30000 करोड़ के मालिक अनिल अग्रवाल लुटे भाग्य के हाथों,पुत्र दिवंगत
बिहार से लंदन तक साम्राज्य… 10 कंपनियां, अनिल अग्रवाल बोले- अब कैसे कटेगी जिंदगी?
Anil Agarwal Son Dies: अरबपति अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल का निधन हो गया.उनका व्यवसाय भारत ही नहीं, लंदन से लेकर साउथ अफ्रीका तक फैला हुआ है और इसमें दिवंगत Agnivesh Agarwal महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे.
लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट है अनिल अग्रवाल की कंपनी
नई दिल्ली,08 जनवरी 2026,वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल (Vedanta Chairman Anil Agarwal) पर दुखों का पहाड़ टूटा है.बुधवार को उनके बेटे अग्निवेश अग्रवाल का अमेरिका में निधन (Agnivesh Agarwal Dies) हो गया.उन्हें न्यूयॉर्क में एक स्कीइंग हादसे के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था,जहां 49 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली.वेदांता ग्रुप का बड़ा कारोबार है,जो लंदन तक फैला हुआ है.आइए जानते हैं कि बेटे के बाद अब अनिल अग्रवाल के परिवार में कौन-कौन है?
बिहार से मुंबई… फिर लंदन में धमक
जब भी कभी अपने दम पर विशाल कारोबारी साम्राज्य खड़ा करने वाले भारतीय उद्योगपतियों का जिक्र होता है, तो वेदांता (Vedanta Ltd) के फाउंडर अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) का नाम भी लिया जाता है. ऐसा हो भी क्यों न आखिर साधारण फैमिली में पैदा होने के बाद उन्होंने अपनी मेहनत और काबिलियत की दम पर माइनिंग व मेटल किंग की छवि बनाई है और इस सेक्टर में ऐसा विशाल कारोबार खड़ा किया है, जिसकी धमक लंदन तक है.
Bihar से Mumbai और अनिल अग्रवाल का कारोबार London तक पहुंचा. बता दें कि लंदन स्टॉक एक्सचेंज (London Stock Exchange) पर लिस्ट होने वाली पहली भारतीय कंपनी भी वेदांता रिसोर्सेज पीएलसी थी, जो 10 दिसंबर 2003 को लिस्ट हुई थी.
₹30000 करोड़ संपत्ति, कंपनी की ये वैल्यू
Vedanta Anil Agarwal भारत के सबसे अमीरों में शामिल हैं. उनकी नेटवर्थ फोर्ब्स के रियल टाइम बिलेनियर्स इंडेक्स के अनुसार,Anil Agarwal Networth 3.3 अरब डॉलर (करीब 30000 करोड़ रुपये) है.उनकी कंपनी वेदांता लिमिटेड की मार्केट वैल्यू 2.23 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है.न सिर्फ माइनिंग और मेटल,बल्कि सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भी Vedanta Group बीते कुछ समय से लगातार कदम आगे बढ़ाता दिखा है.
‘वेदांता चेयरमैन बोले- अब जिंदगी कैसे…’
बेटे अग्निवेश अग्रवाल के निधन से टूटे अनिल अग्रवाल ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा,’अभी तो साथ मिलकर बहुत कुछ करना था अग्नि,तुम्हें पूरी जिंदगी जीनी थी,कितने सपने थे,कितने अरमान थे,सब कुछ अधूरा ही रह गया.समझ नहीं आता,तुम्हारे बिना अब जिंदगी कैसे कटेगी बेटा.’
नहीं रहा बेटा,परिवार में अब कौन-कौन?
दो बच्चों के पिता अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल का बुधवार को निधन हो गया,जो वेदांता ग्रुप में बड़ा रोल निभाते थे और समूह की तमाम कंपनियों में वे बड़े पदों पर रहे थे. Agnivesh Agarwal वेदांता की सब्सिडियरी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड के बोर्ड मेंबर थे.उनके निधन के बाद परिवार में पत्नी किरण के अलावा बेटी प्रिया,भाई नवीन अग्रवाल हैं.
बात करें, अनिल अग्रवाल की बेटी (Anil Agarwal Daughter) प्रिया हेब्बार के बारे में,तो वे वेदांता बोर्ड में शामिल हैं और Hindustan Zinc Ltd की चेयरपर्सन हैं.भाई दिवंगत अग्निवेश अग्रवाल की तरह ही पूजा भी अपने पिता के कारोबार में बड़ी भूमिका निभाती हैं.हिंदुस्तान जिंक की चेयरपर्सन होने के साथ ही वे वेदांता लिमिटेड में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर का पद भी संभाल रही हैं.
