विवेचन: नरवणे की किताब कहां तक जायेगी राहुल की राजनीति ?

क्या नरवणे की किताब पर ‘टकरा’ रहे हैं पब्लिशर पैंग्विन के दो ट्वीट? राहुल गांधी के दावे में कितना दम
पूर्व आर्मी चीफ मनोज नरवणे की किताब Four Stars of Destiny को लेकर उठा तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा. अब राहुल गांधी नरवणे और पेंग्विन के पुराने ट्वीट दिखाकर कह रहे हैं कि किताब ‘उपलब्ध’ रही है. जबकि पब्लिशर पेंग्विन कह रहा है कि उसने किताब नहीं छापी है, और जो कुछ शेयर हुआ है वह ऑथेंटिक नहीं है. आइये, आसान भाषा में समझते हैं कि सच क्या हैं?क्या राहुल गांधी चूक कर रहे हैं?

राहुल गांधी ने पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की किताब को लेकर फिर नए दावे किए हैं.
नई दिल्ली,10 फरवरी 2026,पूर्व आर्मी चीफ मनोज नरवणे की विवादित किताब Four Stars Of Destiny से जुड़े दो ट्वीट्स परस्पर विरोधी दिखते हैं. पहले दिसंबर 2023 के ट्वीट में जनरल मनोज नरवणे ने लिखा, ‘हैलो फ्रेंड्स. मेरी किताब अब उपलब्ध है. लिंक फॉलो करो. हैप्पी रीडिंग. जय हिंद.’

उनके पोस्ट में किताब का कवर और अमेजन का लिंक था.लोग प्री-ऑर्डर कर रहे थे. दूसरा ट्वीट फरवरी 2026 का है.पेंग्विन इंडिया ने कहा ‘किताब प्रकाशन की प्रक्रिया में नहीं गई है.कोई प्रिंट या डिजिटल कॉपी जारी नहीं हुई. जो भी घूम रही है, वह कॉपीराइट उल्लंघन है.’

राहुल गांधी संसद में किताब का हार्डकॉपी दिखा रहे हैं. कह रहे हैं ‘नरवणे जी ने 2023 में ट्वीट किया था कि किताब उपलब्ध है. अमेजन पर प्री-ऑर्डर था. मैं नरवणे जी पर भरोसा करूंगा.’ लेकिन वे 2023 के प्री-ऑर्डर स्टेज को ‘किताब छप गई’ समझ रहे हैं. वो स्टेज सिर्फ लिस्टिंग का था.असल छपाई बाद में होती है.क्लियरेंस न मिलने से छपाई रुक गई.राहुल ने पुरानी बात को अंतिम सच मान लिया.

दिल्ली पुलिस की एफआईआर से बढ़ गया विवाद

दिल्ली पुलिस ने स्पेशल सेल में एफआईआर अंकित की है. मामला है अनऑथोराइज्ड कॉपी के सर्कुलेशन का. पीडीएफ वर्जन व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर घूम रहा था. पुलिस कह रही है कि ये किताब का प्री-प्रिंट वर्जन है, जो पेंग्विन के पास था. किसी ने इसे लीक किया है. पुलिस इसे कॉपीराइट चोरी और सेंसिटिव जानकारी का प्रसार मान रही है.

सोमवार रात पेंग्विन ने सफाई दी कि हमने किताब प्रकाशित नहीं की है. न प्रिंट और न ही डिजिटल. इसकी कोई कॉपी जारी नहीं की है. घूम रही कॉपी कॉपीराइट का उल्लंघन और चोरी है. हम कानूनी कार्रवाई करेंगें. पेंग्विन के पास एक्सक्लूसिव राइट्स हैं. वे किताब छाप नहीं सकते क्योंकि क्लियरेंस पेंडिंग है.

ये हैं 2023 का जनरल नरवणे का ट्वीट-

और फिर बीती रात आई पैंग्विन की सफाई-

क्या है पुस्तक मुद्रण प्रक्रिया?

लेखक मैनुस्क्रिप्ट देता है. पब्लिशर एडिटिंग करता है. कवर बनता है. फिर आईएसबीएन नंबर लेता है. उसके बाद अमेजन-फ्लिपकार्ट पर लिस्टिंग होती है. प्री-ऑर्डर शुरू हो जाते हैं. पैसे जमा होते हैं. लेकिन असल मुद्रण अंतिम चरण में होता है. अगर कोई अड़चन आए तो लिस्टिंग हटा दी जाती है. पैसे रिफंड होते हैं. नरवणे की किताब इसी स्टेज पर अटकी है. पूरी प्रक्रिया पैंग्विन ने मंगलवार को x पर पोस्ट कर समझायी-

ISBN नंबर का महत्व- ISBN यानी इंटरनेशनल स्टैंडर्ड बुक नंबर. यह किताब की पहचान का 13 डिजिट यूनीक आईडी नंबर होता है. पब्लिशर राष्ट्रीय एजेंसी से लेता है. मैनुस्क्रिप्ट एडिटिंग के बाद ले लिया जाता है. मुद्रणपूर्व. आईएसबीएन से किताब ‘घोषित हो जाती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किताब छप गई और बाजार में है. नरवणे की किताब का आईएसबीएन 9780670099757 है जो 2023 में ही मिल गया था. इसलिए अमेजन पर लिस्टिंग दिखी. लेकिन छपाई नहीं हुई.

