भारत का यूरोपियन यूनियन से आज तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता,US,बांग्लादेश,वियतनाम और तुर्किए टेंशन में
India And Eu Signs Trade Deal Modi Calls It Biggest Free Trade Agreement Of India
भारत ने ईयू के साथ की अब तक की सबसे बड़ी ट्रेड डील, प्रधानमंत्री मोदी ने बताया, साझा समृद्धि का नया ब्लूप्रिंट
नई दिल्ली,27 जनवरी 2026, भारत और यूरोपियन यूनियन ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन कर लिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे साझा समृद्धि का नया ब्लूप्रिंट बताया है। उन्होंने कहा कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है। भारत और यूरोपियन यूनियन ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन कर लिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट बताते हुए साझा समृद्धि का नया ब्लूप्रिंट कहा। मोदी ने यूरोपीय काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ इसकी घोषणा की। बहुप्रतीक्षित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता अत्यधिक महत्वपूर्ण है जिसे मदर ऑफ ऑल द डील्स कहा गया। इससे 28 देशों में संबंधों की समग्र दिशा में महत्वपूर्ण विस्तार की उम्मीद है क्योंकि यह विविध क्षेत्रों में नये सहयोग अवसर खोलेगा। भारत और यूरोपीय संघ 2004 से रणनीतिक साझेदार रहे।
India-EU trade deal
भारत और ईयू में इस डील को लंबे समय से बातचीत चल रही थी। मोदी ने कोस्टा और वॉन डेर लेयेन के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “आज भारत ने इतिहास का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किया है। 27 जनवरी को भारत ने 27 यूरोपीय देशों से यह FTA साइन किया जिससे निवेश प्रोत्साहित होगा, नई इनोवेशन पार्टनरशिप बनेंगी और विश्व स्तरीय सप्लाई चेन मजबूत होंगी। यह सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि साझा समृद्धि का ब्लूप्रिंट है।” आज नया युग शुरू हुआ है। भारत-ईयू की ये समिट महत्वपूर्ण क्षण है। आज 27 तारीख है और ये ऐतिहासिक इसलिए है क्योंकि आज ही यूरोपीय संघ के 27 देशों से समझौता हो रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
क्यों है ऐतिहासिक?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस डील से भारत और यूरोप के लोगों के बीच संबंध गहरे होंगे। समझौता स्पष्ट एजेंडा देगा और दोनों पक्षों की साझा समृद्धि आगे बढ़ाएगा। उन्होंने साथ ही कहा कि इस डील में हम साथ मिलकर इंडिया-मिडिल ईस्ट इकॉनॉमिक कॉरिडोर आगे बढ़ाएंगे। मोदी ने कहा, “आज से एक नया युग शुरू हुआ है। भारत-ईयू की ये समिट महत्वपूर्ण क्षण है। आज 27 तारीख ऐतिहासिक इसलिए है क्योंकि आज ही यूरोपीय संघ के 27 देशों से समझौता हो रहा है।”
एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि इस डील से भारत और यूरोप के लोगों में संबंध मजबूत होंगे। ‘यह ऐतिहासिक पल है। हम ट्रेड, सिक्योरिटी और दोनों पक्षों में संबंधों में नया अध्याय शुरू कर रहे हैं। उन्होने स्वयं को भारत का ओवरसीज नागरिक बताया और कहा, “मेरी जड़ें गोवा में हैं। मैं ओवरसीज भारतीय हूं।”
“प्रधानमंत्री मोदी, हमने कर दिखाया। हमने मदर ऑफ ऑल डील्स डिलीवर की है।” यूरोपीय आयोग की प्रेसिडेंट अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन यूरोपीय आयोग की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर के बाद कहा, “प्रधानमंत्री मोदी, हमने कर दिखाया। हमने मदर ऑफ ऑल डील्स डिलीवर की है।” यूरोप भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। दोनों पक्षों के बीच यह डील ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील पर बातचीत अटकी हुई है। माना जा रहा है कि अमेरिका को निर्यात में होने वाले नुकसान की भरपाई यूरोप से कर पायेगा भारत।
