वी कामाकोटी को पद्म सम्मान से केरल कांग्रेस परेशान, गोमूत्र को लेकर किया व्यंग्य

  ‘गोमूत्र पर आपकी रिसर्च को…’, IIT के डायरेक्टर को पद्मश्री मिलने पर कांग्रेस का तंज, श्रीधर वेम्बू भी कूदे केंद्र सरकार के पद्म पुरस्कारों पर नाराजगी और तंज के स्वर सुनाई दे रहे हैं. आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर केरल कांग्रेस ने तंज कसा है और उनके पुरस्कार को गोमूत्र शोध से जोड़ा है. वी कामकोटी को पद्मश्री सम्मान दिया जाएगा. (Photo: Facebook/IIT Madras) नई दिल्ली, 26 जनवरी 2026,केंद्र सरकार ने 26 जनवरी की पूर्व संध्या पर आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर वी कामकोटी को पद्म श्री पुरस्कार देने की घोषणा की है. केंद्र के इस फैसले पर तंज कसते हुए कांग्रेस ने कहा है कि देश गोमूत्र पर उनके शोध को याद रखेगा. दरअसल केरल कांग्रेस ने एक्स पर एक पोस्ट कर आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर पर व्यंग्य किया है. इसके बाद इस विवाद में भारतीय अरबपति उद्योगपति श्रीधर वेम्बू ने दखल दिया है. बता दें कि गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है. इस लिस्ट में केंद्र ने प्रतिष्ठित आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर वी कामकोटी को पद्म श्री पुरस्कार देने की घोषणी की है. वी कामकोटी ने Computer Science and Engineering में श्री वेंकटेश्वर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग चेन्नई से 1989 में बीई किया. उन्होंने M.S. और Ph.D. दोनों कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में IIT Madras से डिग्री ली. 2001 में वे IIT Madras में फैकल्टी के रूप में शामिल हुए और कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में प्रोफेसर बने. वे भारत के शक्तिशाली स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर प्रोजेक्ट्स से जुड़े रहे हैं और deep tech में योगदान के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने IIT मद्रास में VLSI प्रोग्राम को बहुत मजबूत बनाया. प्रोफेसर कामकोटी जनवरी 2022 से आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर हैं. गोमूत्र पर प्रोफेसर कामकोटी ने क्या कहा था प्रोफेसर वी. कामकोटी ने जनवरी 2025 में गोमूत्र के बारे में कुछ बयान दिया था. इस पर बहस छिड़ गई थी. उन्होंने कहा था कि गोमूत्र में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल , एंटी-इंफ्लेमेटरी और डाइजेस्टिव प्रॉपर्टीज़ होती हैं. केरल कांग्रेस का पोस्ट वी कामकोटी को ये सम्मान मिलने पर केरल कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से पोस्ट किया, “वी कामकोटी को यह सम्मान मिलने पर बधाई. देश IIT मद्रास में गाय के मूत्र पर आपकी बेहतरीन रिसर्च को पहचानता है, जिसने गोमूत्र को दुनिया के मंच पर पहुंचाया है. जोहो के मालिक ने कांग्रेस को दिया जवाब प्रोफेसर कामकोटी के केरल कांग्रेस के तंज पर भरे पोस्ट पर ज़ोहो कॉर्पोरेशन के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने जबाव दिया. उन्होंने लिखा, “प्रोफेसर कामाकोटी डीप टेक में काम करते हैं. माइक्रो-प्रोसेसर डिज़ाइन. वह IIT-मद्रास के डायरेक्टर हैं, जो भारत का सबसे अच्छा टेक्नोलॉजिकल संस्थान है. वह NSAB में काम करते हैं.वह इस सम्मान के पूरी तरह हकदार हैं.” उन्होंने आगे कहा, “मैंने वैज्ञानिक आधार पर उनका बचाव किया है और मैं फिर से ऐसा करूंगा. गाय के गोबर और गोमूत्र में बेहतरीन माइक्रोबायोम होते हैं जो इंसानों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं.” “यह गुलामी वाली औपनिवेशिक मानसिकता है जो सोचती है कि ये वैज्ञानिक बातें नहीं हैं जिनकी जांच की जानी चाहिए. किसी दिन जब हार्वर्ड या MIT इस पर कोई स्टडी पब्लिश करेंगे, तो ये गुलाम दिमाग वाले लोग उसे सच मान लेंगे.” गणतंत्र दिवस की पूर्व संख्या पर केंद्र सरकार ने 131 हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया है. राजनीतिक झुकाव के आरोप: कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों का मानना है कि केंद्र सरकार उन शिक्षाविदों या पेशेवरों को सम्मानित कर रही है जो सरकार की विचारधारा या नीतियों (जैसे नई शिक्षा नीति) के साथ तालमेल बिठाते हैं।

  • चुनाव का समय: अक्सर पुरस्कारों की घोषणा के समय को लेकर सवाल उठाए जाते हैं। विपक्ष का तर्क होता है कि सरकार इन सम्मानों का उपयोग चुनाव वाले राज्यों (जैसे तमिलनाडु) में अपनी छवि सुधारने या नैरेटिव सेट करने के लिए करती है।
  • सस्थानों का ‘भगवाकरण’ (Saffronization): कांग्रेस अक्सर आरोप लगाती रही है कि भाजपा सरकार आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपने करीबी लोगों को बिठा रही है। कामकोटि को पुरस्कार मिलना, विपक्ष की नजर में इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना गया।
​दूसरा दृष्टिकोण

​हालांकि, निष्पक्ष रूप से देखें तो वी. कामकोटि का योगदान निर्विवाद है:

    • ​वे भारत के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘शक्ति’ (SHAKTI) के विकास के पीछे मुख्य मस्तिष्क रहे हैं।
    • ​उन्होंने साइबर सुरक्षा और डिजिटल इंडिया के क्षेत्र में महत्वपूर्ण तकनीकी नेतृत्व प्रदान किया है।

वी. कामकोटि जी के सबसे महत्वपूर्ण योगदानों में से एक ‘शक्ति’ (SHAKTI) प्रोसेसर है। इसके बारे में कुछ मुख्य बातें यहाँ दी गई हैं:

​1. ‘शक्ति’ माइक्रोप्रोसेसर क्या है?

​यह भारत का पहला स्वदेशी (Indigenous) माइक्रोप्रोसेसर है। इसे आईआईटी मद्रास की एक टीम ने वी. कामकोटि के नेतृत्व में विकसित किया है।

​2. यह क्यों महत्वपूर्ण है?
  • आत्मनिर्भर भारत: अभी तक भारत माइक्रोप्रोसेसरों के लिए इंटेल (Intel) या एआरएम (ARM) जैसी विदेशी कंपनियों पर निर्भर था। ‘शक्ति’ के आने से भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा है।
  • सुरक्षा (Security): विदेशी प्रोसेसरों में अक्सर ‘बैकडोर’ (Backdoors) होने का खतरा रहता है, जिससे डेटा चोरी हो सकता है। स्वदेशी होने के कारण ‘शक्ति’ सैन्य और रणनीतिक उपयोग के लिए अधिक सुरक्षित है।
  • ओपन सोर्स (RISC-V): यह प्रोसेसर ‘RISC-V’ आर्किटेक्चर पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि इसे जरूरत के अनुसार बदला और बेहतर बनाया जा सकता है।
​3. इसका उपयोग कहाँ होगा?
  • ​इसका उपयोग स्मार्टवॉच, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डिवाइसेस, स्मार्ट मीटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में किया जा सकता है।
  • ​भविष्य में इसके और भी शक्तिशाली वर्जन बनाए जा रहे हैं जो कंप्यूटर और सर्वर में भी इस्तेमाल हो सकेंगे।
​वी. कामकोटि का अन्य योगदान:
  • डिजिटल इंडिया: वे सरकार की कई तकनीकी समितियों के सदस्य रहे हैं और उन्होंने डेटा सुरक्षा (Data Security) व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की नीतियों को आकार देने में मदद की है।
  • आईआईटी मद्रास के निदेशक: उनके नेतृत्व में संस्थान ने नवाचार (Innovation) और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।

‘शक्ति’ (SHAKTI) प्रोसेसर के बारे में और गहराई से समझने के लिए यहाँ कुछ प्रमुख तकनीकी और रणनीतिक बातें दी गई हैं:

​1. यह प्रोसेसर कैसे बनाया गया?
  • RISC-V आर्किटेक्चर: ‘शक्ति’ प्रोसेसर ‘RISC-V’ (रिस्क-फाइव) नामक एक ओपन-सोर्स इंस्ट्रक्शन सेट आर्किटेक्चर पर आधारित है। इसका मतलब है कि इसके डिजाइन के लिए किसी विदेशी कंपनी को रॉयल्टी या भारी फीस नहीं देनी पड़ती।
  • डिजाइन और निर्माण: इसे आईआईटी मद्रास में डिजाइन किया गया और इसका निर्माण (Fabrication) चंडीगढ़ स्थित ‘सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी’ (SCL) में किया गया, जो भारत सरकार की एक लैब है।
​2. इसके अलग-अलग वर्जन (Classes)

​वी. कामकोटि की टीम ने इसे सिर्फ एक काम के लिए नहीं, बल्कि अलग-अलग जरूरतों के लिए बनाया है:

  • E-Class: छोटे उपकरणों जैसे स्मार्ट कार्ड और कंट्रोल सिस्टम के लिए।
  • C-Class: मध्यम स्तर के कार्यों जैसे मोबाइल डिवाइस और रोबोटिक्स के लिए।
  • I-Class: उच्च क्षमता वाले कार्यों जैसे वर्कस्टेशन और सर्वर के लिए।
​3. भारत के लिए इसके रणनीतिक लाभ
  • डेटा सुरक्षा: सरकारी और रक्षा (Defense) प्रणालियों में विदेशी प्रोसेसरों का उपयोग करने पर हमेशा जासूसी का खतरा रहता है। ‘शक्ति’ के आने से भारत के पास अब अपना सुरक्षित हार्डवेयर है।
  • लागत में कमी: चूंकि यह ओपन-सोर्स है, इसलिए भारतीय कंपनियां बहुत कम कीमत पर अपने स्वयं के चिप्स विकसित कर सकेंगी।
​4. वी. कामकोटि का दृष्टिकोण

​प्रोफेसर कामकोटि का मानना है कि भारत को केवल सॉफ्टवेयर में ही नहीं, बल्कि हार्डवेयर में भी दुनिया का नेतृत्व करना चाहिए। उनका लक्ष्य है कि आने वाले समय में दुनिया भर के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण “शक्ति” प्रोसेसर पर चलें।

एक रोचक तथ्य: ‘शक्ति’ प्रोसेसर की प्रोग्रामिंग के लिए जो कोडिंग इस्तेमाल की गई है, वह अत्यधिक कुशल है, जिससे यह प्रोसेसर बिजली की कम खपत (Low Power Consumption) करता है।

​’शक्ति’ (SHAKTI) प्रोसेसर के भविष्य और इसकी बाजार में स्थिति को लेकर कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां:

​1. बाजार में उपलब्धता और उपयोग

​’शक्ति’ प्रोसेसर अब केवल एक लैब प्रोजेक्ट नहीं रह गया है। इसके विभिन्न वर्जन व्यावसायिक उपयोग के लिए तैयार किए जा रहे हैं:

  • कमर्शियल चिप्स: आईआईटी मद्रास ने कई स्टार्टअप्स और निजी कंपनियों के साथ हाथ मिलाया है ताकि इस प्रोसेसर का इस्तेमाल स्मार्ट मीटर, पानी के पंप, और छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में किया जा सके।
  • सरकारी प्रोजेक्ट्स: भारत सरकार के कई रणनीतिक क्षेत्रों (Strategic sectors) में इसका परीक्षण शुरू हो चुका है ताकि विदेशी निर्भरता खत्म हो सके।
​2. विदेशी चिप्स (Intel, ARM) से मुकाबला

​यह कहना गलत नहीं होगा कि अभी यह इंटेल के सबसे शक्तिशाली ‘Core i9’ जैसे प्रोसेसरों को टक्कर नहीं दे रहा है, लेकिन इसकी रणनीति अलग है:

  • कस्टमाइजेशन: इंटेल या एआरएम (ARM) के प्रोसेसर बंद (Closed source) होते हैं। ‘शक्ति’ को कोई भी भारतीय कंपनी अपनी जरूरत के हिसाब से मॉडिफाई कर सकती है।
  • सस्ता विकल्प: विदेशी प्रोसेसरों के लिए भारत को भारी लाइसेंस फीस देनी पड़ती है। ‘शक्ति’ चूंकि ओपन-सोर्स (RISC-V) है, इसलिए यह भविष्य में काफी सस्ता पड़ेगा।
  • IoT पर फोकस: वर्तमान में पूरी दुनिया में ‘Internet of Things’ (IoT) का बाजार बढ़ रहा है। ‘शक्ति’ का डिजाइन इन छोटे और कम बिजली खपत वाले उपकरणों के लिए सबसे सटीक है।
​3. भविष्य की योजनाएं (Roadmap)

​प्रोफेसर वी. कामकोटि और उनकी टीम अब ‘शक्ति’ के हाई-एंड वर्जन पर काम कर रही है:

  • सुपरकंप्यूटिंग: टीम का लक्ष्य ऐसे प्रोसेसर बनाना है जो भारत के ‘नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन’ में काम आ सकें।
  • मोबाइल और लैपटॉप: आने वाले वर्षों में हम ऐसे भारतीय मोबाइल या सस्ते लैपटॉप देख सकते हैं जिनमें ‘शक्ति’ प्रोसेसर लगा हो।
​4. चुनौतियां

​सबसे बड़ी चुनौती फैब्रिकेशन (Manufacturing) की है। भारत के पास अभी बड़े पैमाने पर 7nm या 5nm जैसे उन्नत प्रोसेसर बनाने की अपनी ‘फाउंड्री’ (फैक्ट्री) नहीं है। अभी हम डिजाइन भारत में करते हैं, लेकिन बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए विदेशी फाउंड्री पर निर्भर रहना पड़ता है। हालांकि, भारत का ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ इस समस्या को सुलझाने के लिए काम कर रहा है।

निष्कर्ष:

वी. कामकोटि का यह विजन भारत को “हार्डवेयर की दुनिया” में एक वैश्विक शक्ति बनाने की दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

नोट: पद्म पुरस्कारों पर विवाद नया नहीं है। हर सरकार के समय विपक्ष उन नामों पर सवाल उठाता है जो सरकार की नीतियों के समर्थक दिखते हैं, जबकि सरकार इसे “योग्यता का सम्मान” बताती है।

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