ब्रिटेन की वारविक यूनिवर्सिटी से बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वालीं प्रिया वेदांता लिमिटेड में अन्य कई भूमिकाओं में भी नजर आती हैं,जिनमें इन्वेस्टर्स रिलेशन,कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस जैसे क्षेत्र शामिल हैं,जिन्हें वे लीड करती हैं.प्रिया की शादी साल 2013 में आकाश हेब्बार से हुई थी और उनकी एक बेटी माही है.
‘बेटे को पिता से पहले नहीं जाना…’, Anil Agarwal के बेटे की कैसे हुई अचानक मौत, 49 साल ही थी उम्र
Anil agarwal son Agnivesh Agarwal Death: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल की कार्डिएक अरेस्ट से मौत हो गई है. न्यूयॉर्क में स्कीइंग के दौरान उनका एक्सिडेंट हुआ था जिसके बाद इलाज के दौरान उन्हें कार्डिएक अरेस्ट आया.

कार्डिएक अरेस्ट से हुआ अग्निवेश अग्रवाल का निधन
वेदांता ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल का कार्डिएक अरेस्ट से निधन हो गया है. न्यूयॉर्क में स्कीइंग दुर्घटना के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वो रिकवर भी हो रहे थे लेकिन इलाज के दौरान ही उन्हें अचानक कार्डियक अरेस्ट आया और मात्र 49 साल की उम्र में उनकी मौत हो गई.
पुत्र शोक से व्याकुल अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक भावुक पोस्ट में लिखा, ‘आज मेरी जिंदगी का सबसे दुखद दिन है. मेरा प्यारा बेटा अग्निवेश हमें बहुत जल्दी छोड़कर चला गया. वो सिर्फ 49 साल का था, स्वस्थ था, जिंदगी और सपनों से भरा हुआ था. अमेरिका में एक स्कीइंग दुर्घटना के बाद वो न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में रिकवर हो रहा था. हमें लगा था कि सबसे बुरा समय बीत गया है. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और अचानक कार्डियक अरेस्ट ने हमारे बेटे को हमसे छीन लिया.’
‘एक बेटे को अपने पिता से पहले नहीं जाना चाहिए’
उन्होंने आगे लिखा, ‘कोई भी शब्द उस माता-पिता के दर्द को बयान नहीं कर सकता जिसे अपने बच्चे को अलविदा कहना पड़ता है. एक बेटे को अपने पिता से पहले नहीं जाना चाहिए. इस नुकसान ने हमें इस तरह से तोड़ दिया है कि हम अभी भी इसे समझने की कोशिश कर रहे हैं।
बेटे की मौत से टूटे वेदांता के फाउंडर
वेदांता ग्रुप के संस्थापक ने अपने बेटे की जिंदगी को याद करते हुए लिखा, ‘मुझे आज भी वह दिन याद है जब 3 जून 1976 को पटना में अग्नि का जन्म हुआ था. एक मध्यम वर्गीय बिहारी परिवार में. वो एक मजबूत, दयालु और मकसद वाले इंसान के रूप में बड़ा हुआ. वो अपनी मां की जिंदगी की रोशनी था. एक रक्षा करने वाला भाई, एक वफादार दोस्त और एक नेक इंसान जिसने हर किसी को छुआ जिससे वह मिला.’
उन्होंने आगे कहा, ‘अग्निवेश बहुत कुछ था. वो एक खिलाड़ी, एक संगीतकार, एक लीडर. उसने मायो कॉलेज अजमेर में पढ़ाई की फिर फुजैराह गोल्ड जैसी बेहतरीन कंपनियों में से एक की स्थापना की. हिंदुस्तान जिंक का चेयरमैन बना और सहकर्मियों और दोस्तों का सम्मान हासिल किया. फिर भी सभी पदवियों और उपलब्धियों से परे वो एक सरल, मिलनसार और दिल से इंसान बना रहा. मेरे लिए वो सिर्फ मेरा बेटा नहीं था.वो मेरा दोस्त था. मेरा गर्व. मेरी दुनिया.’
‘बाप के कंधे पर बेटे की अर्थी…’, अग्निवेश के निधन पर कारोबारी अनिल अग्रवाल का छलका दर्द, कहा- सपने अधूरे नहीं रहने दूंगा
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का न्यूयॉर्क में निधन हो गया. अग्निवेश अमेरिका में स्कीइंग के दौरान हादसे का शिकार हो गए थे. उसके बाद उनका इलाज रहा था. इस बीच, कार्डियक अरेस्ट से जान चली गई. बेटे की मौत ने कारोबारी अग्रवाल और उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है.

