशेषतायें और लाभ
ओखा-बेट सिग्नेचर ब्रिज के निर्माण से पहले, तीर्थयात्री द्वारका स्थित द्वारकाधीश मंदिर तक पहुंचने को जल परिवहन पर निर्भर थे। बोट पर निर्भर थे। जो अब खत्म हो गया।
अब समुद्र की लहरों के बीच तीर्थयात्री सड़क मार्ग से द्वारकाधीश मंदिर तक पहुंच सकते हैं।
इसके साथ ही यहां के स्थानीय लोगों को भी मेडिकल इमरजेंसी में स्पेशल बोट करके जाने की जरूरत पड़ती थी। जो अब खत्म हो गई।
स्थानीय लोगों को भी ब्रिज बनने से आने- जाने में आसानी हुई। साथ ही बेट द्वारका में विकास के कई रास्ते खुले।
बेट द्वारका और ओखा के बीच बने 2.5 किलोमीटर लंबे सिग्नेचर ब्रिज में 12 व्यूइंग गैलेरी बनाई गई है।
फुटपाथ पर दोनों साइड पर श्रीमद भगवत गीता के श्लोक ओर भगवान श्रीकृष्ण के चित्र लगाए गए हैं।
इसकी फुटपाथ के दोनों साइड के ऊपरवाले हिस्सों में सोलर पैनल लगाए गए हैं जिससे 1 मेगावॉट बिजली का उत्पादन होगा।
इसी बिजली का प्रयोग ब्रिज पर लगी लाइटिंग को किया जाएगा, बाकि बिजली ओखा गांव में सप्लाई होती है।
पुल पर टूरिस्ट गैलरी में लोग कुछ समय रूक कर कच्छ की खाड़ी के समुद्र को देख सकते हैं।
यहां से सूर्यास्त का नजारा भी देखने योग्य है, जिसका आनंद टूरिस्ट उठा सकते हैं।
सुदर्शन सेतू के खंभों पर मोर का पंख बनाया गया है, जो काफी दूर से दिखता है।
भारत के सबसे लंबे केबल-स्टेड ब्रिज, सुदर्शन सेतु का उद्घाटन वर्ष 2024 में हुआ।
