उपनल कर्मियों को धामी मंत्रिमंडल ने दिया दो वर्ष का लाभ,यूसीसी पंजीकरण अब लचीला

Uttarakhand Cabinet Decisions: मुख्य मंत्री पुष्कर सिंह धामी की  अध्यक्षता में हुई बैठक में किसानों और उपनल कर्मियों के लिए बड़ा फैसला लिया गया है।Uttarakhand Cabinet meeting Held Today 19 Proposals Discussed All updateS in Hindiदेहरादून 15 जनवरी 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अध्यक्षता में आज बृहस्पतिवार को मंत्रिमंडल बैठक में विभिन्न विभागों के 19 प्रस्ताव रखे गए। इसमें यूसीसी में संशोधन प्रस्ताव भी अनुमोदित कर दिया गया है। वहीं, उत्तराखंड पर्यटन की नियमावली को भी मंजूरी मिल गई है। वहीं, उपनल कर्मचारियों को भी समान वेतन को लेकर बड़ा निर्णय हुआ ।

उत्तराखंड की धामी सरकार ने कैबिनेट बैठक में बड़ा निर्णय लेते हुए उपनल कर्मचारी के हक पर मुहर लगाई है.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक संपन्न हो गई है. बैठक में तमाम महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी है, जिसमें मुख्य रूप से उपनल कर्मचारी को लेकर मंत्रिमंडल की बैठक में विस्तृत रूप से चर्चा की गई. साथ ही उपनल कर्मचारी के हक में निर्णय लिया गया है. बैठक में समान कार्य समान वेतन पर सहमति बनी है, जिसका लाभ कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से मिलेगा.

दस साल उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड में 10 साल पूरे करने वाले कर्मचारियों को समान कार्य समान वेतन का लाभ मिलेगा. इस तरह से उपनल के करीब सात हजार कर्मचारियों को समान कार्य समान वेतन का लाभ मिलेगा. वहीं अब से सिर्फ भूतपूर्व सैनिकों के परिजनों को उपनल में नौकरी मिलेगी.

धामी मंत्रिमंडल में उपनल कर्मचारियों को लेकर हुआ बड़ा फैसला
इस मामले में ज्यादा जानकारी देते हुए कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले ही कह दिया था कि उपनल कर्मचारियों के साथ न्याय होगा, आज उसी पर फैसला लिया गया. कैबिनेट ने वित्तिय संसाधनों को देखते हुए निर्णय लिया कि साल 2015 तक के लगे हुए उपनल कर्मचारियों को शासनादेश जारी होने के बाद तत्काल प्रभाव से सामान कार्य का सामान वेतन निर्धारण कर दिया जाएगा और उनको विभागीय संविदा पर नहीं लिया जाएगा. इसके बाद तीन चरणों में 2016, 2017 और 2018 के कर्मचारियों को सामान कार्य का सामान वेतन निर्धारण विभागीय संविदा में लेने का काम लिया जाएगा. इसी तरह 2032 तक के उपनल कर्मचारियों को सामान कार्य का सामान वेतन दिया जाएगा.

वहीं कैबिनेट बैठक के बाद उपनल कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने सचिवालय में मुख्य मंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की. इस अवसर पर उपनल कर्मचारियों ने समान कार्य-समान वेतन के संबंध में आज राज्य मंत्रिमंडल के ऐतिहासिक निर्णय को मुख्यमंत्री एवं प्रदेश सरकार के प्रति आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया. उपनल कर्मचारियों ने कहा कि यह निर्णय लंबे समय से चली आ रही उनकी मांगों को पूरा करने के साथ-साथ उनके सम्मान और आर्थिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इस फैसले से प्रदेश के हजारों उपनल कर्मचारियों में उत्साह एवं विश्वास का वातावरण बना है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार उपनल कर्मियों के हितों की रक्षा, उनके सम्मान और भविष्य को सुरक्षित करने को पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है. मुख्यमंत्री धामी ने यह भी कहा कि उपनल कर्मचारी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनके योगदान को सरकार पूरी गंभीरता से मान्यता देती है. प्रदेश सरकार कर्मचारियों के कल्याण से जुड़े सभी मुद्दों पर संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है.

दरअसल, साल 2018 में उपनलकर्मियों को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया था. उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उपनलकर्मियों को नियमितीकरण करने का आदेश दिया था. हालांकि उत्तराखंड हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार, सुप्रीम कोर्ट चली गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से भी सरकार को कोई राहत नहीं मिली. मतलब सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार की याचिका निरस्त हो गई थी.

बड़ी बात यह है कि इस मामले को लेकर उपनल कर्मचारी सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका भी लगा चुके है, तभी से सरकार पर कोई निर्णय लेने का दबाव था. आखिर में सरकार ने कोर्ट के आदेश के क्रम में मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन भी किया. मंत्रिमंडलीय उप समिति की सिफारिशों पर सरकार ने आज कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया है.

