लोकसभा सचिवालय ने बताया कि PM को खतरा था वास्तविक

Budget Session Sources Said Claim That The Pm Modi Faced No Immediate Threat In Lok Sabha Is Baseless
लोकसभा में प्रधानमंत्री को कोई तात्कालिक खतरा नहीं था… यह दावा निराधार: लोकसभा सचिवालय सूत्र
लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी के भाषण नहीं देने को लेकर लोकसभा स्पीकर के दावे पर नई खबर सामने आ रही है। सूत्रों ने यह दावा पूरी तरह से निराधार बताया है कि सदन में प्रधानमंत्री मोदी को कोई खतरा नहीं था।
नई दिल्ली : लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने  आज कहा कि कुछ विपक्षी नेताओं का यह दावा निराधार है कि गत बृहस्पतिवार को सदन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कोई ”तात्कालिक खतरा” नहीं था, जबकि उस दिन सदन के घटनाक्रमों से लग रहा था कि कुछ भी अप्रत्याशित हो सकता है। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने यह स्पष्टीकरण तब जारी किया है जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री पर सदन में किसी विपक्षी सदस्य के ‘हमला करने’ का कोई सवाल ही नहीं उठता तथा यदि किसी ने कोई ऐसी हरकत करने को कहा भी हो तो प्राथमिकी दर्ज करके उसे तत्काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

सदन में उस दिन की स्थिति का उल्लेख 
लोकसभा सचिवालय सूत्रों ने कहा कि कुछ सांसदों एवं राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों ने यह आरोप लगाया है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने सदन में न आने की दी गई सलाह तथ्यों से परे थी तथा प्रधानमंत्री को कोई तात्कालिक खतरा नहीं था।

उन्होंने कहा कि विषय सही परिप्रेक्ष्य में समझने को यह आवश्यक है कि  अध्यक्ष के उक्त वक्तव्य को उस दिन सदन में उत्पन्न गंभीर एवं अभूतपूर्व अव्यवस्था की पृष्ठभूमि में देखा जाए। कार्यवाही के आरंभ से ही सदन का वातावरण तेजी से बिगड़ा, जिससे सुरक्षा, शिष्टाचार तथा संसदीय कार्यप्रणाली की गरिमा को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न हो गई थीं।”

संसदीय मर्यादाओं की सार्वजनिक अवहेलना
उनका कहना है कि कार्यवाही के बीच में ही विपक्षी दलों के कई सांसद स्थापित संसदीय मर्यादाओं की खुली अवहेलना करते हुए आसन के निकट पहुंच गए । स्थिति उस समय और अधिक बिगड़ गई जब कुछ सदस्यों ने मेज के आसपास आकर सरकारी कागजात फाड़े और उन्हें पीठासीन सभापति की ओर फेंका।

उन्होंने कहा कि ये कृत्य अनुशासन का पूर्ण विघटन दर्शाते हैं और लोकसभा में घटित सबसे दुर्भाग्यपूर्ण एवं अवांछनीय घटनाओं में से एक थे, जिन पर न केवल सदन के भीतर बल्कि देश और विदेश में भी व्यापक स्तर पर चिंता व्यक्त की गई।”

टकराव की मुद्रा में थीं महिला सांसद
सूत्रों का दावा है कि इस अव्यवस्था के बीच,कई महिला सांसद आक्रामक रूप से प्रधानमंत्री की सीट की ओर बढ़ीं और उसके चारों ओर एक प्रकार का घेरा बना लिया। और भी चिंताजनक यह था कि कुछ महिला सदस्य बैनर और तख्तियां लेकर सत्तापक्ष की दीर्घा की ओर बढ़ गईं और खुले तौर पर टकराव की मुद्रा में थीं। उन्होंने न केवल प्रधानमंत्री की सीट घेर ली, बल्कि उन स्थानों तक भी पहुंच गईं जहां वरिष्ठ मंत्री बैठे थे, जिससे सदन में अव्यवस्था और असुरक्षा की भावना और बढ़ गई।

उनका कहना है कि उसी दिन, विपक्षी सदस्यों ने लोकसभा अध्यक्ष कक्ष का रुख किया, जहां उन्होंने असंसदीय भाषा प्रयुक्त की तथा “देखते हैं पीएम का क्या करते हैं” जैसे धमकी भरे वक्तव्य दिए। ऐसा आचरण सांसदों के लिए पूरी तरह से अनुचित था और उस दिन की स्थिति की गंभीरता का और अधिक वर्णन करता है।”

प्रधानमंत्री को सदन में न आने का दिया परामर्श 
उन्होंने कहा कि ये घटनाक्रम देख, अध्यक्ष को प्रधानमंत्री की सुरक्षा तथा सदन में व्यवस्था बनाए रखने को लेकर वास्तविक और ठोस चिंताएं थीं। ऐसे समय प्रधानमंत्री को सदन में प्रवेश न करने की दी गई सलाह का उद्देश्य केवल संसदीय कार्यों का सुचारु संचालन सुनिश्चित करना तथा संसद की गरिमा और पवित्रता की रक्षा करना था। सदन में शिष्टाचार,मर्यादा और व्यवस्था बनाए रखना अध्यक्ष का सर्वोपरि संवैधानिक दायित्व है, और उनके सभी कार्य इसी दायित्व से प्रेरित थे।”

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