कारोबारी अनिल अग्रवाल ने बेटे अग्निवेश के निधन पर भावुक पोस्ट लिखा.
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन और उद्योगपति अनिल अग्रवाल बुधवार को अपने 49 वर्षीय बेटे अग्निवेश के निधन से पूरी तरह टूट गए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक पोस्ट लिखा है और अपना दर्द साझा किया है. अग्रवाल ने बेटे से जुड़ी यादें शेयर कीं और उससे किए वादे का पूरा करने का इरादा दोहराया है. अग्रवाल ने लिखा, एक बाप के कंधे पर बेटे की अर्थी जाए, इससे बुरा और क्या हो सकता है.
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का बुधवार को अमेरिका में निधन हो गया है. अग्निवेश अमेरिका में स्कीइंग के लिए गए थे, जहां एक हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए. इसके बाद उन्हें न्यूयॉर्क के माउंट साइनाई अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान अचानक उन्हें कार्डिक अरेस्ट आया और उनकी मौत हो गई.
‘मेरी जिंदगी का सबसे दर्दनाक दिन’
बेटे के निधन के बाद अनिल अग्रवाल ने फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट लिखी. उन्होंने लिखा, आज मेरे जीवन का सबसे दर्दनाक दिन है. मेरा अग्निवेश, मेरा 49 साल का बेटा, आज हमारे बीच नहीं रहा. एक बाप के कंधे पर बेटे की अर्थी जाए, इससे बुरा और क्या हो सकता है. उन्होंने बताया कि अग्निवेश अपने एक दोस्त के साथ अमेरिका में स्कीइंग करने गया था, जहां हादसा हुआ. वह माउंट साइनाई हॉस्पिटल, न्यूयॉर्क में ठीक हो रहा था. हमें लगा सब ठीक हो जाएगा. लेकिन अचानक कार्डिक अरेस्ट हो गया और हमारा बच्चा हमें छोड़कर चला गया.
पटना से शुरू हुई अग्निवेश की कहानी
अनिल अग्रवाल ने बेटे की जिंदगी के सफर को भी याद किया. उन्होंने लिखा कि 3 जून 1976 को जब अग्निवेश का जन्म पटना में हुआ था, वह पल आज भी उनकी आंखों के सामने है. एक मिडिल क्लास बिहारी परिवार में जन्मा था मेरा अग्नि.
उन्होंने बेटे को बचपन से ही चंचल, शरारती और हमेशा मुस्कुराने वाला बताया. उन्होंने कहा, अग्नि अपनी मां का दुलारा था. यारों का यार था और अपनी बहन प्रिया को लेकर सबसे ज्यादा प्रोटेक्टिव था.
पढ़ाई, खेल और संगीत में अव्वल
अग्निवेश ने अजमेर के मेयो कॉलेज से पढ़ाई की थी. अनिल अग्रवाल के मुताबिक, अग्निवेश की पर्सनैलिटी बेहद मजबूत थी. वह बॉक्सिंग चैंपियन था, घुड़सवारी का शौकीन था और शानदार म्यूजिशियन भी. पढ़ाई के बाद उसने फुजैराह गोल्ड जैसी बड़ी कंपनी खड़ी की और बाद में हिंदुस्तान जिंक का चेयरमैन भी बना.
उपलब्धियों से ऊपर इंसान
अनिल अग्रवाल ने लिखा कि तमाम उपलब्धियों के बावजूद अग्निवेश बेहद सादा इंसान था. वह हमेशा अपने दोस्तों और सहकर्मियों के बीच रहता था. जिससे भी मिलता, उसे अपना बना लेता था. जमीन से जुड़ा, सीधा, सच्चा, जिंदादिल और इंसानियत से भरा हुआ.
उन्होंने कहा, वह सिर्फ मेरा बेटा नहीं था. वह मेरा दोस्त था. मेरी शान था. मेरी पूरी दुनिया था.
‘हम टूट गए हैं’
पोस्ट में अनिल अग्रवाल ने लिखा कि वह और उनकी पत्नी किरण पूरी तरह टूट गए हैं. हम बस यही सोच रहे हैं कि हमारा बेटा चला गया. लेकिन इसी दर्द के बीच उन्होंने वेदांता में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों को भी अपने बच्चे जैसा बताया. वेदांता में काम करने वाले सभी लोग हमारे बेटे-बेटियां ही तो हैं.
