बिहारियों को गालियां दे रही थी केंद्रीय विद्यालय की शिक्षिका,सस्पेंड

Kendriya Vidyalaya Teacher Deepali Shah Not Only Abuses Bihar But Holy Profession Of Teaching
काश! पूर्वाग्रह और दुराग्रह की जकड़न से मुक्त हो पातीं दीपाली शाह! ये गालियां बिहार को नहीं, शिक्षक के पवित्र पेशे को भी हैं
बिहार के जहानाबाद में केंद्रीय विद्यालय की टीचर दीपाली शाह को सस्पेंड कर दिया गया है। शाह ने सोशल मीडिया पर अपना एक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें बिहार और बिहारियों के लिए गाली और आपत्तिजनक बातें करती दिख रही थीं। वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में आक्रोश बढ़ गया था।

केंद्रीय विद्यालय की एक शिक्षिका ने बिहार को लेकर विवादित बातें कहीं
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने मचाया बवाल
केंद्रीय विद्यालय संगठन ने शिक्षिका को सस्पेंड किया
शिक्षिका का नाम दीपाली शाह है जो जहानाबाद में तैनात थीं

Deepali Shah Kendriya Vidyalaya
दीपाली शाह वीडियो में कहती दिख रही हैं कि उन्हें कहीं भी पोस्टिंग दे देते, बिहार में क्यों दिया

सोशल मीडिया पर एक मोहतरमा का वीडियो काफी वायरल हो गया। वीडियो में वह बिहार और बिहारियों को कोस रही थीं। नाराज थीं। इसलिए कि उन्हें बिहार में पोस्टिंग क्यों दी गई। मोहतरमा की पिछले साल ही केंद्रीय विद्यालय संगठन में नियुक्ति मिली थी। पोस्टिंग हुई बिहार के जहानाबाद में। इंग्लिश टीचर के तौर पर। बिहार के बारे में उनकी अज्ञानता कहें, पूर्वाग्रह या दुराग्रह कहें या फिर कुछ ऊटपटांग बोलकर वायरल होने की सनक कहें, मोहतरमा ने बिहार और बिहारियों को कोसते हुए, लेक्चर देते हुए अपना एक वीडियो रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। वीडियो में मैडम अपनी गालीबाज प्रतिभा का भी खूब मुजाहिरा करती हैं। हिंदी और अंग्रेजी में गालियों का इस्तेमाल करती हैं। यहां तक कहती हैं कि बिहार की वजह से ही भारत विकसित देश नहीं बन पाया है। जिस दिन बिहार इंडिया से हट जाएगा, देश विकसित बन जाएगा। वीडियो का लब्बोलुआब ये कि मुझे ‘सबसे घटिया’ क्षेत्र बिहार में पोस्टिंग क्यों दी गई, कहीं भी दे देते, बिहार नहीं देते। मोहतरमा का नाम दीपाली शाह है। वीडियो वायरल होते ही बवाल मच गया और अब केंद्रीय विद्यालय संगठन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक सस्पेंड करते हुए केंद्रीय विद्यालय, मशरक से अटैच कर दिया गया है।

सबसे पहले तो देखते हैं कि दीपाली शाह ने आखिर कहां क्या, जिस पर लोग आक्रोशित हुए और केंद्रीय विद्यालय संगठन को उनके खिलाफ ऐक्शन लेना पड़ा। वीडियो में वह कहती दिख रही हैं, ‘मैं तो बस ये सोचती हूं कि केंद्रीय विद्यालय के इंडिया में कितने सारे रीजन हैं, मुझे किसी भी रीजन में पोस्टिंग दे सकता था। मतलब, लोगों को कोलकाता रीजन उतना पसंद नहीं है लेकिन मैं तो उसके लिए भी रेडी थी कि कोई बात नहीं, वेस्ट बंगाल में भी कहीं पर भी दे दो, मुझे कोई दिक्कत नहीं है। मेरी फ्रेंड की पोस्टिंग हुई है दार्जिलिंग, कैन यू इमैजिन। मेरी दूसरी दोस्त की पोस्टिंग हुई है सिलचर, नॉर्थ ईस्ट में…वॉओ। मेरा एक फ्रेंड पोस्ट हुआ है बेंगलौर (बेंगलुरु) में। मेरे से क्या बह…द दुश्मनी थी, मेरे को इंडिया के मोस्ट फ..ग रीजन में पोस्टिंग दे दी। मैं अपनी फर्स्ट पोस्टिंग जिंदगीभर याद रखूंगी। मुझे गोवा दे देते, कहीं भी दे देते, ओडिशा दे देते, कोई दिक्कत नहीं थी। साउथ में कहीं भी दे देते, मुझे कोई दिक्कत नहीं थी। या हिमाचल साइड दे देते। मेरे को हार्ड स्टेशन ही दे देते, लद्दाख दे देते जहां पर जाने को कोई रेडी नहीं है।’

