निशानेबाज जसपाल राणा का पार्थिव शरीर देहरादून में,वाराणसी में अंतिम संस्कार

जसपाल राणा का पार्थिव शरीर पहुंचा देहरादून, भावुक हुई मनु भाकर, कल वाराणसी में होगा अंतिम संस्कार

देहरादून में दिग्गज शूटर जसपाल राणा के पार्थिव शरीर को सीएम धामी और मनु भाकर समेत खेल और राजनीतिक जगह के लोगों ने श्रद्धांजलि दी.

जसपाल राणा का पार्थिव शरीर पहुंचा देहरादून
देहरादून 12 जून 2026 : भारत के दिग्गज शूटर और कोच जसपाल राणा का आज 12 जून शुक्रवार को दिल्ली में निधन हो गया. उनका पार्थिक शरीर देर शाम को उनके आवास देहरादून पहुंचा. दिवंगत जसपाल राणा के अंतिम दर्शन करने के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के अलावा प्रदेश की तमाम राजनीतिक और खेल से जुड़ी हस्तियां उनके घर पहुंची. इस दौरान जसपाल राणा की शिष्य और ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर भी भावुक दिखाई दी.

अपने कोच और मार्गदर्शक को श्रद्धांजलि देने पहुंचीं ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर इस बीच भावुक नजर आईं. पार्थिव शरीर के सामने पुष्प अर्पित करते वह अपने आंसू नहीं रोक सकीं. मनु भाकर ने जसपाल राणा को भारतीय निशानेबाजी का एक युग बताया और कहा कि उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा. जसपाल राणा के निधन की खबर से पूरे खेल जगत में शोक की लहर है. उनके आवास पर सुबह से ही लोगों का तांता लगा रहा.

जसपाल राणा का पार्थिव शरीर पहुंचा देहरादून
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जसपाल राणा को श्रद्धांजलि अर्पित की. इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण,कैबिनेट मंत्री खजान दास,विधायक मुन्ना सिंह चौहान, स्वामी दर्शन भारती समेत कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहे. सभी ने राणा के निधन को खेल जगत की अपूरणीय क्षति बताया.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जसपाल राणा का जाना उत्तराखंड के साथ-साथ पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति हैं. जसपाल राणा खेल के सितारे थे, जिन्होंने खेल जगत में भारत का नाम रोशन किया. साथ ही कई खिलाड़ियों को देश के लिए खेलने के लिए तैयार किया. भारत का पदक दिलाने के लिए उनका खेल और कोचिंग दोनों काम आए. ये हम सबके के लिए ऐसे क्षति है, जिसकी भरपाई नहीं हो सकती है.

बता दें कि जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के सबसे बड़े नामों में से एक थे. उन्होंने अपने शानदार करियर में कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स सहित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कुल 23 पदक जीतकर देश का नाम प्रकाशित किया. खिलाड़ी के साथ-साथ कोच के रूप में भी उन्होंने कई प्रतिभायें तराशी. मनु भाकर समेत अनेक निशानेबाजों की सफलता के पीछे उनका मार्गदर्शन महत्वपूर्ण माना जाता है.

दरअसल, जसपाल राणा विश्व कप प्रतियोगिता के सिलसिले में जर्मनी गए थे. वहां से लौटते हुए उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल में भर्ती कराया गया. पिछले कई दिनों से उनका उपचार चल रहा था, लेकिन शुक्रवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली. शुक्रवार शाम उनका पार्थिव शरीर देहरादून के पोंधा स्थित मझौन गांव स्थित आवास लाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी. जसपाल राणा ने भाजपा और कांग्रेस से चुनावी निशाने भी लगाये। स्वयं उनके पिता और उनके कोच नारायण सिंह राणा भाजपा सरकार में राज्यमंत्री रहे हैं

परिवार के अनुसार शनिवार को उनके पार्थिव शरीर को वाराणसी ले जाया जाएगा, जहां मणिकर्णिका घाट पर पूरे राजकीय सम्मान और धार्मिक परंपरानुसार उनका अंतिम संस्कार होगा. जसपाल राणा के निधन से उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय खेल जगत ने एक ऐसे खिलाड़ी, कोच और प्रेरणास्रोत को खो दिया है, जिसने अपनी प्रतिभा और समर्पण से देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई.

जसपाल राणा को आज होना था डिस्चार्ज, अचानक क्या हुआ मैक्स हॉस्पिटल के चेयरमैन का आया वक्तव्य 

जसपाल राणा का शव उनके घर दिल्ली सैनिक फार्म लाया गया, वहां उनके अंतिम दर्शन को लोग पहुंचे

भारत के दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा का आज शुक्रवार 12 जून सुबह दिल्ली के साकेत मैक्स अस्पताल में निधन हो गया. तीन दिन पहले हार्ट अटैक के बाद उनको साकेत मैक्स भर्ती कराया गया था. इसी अस्पताल में उनकी आज मौत हुई है.

