भारत-अमेरिका ट्रेड डील फैक्ट शीट बदली, दाल हटी, $500 अरब डॉलर खरीद भी बदली “इरादे” में
व्हाइट हाउस ने बदली भारत-अमेरिका ट्रेड डील की फैक्ट शीट,दाल शब्द हटाया,$500 अरब डॉलर खरीद में भी बदलाव
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर व्हाइट हाउस ने नई फैक्ट शीट जारी की है. इसमें एक बड़ा बदलाव हुआ है. अमेरिका ने नई फैक्ट शीट में दाल हटा दी है.
भारत और अमेरिका में ट्रेड डील के फ्रेमवर्क जारी हो गया था. अब व्हाइट हाउस ने अपडेटेड फैक्ट शीट सार्वजनिक की है. नई फैक्ट शीट में अमेरिकी के कृषि उत्पादों की सूची से दालें हटा दी हैं, जिन पर भारत ने कर घटाने का वादा किया था. बता दें कि व्हाइट हाउस की पूर्व फैक्ट शीट में साफ लिखा था कि भारत कुछ दालों और अमेरिकी कृषि उत्पादों से कर हटाएगा या घटायेगा. अब नई फैक्ट शीट में दाल नही है.
कई प्रोडक्ट्स को ट्रेड डील से रखा बाहर
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इससे पहले सोशल मीडिया पर फल, दालों, मसालों, अनाज और डेयरी उत्पादों सूची दी थी, जिसे ट्रेड डील से बाहर रखा गया था और इनके भारत में आयात पर रोक लगाई थी.
इन अमेरिकी प्रोडक्ट्स में कटौती प्रस्तावित
दालें छोड़कर समझौते में भारत ने अमेरिका के कृषि उत्पाद- सूखे अनाज, ट्री नट्स (बादाम,अखरोट), सोयाबीन, तेल और शराब पर कर कटौती का प्रस्ताव रखा है.
व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट के अनुसार भारत ने ऐतिहासिक रुप से अमेरिकी कृषि उत्पादों पर औसतन 37 प्रतिशत कर लगाया है.
राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार समझौते से कृषि संबंधित बाधाएं दूर होंगी और यह अमेरिकी वर्कर्स को लाभदायक सिद्ध होगा.
इन अनाजों पर जारी रहेगा प्रतिबंध
भारत में अमेरिका से छिलका रहित अनाज, आटा, मैदा, ओट्स कांगनी, बाजरा, कोदो, स्यामक, कोपरा, गेंहू, रागी, अमरंथ, मक्का, चावल, जौ, जवार पर प्रतिबंध रहेगा.
डेयरी प्रोडक्ट्स जिन पर रहेगा प्रतिबंध
डेयरी उत्पादों में दूध के तरल पाउडर, कंडेस्ड आदि, क्रीम, योगर्ट, बटर मिल्क, मक्खन, घी, चीज (मोजरेला, ब्लू वेंड, ग्रेटेड/पाउंडर्ड), बटर ऑयल, पनीर और अन्य उत्पाद, व्हे प्रोडक्ट्स आदि भारत नही आयेंगें.
मसालों में काली मिर्च,लॉन्ग,सूखी हरी मिर्च,दालचीनी धनिया, जीरा,हींग,अदरक,हल्दी,अजवाइन,मेथी,चक्रमर्द,कैसिया,सरसों, राई,भूसी और दूसरे पाउडर भारत नहीं आएंगे.
फ्रोजन सब्जियों में आलू, मटर, बीन्स, दूसरी दलहनी सब्जियां, मिक्सिड सब्जियां, अस्थाई रूप से संरक्षित सब्जियां – खीरा एवं घेरकिन्स, मशरूम (एगारिकस प्रजाति), मिक्स्ड डिब्बाबंद सब्जियां के आयात पर भी पाबंदी रहेगी.
500 अरब डॉलर के प्रोडक्ट खरीदेगा भारत
व्हाइट हाउस ने अपनी फैक्टशीट में कहा है कि भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर से ज्यादा मूल्य के उत्पाद खरीदना चाहता है. उत्पादों में विशेष रूप से एनर्जी, सूचना और संचार तकनीक, कोयला और दूसरे अमेरिकी सामान होंगे. व्हाइट हाउस के अनुसार भारत और अमेरिका इस समझौते को अंतिम रूप देंगें. साथ ही डिजिटल व्यापार, सप्लाई चेन और आर्थिक सुरक्षा पर मिलकर काम करेंगें.
