फिर उबली मृणाल पांडे की हिंदू घृणा,पौराणिक सनातनी स्त्रियों से कुंठा

रश्मिका-विजय की शादी की तस्वीरों पर लेखिका मृणाल पांडे ने दिखाई हिंदू घृणा, मंदोदरी से लेकर अहिल्या जैसे महान चरित्रों का नाम उछाला: नेटिजन्स ने सिखाया ‘महाभारत’ वाला पाठ

लेखिका मृणाल पांडे ने किया रश्मिका-विजय की शादी की तस्वीरों पर विवादित तंज (फोटो साभार : Theindianexpress)
नेशनल क्रश रश्मिका मंधाना और साउथ सुपरस्टार विजय देवरकोंडा की शादी की खुशियों के बीच लेखिका मृणाल पांडे अपने एक सोशल मीडिया कमेंट को लेकर विवादों के घेरे में आ गई हैं। उदयपुर में हुई इस भव्य शादी की तस्वीरों ने जहाँ फैंस का दिल जीत लिया, वहीं पद्मश्री से सम्मानित मृणाल पांडे ने इन तस्वीरों पर ऐसी प्रतिक्रिया दी, जिसे लोग ‘हिंदूफोबिक एजेंडा’ और ‘नफरत से भरा’ बता रहे हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है और लोग उन्हें इतिहास और धर्मग्रंथों का सही ज्ञान लेने की सलाह दे रहे हैं।

क्या था मृणाल पांडे का विवादित कमेंट?
दरअसल, रश्मिका और विजय की शादी की फोटो पर एक यूजर ने लिखा था कि यह जोड़ा ‘महाभारत के द्रौपदी और अर्जुन’ जैसी वाइब्स दे रहा है। इसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए मृणाल पांडे ने नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद देने के बजाय तंज कसते हुए लिखा, “उम्मीद है कि दुल्हन की किस्मत द्रौपदी, कुंती, गांधारी, तारा, मंदोदरी, अहिल्या से बहुत अलग होगी।”

मृणाल पांडे का यह कमेंट सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। आलोचकों का कहना है कि जो मृणाल पांडे ‘लव जिहाद’ को महिला की पसंद का मामला बताकर उसका बचाव करती हैं, वही हिंदू धर्म की महान विदुषी स्त्रियों के चरित्र को केवल उनके ‘दुखद भाग्य’ तक सीमित कर उन्हें अपमानित करने का प्रयास कर रही हैं।

सोशल मीडिया पर लोगों ने पढ़ा दी ‘महाभारत’
मृणाल पांडे द्वारा इन महान स्त्रियों के सम्मान पर सवाल उठाने के बाद यूजर्स ने उन्हें जमकर लताड़ा और तथ्यों के साथ जवाब दिया। साइन हमेशा (@ShineHamesha) नाम के एक यूजर ने लिखा, “द्रौपदी: महाभारत की लड़ाई उनके सम्मान के लिए लड़ी गई थी और कौरवों के 100 बेटे मारे गए थे।”

आगे लिखा, “कुंती: पांडवों ने उनके अलावा किसी और को नहीं माना। गांधारी: धृतराष्ट्र से शादी के बाद गांधारी ने खुद अपनी आँखें ढकने का फैसला किया। किसी ने उन्हें मजबूर नहीं किया।, मंदोदरी: वह अक्सर रावण को उसके गलत कामों के खिलाफ सलाह देती थीं, हालाँकि किसी और में ऐसा करने की हिम्मत नहीं थी।, अहिल्या: उन्हें भगवान राम के स्पर्श से ही मोक्ष मिला था। आपने जिन महिलाओं का ज़िक्र किया है, वे सभी ताकतवर महिलाएँ थीं।”

नेटिजन्स का गुस्सा: हिंदू नाम क्यों रखा है?
मृणाल पांडे के इस बयान पर लोग इस कदर नाराज हुए कि उन्होंने उनके अस्तित्व और विचारधारा पर ही सवाल उठा दिए। एक अन्य यूजर ने लिखा, “भगवान कृष्ण द्रौपदी के लिए आए थे। कुंती 6 धर्मराज की माँ। तारा मंदोदरी अहिल्या पूज्य। अगर आप कुछ जानते हैं तो आपको उसी के अनुसार उम्मीद करनी चाहिए।”

वहीं, एक यूजर ने तीखा प्रहार करते हुए लिखा, “अगर आपको हिंदू धर्म से इतनी नफरत है तो आप अभी भी हिंदू नाम क्यों रखती हैं। कृपया आप जिस भी धर्म को पसंद करती हैं, उसे अपना लें और हमें अपनी घटिया पोस्ट से बचाएँ।”