दुनिया की 25% जीडीपी, ट्रंप की दादागीरी को सीधा चैलेंज… भारत-EU समझौता यूं ही नहीं कहलाया ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ भारत और 27 देशों के ब्लॉक यूरोपियन यूनियन ने 2007 में शुरू हुई एक ट्रेड डील को आखिरकार पूरा कर लिया है. अंतर्राष्ट्रीय हलकों में इस समझौते का ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है. भारत-EU का ये डील न सिर्फ आंकड़ों में एक भारी भरकम समझौता है बल्कि भारत की स्वतंत्र विदेश और व्यापार नीति की उदघोषणा भी है. इसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ पैंतरे का उपयुक्त जवाब भी कहा जा रहा है. इस ट्रेड डील से 93 प्रतिशत इंडियन शिपमेंट को EU में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगी। भारत की 1.4 अरब आबादी और यूरोपीय संघ के 45 करोड़. कुल मिलाकर दुनिया के 2 अरब लोग. दुनिया की जीडीपी का 25 प्रतिशत हिंसा. विश्व में होने वाले व्यापार का एक तिहाई हिस्सा. ये आंकड़े सिर्फ संख्याएं नहीं है, बल्कि ये आत्मविश्वास से लबरेज भारत और यूरोप की बुलंद आवाज है. भारत और यूरोप के बीच 18 साल तक चले जद्दोजहद, व्यापार की जटिल वार्ताएं, दुनिया के बनते बिगड़ते समीकरण, किसानों की चिंताएं और छोटे उद्योगों का डर, सब कुछ पार कर भारत और यूरोपियन यूरोपियन ने आखिरकार ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ पर हस्ताक्षर कर ही दिया. यह कोई साधारण व्यापार समझौता नहीं है. यह दुनिया के आर्थिक नक्शे पर एक नया सितारा उभरने की घोषणा थी.
आइए पहले समझें कि इंटरनेशनल ट्रेड की भाषा में ट्रेड डील, या फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) क्या होता है। ट्रेड डील दो या अधिक देशों में कानूनी समझौता होता है, जो आयात शुल्क कम करने या हटाने, बाजार तक पहुंच बढ़ाने और व्यापार नियम तय करने को होता है. ट्रेड डील या फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) देशों में व्यापार बाधायें घटाता है, जैसे टैरिफ घटाकर निर्यात-आयात आसान बनाना. इससे दोनों पक्षों को आर्थिक लाभ और परस्पर तकनीकी लाभ मिलता है. लेकिन संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा भी होती है. यूरोपियन यूनियन में अभी 27 देश हैं.
साथ आईं दुनिया की दो दिग्गज अर्थव्यवस्थाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस डील के पूरे होने पर कहा कि दुनिया की दूसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच यह ऐतिहासिक डील अभूतपूर्व अवसर पैदा करने और विकास के साथ-साथ सहयोग के नए रास्ते खोलने का वादा करती है. इस डील से पूरे ग्लोबल समुदाय को फायदा होगा. यह प्रमुख सेक्टरों में अच्छी क्वालिटी की नौकरियां पैदा करने, हमारे युवाओं, प्रोफेशनल टैलेंट, छात्रों और रिसर्चर्स के लिए आगे बढ़ने के और मौके देने और डिजिटल युग की क्षमता को अनलॉक करने में मदद करेगी. सबसे जरूरी बात यह है कि यह इनोवेशन को बढ़ावा देगी और आपसी विकास के लिए आर्थिक संबंधों को मज़बूत करेगी. 93 प्रतिशत इंडियन शिपमेंट को EU में ड्यूटी-फ्री एक्सेस कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा कि उम्मीद है कि 2026 अंत तक डील पूरी तरह से लागू कर दी जाएगी. एक बार लागू होने के बाद, 93 प्रतिशत भारतीय शिपमेंट को यूरोपियन यूनियन में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा, जबकि वहां से लग्जरी कारों और वाइन का इंपोर्ट भारत में सस्ता हो जाएगा. उन्होंने कहा कि यह समझौता दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, भारत और दूसरे सबसे बड़े आर्थिक समूह, EU में लगभग 2 अरब लोगों का बाज़ार बनाएगा. उन्होंने कहा, “कुल मिलाकर