ये हुए फैसले
    • पेराई सत्र 2025-26 के लिए 270 करोड़ की शासकीय प्रतिभूति यानी स्टेट गारंटी को मंजूरी। अब चीनी मिलें ऋण ले सकेंगी।
    • चीनी मिलों के गन्ने के मूल्य को मंजूरी। 405 रुपये अगेती के मिलेंगे।
    • निर्वाचन विभाग में सेवा नियमावली को मंजूरी।
    • उत्तराखंड संस्कृत अकादमी का नाम उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम होगा।
    • यूकॉस्ट में अल्मोड़ा व चंपावत के साइंस सेंटर के लिए 6-6 पद स्वीकृत किए गए।
    • 2024-25 की ऊर्जा विभाग की रिपोर्ट सदन में रखी जाएगी।
    • वन निगम की रिपोर्ट सदन में रखने पर मुहर।
    • बागवानी मिशन में एंटी हेलनेट पर भारत सरकार की 50% के साथ अब राज्य से 25% अतिरिक्त मिलेंगें।
    • दून विश्विद्यालय में हिन्दू अध्ययन केंद्र में 6 पदों (4 अकादमी,2 अन्य) को स्वीकृति मिली।
    • उपनल कर्मचारियों के लिए: पूर्व में चरणों में समान कार्य समान वेतन के 12 वर्ष के बजाय 10 वर्ष पूरे करने वालों को समान कार्य समान वेतन 7000 से 8000 कर्मचारियों को मिलेगा। 2018 से पूर्व के बाकी को भी अलग से मिलेगा लाभ। भविष्य में उपनल के माध्यम से भूतपूर्व सैनिकों के पुनर्वास कार्य ही किए जाएंगे।
    • सतेंद्र कुमार बनाम सीबीआई में एनडीपीएस, पॉक्सो, के  विशेष न्यायालय बनेंगे। 16 न्यायालय बनेंगे, जिसमें 144 पद स्वीकृत हैं। देहरादून हरिद्वार नैनीताल और उधमसिंह नगर में 7 एडीजी, 9 एसीजेएम स्तर के न्यायालय होंगे।
    • उत्तराखंड की विधानसभा के शीतकालीन सत्र के लिए मुख्यमंत्री को निर्णय को अधिकृत किया गया।
    • खनन विभाग: नंधौर व अन्य नदियों में खनन का आदेश संशोधित किया गया है।
    • विभिन्न खेल प्रतियोगिता के लिए विधायक स्तर की चैंपियन ट्रॉफी और एक लाख, सांसद स्तर पर चैंपियनशिप ट्राफी और 2 लाख, राज्य स्तर पर 5 लाख और ट्रॉफी मिलेगी।
    • ब्रिडकुल रोपवे, टनल व कैविटी पार्किंग, ऑटोमेटेड या मेकैनिकल पार्किंग भी बनाएगा।
    • बीएनएस की धारा 330 में दो पक्षों के सहमत होने पर विशेषज्ञ की जरूरत नहीं है। उसका एक फॉरमेट बनाने को नियमावली को मंजूरी।
    • यूसीसी में संशोधन को मंजूरी। अध्यादेश आएगा। जनवरी 2025 से पूर्व शादी वालों को छह माह के बजाय एक साल में कराना होगा विवाह पंजीकरण। रजिस्ट्रार जनरल अब अपर सचिव स्तर के अधिकारी होंगे। समय से काम न करने पर फाइन के बजाय पेनाल्टी किया गया।पहचान छुपाकर शादी करने पर अब यूसीसी के तहत अमान्य घोषित की जाएगी। इसका मुकदमा अदालत में चलेगा। इससे पहले यूसीसी में यह प्रावधान नहीं था। कैबिनेट ने बृहस्पतिवार को यूसीसी में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके अलावा भी कई संशोधन किए गए हैं।
    • पहले सचिव स्तर का अधिकारी रजिस्ट्रार जनरल बन सकता था। अब इसे अपर सचिव कर दिया गया है। अपर सचिव स्तर के अधिकारी भी रजिस्ट्रार जनरल बन सकते है। इसके अलावा सब रजिस्ट्रार को भी अपील का अधिकार दिया गया है। इससे पहले रजिस्ट्रार को अपील का अधिकार दिया गया था।

      बता दें कि यूसीसी पिछले साल 27 जनवरी को लागू की गई थी। तब से अब तक कई संशोधन इसमें किए गए हैं। पिछली बार संशोधन किया गया था मगर इसमें लिपिकीय त्रुटियों के चलते राज भवन ने इसे वापस कर दिया गया था। इन लिपिकीय त्रुटियों को दूर कर लिया गया है। अब इसके लिए अध्यादेश लाया जाएगा। इसे विधानसभा सत्र पेश किया जाएगा।

    • उत्तराखंड पर्यटन की नियमावली को मंजूरी, होम स्टे योजना का लाभ स्थानीय को ही मिलेगा। अब इसके लिए स्थायी निवास जरूरी होगा। ब्रेड एन्ड ब्रेकफास्ट ही करा सकेंगें बाहरी राज्यों के लोग। होम स्टे जैसा कोई लाभ नहीं मिलेगा।
    •  केदारनाथ धाम में एक पायलट प्रोजेक्ट बनेगा। इसमें गोबर व चीड़ की पत्तियों से बायो मास पैलेट बनेंगें। पर्यटन विभाग करेगा।

 

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