इरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध फैला आठ देशों तक,शेयर बाजार डूबना तय

Iran-Israel-US War: तेल, शेयर बाजार और सोना-चांदी…. ईरान-अमेरिका जंग से भारत के इन सेक्‍टर्स में मचेगी खलबली!
ईरान-इजरायल जंग ने भयंकर रूप ले लिया है. दुबई, सऊदी अरब, कुवैत से लेकर कई जगहों पर ईरान ने अटैक किया है. इससे साफ है कि सोमवार को तेल की कीमतों में तेज उछाल आएगा. साथ ही शेयर बाजार में भारी गिरावट आ सकती है.

ईरान और इजरायल जंग से मार्केट पर क्‍या होगा असर.
नई दिल्‍ली ,28 फरवरी 2026, ईरान और इजरायल के बीच जंग अब भयानक रूप लेता जा रहा है. पहले इजरायल-अमेरिका ने मिलकर ईरान के 30 से ज्‍यादा ठिकानों पर हमला किया था और अब ईरान ने इजरायल समेत अमेरिका के 7 सैन्‍य अड्डों पर हमला किया है. ईरान ने कुवैत, यूएई, कतर और बहरीन जैसे ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं.

अब इस युद्ध में सात से आठ देश शामिल हो चुके हैं. ईरान मिडिल ईस्‍ट में स्थित अमेरिकी सैन्‍य बेस को निशाना बना रहा है. लेबलान और हुती जैसे देश भी ईरान की ओर से अटैक कर रहे हैं. इजरायल पर कई देशों की ओर से हमला हो रहा है. ऐसे में अब दुनिया में एक डर बन गया है. हालांकि अभी ये अंदाजा लगाना मुश्किल है कि यह आक्रमण कितना लंबा और भयानक होगा? इसी तरह, शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोग भी डरे हुए हैं. आइए जानते हैं भारत में किन-किन सेक्‍टर्स पर क्‍या असर हो सकता है…

कच्‍चे तेल के दाम में बड़ी उछाल
इस वॉर के छिड़ने से भारत समेत दुनियाभर के निवेशक डरे हुए हैं. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि इस अटैक से कच्‍चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आना तय है, जो महंगाई को बढ़ा सकती है. भारत समेत कई देश होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से अपना कच्‍चा तेल आयात करते हैं. इस युद्ध के दौरान यह एरिया बंद होने की उम्‍मीद है, जिस कारण कच्‍चे तेल की कीमतों में वृद्धि होगी. शुक्रवार को कच्‍चे तेल का दाम 2.78% चढ़कर 67.02 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था. सोमवार को जब कमोडिटी मार्केट खुलेगा तो इसमें और ज्‍यादा उछाल आएगा.

शेयर बाजार में भारी गिरावट की आशंका
युद्ध इतनी भीषण हो चुका कि एक्‍सपर्ट्स मानते हैं कि सोमवार को शेयर बाजार में भारी गिरावट आ सकती है. यह गिरावट कितनी होगी, यह निवेशकों के सेंटिमेंट और बिकवाली पर निर्भर रहेगा. इसके संकेत शुक्रवार को ही भारतीय बाजार में दिख गए थे, जब ईरान-अमेरिका के बीच बातचीत किसी सार्थक नतीजे पर नहीं पहुंची थी. इस सेंटिमेंट से सेंसेक्‍स 961 अंक या 1.17 प्रतिशत और निफ्टी 317 अंक या 1.25% गिरकर बंद हुआ था. अब सोमवार को निवेशकों की नजर रहेगी.

सोना और चांदी पर क्‍या होगा असर?
जब भी दुनिया में युद्ध होता है या युद्ध जैसी स्थिति बनती है तो सेफ असेट जैसे सोना-चांदी और कॉपर के दाम उछलते हैं. दुनिया में इस घटनाक्रम से एक बार फिर सोने और चांदी के दाम में बड़ी तेजी आयेगी. अभी कमोडिटी मार्केट में 10 ग्राम सोने की कीमत 1,61,971 रुपये है और चांदी की कीमत 2,74,389 रुपये है.

सिर्फ तेल नहीं… ईरान-अमेरिका युद्ध से भारत को ये भी टेंशन! जानिए कितना बड़ा संकट
ईरान पर इजरायल और अमेरिका के संयुक्‍त हमले के बाद ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है. इस हमले के साथ ही दुनियाभर में तेल की कीमतें बढ़ने की आशंका है. साथ ही जलमार्ग में भी रुकावट आयेगी, जो व्‍यापार को बड़ा खतरा पैदा कर सकती है.

