सुको का कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को गिरफ्तार से एक दिन की भी छूट देने से ‘न’
Cartoonist And Stand Up Comedian Gets Big Blow From Supreme Court Freedom Of Speech Is Being Abused
बोलने की आजादी का दुरुपयोग…कार्टूनिस्ट और स्टैंड-अप कॉमेडियन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका,हेमंत मालवीय को राहत नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को गिरफ्तारी से बचाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि कुछ कलाकार बोलने की आजादी का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।
नई दिल्ली: कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। कोर्ट ने साफ कह दिया है कि कुछ कलाकार, जैसे कार्टूनिस्ट और स्टैंड-अप कॉमेडियन, ‘बोलने की आजादी का गलत इस्तेमाल’ कर रहे हैं। कोर्ट ने मालवीय को गिरफ्तारी से बचाने से इनकार कर दिया। यह मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस पर कथित रूप से मानहानिकारक कार्टून बनाने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को एक दिन के लिए भी राहत देने से मना कर दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई यानी मंगलवार को होगी।
सुप्रीम कोर्ट से पहले हाई कोर्ट ने नहीं दी थी राहत
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि ‘बोलने की आजादी का गलत इस्तेमाल कार्टूनिस्ट और स्टैंड-अप कॉमेडियन कर रहे हैं।’ कोर्ट ने साफ किया कि ऐसे विचारों को बोलने की आजादी के नाम पर बचाया नहीं जा सकता। इससे पहले, 3 जुलाई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हेमंत मालवीय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि उन्होंने ‘बोलने की आजादी का गलत इस्तेमाल’ किया है और कार्टून बनाते समय सावधानी नहीं बरती।
कोर्ट में कार्टून को व्यंग बताने की दलीलें हुईं फेल
हेमंत मालवीय ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका में कहा कि कार्टून कोविड-19 महामारी के दौरान बनाया गया था। उस समय वैक्सीन को लेकर गलत जानकारी और डर फैला हुआ था। उन्होंने कहा कि कार्टून एक व्यंग्य था। इसका मकसद उन लोगों पर कटाक्ष करना था जो वैक्सीन को ‘सुरक्षित पानी’ बता रहे थे, जबकि उनका ठीक से परीक्षण भी नहीं हुआ था। मालवीय ने यह भी कहा कि कार्टून में एक कलाकार ने एक नागरिक को एक नेता से टीका लगवाते हुए दिखाया था। यह कार्टून सोशल मीडिया पर चार साल से ज्यादा समय से है।
‘बोलने की आजादी का इस्तेमाल जिम्मेदारी से हो’
सुप्रीम कोर्ट ने मालवीय को गिरफ्तारी से बचाने का कोई भी आदेश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बोलने की आजादी का इस्तेमाल जिम्मेदारी से करना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि कुछ लोग इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई या मंगलवार को होगी। इस सुनवाई में कोर्ट यह तय करेगा कि मालवीय को राहत मिलनी चाहिए या नहीं।
कोर्ट का कहना है कि बोलने की आजादी जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई भी कुछ भी कह सकता है। अगर कोई बोलने की आजादी का गलत इस्तेमाल करता है, तो उसे इसकी सजा मिलनी चाहिए। इस मामले में, मालवीय पर आरोप है कि उन्होंने एक ऐसा कार्टून बनाया जिससे प्रधानमंत्री और RSS की छवि खराब करने की कोशिश की गई।