भारत और EU मिलकर ग्लोबल GDP का 25 प्रतिशत और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार (लगभग USD 33 ट्रिलियन) का एक-तिहाई (लगभग USD 11 ट्रिलियन) हिस्सा हैं.” ट्रंप की ट्रेड दादागीरी को मैसेज देते हुए भारत के कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा कि यूरोपियन यूनियन और भारत ने संवेदनशील मुद्दों को किनारे रखकर एक “संतुलित, न्यायसंगत और निष्पक्ष” फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किया है, जो भारत और यूरोपियन यूनियन दोनों में इंडस्ट्री के सभी सेक्टर्स के लिए फायदेमंद है. गोयल ने कहा कि इससे निवेश के कई मौके खुलेंगे. बता दें कि भारत और अमेरिका के बीच का ट्रेड डील लगभग 8-9 महीनों से पेंडिंग है. ट्रंप भारत पर ट्रेड डील के लिए दबाव बनाने के लिए टैरिफ का इस्तेमाल हथियार की तरह कर रहे हैं. सामान के मामले में EU भारत का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर एक ब्लॉक के तौर पर EU सामान के मामले में भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है. फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में EU के साथ भारत का कुल सामान का ट्रेड लगभग 136 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था, जिसमें एक्सपोर्ट लगभग 76 बिलियन अमेरिकी डॉलर और इंपोर्ट 60 बिलियन अमेरिकी डॉलर था. EU का बाजार भारत के कुल एक्सपोर्ट का लगभग 17 प्रतिशत है, और इस ब्लॉक का भारत को एक्सपोर्ट उसके कुल विदेशी शिपमेंट का 9 प्रतिशत है. 2023-24 में, भारत ने EU को 76 बिलियन अमेरिकी डॉलर का सामान और 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर की सेवाएं एक्सपोर्ट कीं, जबकि EU ने भारत को 61.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का सामान और 23 बिलियन अमेरिकी डॉलर की सेवाएं एक्सपोर्ट कीं. EU में स्पेन, जर्मनी, बेल्जियम, पोलैंड और नीदरलैंड भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए मुख्य डेस्टिनेशन हैं. व्यापारिक साझेदारी और रणनीतिक चाल भारत-यूरोपियन यूनियन के बीच ये समझौता व्यापारिक समझौता तो है ही, ये जियोपॉलिटिक्स भी है. अमेरिका के लगातार ताने सह रहा यूरोप नए और भरोसेमंद मार्केट की तलाश कर रहा है. भारत इस समीकरण में सटीक बैठता है. भारत खुद को यूरोप में खुले मार्केट के तौर पर बेचने की कोशिश कर रहा है, जबकि अमेरिका टैरिफ लगाने में ज़्यादा दिलचस्पी दिखा रहा है. भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए खासकर अपैरल और फुटवियर जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स बहुत मायने रखती है. ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी को जवाब गौरतलब है कि भारत और यूरोपियन यूनियन 18 साल की लंबी और ठिठक ठिठक कर चल रही बातचीत के बाद इस व्यापार समझौते पर पहुंचे हैं. इस ट्रेड डील की टाइमिंग बहुत अहम है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ की धमकियों से सहयोगी देश परेशान हो गए हैं. यूरोप अमेरिका के बाजार से परे दूसरे विकल्प चाहता है और चीन से जुड़ी सप्लाई चेन में कम रुकावटें चाहता है. भारत जो अमेरिका के कड़े टैरिफ का सामना कर रहा है, उसके पास भी अपने व्यापार को फैलाने और कम संरक्षणवादी बनने का अपना कारण है. इस समझौते का मुख्य मुद्दा टैरिफ है. भारत यूरोप से आयात होने वाली कई चीज़ों – कार, शराब मशीनरी, केमिकल, दवाएं, स्टील और लोहा पर ड्यूटी कम कर रहा है, जबकि कुछ संवेदनशील सेक्टर इससे बाहर रखेगा. इसके बदले में यूरोप भारतीय सामानों के लिए ज़्यादा जगह खोलने वाला है, जिसमें लेबर-इंटेंसिव एक्सपोर्ट भी शामिल हैं, जिन पर दूसरे देशों में टैरिफ बढ़ने पर सबसे ज़्यादा असर पड़ता है. बता दें कि इस समझौते की वजह से यूरोपियन यूनियन से ढाई लाख कारें हर साल भारत के बाजार में प्रवेश करेंगी. इन कारों पर ड्यूटी 110 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत हो जाएगा. 2007 में शुरू हुई वार्ता भारत-यूरोपीय संघ FTA बातचीत 2007 में शुरू हुई थी. शुरू में 2007 से 2013 तक, बातचीत के कई दौर हुए लेकिन मार्केट एक्सेस, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स, लेबर स्टैंडर्ड और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर असहमति के कारण इसमें रुकावट आईं. 2013 तक बातचीत रुक गई. खासकर ऑटोमोबाइल, वाइन, स्पिरिट, भारतीय IT फर्मों के लिए डेटा सिक्योरिटी और पब्लिक प्रोक्योरमेंट पर टैरिफ को लेकर मतभेदों के कारण. 2016 और 2020 के बीच बातचीत को फिर से शुरू करने की कोशिशों के बावजूद कोई खास प्रगति नहीं हुई. हालांकि 2020 के बाद भारत और यूरोपीय संघ दोनों ने बातचीत फिर से शुरू करने में नई दिलचस्पी दिखाई. जून 2022 में एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, एक इन्वेस्टमेंट प्रोटेक्शन एग्रीमेंट और ज्योग्राफिकल इंडिकेशंस (GI) पर एग्रीमेंट को बातचीत फिर से शुरू हुई और 2026 में बातचीत पूरी हुई।
India-EU ट्रेड डील से अमेरिका क्यों बेचैन? जानिए आखिर उसको इससे क्या नुकसान है…
भारत की एक के बाद एक डील अमेरिका की टेंशन बढ़ा रही हैं, क्योंकि ट्रंप के टैरिफ का असर भारतीय रणनीति के आगे धुआं-धुआं हो रहा है.
भारत-ईयू डील अमेरिका को बड़ा झटका
डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ-टैरिफ खेलते (Donald Trump Tariff Game) रह गए और उधर भारत ने दांव खेल दिया. जी हां, मंगलवार को मदर ऑफ ऑल डील्स (Mother Of All Deals) भारत-यूरोपीय संघ में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर मोहर लगी और India-EU ने समझौता घोषित भी कर दिया .
अमेरिकी राष्ट्रपति के 50% टैरिफ का असर भारत के आयात-निर्यात पर न पड़े, इसको मोदी सरकार का प्लान-बी (Modi Govt Plan-B) अच्छा काम कर रहा है । इसमें ओमान, न्यूजीलैंड के बाद अब भारत ने ईयू से बड़ा समझौता किया है. हालांकि, इसके फाइनल से पहले ही अमेरिका बेचैन दिखने लगा था । ट्रंप के मंत्री बेतुके बयान देते दिखे थे. आखिर भारत के समझौते से अमेरिका का घाटा क्या है?
ऐसे बौखलाया US
50% अमेरिकी टैरिफ (US Tariff On India) से भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोई खास असर नहीं दिखा और इसकी रफ्तार भी नही रुकी. दूसरी ओर भारत ने अपने एक्सपोर्ट डेस्टिनेशंस में रणनीतिक विविधिता लाई जिससे टैरिफ का असर कम करने में मदद मिली . भले ही भारत के लिए अमेरिकी बाजार सबसे बड़ा क्यों न हो. ये पहले से ट्रंप और उनके प्रशासन की बेचैनी बना था और Oman, New Zeeland के बाद अब EU से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ने इसे और भी बढ़ा दिया .
US Finance Minister Scott Bassent
इसका असर दिखा, जब अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने समझौते से ऐन पहले, India-EU ट्रेड डील पर तीखा बयान दिया. कि, ‘यूरोपीय देश खुद के खिलाफ चलती जंग को फंड कर रहे हैं.’ भारत से ट्रेड डील साइन कर यूरोपियंस असल में अपने ही खिलाफ जंग फाइनेंस कर रहे हैं.
रूसी तेल खरीद पर दिया था ऐसा बयान
Donald Trump वित्त मंत्री बेसेंट इससे पहले रूसी तेल की खरीद पर भी भारत पर निशाना साध चुके . तब उन्होंने भारत की Russian Oil खरीद को यूक्रेन युद्ध में ‘पुतिन की वॉर मशीन’ को फंड करने का जरिया बताया था. भारत पर अमेरिका के 25% एक्स्ट्रा टैरिफ भी उन्होंने इसी कारण बताई थी. पहले ट्रंप ने भारत पर 25% का रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariff) लगाया था, जिसे बढ़ाकर दोगुना कर दिया था.
Donald Trump
वैश्विक व्यापार में भारत-EU की साझेदारी मजबूत होने से अमेरिका की पकड़ कमजोर पड़ेगी. India-EU Trade यूरो या अन्य स्थानीय मुद्रा में आगे बढने से अमेरिकी डॉलर का प्रभुत्व घट सकता है, जो ट्रंप को पहले ही टेंशन बना है, क्योंकि चीन जैसे कई देश स्थानीय करेंसी में ट्रेड कर रहे हैं.
भारत-EU एफटीए के लाभ क्या?
India-EU व्यापार समझौता बहुत व्यापक है जिसके तमाम फायदे होंगें. एग्रीमेंट भारत में यूरोपीय कारों पर टैरिफ धीरे-धीरे घटाकर 10% और 90% यूरोप देशीय सामान पर टैरिफ या तो खत्म या फिर कम करेगा. मशीनरी (44%), केमिकल (22%), मेडिसिन (11%) पर ज्यादातर टैरिफ खत्म हो सकते हैं. बीयर पर टैरिफ 50%, शराब-वाइन पर 40% हो सकता है. जूस, प्रोसेस्ड फूड, एयरक्राफ्ट, स्पेसक्राफ्ट पर टैरिफ जीरो हो सकता है. यानि यूरोप की लग्जरी कारों से लेकर शराब तक सस्ती हो सकती है.
India eu Free Trade Deal Turmoil In Bangladesh And Turkey Big Boost For Indian Textile Industry
ईयू के साथ भारत की डील होते ही बांग्लादेश और तुर्की में पसर गया सन्नाटा, किस बात का सताया भय?
भारत और यूरोपीय संघ में सबसे बड़े फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारतीय परिधान उद्योग को बड़ी राहत मिलेगी। समझौते से भारतीय कपड़ों को ईयू मार्केट में बिना ड्यूटी प्रवेश मिलेगा, जिससे निर्यात दोगुना हो सकता है। यह बांग्लादेश और तुर्की जैसे देशों की चिंता का विषय है।
भारत के यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ इतिहास का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) की घोषणा होते ही पूरे भारत और यूरोप में खुशी की लहर है। इसके उलट बांग्लादेश और तुर्की भयभीत हैं। भारत और ईयू समझौते से तमाम उद्योगों के साथ अपैरल और टेक्सटाइल इंडस्ट्री को ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है। यह एक ऐसा सेक्टर है जहां बांग्लादेश ने भी कई सालों में अपनी पकड़ मजबूत की। ईयू से भारतीय डील भारतीय एक्सपोटर्स को यूरोपीय मार्केट में बांग्लादेश और तुर्की को उखाड़ फेंकने में मदद मिलेगी। यह बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ देगा। कपड़ा उद्योग की बांग्लादेश के कुल एक्सपोर्ट में 80% से 85% हिस्सेदारी है।
अपैरल और टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का जोरदार स्वागत किया । इस ऐतिहासिक समझौते से भारतीय परिधान निर्यात तीन सालों में दोगुना होने की उम्मीद है। अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) के चेयरमैन डॉक्टर ए. शक्तिवेल ने कहा कि यह डील भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए बड़ा कदम है। इससे निर्यात काफी बढ़ेगा। भारत ‘विकसित भारत’ बनने की राह पर बड़ी छलांग लगाएगा।
ईयू मार्केट में बिना किसी ड्यूटी मिलेगी एंट्री
एफटीए से भारतीय कपड़ों को ईयू मार्केट में बिना ड्यूटी एंट्री मिलेगी। इससे यूरोपीय बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा क्षमता बहुत ज्यादा बढ़ेगी। औद्योगिक अनुमानों के मुताबिक, एफटीए से भारतीय परिधान निर्यात में सालाना 20-25% बढ़ोतरी हो सकती है। अभी ईयू बाजार में भारत की निर्यात ग्रोथ दर केवल 3.01% है।
यह डील भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए ऐतिहासिक क्षण है। हमारे निर्यात को यह दोगुना करने में मदद करेगी। भारत को विकसित भारत बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।
डॉ. ए शक्तिवेल, चेयरमैन, एईपीसी
