करतूत मुस्लिम ग्राम प्रधानों की?पछवादून के 28 गांव में 14 साल में मुस्लिम बढे-हिदू घटे
देहरादून के 28 गांवों में मुस्लिम जनसंख्या बढ़ी, हिंदुओं की घटी
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के सीमावर्ती क्षेत्रों में मुस्लिम जनसंख्या तेजी से बढ़ी है, जबकि हिन्दू जनसंख्या घटी है. इस संबंध में हुई जांच में मुस्लिम ग्राम प्रधानों की अवैध गतिविधियां सामने आई है.
[उत्तराखंड के देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में 28 गांवों में मुस्लिम जनसंख्या बढ़कर हिंदू जनसंख्या से अधिक हो गई है
मुस्लिम ग्राम प्रधानों ने परिवार रजिस्टरों में रिश्तेदारों के नाम जोड़कर जनसंख्या आंकड़ों में हेरफेर कर दिया है
फैमिली रजिस्टर में शादी के बाद बाहर गई महिलाओं के नाम नहीं काटे गए और दामाद, बच्चों के नाम भी जोडे,लोग रोजगार, पढाईको बाहरगये लेकिन कागजों में वें बनें हुए हैं]
देहरादून 4 अक्टूबर 2025। उत्तराखंड में लगातार जनसांख्यिकी परिवर्तन सामने आ रहा हैं. अब राजधानी देहरादून से ऐसे ही चौंकाने वाले आंकड़े सामने आये है. यहां के 28 गांव में अब मुस्लिम आबादी ज्यादा हो गई है. जबकि वहां हिंदू आबादी बहुसंख्यक हुआ करती थी. कई क्षेत्रों में तेजी से मुस्लिम आबादी बढ़ी है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण देहरादून राजधानी का वो क्षेत्र है, जो उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की सीमा से लगता है. विकासनगर जिसे पछुवा दून कहा जाता है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस क्षेत्र में करीब 28 गांव ऐसे है, जहां पर मुस्लिम आबादी बढ़ गई है और हिंदुओं की आबादी कम हो गई है. लगातार जनसंख्या असंतुलन की खबरों के बाद जब इस मामले में जांच की गई और परिवार रजिस्टरों की छानबीन हुई तो चौंकाने वाली बातें चली .
फैमिली रजिस्टर में की गई गड़बड़ी
जांच में पाया गया कि मुस्लिम ग्राम प्रधानों ने अपनी सत्ता बनाये रखने को ग्राम सभा के अधिकारियों की मिलीभगत से अपने रिश्तेदारों के नाम षडयन्त्रपूर्वक यहां के परिवार रजिस्टरों में लिखवा लिए थे. यानी फैमिली रजिस्टर में शादी होने के बाद अभी भी लडकियों के नाम दर्ज हैं. जो लोग रोजगार को बाहर चले गये,उनके भी नाम ह्ज विधिक स्थिति यह है कि उत्तराखंड से बाहर लड़की की शादी होने के बाद उसका नाम परिवार रजिस्टर से काटा जाना चाहिए था, लेकिन उन लड़कियों का नाम नहीं काटा गया बल्कि दामाद और उसके बच्चों के नाम भी रजिस्टर में लिखवा दिए गए.
जानकारी के मुताबिक, परिवार रजिस्टर में नाम चढ़ाए गए हैं और वे सब सरकारी सुविधाएं ले रहे हैं वोटर लिस्ट में भी नाम है,उनके आधार कार्ड बन गए है राशन कार्ड बन गए हैं. यह सिर्फ देहरादून से सटे विकास नगर पछुवा दून में ही नहीं बल्कि राज्य के कई ऐसे क्षेत्र है जहां पर तेजी से मुस्लिम आबादी बढ़ी है.
फर्जी प्रमाणपत्र से बढ़वाए गए नाम
दरअसल, अगस्त महीने में एक कॉमन सर्विस सेंटर में बड़े पैमाने पर फर्जी प्रमाणपत्र बनाए जाने का मामला सामने आया था. इस मामले में जांच की गई तो यह खुलासा हुआ कि सुनियोजित तरीके से पंचायत चुनाव में वोट बैंक बढ़ाने के लिए न सिर्फ बाहरी लोगों के नाम दर्ज किए जा रहे हैं बल्कि जो नाम काटे जाने चाहिए उनको भी बरकरार रखा गया है.जानकारी के मुताबिक, पछुवा दून के क्षेत्र में ग्रामों में जनसंख्या बदलाव यानी डेमोग्राफी चेंज लगातार देखा जा रहा है. राज्य गठन से पहले जो हिंदू बाहुल्य क्षेत्र थे, अब वहां पर वर्तमान में मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र हो चुके हैं.
गांवों के आंकड़ों से खुलासा
गांव – हिन्दू आबादी – मुस्लिम आबादी
ढकरानी -40% हिंदू – 60% मुस्लिम
2011 में – 60% हिंदू -40% मुस्लिम
ढालीपुर -50% हिंदू -50% मुस्लिम
2011 -75% हिंदू – 25% मुस्लिम
कुंजा– 50% हिंदू- 50% मुस्लिम
2011– 65% हिंदू -35% मुस्लिम
कुंजाग्रांट-23% हिंदू -77% मुस्लिम
2011 – 30% हिंदू – 70% मुस्लिम
कुल्हाल – 15% हिंदू – 85% मुस्लिम
2011 – 20% हिंदू – 80% मुस्लिम
धर्मावाला -50% हिंदू – 50% मुस्लिम
2011 -70% हिंदू – 30% मुस्लिम
तिमली -5% हिंदू – 95% मुस्लिम
2011– 25% हिंदू -75% मुस्लिम
बैरागी वाला-50% मुस्लिम -50% हिंदू
2011 -60% हिंदू – 40% मुस्लिम
जमनीपुर-70% हिंदू -30% मुस्लिम
2011 – 80% हिंदू – 20% मुस्लिम
केदारावाला -30% हिंदू – 70% मुस्लिम
2011 – 55% हिंदू – 45% मुस्लिम
बुलाकी वाला– 75% हिंदू – 25% मुस्लिम
2011– 88% हिंदू – 11% मुस्लिम
मेहूवाला खालसा-55% हिंदू – 45% मुस्लिम
2011 -75% हिंदू – 25 प्रतिशत मुस्लिम
जीवनगढ़ -50% हिंदू – 50% मुस्लिम
2011 में – 65% हिंदू – 35% मुस्लिम
नवाबगढ़ -44% हिंदू – 56% मुस्लिम
2011 में – 60% हिंदू – 40% मुस्लिम
जस्सोवाला – 55% हिंदू -45% मुस्लिम
2011 -65% हिंदू -35% मुस्लिम
माजरी -30% हिंदू -70% मुस्लिम
2011 में – 65% हिंदू – 35% मुस्लिम
आम वाला(पौंधा)- 40% हिंदू- 60% मुस्लिम
2011 में – 45% हिंदू – 55% मुस्लिम
जाटों वाला -20% हिंदू – 80% मुस्लिम
2011 में – 60% हिंदू – 40% मुस्लिम
सभावाला-55% हिंदू -45% मुस्लिम
2011 -75 % हिंदू – 25% मुस्लिम
कल्याणपुर/ हसनपुर- 15% हिंदू – 85% मुस्लिम
2011 – 55% हिंदू – 45% मुस्लिम
शेरपुर– 70% हिंदू -30% मुस्लिम
2011 -75 % हिंदू – 25% मुस्लिम
सिंघनीवाला/शीशम बाड़ा– 50% हिंदू -50% मुस्लिम
2011 -55% हिंदू – 45% मुस्लिम
कुशालपुर – 4% तक हिंदू -96% मुस्लिम
2011 -10% हिंदू – 90% मुस्लिम
ढाकी –20% हिंदू -80% मुस्लिम
2011 -30% हिंदू -70% मुस्लिम
सहसपुर -38% हिंदू -62% मुस्लिम
2011 -50% हिंदू – 50% मुस्लिम
लक्ष्मीपुर -25% हिंदू -75% मुस्लिम
2011 – 30% हिंदू – 70% मुस्लिम
रामपुर कला – 5% हिंदू -95% मुस्लिम
2011 – 20% हिंदू -80% मुस्लिम
शंकरपुर -35% हिंदू -65% मुस्लिम
2011 – 40% हिंदू – 60% मुस्लिम
कर्मचारियों-अधिकारियों की मिलीभगत
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से कुछ ही दूरी पर विधानसभा विकास नगर के अंतर्गत आने वाले पछवादून इलाके में धीरे-धीरे हिंदू आबादी कम होती जा रही है.