ईरान अमेरिका वॉर में भारत के लिए बड़ी टेंशन (Photo: File/ITG)

इजरायल-अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद शुरु युद्ध धीरे-धीरे बड़ा रूप लेता जा रहा है. ईरान पर हमले के बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने मिडिल ईस्‍ट में कई अमेरिका ठिकानों पर मिसाइलें दागी हैं. कुवैत, कतर, दुबई और सऊदी अरब में ईरानी हमले हुए हैं, जिसका जवाब इजरायज और अमेरिका भी दे रहे हैं. ऐसे में यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि युद्ध कितने दिन चलेगा और अब कितना बड़ा होगा?

दूसरी ओर, यह भी आशंका है कि ईरान इन अटैक्‍स के साथ कूटनीतिक तौर पर होर्मुज जलमार्ग बंद कर सकता है, जहां से दुनिया का लगभग 40 प्रतिशत तेल आयात होता है. अगर ये रास्‍ता बंद होता है तो भारत समेत दुनिया भर में कच्‍चे तेल आपूर्ति की समस्‍या तो आएगी ही. साथ में इस रास्‍ते भारत का एक्‍सपोर्ट भी प्रभावित होगा. समझते हैं कि भारत के लिए यह कितना बड़ा नुकसान हो सकता है…

“मनीकंट्रोल” की रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से भारत के नॉन -ऑयल एक्‍सपोर्ट के दसवें हिस्‍से से ज्‍यादा पर खतरा बढ़ सकता है. भारत के लिए यह घटना जोखिम ऊर्जा सुरक्षा से कहीं ज्‍यादा बड़ा है. भारत के तीन प्रमुख आपूर्तिकर्ता कच्‍चा तेल इसी मार्ग से भेजते हैं, जबकि तेल के अलावा अन्‍य कई महत्‍वपूर्ण व्‍यापार भी इसी रास्‍ते से होता है.

47 अरब डॉलर से ज्‍यादा का निर्यात
रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इसी रास्‍ते समुद्री मार्गों पर निर्भर खाड़ी देशों को 47.6 अरब डॉलर की कीमत के कच्‍चे तेल को छोड़कर अन्‍य चीजें निर्यात की हैं. यह भारत के कुल गैर-तेल निर्यात का 13.2 प्रतिशत है और भारत का कुल समुद्री मार्ग से एक्‍सपोर्ट तेल को छोड़कर 360.2 अरब डॉलर है.

समुद्री मार्ग प्रभावित होता है तो यह एक बड़ा नुकसान होगा. भारत के निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात का है, जिसका निर्यात मूल्य 28.5 अरब डॉलर है, इसके बाद सऊदी अरब का स्थान आता है जिसका मूल्य 11.7 अरब डॉलर है. अन्‍य बाजारों में इराक (2.8 बिलियन डॉलर), कुवैत (2.1 बिलियन डॉलर), कतर (1.7 बिलियन डॉलर) और ईरान (1.25 बिलियन डॉलर) शामिल है.

बढ सकती है लागत 
ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्‍य दुनिया के सबसे व्‍यस्‍त समुद्री चोक पॉइंट है, जो बड़ी मात्रा में माल व्‍यापार के साथ-साथ ग्‍लोबल एनर्जी शिपमेंट का एक बड़ा हिस्‍सा संभालता है. इस मार्ग में किसी भी रुकावट, चाहे अस्थायी ही क्यों न हो, माल ढुलाई लागत बढ़ायेगी. साथ ही शिपमेंट में देरी हो सकती है और एशिया-यूरोप का व्‍यापार घटा सकती है.

भारत इन रूटों पर क्‍या-क्‍या चीजें निर्यात करता है?
भारत इस रूट्स से कई खाड़ी देशों को इंजीनियरिंग सामान, रत्न और आभूषण, खाद्य उत्पाद, रसायन और निर्माण सामग्री भेजता है, ये सभी समुद्री मार्ग पर बहुत अधिक निर्भर हैं. ऐसे में यह युद्ध सिर्फ तेल नहीं कई अन्‍य व्‍यापार को भी प्रभावित कर सकती है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *