Vodafone Idea को और सहयोग नहीं, सरकारी कंपनी बनाने से सिंधिया की ‘न’?
Vodafone Idea अब सरकारी कंपनी बनने वाली है? खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिया महत्वपूर्ण सवालों का जवाब
नई दिल्ली 04 जुलाई 2024। टेलीकॉम मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने साफ कर दिया है कि Vodafone Idea को पहले ही बड़ी राहत दी है, लेकिन अब कंपनी को अपने दम पर आगे बढ़ना होगा. सरकार का ध्यान कंपिटीशन और ग्राहक पर फोकस रहा. इस दौरान उन्होंने Bharti Airtel, Starlink, SATCOM समेत कई अन्य मुद्दों पर बात की. आगे पूरी डिटेल में जानते हैं-
कर्ज में डूबी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (Vi) को लेकर केंद्र सरकार ने अपनी स्थिति साफ कर दी है. टेलीकॉम मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने CNBC-TV18 को दिए एक खास इंटरव्यू में कहा कि सरकार Vodafone Idea में अपनी हिस्सेदारी मौजूदा 49% से आगे नहीं बढ़ाएगी. उन्होंने साफ किया कि अगर सरकार की हिस्सेदारी 49% से ज्यादा होती है, तो कंपनी सरकारी (PSU) बन जाएगी, और सरकार का ऐसा हमारा इरादा नहीं है. वोडाफोन आइडिया इस समय भारी कर्ज से जूझ रही है. अप्रैल 2025 में कंपनी ने ₹36,950 करोड़ स्पेक्ट्रम ऑक्शन के बकाये को इक्विटी में बदलकर सरकार को दिया था. इससे सरकार की हिस्सेदारी 22.6% से बढ़कर 48.99% हो गई. इसके साथ ही सरकार इस Vodafone Idea में सबसे बड़ी शेयरहोल्डर बन गई.
हालांकि, सरकार को प्रमोटर के रूप में क्लासिफाई नहीं किया गया है. कंपनी ने चेतावनी दी थी कि अगर उसे 2026 के बाद और सरकारी सहायता नहीं मिली, तो उसकी संचालन क्षमता खतरे में पड़ सकती है. मंगलवार को वोडाफोन आइडिया के शेयर 1.1% की तेजी के साथ ₹7.53 पर कारोबार कर रहे थे.
Vodafone Idea पर क्या है सरकार का रुख?
सिंधिया ने साफ कहा, “हमारी मंशा Vi को PSU बनाने की नहीं है. अब किसी अतिरिक्त इक्विटी का कन्वर्जन नहीं किया जाएगा, यह अंतिम सीमा है.” उन्होंने यह भी जोड़ा कि कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी और बैलेंस शीट का जिम्मा उसके मैनेजमेंट का है. सरकार केवल नीतिगत दिशा-निर्देश और सुझाव दे सकती है. उन्होंने कहा, “घाटे और मुनाफे की जिम्मेदारी कंपनी के मैनेजमेंट की है, चाहे वह Vi हो, Jio हो, या Airtel.”
Bharti Airtel की अपील पर विचार
सिंधिया ने इंटरव्यू में बताया कि Bharti Airtel ने भी अपने बकाये को इक्विटी में बदलने की अपील की है. इस पर दूरसंचार विभाग (DoT) और वित्त मंत्रालय विचार कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “हर ऑपरेटर को यह अधिकार है कि वह हमारे पास इक्विटी में बदलने की अपील करे. एयरटेल ने यह अधिकार उपयोग किया है.” हालांकि, उन्होंने इस पर कोई अंतिम फैसले की जानकारी नहीं दी.
5G नेटवर्क पर भारत ने अब तक खर्च किए ₹4.5 लाख करोड़
सिंधिया ने कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में है, जहां सक्रिय रूप से चार टेलीकॉम कंपनियां ऑपरेट कर रही है. किसी भी कंपनी के ग्राहकों की संख्या 90 मिलियन से कम नहीं है. BSNL के 91 मिलियन, Vi के 90 मिलियन और Jio के 300 मिलियन ग्राहक हैं. उन्होंने बताया कि भारत में 5G नेटवर्क पर अब तक ₹4.5 लाख करोड़ खर्च किए जा चुके हैं. कंपनियां अब मजबूत रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) दिखा रही हैं, जिससे उन्हें पूंजीगत खर्च (Capex) में आसानी हो रही है. BSNL ने पिछले साल 150% ऑपरेटिंग प्रॉफिट में ग्रोथ दर्ज की और ₹25,000 करोड़ से ज्यादा का Capex किया.
MTNL और BSNL की स्थिति पर क्या कहा?
सिंधिया ने बताया कि जनवरी 2025 से MTNL के सभी ऑपरेशन BSNL को ट्रांसफर कर दिए गए हैं. MTNL का बैंक कर्ज फिर से तय करने का काम वित्त मंत्रालय कर रहा है. इसके अलावा, MTNL की संपत्तियों को मोनेटाइज करने की प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने कहा, “MTNL की जमीनों को राष्ट्रीय भूमि मुद्रीकरण समिति (NLMC) के जरिए बेचा जाएगा और उससे मिले पैसे से कर्ज और बैंकों के बकाया चुकाए जाएंगे.”
SATCOM पर क्या है सरकार की नीति?
सिंधिया ने कहा कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम को मोबाइल स्पेक्ट्रम की तरह नहीं माना जा सकता. यह एक साझा संसाधन है. सिंधिया ने कहा, “दुनियाभर में सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की नीलामी नहीं होती, इसे प्रशासनिक रूप से आवंटित किया जाता है.” TRAI की सिफारिशों को मंजूरी की प्रक्रिया में कुछ महीने लग सकते हैं. Starlink जैसी कंपनियां अभी मंजूरी प्रक्रिया में हैं और उन्हें अर्थ गेटवे, स्पेक्ट्रम, IN-Space मंजूरी और सुरक्षा क्लियरेंस जैसे नियम पूरे करने होंगे.

