ज्ञान:सैन्य वर्दी में ताली क्यों नही बजाते भारतीय सैनिक?

Why Indian Army Soldiers Dont Clap In Uniform Did You Know The Story Behind It
सेना की वर्दी में ताली क्यों नहीं बजाते फौजी? बहुत कम लोग जानते हैं इसके पीछे की ये कहानी
​Indian Army Uniform Fact: इंडियन आर्मी यूनिफॉर्म पहनने के लिए कड़े नियम रखती है, जिसमें साफ-सफाई, फिटिंग और गाइडलाइंस का पालन करने पर ज़ोर दिया जाता है। निशान, बैज और सजावट सही तरीके से पहनने होते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते होंगे कि फौजी वर्दी पहनने के बाद ताली नहीं बजाते। आइए जानते हैं इसके पीछे की कहानी

​सेना की हर छोटी से छोटी चीज का बड़ा महत्व है। भारतीय सेना का हर जवान कठोर अनुशासन और मर्यादा के लिए जाना जाता है। अनुशासन और शिष्टाचार के चलते भारतीय सेना में कई नियम बनाए गए हैं। कुछ नियम ऐसे भी हैं जो आधिकारिक नहीं होने के बावजूद परंपरागत तरीके से निभाए जाते हैं। वर्दी में ताली न बजाना उन्हीं में से एक है। एसएससी, यूपीएससी, बैंक समेत कई प्रतियोगीता परीक्षाओं के सामान्य ज्ञान में सेना से संबंधित कई ट्रिकी सवाल पूछे जाते हैं। उसमें ये सवाल भी हो सकता है।

सैन्य शिष्टाचार
सेना की वर्दी पहने हुए फौजी को ताली बजाते हुए शायद ही देखा होगा। यह न केवल लंबे समय से चली आ रही परंपरा है बल्कि एक सैन्य शिष्टाचार बन चुका है। भारतीय सेना के जवान अगर वर्दी में है तो वह किसी कार्यक्रम में ताली नहीं बजाएंगे। यह एक ऐसा नियम है जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं है लेकिन परंपरागत तरीके से निभाया जा रहा है।

वर्दी में ताली क्यों नहीं बजाते फौजी?
दरअसल, वर्दी में ताली न बजाने के पीछे एक सेना प्रमुख का निर्देश भी है। साल 2015 में तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह ने एक आधिकारिक कार्यक्रम में सैनिकों को ताली नहीं बजाने का निर्देश दिया था। तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह ने कहा था, ‘मेरा संबोधन खत्म होने के बाद, कृपया ताली न बजाएं। इसके बाद, हम वर्दी में ताली न बजाने की मर्यादा बनाए रखेंगें।’ तभी से ये परंपरा इसी तरह चली आ रही है।

सेना की वर्दी का महत्व
सेना की वर्दी एक यूनिफॉर्म से कई बढ़कर है। यह एक जवान की जिम्मेदारी, गरिमा और शपथ का प्रतीक है, जो देश के लिए निभाई जाती है। वर्दी पहनने के बाद एक फौजी सामान्य जन नहीं रह जाता। उसका हर कदम पर्सनल न होकर संस्थानिक माना जाता है। इसलिए किसी प्रोग्राम में ताली बजाना भी सेना के सम्मान के खिलाफ माना जाता है।

सैन्य शिष्टाचार
एक सैनिक कब और कैसे प्रतिक्रिया देगा, यह सैन्य शिष्टाचार और व्यवहार का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसलिए कई बार ताली बजाना या सार्वजनिक प्रशंसा करना ठीक नहीं माना जाता। खासकर राजनीतिक परिस्थितियों में। तालियां किसी वक्ता के राजनीतिक एजेंडे से जुड़े होने की इशारा कर सकती हैं, जिससे सेना का गैर-राजनीतिक रुख कमजोर हो सकता है, जो जनता के विश्वास और संवैधानिक निष्ठा के लिए महत्वपूर्ण है।

नियम नहीं, फिर भी अनुसरण करते हैं सैनिक
बता दें कि वर्दी में ताली न बजाने को लेकर कोई लिखित बाध्य नियम नहीं, लेकिन इसे आचार-संहिता का हिस्सा मानकर अनुशासन का प्रतीक समझा जाता है, न कि कडे आदेश का पालन करना। भारतीय सेना में यूनिफॉर्म पहनने के कड़े नियम हैं, जिसमें साफ-सफाई, फिटिंग और गाइडलाइंस का पालन करने पर जोर दिया जाता है। निशान, बैज और सजावट सही तरीके से पहनने होते हैं।

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