हमलों के हज़ार साल बाद भी सोमनाथ मंदिर भव्य,लुटेरे का ठिकाना गजनी है खंडहर

सोमनाथ मंदिर पर हमले के 1000 साल: प्रसिद्ध इतिहासकार से जानिए ऐतिहासिक तथ्य 
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‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में शामिल होने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
अमरावती (महाराष्ट्र): वर्तमान अफगानिस्तान के गजनी से आने वाले आक्रमणकारी सुल्तान महमूद गजनवी ने करीब 1000 साल पहले भारत पर हमला किया था. इन हमलों के दौरान, उसके सैनिकों ने कई मंदिरों को तोड़ दिया था. महमूद गजनवी ने भारत पर कुल 17 हमले किए और गुजरात के सोमनाथ मंदिर को खूब लूटा. इस हमले के 1000 साल पूरे हो रहे हैं. खास बात यह है कि सोमनाथ मंदिर, जिसे महमूद गजनवी ने तोड़ दिया था, भारत को आजादी मिलने के बाद देश के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर 1951 में फिर से उसका जीर्णोद्धार कराया गया था. रविवार को ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए.

जाने-माने इतिहासकार प्रो. डॉ. वैभव म्हस्के ने ‘ईटीवी भारत’ से बातचीत में सोमनाथ मंदिर पर हुए हमलों के इतिहास और इसके ऐतिहासिक महत्व के बारे में विस्तृत चर्चा की. डॉ. म्हस्के ने कहा, “ऐतिहासिक रिकॉर्ड में लिखा है कि सौराष्ट्र में सोमनाथ मंदिर चालुक्य काल में बना था. इस मंदिर का जिक्र महाभारत में भी है. मंदिर को बार-बार लूटा गया और फिर से बनाया गया. भारतीयों के लिए यह मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर कुल 17 हमले किए, जिससे इसकी लूट ऐतिहासिक रूप से अहम हो गई. उसने भारत पर सिर्फ लूटपाट के लिए हमला किया, मंदिर से बहुत सारा पैसा लूटा और अपने समय में गजनी शहर के विकास में उसका इस्तेमाल किया.”

इतिहासकार प्रो. डॉ. वैभव म्हासके
म्हासके के अनुसार महमूद गजनवी 971 में पैदा हुआ और 1000 से 1030 ईसवी तक राज किया. वह गजनी शहर का सुल्तान था और उसे सुल्तान की उपाधि लेने वाला पहला मुस्लिम शासक माना जाता है. उसके पिता का नाम सबुक्तगीन था. महमूद गजनवी बहुत क्रूर था जिसने 1000 ईसवी में सत्ता हथियाने को अपने भाइयों समेत सभी रिश्तेदार खत्म कर खुद को सुल्तान घोषित किया. फिर उसका ध्यान भारत की ओर गया और उसने भारत पर कुल 17 हमले किए. “महमूद गजनवी ने भारत की दौलत लूटने को कुल 17 बार हमला किया. ये हमले रोकने को, आज के पाकिस्तान के ओहिंद प्रांत में राजपूत वंश के राजा जयपाल ने उसका सामना किया. जयपाल खुद गजनी प्रांत पहुंचे और अपनी सेना से कहा कि अगर वे महमूद गजनवी को हराने में विफ़ल रहे तो आत्मबलिदान कर देंगे. गजनवी को हराने में विफ़ल रहने पर, जयपाल ने अपने 11 साल के बेटे आनंदपाल को राजा घोषित कर आत्मबलिदान कर दिया. 12 साल की छोटी उम्र में सत्ता प्राप्ति के बाद भी, आनंदपाल ने महमूद गजनवी को भारत पर हमला करने से रोकने की कोशिश की, लेकिन वह विफ़ल रहे. आगे चलकर आनंदपाल के बेटे त्रिलोचनपाल भी गजनवी को नहीं रोक पाए.”

गजनवी ने 1026 में किया था आखिरी हमला
डॉक्टर वैभव म्हस्के कहते हैं, “महमूद गजनवी ने 1026 में सोमनाथ मंदिर पर अपना 17वां और आखिरी हमला किया. तब गुजरात के राजा भीम ने उसे रोकने की कोशिश की। तीन दिनों तक बहुत खून-खराबा हुआ. महमूद गजनवी ने कई लोग मार डाले, सोमनाथ मंदिर को फिर लूट बहुत सारा धन जमा किया. पिछले 16 हमलों में उसने मंदिर की मूर्ति को हाथ नहीं लगाया था, लेकिन इस 17वें हमले में उसके वजीरों ने उससे कहा, ‘मंदिर की मूर्ति को तोड़कर साबित करो कि तुम इस्लाम के सच्चे मानने वाले हो.’ इस पर महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर में शिव लिंग क्षतिग्रस्त कर बहुत सारा लूट का माल बटोरा। राजपूत राजा उसकी वापसी यात्रा रोकने को इकट्ठा हुए, लेकिन महमूद गजनवी अपना रास्ता बदल वापस लौट गया.”

इतिहासकार डॉक्टर वैभव म्हस्के ने बताया, कि “महमूद गजनवी ने सौराष्ट्र के सोमनाथ मंदिर से लूटी दौलत से गजनी शहर बसा वहां एक यूनिवर्सिटी और एक बड़ी लाइब्रेरी बनवाई. 1030 में गजनवी बीमार पड़ा, तो उसने हकीम बुला इच्छा व्यक्त की कि, ‘मैं फिर से जवान होना चाहता हूं ताकि लूट को भोग सकूं, मेरा इलाज करो,’ लेकिन हकीम ने जवाब दिया कि यह मुमकिन नहीं है. आखिरकार, गजनवी ने 1030 में आखिरी सांस ली.”

डाॅक्टर म्हास्के कहते हैं कि महमूद गजनवी को रोकने वाले अनंतपाल और जयपाल की मौत के बाद, राज परिवार के कई सदस्य दिल्ली चले गए. इसके बाद, राजपूत तोमर वंश ने दिल्ली को अपनी भविष्य की राजधानी विकसित किया.

लॉर्ड एलनबरो ने गजनी पर किया हमला
डॉक्टर वैभव म्हस्के ने बताया कि 1842 में, जब भारत ब्रिटिश राज के अधीन था, गवर्नर जनरल लॉर्ड एलनबरो को जानकारी मिली कि सौराष्ट्र में सोमनाथ मंदिर महमूद गजनवी ने कई बार लूटा था. गजनी पर हमला कर उसकी कुछ दौलत वे भारत वापस ले आए. तब उनके साथ ब्रिटिश सेना के अधिकारी विलियम नॉट ने दावा किया कि वे गजनी शहर से चंदन की लकड़ी का एक दरवाजा लाए थे, जो सोमनाथ मंदिर का बताया जाता है. हालांकि, इतिहासकारों ने यह दावा निरस्त कर दिया है. अभी वो चंदन की लकड़ी का दरवाजा आगरा में रखा है.

सोमनाथ मंदिर से लूटी करोड़ों रुपये की दौलत गजनी शहर ले जाई गई थी.  महमूद गजनवी के समय शहर विकसित हुआ, लेकिन आज गजनी एक खंडहर शहर है.

इतिहासकार डॉक्टर वैभव म्हस्के ने कहा, “भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1951 में सौराष्ट्र में सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था. इस पुनर्निर्माण के बाद, मंदिर को एक शानदार और गौरवशाली रूप मिला. आज, सौराष्ट्र में सोमनाथ मंदिर भारतीयों के लिए बहुत बड़ी आस्था का केंद्र बना है.”

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