अमेजन पर प्री-ऑर्डर का मतलब

प्री-ऑर्डर का मतलब किताब छप गई, ऐसा नहीं. कई किताबें साल भर पहले लिस्ट हो जाती हैं. पैसे ले लिए जाते हैं. अगर देरी हो तो रिफंड होता है. नरवणे की किताब का प्री-ऑर्डर 2023 में शुरू हुआ था. बाद में कैंसल हो गया. लिस्टिंग हटा दी गई. जो लोग कह रहे हैं ‘अमेजन पर थी’, वे सही कह रहे हैं. लेकिन वो सिर्फ लिस्टिंग थी, किताब नहीं.

सैन्य अफसर के लिए किताब छापने के नियम क्या हैं

सर्विंग ऑफिसर को किताब छापने को सेंट्रल गवर्नमेंट की परमिशन लेनी पड़ती है. आर्मी रूल्स 1954 का सेक्शन 21 कहता है,रिटायर्ड ऑफिसर पर ये नियम लागू नहीं होता. लेकिन ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट 1923 जीवन भर को है. संवेदनशील जानकारी नहीं छाप सकते. 2021 में पेंशन रूल्स में बदलाव आया. इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी ऑर्गेनाइजेशन के रिटायर्ड लोगों को क्लियरेंस लेना पड़ता है. आर्मी इसमें नहीं है, लेकिन प्रैक्टिस में आर्मी चीफ जैसे बड़े ऑफिसर मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस को मैनुस्क्रिप्ट दिखाते हैं. इसी सिलसिले में नरवणे की बुक पेंग्विन ने क्लियरेंस को भेजी, जो 2024 से पेंडिंग है.

किताब के न छपे होने की बात क्यों ज्यादा विश्वसनीय?

पेंग्विन पब्लिशर है.वे किताब छापने वाले हैं.अगर क्लियरेंस नहीं मिला तो वे प्रिंटिंग नहीं करेंगें.नुकसान उनका होगा. नरवणे ने 2023 में सिर्फ अनाउंसमेंट किया था. तब क्लियरेंस की प्रक्रिया गतिमान थी. अब 2026 में पेंग्विन कह रही है कि किताब प्रकाशन स्टेज पर नहीं पहुंची. लीक हुई कॉपी प्री-प्रिंट टाइपसेट है. दिल्ली पुलिस भी यही जांच रही है. इसलिए सच्चाई यही है कि किताब अभी छपी नहीं है. जो कॉपी घूम रही है, वो चोरी का माल है. लीगल और ऑथेंटिक नहीं.

नरवणे की किताब की यह कथित पीडीएफ कॉपी सोशल मीडिया पर खूब शेयर हुई, जिसकी जांच हो रही है.
राहुल गांधी से कहां चूक हुई

वे पुराने ट्वीट को अंतिम सच मान रहे हैं. लेकिन प्रकाशन की दुनिया में ‘उपलब्ध’ (available) का मतलब प्री-ऑर्डर लिंक होता है. असल उपलब्धता तब होती है जब किताब छपकर दुकान पर आ जाए. क्लियरेंस न मिलने से वो स्टेज कभी आया ही नहीं. सरकार कह रही है कि किताब में गलवान, राजनीतिक फैसले जैसे संवेदनशील विषय हैं. इसलिए क्लियरेंस रुका है. राहुल गांधी इसे सच दबाने का षड्यंत्र बता रहे हैं. लेकिन असल में नियम और सुरक्षा का मामला है.

किताब को क्लीयरेंस मिल जाता तो मई 2024 में छप जाती. अमेजन पर डिलीवरी शुरू हो जाती. कोई विवाद नहीं होता. लेकिन क्लियरेंस पेंडिंग है. इसलिए पेंग्विन ने छापना रोक दिया. नरवणे भी प्रतीक्षा में हैं । लीक हुई कॉपी से विवाद बढ़ गया. ये कंट्रोवर्सी अब किताब के कंटेंट से ज्यादा प्रकाशन प्रक्रिया और क्लियरेंस नियमों पर है. नरवणे ने सही कहा था – 2023 में किताब ‘उपलब्ध’ थी, यानी प्री-ऑर्डर पर. पेंग्विन सही कह रही है कि वो आज तक छपी नहीं. राहुल गांधी ने बीच का गैप नहीं देखा. दिल्ली पुलिस लीक की जांच कर रही है. पेंग्विन कॉपीराइट बचाने की कोशिश में है. किताब छपेगी या नहीं, ये क्लियरेंस पर निर्भर है. फिलहाल वो अनपब्लिश्ड है. जो भी पढ़ रहे हैं, वो अनऑथराइज्ड कॉपी पढ़ रहे हैं.

अपडेट– राहुल गांधी के बयानों से किताब फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी को लेकर बढ़ते बवाल के बीच आखिर आर्मी चीफ मनोज नरवणे ने अपनी चुप्पी तोड़ी. मंगलवार शाम उन्होंने X पर पेंग्विन की पोस्ट उद्धृत करते हुए लिखा कि जो पेंग्विन ने कहा है वही उनकी बुक का स्टेटस है. यानी राहुल गांधी जिस तरह नरवणे और पेंग्विन को आमने- सामने खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे, वह विफल हो गई.

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