देहरादून के 28 गांवों में घटी हिंदू आबादी, डेमोग्राफिक बदलाव ने बढ़ाई धामी सरकार की चिंता
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री (फाइल फोटो)
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से कुछ दूरी पर दो दर्जन से ज्यादा गांवों में डेमोग्राफिक बदलाव ने प्रदेश सरकार की चिंता बढ़ा दी है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों से साफ कहा कि किसी ने भी अधिकारों और प्रक्रिया का दुरुपयोग किया या किसी भी अधिकारी – कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध मिली तो उस पर कठोर कार्रवाई होगी. उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश का मूलस्वरूप बनाए रखने को हमें जो भी प्रयास करना पड़ेंगें,हम करेंगे.
वास्तव में , देहरादून से कुछ ही दूरी पर विधानसभा विकास नगर अंतर्गत पछवादून क्षेत्र में धीरे-धीरे हिंदू जनसंख्या घट रही है, यहां के 28 गांव ऐसे हैं जहां पर हिंदू अल्पसंख्यक हो रहे हैं. यहां तेजी से डेमोग्राफिक बदलाव हुए हैं, इसे लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि यहां लोगों का सत्यापन करा कर उनके राशन कार्ड आदि की पडताल हो.
सरकार शिकायतों पर कठोर
पछवादून को लेकर कई लोग पहले ही शिकायत कर चुके हैं कि धीरे-धीरे यहां पर मुस्लिम जनसंख्या तेजी से बढ़ी है और हिंदू जनसंख्या घटी है. इसे लेकर राज्य सरकार भी कठोर दिख रही है.
सभी जिलाधिकारियों को सत्यापन अभियान चलाने के निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि, हमने न केवल यहां बल्कि प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह सत्यापन अभियान चलाएं और राशन कार्ड आदि की ठीक से जांच करें. विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र में क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से डेमोग्राफिक चेंज हो रहा है.
बिजली कनेक्शन आदि के जांच के आदेश
वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि पछवादून को लेकर हमें कई शिकायतें मिली है. इसके लिए हमने अधिकारियों को फर्जी राशनकार्ड, फर्जी बिजली के कनेक्शन आधारकार्ड, वोटर आई डी कार्ड चेक करने को कहा है.
सिस्टम फेल,कागज में हुआ खेल,जनजातीय क्षेत्र में अचानक बढ गई मुस्लिम जनसंख्या
चकराता विधानसभा में त्यूणी क्षेत्र के 1 दर्जन गांव की सूरत पूरी तरह बदल गई है. बाहर से आए मुस्लिमों की संख्या अचानक से बढ़ना और सेटिंग गेटिंग के तहत जमीनों को नाम करने से अब लोगों को अपने हकहकूक को लेकर चिंता सता रही है. नियमानुसार जनजातीय लोगों की जमीन को कोई भी खरीद नहीं सकता. 40 साल पहले आए वन गुर्जर के रूप में मुस्लिम समाज के लोगों ने सबसे ज्यादा सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ की, जिसमें देहरादून जिले का त्यूणी क्षेत्र और उत्तरकाशी जिले का बंगाण क्षेत्र शामिल है. ये घुसपैठ कुछ सालों में अधिक बढ़ी है. अब लोग जांच की मांग करते हुए जमीनों पर हुए कब्जों को मुक्त कराने की बात कर रहे है.
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अचानक संख्या बढ़ने का कारण संख्या नियंत्रण कानून न होना भी माना जा रहा है. पड़ताल में ऐसे लोगों के बारे में भी जानकारी मिली जिनके 16 बच्चे हैं. वहीं जब हमारे संवाददाता ने मुस्लिम बस्ती में पहुंच कर इन लोगों से बातचीत की और पूछा कि यहां जनजातीय क्षेत्र है और यहां कि जमीनें कोई नाम नहीं कर सकता तो आप लोगों ने कैसे की तो इनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था.
अब क्षेत्र कि जनता भी डेमोग्राफिक चेंज और जमीनों को गलत तरीके से नाम करने के मामले में एक्टिव हो गई है. मुखर होकर आवाज उठानी शुरू कर दी है.जगह-जगह बैठकों का दौर शुरू हो गया है और अब जांच की मांग और जमीन को खाली करवाने तथा बनाए गए दस्तावेजों को निरस्त करने की मांग की जा रही है. साथ ही एक महीने का अंदर खाली न करने पर एक बड़े जनआंदोलन की चेतावनी भी दी है.
रूद्र सेना के संस्थापक राकेश तोमर ने कहा कि अब देखना होगा सरकार गलत तरीके से नाम हुई जमीनें और तैयार किए दस्तावेजों को लेकर क्या एक्शन लेगी. वहीं, दस्तावेज तैयार करने वाले अधिकारियों पर क्या एक्शन लेगी ये देखना दिलचस्प होगा.