वीडियो में वह आगे कहती हैं, ‘बिहार की स्थिति बहुत खराब है। ग्राउंड रियलिटी ये है कि लोगों में कोई सिविक सेंस नहीं है। जो लोग बिहार से दिल्ली सफर करना चाहते हैं, हम अगर सफर करना चाहते हैं तो हमारे लिए बहुत मुश्किल है। ओह गॉड, उन्हें जीरो सिविक सेंस है। जीरो सिविक सेंस है। इंडिया डिवेलपिंग कंट्री है तो मुझे लगता है कि इसलिए है कि बिहार उसमें है। जिस दिन बिहार को हटाया जाएगा, सिर्फ उसी दिन भारत विकसित देश बनेगा। मुझे जो गुस्सा है न, लोगों में कोई सिविक सेंस नहीं है। इंडियन रेलवे की ब….द दिया है।’

दीपाली ने जो कुछ कहा, वह आपत्तिजनक तो है ही, एक टीचर होने के नाते उनका ये व्यवहार और भी ज्यादा आपत्तिजनक है। टीचर कोई पद नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। वह बदलाव का वाहक होता है। सुधार का वाहक होता है। एक शिक्षक पीढ़ियां गढ़ता है। बच्चों के भविष्य को आकार देता है। लेकिन अगर शिक्षक ही पूर्वाग्रह और दुराग्रह का शिकार है तो वह इस पवित्र पेशे के साथ बेईमानी करता है।

अपनी तुच्छ और संकीर्ण सोच की कैद में बंधी दीपाली शाह ये भूल गईं कि वह सिर्फ बिहार या बिहारियों को नहीं बल्कि भारत और भारतीयों को गाली दे रही हैं। पूरा देश तो अपना है। फिर बिहार पर इतना गुस्सा क्यों?

दीपाली शाह ने वीडियो में अपनी ‘अज्ञानता’ का भी प्रदर्शन किया। एक शिक्षिका होने के नाते उनसे ये उम्मीद तो की ही जा सकती है कि उन्हें देश और उसके राज्यों के गौरवशाली अतीत और वर्तमान का ज्ञान होना चाहिए, ज्ञान नहीं तो कम से कम अंदाजा तो होना ही चाहिए। वह उस बिहार को गाली दे रही हैं जो ज्ञान-विज्ञान की की धरती है। जब दुनिया में स्कूल तक नहीं थे तब जहां नालंदा विश्वविद्यालय था। जब दुनिया को गणतंत्र का ग तक नहीं पता था तब वैशाली में दुनिया का सबसे पहला गणतंत्र पुष्पित पल्लवित हो रहा था। प्राचीन भारत के महान साम्राज्यों की राजधानी बिहार में थी। मौर्य साम्राज्य से लेकर शिशुनाग , नंद, गुप्त और पाल साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र रही जिसे आज पटना के नाम से जाना जाता है।

बिहार ज्ञान की धरती है। ये वो धरती है जहां बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ। जहां एक राजकुमार सिद्धार्थ महात्मा बुद्ध बन जाते हैं। जो जैन तीर्थंकर स्वामी महावीर की धरती है। ये वो धरती है जहां से मोहन दास करम चंद गांधी अपना पहला सत्याग्रह शुरू करते हैं। चंपारण सत्याग्रह। ये वो धरती है जिसका गौरवशाली अतीत न सिर्फ बिहारियों, बल्कि पूरे देशवासियों के लिए गर्व का विषय है। ये वो धरती है जहां के युवा तमाम क्षेत्रों में अपने ज्ञान, हुनर, प्रतिभा और मेधा का लोहा मनवाते हैं।

जिन शब्दों का चयन हुआ, वो शब्द किसी शिक्षक के तो नहीं हो सकते। सिविक सेंस के बहाने कही गई बात बिहार को लेकर पूर्वाग्रह और दुराग्रह को ही दिखाती है। ये क्षेत्रीयता के आधार पर भेदभाव की संकीर्ण सोच को दर्शाती है। काश, दीपाली अपनी संकीर्णता और पूर्वाग्रह की बेड़ियों को तोड़ पाई होतीं, ताकि शिक्षक पद की गरिमा के साथ न्याय होता। अंत में बस इतना ही- लेट गुड सेंस प्रीवेल।
चन्द्र प्रकाश पाण्डेय

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