देश के लिए अधूरा सपना
अनिल अग्रवाल ने लिखा कि उनका और अग्निवेश का सपना था भारत को आत्मनिर्भर बनाना. वह हमेशा कहता था, पापा हमारे देश में क्या नहीं है, फिर हम किसी से पीछे क्यों रहें. उन्होंने बताया कि दोनों की दिली इच्छा थी कि कोई बच्चा भूखा न सोए, कोई बच्चा अनपढ़ न रहे, हर महिला आत्मनिर्भर बने और हर युवा को रोजगार मिले.
75 प्रतिशत संपत्ति समाज के नाम
अनिल अग्रवाल ने उस वादे को दोहराया, जो उन्होंने बेटे के साथ किया था. उन्होंने लिखा कि वेदांता ग्रुप की कमाई का 75 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा समाज के कामों में लगाया जाएगा. आज फिर वही वादा दोहराता हूं. अब और भी सादगी से जीवन जीऊंगा और अपनी बाकी जिंदगी इसी में लगा दूंगा.
‘तुम्हारे सपने अधूरे नहीं रहने दूंगा’
पोस्ट के अंत में अनिल अग्रवाल ने लिखा, अभी तो साथ मिलकर बहुत कुछ करना था अग्नि. तुम्हें पूरी जिंदगी जीनी थी. कितने सपने थे, कितने अरमान थे. सब अधूरा रह गया. उन्होंने कहा कि बेटे के बिना जिंदगी हमेशा अधूरी रहेगी, लेकिन वे उसके सपनों को अधूरा नहीं रहने देंगे.
अग्निवेश को एक्सिडेंट्स के बाद आया था कार्डिएक अरेस्ट
अनिल अग्रवाल के बेटे की असामयिक मौत से हर कोई हैरान है, उनकी उम्र भी 49 साल ही थी, ऐसे में लोग सवाल कर रहे हैं कि इतनी कम उम्र में उनकी मौत की क्या वजह थी. कार्डियक अरेस्ट कब और क्यों आता है और क्या इसके कोई लक्षण क्या होते हैं?
क्या है कार्डिएक अरेस्ट
अमेरिका की हार्ट एसोसिएशन की वेबसाइट के अनुसार, कार्डिएक अरेस्ट दिल का एक इलेक्ट्रिकल फेल्योर होता है. हमारे दिल में एक कुदरती पेसमेकर (SA Node) होता है जो बिजली के सिग्नल भेजता है. जब ये सिग्नल अचानक अस्त-व्यस्त यानी ठीक से काम नहीं कर पाते हैं तो दिल की धड़कन रुक जाती है. मेडिकल भाषा में इस अनियमित धड़कन को अरिदमिया (Arrhythmia) कहते हैं.
कार्डिएक अरेस्ट (Cardiac Arrest) को आसान भाषा में समझाएं तो इसका मतलब है दिल का अचानक धड़कना बंद होना हमारा दिल एक मोटर की तरह है जो बिजली के झटकों (Electrical Impulses) से चलता है. ये बिजली के झटके ही तय करते हैं कि दिल कब और कितनी बार धड़केगा. हार्ट अटैक में खून की नली जाम होती है जबकि कार्डिएक अरेस्ट में मेन पावर सप्लाई यानी Electrical Impulses रुक जाते हैं. इसके बाद दिल धड़कना बंद कर देता है और शरीर के अंगों (खासकर दिमाग) तक खून पहुंचना रुक जाता है.
कार्डिएक अरेस्ट क्यों होता है?
अमेरिका के मेडिकल क्षेत्र के लिए काम करने वाली जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी ने अपनी वेबसाइट में बताया, कार्डिएक अरेस्ट दिल की किसी बीमारी की वजह से हो सकता है या यह अचानक भी आ सकता है. इसके तीन बड़े कारण होते हैं.
अरिदमिया और वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन
अरिदमिया तब होता है जब दिल के इलेक्ट्रिकल सिग्नल में खराबी आ जाती है, जिससे धड़कन असामान्य हो जाती है. ‘वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन’ अरिदमिया का ही एक प्रकार है और कार्डिएक अरेस्ट का सबसे आम कारण है. इसमें दिल के निचले हिस्से की धड़कन इतनी तेज हो जाती है कि दिल खून को पंप करने के बजाय सिर्फ थरथराने लगता है.
