स्टार वकीलों से लटकते हैं मुकदमें,CJI जनवरी से लगायेंगें इस पर लगाम
CJI Surya Kant announced equitably allocate judicial time for poor litigants no Star lawyers argue for hours
घंटों दलीलें देते हैं स्टार वकील, निराश लौट जाता है गरीब; CJI सूर्यकांत बोले- जनवरी से लगेगी लगाम
सुनवाई में CJI ने मार्मिक घटना सुनाई- एक गरीब महिला का पति रेलवे ट्रैक पर मर गया । मुआवजे को मुकदमा लड़ा। 23 साल बाद सुप्रीम कोर्ट उसे 8 लाख रुपए अनुतोष दिला पाया ।
देहरादून/नई दिल्ली 13 दिसंबर 2025। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एक ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने कहा कि जनवरी 2026 से हर केस में वकीलों की मौखिक दलीलों के लिए सख्त समय सीमा लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य न्यायिक समय का समान बंटवारा सुनिश्चित करना है ताकि गरीब और साधारण मुवक्किलों के मामले भी निर्धारित तारीख पर सुने जा सकें।
CJI ने यह टिप्पणी पूरे देश में जारी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ी कई जनहित याचिकाओं (PIL) की सुनवाई के दौरान की। बेंच के सामने कई वरिष्ठ अधिवक्ता लंबी-लंबी दलीलें दे रहे थे, तभी CJI ने कहा- जो हो रहा है वह पूरी तरह अन्यायपूर्ण और असंगत है। एक गरीब व्यक्ति मोटर दुर्घटना मुआवजे या जमानत के लिए अदालत आता है, लेकिन कुछ मशहूर वकीलों की घंटों-घंटों दलीलें देने की वजह से उसका केस नहीं लिया जाता और वह निराश लौट जाता है।
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि अब से कोई भी वकील मनमाने ढंग से घंटों दलील नहीं दे सकेगा। नए नियम के तहत:
1.हर वकील को अंतिम सुनवाई वाले मामलों में लिखित सबमिशन दाखिल करना अनिवार्य होगा।
2.उसमें स्पष्ट लिखना होगा कि वह अपनी मौखिक दलीलें कितने समय में पूरी करेगा।
3.अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध मामलों में कोई स्थगन नहीं दिया जाएगा।
4.समय सीमा का कड़ाई से पालन होगा।
5.स्टार वकीलों और बार-बार PIL दने वालों पर नकेल
बार के अंदर लंबे समय से यह शिकायत रही है कि कुछ स्टार सीनियर वकील और कुछ एक्टिविस्ट वकील/याचिकाकर्ता घंटों तर्क वितर्क या बार-बार PIL देते हैं, जिससे साधारण मुवक्किलों के केस पीछे छूट जाते हैं। कई बार तो ऐसी याचिकायें तुरंत सूचीबद्ध न करने को आधार बनाकर जजों पर असंवेदनशीलता का आरोप तक लगाते हैं। CJI ने इस प्रिविलेज्ड ट्रीटमेंट को न्याय प्रणाली में असंतुलन का बड़ा कारण बताया और कहा कि अब न्यायिक समय का न्यायसंगत वितरण होगा।
एक विधवा की 23 साल पुरानी कहानी ने सबको झकझोर दिया
सुनवाई के दौरान CJI ने एक मार्मिक घटना सुनाई। उन्होंने कहा- एक गरीब विधवा का पति रेलवे ट्रैक पर मर गया था। मुआवजे के लिए उसने मुकदमा लड़ा। 23 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसे 8 लाख रुपए मुआवजा दिया। लेकिन तब तक वह न्याय व्यवस्था से इतनी निराश हो चुकी थी कि गुमनामी में खो गई थी। एक युवा वकील ने अतिरिक्त मेहनत कर उसे ढूंढा। पता चला कि उसका बैंक खाता तक नहीं था। खाता खुलवाया गया और पैसा जमा किया गया। 23 साल बाद उसके चेहरे पर जो मुस्कान आई, वही न्याय व्यवस्था का असली काम है। हमें हर मुवक्किल के चेहरे पर समय से न्याय देकर मुस्कान लानी है।
पीठ ने कहा कि उस बुजुर्ग महिला को खोज पाना एक मुश्किल काम था, जिसने बिहार के एक दूरदराज के गांव में अपना घर बदल लिया था और उसके स्थानीय वकील के निधन के बाद उसका आखिरी संपर्क भी टूट गया था। पीठ ने रेलवे और वकील फौजिया शकील के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने विधवा की तरफ से मामले में बिना किसी फीस के पक्ष रखा।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा- इन युवा अधिवक्ता (फौजिया शकील) ने, जिन्होंने उसका केस बिना फीस के लड़ा, यह सुनिश्चित किया कि उसे 23 साल बाद मुआवजा मिले। हमें स्थानीय पुलिस और प्रशासन की मदद से उसे ढूंढना पड़ा और आखिरकार रेलवे उसे भुगतान करने में कामयाब रहा। हम एक गरीब व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान देखना चाहते हैं, और कुछ नहीं। रेलवे ने अपने हलफनामे में कहा कि छह अक्टूबर के आदेश के अनुपालन में, उसने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मदद से महिला संयोगिता देवी को ढूंढ लिया।