1. टैरिफ में अमेरिका ने भारत को दी राहत
पिछले 10 दिनों में सबसे बड़ा टैरिफ को लेकर देखने को मिला जिसके तहत अमेरिका की तरफ से भारतीय सामानों पर लगाए गए अतिरिक्त ‘पेनल्टी टैरिफ’ को खत्म कर दिया गया है। 7 फरवरी के बाद से प्रभावी हुए नए नियमों के तहत अमेरिका ने भारत पर लगने वाले प्रभावी टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को वियतनाम और मैक्सिको जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बाजार में बेहतर बढ़त मिलने की उम्मीद है।
2. रूसी तेल से दूरी और नया ऊर्जा करार
भारत अमेरिका के बीच ट्रेड डील की सबसे बड़ी शर्त ‘एनर्जी’ रही है। ट्रंप प्रशासन के मुताबिक भारत ने रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल इम्पोर्ट बंद करने या बहुत कम करने को लेकर रजामंदी जताई है। बताया जाता है कि भारत अपनी रूसी तेल खरीद को घटाकर 5-6 लाख बैरल तक लाने की तैयारी में है। पहले यह 1.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक थी। रिपोर्ट के मुताबिक अब भारत अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। रिलायंस और इंडियन ऑयल जैसी बड़ी कंपनियों ने अप्रैल 2026 की डिलीवरी के लिए रूसी तेल के नए ऑर्डर देना पहले ही बंद कर दिया है। वहीं अमेरिका ने भारत के रत्न, आभूषण और जेनेरिक दवाओं के लिए अपने बाजार के दरवाजे पूरी तरह खोल दिए हैं, जिससे भारत के फार्मा और ज्वेलरी सेक्टर को बड़ी राहत मिली है।
3. 500 बिलियन डॉलर की खरीद का करार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुए इस समझौते में भारत ने अमेरिका से 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 41 लाख करोड़ रुपये के सामान खरीदने का इरादा जताया है। इसमें हाईटेक और डेटा सेंटर, एयर इंडिया और इंडिगो जैसी कंपनियों के लिए बोइंग के सैकड़ों नए विमान और उनके पुर्जे और अमेरिका से भारी मात्रा में कोकिंग कोल (स्टील उत्पादन के लिए) और LNG की खरीद शामिल है। वहीं भारत ने इक्वलाइजेशन लेवी यानी डिजिटल सर्विस टैक्स के मुद्दे पर नरम रुख अपनाते हुए इसे धीरे-धीरे हटाने के संकेत दिए हैं। बताया जा रहा है कि इससे अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत में निवेश का माहौल और भी सुगम होगा।
4. कृषि और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा
अमेरिका से ट्रेड डील में भारत ने अपने किसानों का ख्याल रखा है। भारत ने एक ‘नेगेटिव लिस्ट’ तैयार की है जिसके तहत कुछ वस्तुओं पर कोई भी टैक्स छूट नहीं दी जाएगी। मसलन डेयरी और मांस, गेहूं, चावल, मक्का और बाजरा। साथ ही जेनेटिकली मॉडिफाइड मक्का और सोयाबीन को अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इससे साफ है कि अमेरिकी डेयरी कंपनियों या मांस उत्पादकों को भारतीय बाजार में उस तरह की पहुंच नहीं मिलेगी जिससे स्थानीय किसानों को नुकसान हो।
5. रणनीतिक और सुरक्षा के मोर्च पर बदलाव
भारत-अमेरिका के बीच डील केवल व्यापार नहीं, बल्कि चीन के खिलाफ एक मोर्चा भी है। शांति एक्ट, 2025 के तहत, अमेरिका भारत को नागरिक परमाणु ऊर्जा और रक्षा विनिर्माण में वैसी ही प्राथमिकता देगा जैसी वह अपने करीबी नाटो (NATO) सहयोगियों को देता है। इससे भारत में अमेरिकी निवेश के दरवाजे और तेजी से खुलेंगे।