दिल का बढ़ जाना (कार्डियोमायोपैथी)
इसमें दिल की मांसपेशियां खिंच जाती हैं या मोटी हो जाती हैं जिससे दिल का सिकुड़ना (धड़कना) सामान्य नहीं रहता.
कोरोनरी आर्टरी डिजीज
यह बीमारी तब होती है जब दिल की नसें (धमनियां) कोलेस्ट्रॉल जमा होने के कारण संकरी और सख्त हो जाती हैं जिससे दिल तक खून पहुंचना कम हो जाता है. अगर इसका इलाज न किया जाए तो यह हार्ट फेल्योर या अरिदमिया का कारण बन सकता है जिससे कार्डिएक अरेस्ट आ सकता है.
कार्डिएक अरेस्ट के कुछ अन्य कारण
शरीर से बहुत ज्यादा खून बह जाना.
दिल के वाल्व की बीमारी.
शरीर में ऑक्सिजन की भारी कमी.
पोटैशियम और मैग्नीशियम का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाना जिससे धड़कन बिगड़ सकती है.
कार्डियक अरेस्ट क्यों है जानलेवा
हार्ट अटैक से अलग कार्डियक अरेस्ट कभी भी किसी को भी आ सकता है. यह चुपचाप दस्तक देता है और ज्यादातर मामलों में जानलेवा होता है.
कभी भी किसी को भी आ सकता है कार्डिएक अरेस्ट
यह कभी भी किसी भी व्यक्ति को आ सकता है. चाहे उसे दिल की बीमारी हो या ना हो. यह अचानक होता है और फिर कई बार कुछ लक्षण भी दिखा सकता है. अगर तुरंत एक्शन ना लिया जाए तो कार्डियक अरेस्ट अक्सर जानलेवा होता है. हालांकि 30 से कम उम्र के व्यक्ति में कार्डिएक अरेस्ट होने की संभावना कम होती है. लेकिन पिछले कुछ समय से भारत और पूरी दुनिया में बच्चों, युवाओं हर किसी में भी सडन कार्डिएक अरेस्ट देखा गया. हार्ट डिसीस और अगर किसी की फैमिली हिस्ट्री में ये कंडीशन रही है तो ऐसे लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है.
क्यों खतरनाक है कार्डिएक अरेस्ट
दिमाग को जिंदा रहने के लिए लगातार ऑक्सीजन और खून की जरूरत होती है. जब दिल रुक जाता है तो दिमाग को खून मिलना बंद हो जाता है. अगर 3 से 5 मिनट के भीतर इलाज या CPR न मिले तो व्यक्ति की मौत हो सकती है या दिमाग हमेशा के लिए डैमेज हो सकता है.
कार्डियक अरेस्ट से ठीक पहले क्या होता है?
बेहोश होने से पहले मरीज में कार्डियक अरेस्ट के कई लक्षण दिख सकते हैं.
सीने में दर्द
मतली और उल्टी
सांस फूलना
कब और क्यों हार्ट बीट में दिक्कत आती है
कार्डियोमायोपैथी.
किसी बीमारी के लिए ली जा रही दवाएं
हार्ट अटैक
हार्ट फेल होना
कोकेन जैसे ड्रग्स का सेवन
लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम (LQTS)
गंभीर बीमारी या चोट जिसमें बहत ज्यादा खून बह जाता है
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में क्या अंतर है?
हार्ट अटैक तब होता है जब दिल के किसी हिस्से में ब्लड फ्लो यानी ब्लड फ्लो
Vedanta का देश-विदेश में बड़ा कारोबार
अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाला वेदांता ग्रुप एक ग्लोबल नेचुरल रिसोर्स समूह है,जिसका कारोबार देश-विदेश में फैला हुआ है.ग्रुप की पेरेंट कंपनी लंदन हेडक्वार्टर वाली वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड (Vedanta Resources Limited) है,जबकि इसकी मैन सब्सिडियरी कंपनी वेदांता लिमिटेड है.ग्रुप का एल्युमिनियम, जिंक-लेड-सिल्वर, आयरन, कॉपर समेत कई सेक्टर्स में बड़ा कारोबार है.
वेदांता ग्रुप की बड़ी सब्सिडियरी और बिजनेस यूनिट्स में Hindustan Zinc,भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO),Cairn Oil & Gas,ESL Steel Ltd, Talwandi Sabo Power Ltd,Sterlite Copper हैं.इसके अलावा साउथ अफ्रीका और नांबिया में माइनिंग ऑपरेशंस संभाल रही Vedanta Zinc International,जाम्बिया बेस्ड Konkola Copper Mines (KCM) भी शामिल है.
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