बंगाल छात्रा गैंगरेप में पांचों मुस्लिम बंदी,ब्वॉयफ्रेंड भी संदेह की परिधि में
दुर्गापुर रेप केस के मुख्य आरोपित सफीक की बहन ने की बंगाल पुलिस की मदद, जानिए कैसे अपने भाई को करवाया गिरफ्तार
पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले के दुर्गापुर में एक निजी मेडिकल कॉलेज की छात्रा के साथ गैंगरेप हुआ। पुलिस ने मुख्य आरोपित समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। आसनसोल-दुर्गापुर के डीसीपी अभिषेक गुप्ता ने बताया कि आरोपित की बहन ने ही उसे गिरफ्तार करवाने में पुलिस की मदद की।
एक अन्य आरोपित एस.के. नसीरुद्दीन भी सोमवार को पकड़ लिया गया। सफीक और नसीरुद्दीन के पकड़े जाने के साथ ही मामले के सभी पांच आरोपित अब हिरासत में हैं। अन्य तीन – एस.के. रियाजुद्दीन, अपू बरुई और फिरदौस एस.के. रविवार को पकड़े गये। रियाजुद्दीन उस निजी मेडिकल कॉलेज में गार्ड था जहां पीड़िता पढ़ती है, पांच साल पहले उसे नौकरी से निकाल दिया गया था।
क्या बोले पुलिस कमिश्नर
आसनसोल-दुर्गापुर के पुलिस आयुक्त सुनील चौधरी ने कहा कि घटनास्थल पर मौजूद सभी पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। हम पीड़िता के परिवार और दोस्तों को आश्वस्त करते हैं कि सभी आरोपितों को जल्द ही न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। हमें बेहद दुख है और कोई भी अपराधी छोड़ा नहीं जायेगा।
23 वर्षीय एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा के साथ शुक्रवार शाम को एक सहपाठी के साथ खाना खाने बाहर गई थी। कुछ ही देर बाद मेडिकल कॉलेज परिसर के पास एक जंगली इलाके में कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया गया।
क्या बोली आरोपित की बहन
रोज़िना ने अपने भाई को पकडवाने के बाद दुर्गापुर के पास बिरजा गांव स्थित अपने घर पर पत्रकारों से बात की। उसने बताया कि हमें उस जगह से पुलिस स्टेशन ले जा रहा था जहां उसने आत्मसमर्पण किया था। सफीक उस पुलिस वाहन में डर के मारे कांप रहा था। पुलिस के कारण हम ज़्यादा बात नहीं कर पाए, लेकिन मैंने उससे कहा कि उसने आत्मसमर्पण करके सही किया। उसके कारण परिवार को शर्मिंदा नहीं होना पड़ेगा। हम गरीब हो सकते हैं, लेकिन हम आत्मसम्मान को महत्व देते हैं। अगर वह दोषी है, तो उसे परिणाम भुगतने चाहिए। अगर वह दोषी नहीं है, तो उसे छोड़ दिया जाएगा। उसने कभी किसी महिला के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया।
आरोपित के दो छोटे बच्चे
रोजिना ने बताया कि पुलिस ने शनिवार सुबह उसका मोबाइल फोन मांगा था। मुझे अंडाल पुल के नीचे उस जगह ले जाया गया जहां सफीक ने कहा था कि वह आएगा। मुझे मेरा फ़ोन वापस मिल गया है। रोज़ीना ने बताया कि उसका इकलौता भाई सफ़ीक दुर्गापुर की एक रोलिंग मिल फ़ैक्ट्री में काम करता था और उसका एक बेटा और बेटी है। उसने कहा कि उसकी पत्नी और बच्चों ने कुछ भी गलत नहीं किया है। पुलिस की रोज़ाना की दस्तक से परिवार की बदनामी होती थी। अब और नहीं।
वकीलों ने कहा- नहीं लड़ेंगे आरोपितों का केस
सफीक और नसीरुद्दीन की बाइक का इस्तेमाल आरोपितों ने कथित तौर पर घटनास्थल से भागने को किया था। उन्हें दुर्गापुर न्यायिक मजिस्ट्रेट राजीब सरकार की अदालत में पेश किया गया। दुर्गापुर बार एसोसिएशन ने फैसला किया था कि उसका कोई भी सदस्य आरोपितों की ओर से पेश नहीं होगा।
नगर निगम में था ठेका मजदूर
कानूनी सहायता से पूजा कुर्मी ने सफीक और नसीरुद्दीन के लिए एक ‘वकालतनामा’ दिया, लेकिन ज़मानत नहीं मांगी। दोनों को नौ दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा गया है। नसीरुद्दीन दुर्गापुर नगर निगम में अस्थायी कर्मचारी था। दुर्गापुर की महापौर अनिंदिता मुखर्जी ने बताया कि यह व्यक्ति नगरपालिका में श्रमिक ठेकेदारों के नियुक्त कई अस्थायी कर्मचारियों में से एक था।
जांचकर्ताओं ने कहा कि वे आरोपितों की डीएनए प्रोफाइलिंग और पीड़िता की चिकित्सीय-कानूनी जांच में एकत्र नमूनों की जांच को अदालत से अपील करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि पीड़िता के तैयार होने के बाद, पुलिस न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष उसका बयान दर्ज कराएगी और एक पहचान परेड का आयोजन किया जायेगा.![]()