डॉक्टर शक्तिवेल ने बताया कि यह एफटीए भारतीय कंपनियों को कीमत के बजाय क्वालिटी, डिजाइन और स्थिरता जैसे स्टैंडर्ड पर ज्यादा प्रतिस्पर्धा करने में मदद करेगा। समझौते से परिधान की सभी 100% टैरिफ लाइनों पर ड्यूटी खत्म होगी। इससे ईयू के सभी सदस्य देशों में भारतीय कपड़ों के लिए बाजार पहुंच बढ़ेगी।
रेमंड ग्रुप के एमडी गौतम सिंघानिया ने कल कहा था कि भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारत के कपड़ा उद्योग लाभान्वित होगा। खासकर, कपड़ों पर जीरो-ड्यूटी सुविधा से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। कपड़ा उद्योग भारत में सबसे ज्यादा रोजगार देता है। ईयू बाजार में बेहतर पहुंच मिलने से इसे काफी लाभ होगा।
कपड़ों पर जीरो ड्यूटी भारतीय उद्योग के लिए और रोजगार के नजरिए से बहुत अच्छी होगी। ईयू के साथ एक मजबूत डील एक महत्वपूर्ण कदम।
गौतम सिंघानिया, एमडी, रेमंड ग्रुप
बांग्लादेश की उड़ेगी नींद
भारत से ईयू की ट्रेड डील बांग्लादेश में बुरी खबर है। ईयू बांग्लादेश का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन है। बांग्लादेशी निर्यात में ईयू की हिस्सेदारी 45% से 50% है। इस में बड़ा हिस्सा बुने कपड़ों (निटवीयर), रेडीमेड गारमेंट्स, गारमेंट्स होजरी का है। उसकी जीडीपी में टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स (आरएमजी) सेक्टर का कॉन्ट्रिब्यूशन 11% से 13% तक है। भारत से ईयू की डील बांग्लादेश की बाजार हिस्सेदारी को सीधे प्रभावित करेगी। टैरिफ हटने से भारत बांग्लादेश को रिप्लेस करने की स्थिति में होगा।
ईयू दुनिया का सबसे बड़ा अपैरल इम्पोर्टर
ईयू दुनिया का सबसे बड़ा अपैरल इम्पोर्टर है। वित्त वर्ष 2024-25 में ईयू ने 202.8 अरब अमेरिकी डॉलर के परिधान आयात किये। जर्मनी, फ्रांस, स्पेन और इटली जैसे प्रमुख यूरोपीय देश भारत से काफी कपड़े खरीदते हैं। यह समझौता इन देशों में भारतीय परिधान निर्यात और बढ़ाएगा।
फिलहाल, भारत के कुल परिधान निर्यात में ईयू की हिस्सेदारी 28% है। ईयू के कुल परिधान बाजार में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2.9% है। भारतीय परिधान उत्पादों पर ड्यूटी खत्म होने से भारतीय कपड़ा उद्योग लाभान्वित होगा। इससे बांग्लादेश, तुर्की और वियतनाम जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा में भारत को समान अवसर मिलेगा। ये पहले से ही ईयू में ड्यूटी-फ्री या रियायती शुल्क पहुंच का लाभ उठा रहे हैं।
भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण मोड़
यह समझौता भारतीय कपड़ा उद्योग को महत्वपूर्ण मोड़ है। यह न केवल निर्यात बढ़ाएगा, बल्कि भारत को वैश्विक कपड़ा बाजार में मजबूत खिलाड़ी स्थापित करेगा। बिना ड्यूटी यूरोपीय बाजारों तक पहुंच से भारतीय निर्माताओं को उत्पादन क्षमता बढ़ाने और क्वालिटी सुधारने का अवसर मिलेगा। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और देश की अर्थव्यवस्था मजबूती होगी।
एफटीए ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी बढ़ायेगा। यूरोपीय खरीदार अब भारतीय कपड़े अधिक आसानी से और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर खरीद सकेंगे। इससे भारतीय डिजाइनरों और निर्माताओं को अपनी क्रिएटिविटी दिखाने का बड़ा मंच मिलेगा। समझौता भारत और यूरोपीय संघ में आर्थिक संबंध और मजबूत करेगा।
uaeEu India Trade Deal And Customs Union Deadlock Undermine Turkey Report