सैनिक फॉर्म स्थित घर लाया गया जसपाल राणा का शव:  परिजन पार्थिव शरीर उनके दिल्ली सैनिक फार्म घर पर ले जाया गया . वहां उनके अंतिम दर्शन को लोग पहुंचे।

‘एशिया-राष्ट्रमंडल  विजेता’ होने के बाद भी ज़मीन पर सोते थे, चूल्हे की रोटी और मांड था बेहद पसंद
अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज जसपाल राणा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव चिलामू पहुंचा, जहां शोक का वातावरण है। ग्रामीण उनकी सादगी को याद कर रहे हैं, वे हमेशा जमीन पर सोते थे और चूल्हे का साधारण खाना पसंद करते थे।

मैक्स अस्पताल के ग्रुप चेयरमैन का कथन : मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के ग्रुप चेयरमैन डॉक्टर बलबीर सिंह ने इंटरनेशनल शूटर और भारतीय शूटिंग टीम के हाई परफॉर्मेंस कोच जसपाल राणा को लेकर एक वक्तव्य जारी किया है. इसके अनुसार…

मिस्टर जसपाल राणा को तीन दिन पहले एक्यूट हार्ट अटैक आया था. वह ट्रैवल कर रहे थे और हॉस्पिटल पहुंचने से पहले उन्हें सीने में दर्द हो रहा था. उनकी हालत बहुत क्रिटिकल थी. हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार आर्टरी पूरी तरह से ब्लॉक हो गई थी. पता चला कि उनके हार्ट का पंपिंग फंक्शन बहुत कमजोर हो गया था और उनका हार्ट फेलियर हो गया था.हार्ट अटैक के बाद देर से आने वाले मरीजों को गंभीर कॉम्प्लीकेशंस का खतरा होता है, जिसमें कार्डियक रप्चर भी शामिल है, जिससे अचानक मौत हो सकती है. मिस्टर राणा काफी ठीक हो गए थे और आज डिस्चार्ज के लिए फिट थे. हालांकि, बदकिस्मती से सोते समय उनका कार्डियक रप्चर अचानक हो गया, जिससे उनकी मौत हो गई.                                   -डॉ. बलबीर सिंह, ग्रुप चेयरमैन – कार्डियक साइंसेज, पैन मैक्स और चीफ ऑफ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी एंड इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत-

क्या होता है ‘कार्डियक रप्चर’, जिसकी वजह से दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा की हो गई मौत

मैक्स अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार जसपाल राणा की मृत्यु का कारण हृदय के अंदरूनी हिस्से का अचानक फट जाना (कार्डियक रप्चर) है, जिसे हृदय से जुड़ी अत्यंत गंभीर और जानलेवा स्थिति मानी जाता है।

कार्डियक रप्चर को बताया गया निधन का मुख्य कारण।

भारतीय शूटिंग में 600 से अधिक पदक जीतकर कमाया नाम

देश के दिग्गज निशानेबाज और प्रतिष्ठित कोच जसपाल राणा का निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय खेल जगत को बड़ा झटका लगा है। जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से भारतीय दल के साथ लौटते समय फ्लाइट में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।

नई दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें दक्षिण दिल्ली स्थित मैक्स अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। वह 49 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से खेल जगत, खिलाड़ियों और प्रशंसकों में शोक की लहर है।

सिर्फ 12 साल की उम्र में जीता था रजत पदक
उत्तराखंड के टिहरी जिले के जौनपुर ब्लॉक के भाल गांव में जन्मे जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते थे। उनके पिता नारायण सिंह राणा ने ही उन्हें शूटिंग की शुरुआती ट्रेनिंग दी थी। महज 12 वर्ष की उम्र में उन्होंने अहमदाबाद में आयोजित राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर रजत पदक जीता था और अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था।

वर्ष 1994 में विश्व शूटिंग चैंपियनशिप के जूनियर वर्ग में स्टैंडर्ड पिस्टल स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराया। अपने लंबे करियर में उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 600 से अधिक पदक जीते। खेलों में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2002 में पद्मश्री तथा अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

1994 में एशियाई खेलों में जीता था स्वर्ण पदक
जसपाल राणा का नाम भारतीय खेल इतिहास के उन खिलाड़ियों में शामिल है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी देश को गौरवाविंत किया। खेल प्रेमियों को आज भी वर्ष 1994 में हिरोशिमा (जापान) में आयोजित एशियाई खेलों का वह यादगार प्रसंग याद होगा कि जब जसपाल राणा ने तकनीकी परेशानी और क्षतिग्रस्त पिस्तौल के बावजूद शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश को गौरवाविंत किया था।

दिल्ली के सैनिक फार्म स्थित उनके आवास ‘गुरु कृपा’, फारेस्ट लेन में शोक व्यक्त करने वालों का तांता लगा हुआ है। उनके निधन से भारतीय निशानेबाजी ने एक महान खिलाड़ी, सफल कोच और प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व को खो दिया है।

क्या है कार्डियक रप्चर और कब होता है
कार्डियक रप्चर हृदय की दीवार, वॉल्व या अंदरूनी संरचना के फट जाने की अत्यंत गंभीर स्थिति है। यह आमतौर पर बड़े हार्ट अटैक के बाद तब होता है, जब हृदय का कोई हिस्सा कमजोर होकर फट जाता है। गंभीर चोट, हृदय की कुछ बीमारियां या रक्त प्रवाह लंबे समय तक बाधित रहने से भी यह स्थिति पैदा हो सकती है। इससे हृदय की पंपिंग क्षमता अचानक प्रभावित हो जाती है और मरीज की जान को तत्काल खतरा हो सकता है।

 

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