एक यूजर ने तो मृणाल पांडे की तुलना विवादित चेहरों से करते हुए लिखा, “उम्मीद है कि उनका (रश्मिका का) किरदार राणा, आरफा, अरुंधति, स्वरा और मृणाल पांडे से अलग होगा।”

नफरत बनाम आस्था
सोशल मीडिया पर हो रही इस बहस में लोग मृणाल पांडे को एक ऐसी ‘विषाक्त’ लेखिका के तौर पर देख रहे हैं जो हर खुशी के मौके पर हिंदू धर्म को नीचा दिखाने का बहाना ढूँढती हैं। यूजर्स का मानना है कि रश्मिका ने जब आधुनिक ट्रेंड को छोड़ चमकीले दुल्हन के रंग और पारंपरिक गहने पहने, तो यह वामपंथी विचारधारा वाले लोगों को रास नहीं आया, इसीलिए वे उनके सौभाग्य की तुलना दुर्भाग्य से करने लगे।

 

विवादित मृणाल पांडे

मृणाल पांडे (Mrinal Pande) एक प्रसिद्ध भारतीय वरिष्ठ पत्रकार, लेखिका, संपादक और नारीवादी विचारक हैं। उनका जन्म 26 फरवरी 1946 को हुआ था। वे हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में सक्रिय रही हैं और कई किताबें लिख चुकी हैं, जैसे “देवी”, “स्त्री: लंबा सफर” आदि।  हिंदुस्तान अखबार की चीफ एडिटर रह चुकी हैं, प्रसार भारती चेयरपर्सन रहीं (2010 के आसपास), और पद्म श्री से सम्मानित हैं। वर्तमान में वे नेशनल हेराल्ड ग्रुप से जुड़ी हैं।वे अक्सर राजनीतिक टिप्पणियों, सोशल मीडिया पोस्ट्स और लेखों के कारण विवादों में रही हैं, खासकर दक्षिणपंथी/हिंदुओं के बीच उनकी आलोचना होती है। उनके कुछ प्रमुख विवाद निम्नलिखित हैं:

  • 2017 का “जुमला जयंती” विवाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उन्होंने व्यंग्यात्मक ट्वीट किया – “जुमला जयंती पर आनंदित, पुलकित, रोमांचित वैशाखनंदन” और गधे की तस्वीर पोस्ट की। इसे मोदी का अपमान माना गया। उन्ही के संगी-साथी पत्रकारों (रवीश कुमार, अजीत अंजुम आदि) ने आलोचना की कि बड़ी हस्ती होने के नाते मर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए था। विवाद बढ़ने पर उन्होंने अपने ही संगियों रबीस कुमार , अजीत अंजुम तक को ब्लॉक भी किया।
  • 2024 का कंगना रनौत विवाद: जब भाजपा ने कंगना रनौत को मंडी से टिकट दिया, तो मृणाल पांडे ने ट्वीट किया – “शायद यूं कि मंडी में सही रेट मिलता है?” (व्यंग्य में कंगना को “बिकने” वाला इशारा)। इसे सेक्सिस्ट और असंवेदनशील माना गया, खासकर एक नारीवादी लेखिका से ऐसी टिप्पणी पर। कई लोगों ने कहा कि उनका फेमिनिज्म राजनीतिक विरोधियों पर अलग-अलग लागू होता है। ट्वीट बाद में डिलीट किया गया, लेकिन स्क्रीनशॉट वायरल रहे।
  • अन्य विवाद:
    • योगी आदित्यनाथ या मोदी सरकार की नीतियों (गौ-रक्षा, राम मंदिर आदि) पर उनके लेखों को कुछ लोग “बायस्ड” या “झूठा” बताते हैं।
    • सिख नेता या हिंदू मंदिरों से जुड़े कुछ हालिया ट्वीट्स पर भी आलोचना हुई।
    • कभी-कभी वे विपक्षी विचारों को सपोर्ट करती दिखती हैं, जिससे उन्हें “कांग्रेस पेड जर्नलिस्ट” जैसे आरोप लगते हैं।

मृणाल पांडे की छवि एक स्वतंत्र, नारीवादी और बाएं-झुकाव वाली पत्रकार की है, लेकिन उनके सोशल मीडिया व्यवहार (व्यंग्य, ब्लॉक करना आदि) के कारण दक्षिणपंथी सर्कल में उन्हें “हिंदूफोबिक”, “विवादित” या “असहिष्णु” कहा जाता है। समर्थक उन्हें साहसी और सच्ची बताते हैं। कुल मिलाकर, “विवादित मृणाल पांडे” की छवि मुख्य रूप से उनके राजनीतिक व्यंग्यों और टिप्पणियों से बनी है, जो अक्सर सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन जाती 

 

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