भारत-यूरोपीय संघ डील से घबराया तुर्की, एक्सपर्ट की बड़े नुकसान की चेतावनी, कैसे निपटेंगे एर्दोगन
भारत और यूरोपीय यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर तुर्की की भी नजर थी।
भारत और यूरोपियन यूनियन की दो दशक लंबी बातचीत के बाद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को मदर ऑफ डील्स यूं ही नही कहा जा रहा । डील से एक तरफ यूरोप और भारत को काफी उम्मीदें हैं, तुर्की की रेसेप तैयप एर्दोगन सरकार चिंतित है।
तुर्किए टुडे के अनुसार, यूरोपीय संघ (ईयू) की भारत और मर्कोसुर ब्लॉक से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) ने तुर्की के ट्रेड एक्सपर्ट और इंडस्ट्री लीडर्स को चिंतित कर दिया है। तुर्की व्यापार विशेषज्ञों ने इन डील्स से अपने देश के प्रमुख ग्लोबल बाजारों में पीछे छूट जाने की चेतावनी दी है। दरअसल तुर्की दशकों पुराने कस्टम्स यूनियन से बंधा हुआ है। यह उसे ईयू के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में भाग लेने से रोकता है।
तुर्की क्यों भारत की ओर देख रहा
तुर्की 1995 से यूरोपीय संघ के कस्टम्स यूनियन का हिस्सा है। तुर्की को अपने कस्टम्स यूनियन के कारण FTA से फायदा नहीं होगा।
तुर्की के बिजनेस लीडर्स का कहना है कि उनका देश ईयू से आर्थिक एकीकृत होने के बावजूद भारत की तरह ईयू देशों से आपसी व्यापार लाभ पाने में असमर्थ है। तुर्की के व्यापार मंत्री उमर बोलाट ने कहा कि यूरोपीय संघ के कुछ देश तुर्की-EU कस्टम्स यूनियन को आधुनिक बनने से रोक रहे हैं।
तुर्की निर्यात पर भारत का दबाव
तुर्की निर्यातक सभा (TIM) के प्रमुख मुस्तफा गुलटेपे ने चेताया है, कि ‘ईयू बाजार में तुर्की की लंबे समय से प्रतिस्पर्धी बढ़त कमजोर हो रही है। ईयू के नए समझौते तुर्की के निर्यात पर असर डालेंगें। भारत खासतौर से औद्योगिक आधार केमिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और डिफेंस क्षेत्र में तुर्की के लिए चुनौती है।’
गुल्टेपे ने आगे कहा, ‘भारत सिर्फ केमिकल्स में ही तुर्की का प्रतिस्पर्धी नहीं है। भारत ईयू को हमारे हाई-टेक निर्यात को प्रभावित कर सकता है। भारत से हमें रेडीमेड कपड़ों और टेक्सटाइल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में निर्यात में नुकसान हो सकता है। मौजूदा हालात में हमारे पास कीमत के मामले में भारत से मुकाबला करने का कोई मौका नहीं है।’
तुर्की को ग्लोबल ट्रेड में पिछड़ने का खतरा
टर्किश इंडस्ट्री एंड बिजनेस एसोसिएशन (TUSIAD) के जर्मनी प्रतिनिधि अल्पर उकोक का कहना है कि भारत के साथ ईयू की ट्रेड डील के व्यापार से इतर भू-आर्थिक परिणाम हो सकते हैं। यह संभावित रूप से इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) के भविष्य का रास्ता साफ करेगा, जिससे तुर्की को बाहर रखा गया है।
इकोनॉमिक डेवलपमेंट फाउंडेशन (IKV) अध्यक्ष आयहान जेतिनोग्लू कहते हैं, ‘तुर्की को स्ट्रक्चरल नुकसान का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। तुर्की के पास फिलहाल 24 देशों के साथ FTA हैं। दूसरी ओर ईयू के पास 80 देशों के साथ ट्रेड और पार्टनरशिप एग्रीमेंट हैं।’
जेतिनोग्लू ने आगे कहा, ‘जो देश ईयू के साथ FTA साइन करते हैं, वे कस्टम्स यूनियन से तुर्की के बाजार में प्रवेश कर सकते हैं लेकिन तुर्की उन बाजारों तक समान शर्तों पर पहुंच नहीं बना पाता है, जिससे मुश्किल पैदा होती है। हालिया घटनाक्रमों ने तुर्की-ईयू कस्टम यूनियन में सुधार को पहले से ज्यादा जरूरी बना दिया है।

